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स्वदेशी नवाचार और स्वच्छ ऊर्जा से बदल रहा भारत का तकनीकी परिदृश्य : डॉ. जितेंद्र सिंह

15-May-2026
नई दिल्ली।  (शोर संदेश) केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन राष्ट्र को समर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने में नवीकरणीय और स्वच्छ ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीईएल की 200 मेगावाट सौर मॉड्यूल निर्माण लाइन का शुभारंभ विकसित भारत 2047 की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और महासागर आधारित ऊर्जा प्रणालियों सहित विभिन्न गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षेत्रों में तेजी से अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।
मंत्री ने कहा कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा और रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी तथा स्वदेशी नवाचार से प्रेरित परिवर्तनकारी दौर में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र अभूतपूर्व स्तर पर खुल रहे हैं।
इस अवसर पर डॉ. एन. कलैसेल्वी, सीईएल के सीएमडी चेतन जैन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के निदेशक और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का पहला सौर सेल वर्ष 1977 में सीईएल द्वारा बनाया गया था, जबकि देश का पहला सौर संयंत्र भी 1979 में इसी संस्था ने स्थापित किया था।
उन्होंने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बावजूद सीईएल को पहले वह पहचान नहीं मिल सकी जिसकी वह हकदार थी, लेकिन अब संस्था दोबारा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रही है।
मंत्री ने कहा कि विनिवेश के कगार पर पहुंच चुकी सीईएल का लाभ अर्जित करने वाली मिनी रत्न कंपनी में बदलना संस्थागत पुनरुत्थान का उल्लेखनीय उदाहरण है। उन्होंने इसका श्रेय नेतृत्व, नीतिगत समर्थन, संचालन अनुशासन और वैज्ञानिकों व कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों को दिया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई निर्माण लाइन की स्थापना की गति की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए निविदा 24 अप्रैल 2025 को जारी हुई थी और एक वर्ष से कम समय में निर्माण सुविधा का संचालन शुरू हो गया।
मंत्री ने कहा कि सीईएल अब वर्टिकल एक्सिस पवन टर्बाइन, हाइब्रिड नवीकरणीय प्रणालियां, डेटा सेंटर, उन्नत रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और छोटे हथियार प्रणालियों जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह भारत के बढ़ते तकनीकी आत्मविश्वास और रणनीतिक तैयारी को दर्शाता है।
रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार के सुधारों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को अधिक निजी भागीदारी के लिए खोला है। साथ ही देश उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं और सीईएल के बीच स्वचालित मौसम अवलोकन प्रणाली तथा नई पीढ़ी की दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर प्रणाली से जुड़ी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहल का भी स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर प्रणाली अब पूरी तरह स्वदेशी बन चुकी है और स्वदेशी तकनीकें राष्ट्रीय आत्मविश्वास, विनिर्माण क्षमता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करती हैं।

महाराष्ट्र में 5 लाख पीएमएवाई-जी आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ करेंगे शिवराज सिंह चौहान

15-May-2026
नई दिल्ली। (शोर संदेश) केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान 15 मई 2026 को सतारा में आयोजित “प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) लाभार्थी सम्मेलन एवं महा आवास अभियान राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह” में शामिल होंगे। कार्यक्रम सैनिक स्कूल ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा अजित पवार सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहेंगे।
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पूर्ण हुए 5 लाख आवासों के गृह प्रवेश का शुभारंभ करेंगे। इसके साथ ही वह छह लाभार्थियों को आवास की चाबियां भी सौंपेंगे, जिनमें योजना के तहत 3 करोड़वें आवास से जुड़े लाभार्थी भी शामिल होंगे।
केंद्रीय मंत्री इस अवसर पर महाराष्ट्र को पीएमएवाई-जी के तहत वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹8,368.50 करोड़ की केंद्रीय अंश सहायता की मातृ स्वीकृति जारी करेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)-IV के तहत ₹122.98 करोड़ की लागत वाली 35 सड़क परियोजनाओं को भी मंजूरी दी जाएगी। इन परियोजनाओं से राज्य की 35 ग्रामीण बसावटों को लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान ‘महा आवास अभियान 2023-24’ के अंतर्गत राज्य स्तरीय पुरस्कारों का वितरण किया जाएगा। साथ ही ‘महा आवास अभियान अवॉर्ड्स गौरवगाथा पुस्तिका’ और त्रैमासिक पत्रिका का भी प्रकाशन होगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को मूलभूत सुविधाओं सहित पक्के घर उपलब्ध कराना है। योजना के तहत अब तक राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 4.15 करोड़ आवासों का लक्ष्य आवंटित किया जा चुका है। इनमें 3.91 करोड़ आवास स्वीकृत हुए हैं, जबकि 11 मई 2026 तक 3.03 करोड़ से अधिक आवास पूरे किए जा चुके हैं।
महाराष्ट्र को आवंटित 43.80 लाख आवासों के लक्ष्य के मुकाबले 41.42 लाख आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं और 17.92 लाख आवास पूरे हो चुके हैं। वहीं, सतारा जिले में 55,052 आवासों के लक्ष्य के मुकाबले 54,759 आवास स्वीकृत किए गए हैं और 24,848 आवास पूर्ण हो चुके हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV के अंतर्गत महाराष्ट्र के लिए बड़ी स्वीकृति की घोषणा भी की जाएगी। इसके तहत 95.99 किलोमीटर लंबाई की 35 सड़क परियोजनाओं को लगभग ₹122.98 करोड़ की लागत से मंजूरी मिलने का प्रस्ताव है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर मौसम में सड़क संपर्क सुनिश्चित करना और शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार सहित आवश्यक सेवाओं तक पहुंच बेहतर बनाना है।
महाराष्ट्र में पीएमजीएसवाई के तहत अब तक 34 हजार किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कों और 1000 से अधिक पुलों को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं पर ₹15 हजार करोड़ से अधिक की लागत स्वीकृत की गई है। राज्य में ‘न्यू एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी’ आधारित सड़क निर्माण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल ग्रामीण आधारभूत संरचना विकसित हो रही है। 

गाजियाबाद में एनडीआरएफ को मिला ‘प्रेसिडेंट्स कलर’, अमित शाह बोले—भारत बना आपदा प्रबंधन में ग्लोबल लीडर

14-May-2026
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में आयोजित समारोह में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ प्रदान किए जाने के कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मोदी सरकार हीट वेव से होने वाली मृत्यु दर को शून्य तक लाने की दिशा में काम कर रही है।
अमित शाह ने पिछले 20 वर्षों में साहस, समर्पण और परिश्रम से देश का विश्वास अर्जित करने पर एनडीआरएफ के सभी जवानों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ ने 1.5 लाख से अधिक लोगों की जान बचाई है और 9 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ के जवानों को देखते ही लोगों के मन में सुरक्षा और भरोसे का भाव पैदा होता है।
गृह मंत्री ने कहा कि पहले आपदा प्रबंधन केवल राहत और प्रतिक्रिया आधारित था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे रिएक्टिव से आगे बढ़ाकर प्रिवेंटिव और प्रोडक्टिव बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण को ‘मिनिमम कैजुअल्टी’ से ‘जीरो कैजुअल्टी’ तक ले जाने का प्रयास कर रही है।
अमित शाह ने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी के 10-सूत्रीय एजेंडा और 360-डिग्री अप्रोच ने डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट को नई दिशा दी है। इसके तहत रिस्क मैपिंग, अर्ली वार्निंग सिस्टम, कम्युनिटी पार्टिसिपेशन और गाइडलाइंस निर्माण जैसे क्षेत्रों को मजबूती मिली है।
उन्होंने कहा कि आज भारत वैश्विक स्तर पर आपदा प्रबंधन में निर्विवाद रूप से ‘ग्लोबल लीडर’ और ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ बनकर उभरा है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को धरातल पर उतारते हुए भारत ने कई देशों की आपदा के समय मदद की है।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से ‘डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ के क्षेत्र में भारत ने वैश्विक नेतृत्व स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि सीडीआरआई (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure) से अब तक 48 देश जुड़ चुके हैं और भारत के साथ मिलकर इस दिशा में काम कर रहे हैं।
अमित शाह ने कहा कि एनडीआरएफ ने धराली में फ्लैश फ्लड, चासोटी में क्लाउडबर्स्ट, जम्मू, पंजाब और दिल्ली में आई बाढ़, साइक्लोन मोंथा और साइक्लोन दितवाह जैसी आपदाओं में प्रभावी ढंग से काम किया।
इसके अलावा अमरनाथ यात्रा, महाकुंभ, चारधाम यात्रा, मणि महेश यात्रा, सबरीमाला यात्रा और भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा जैसे बड़े आयोजनों में भी एनडीआरएफ ने समाज के साथ मिलकर उत्कृष्ट कार्य किया।
गृह मंत्री ने देशभर के सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के जवानों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 से अब तक CAPF जवानों ने देशभर में 7 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए हैं। उन्होंने इसे CAPFs के मानवीय दृष्टिकोण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रतीक बताया। 

आईएमडी ने शुरू की एआई-सक्षम मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, अब 10 दिन पहले मिलेगी स्थानीय मौसम की जानकारी : डॉ. जितेंद्र सिंह

13-May-2026
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अत्यंत-स्थानीय मौसम पूर्वानुमान उपलब्ध कराने के लिए एआई-सक्षम प्रणालियां शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि नई उन्नत पूर्वानुमान प्रणालियां 10 दिन पहले तक स्थानीय मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएंगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने 16 राज्यों और 3,000 से अधिक उप-जिलों के लिए एआई-सक्षम मानसून पूर्वानुमान प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के लिए एआई-आधारित मानसून अग्रिम पूर्वानुमान प्रणाली और 1 किलोमीटर रिजॉल्यूशन वर्षा पूर्वानुमान प्रणाली भी लॉन्च की।
मौसम सेवाओं के आधुनिकीकरण पर सरकार का जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने जलवायु सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए कई परिवर्तनकारी पहलें शुरू की हैं। उन्होंने बताया कि ‘मिशन मौसम’, रडार नेटवर्क का विस्तार, प्रेक्षण प्रणालियों को मजबूत करना, डेटा संचार अवसंरचना का आधुनिकीकरण और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सुविधाओं का विस्तार मिलकर एक मजबूत और प्रौद्योगिकी-संचालित मौसम पूर्वानुमान तंत्र तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आईएमडी अब भारत के दैनिक प्रशासन और सार्वजनिक निर्णय-निर्माण का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।
मोबाइल एप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पहुंचेंगी चेतावनियां
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मौसम संबंधी परामर्श और प्रारंभिक चेतावनी अब मोबाइल एप्लिकेशन, एसएमएस अलर्ट, व्हाट्सएप, किसान पोर्टल, टेलीविजन और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि अंतिम छोर तक सूचना पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि चरम मौसम की घटनाओं के दौरान नुकसान कम करने के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित हितधारकों द्वारा मौसम संबंधी सलाह का समय पर पालन करना भी बेहद जरूरी है।
नागरिक-केंद्रित मौसम सेवा तंत्र की दिशा में बड़ा कदम
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नई पूर्वानुमान प्रणालियां जलवायु-सहिष्णु, डिजिटल रूप से सशक्त और नागरिक-केंद्रित मौसम सेवा तंत्र विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति सीधे सामाजिक और आर्थिक लाभों में योगदान दे रही है।
एआई और मौसम मॉडल के संयोजन से तैयार हुई प्रणाली
डॉ. एम. रविचंद्रन ने कहा कि नई प्रणालियां हितधारक-आधारित पूर्वानुमान मॉडल हैं, जिन्हें संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल और एआई-आधारित डेटा-संचालित तकनीकों के संयोजन से विकसित किया गया है।
उन्होंने कहा कि कृषि और अन्य क्षेत्रों से अत्यंत-स्थानीय और उच्च-रिजॉल्यूशन मौसम पूर्वानुमानों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए इन प्रणालियों को तैयार किया गया है।
जिला स्तर तक मिलेगा मानसून का सूक्ष्म पूर्वानुमान
डॉ. रविचंद्रन ने बताया कि मानसून अग्रिम पूर्वानुमान प्रणाली अब जिला स्तर तक मानसून की प्रगति का सूक्ष्म पूर्वानुमान उपलब्ध कराएगी। वहीं, उत्तर प्रदेश पायलट परियोजना सघन प्रेक्षण नेटवर्क और एआई तकनीकों की मदद से 1 किलोमीटर रिजॉल्यूशन पर वर्षा पूर्वानुमान देने की क्षमता प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे प्रेक्षण अवसंरचना का विस्तार होगा, वैसे-वैसे इन सेवाओं को देश के अन्य हिस्सों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
 

एम्स नई दिल्ली अब वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है : उपराष्ट्रपति

13-May-2026
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के 51वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि एम्स अब केवल अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुसरण नहीं कर रहा, बल्कि स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नए वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि एम्स चिकित्सा नवाचार और स्वास्थ्य सेवा उत्कृष्टता का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जो आम लोगों को सस्ती दरों पर उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि महामारी प्रबंधन से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में “एम्स ब्रांड” भरोसे और सत्यनिष्ठा का प्रतीक बन गया है।
वहन करने योग्य शुल्क पर उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा की सराहना
सी.पी. राधाकृष्णन ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, एम्स के निदेशक और संकाय सदस्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान शैक्षणिक गुणवत्ता से समझौता किए बिना बड़ी संख्या में मरीजों का कुशल प्रबंधन कर रहा है। उन्होंने कहा कि एम्स दशकों से ऐसे विशेषज्ञ तैयार कर रहा है, जिनमें चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ नैतिकता और सहानुभूति की भावना भी मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि एम्स के पूर्व छात्र दुनिया भर के प्रतिष्ठित संस्थानों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा रहे हैं।
एआई तकनीक डॉक्टर की मौजूदगी का विकल्प नहीं
उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि एआई आधारित तकनीकें चिकित्सा क्षेत्र में बड़े बदलाव ला रही हैं, लेकिन कोई भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक मरीज के बिस्तर के पास डॉक्टर की मौजूदगी का विकल्प नहीं बन सकती। उन्होंने कहा कि डॉक्टर की सहानुभूति, नैतिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाएं स्वास्थ्य सेवा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने उत्तीर्ण डॉक्टरों से अपने पेशे में सत्यनिष्ठा, करुणा और मानवता बनाए रखने का आह्वान किया।
एम्स की वैश्विक उपलब्धियों का किया उल्लेख
सी.पी. राधाकृष्णन ने इस वर्ष अंटार्कटिका में दूरस्थ रोबोटिक अल्ट्रासाउंड आयोजित करने की एम्स की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे साबित हुआ है कि भारतीय चिकित्सा उत्कृष्टता के सामने अब भौगोलिक सीमाएं बाधा नहीं हैं। उन्होंने भारत-फ्रांस केंद्र सहित स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई अनुप्रयोगों को लेकर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय सहयोगों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में एम्स ने केवल दो वर्षों में 40 स्थानों की छलांग लगाकर वैश्विक स्तर पर 105वां स्थान हासिल किया है और जल्द ही यह शीर्ष 100 संस्थानों में शामिल होगा। साथ ही, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) के तहत मेडिकल कॉलेज श्रेणी में एम्स ने 2018 से 2025 तक लगातार शीर्ष स्थान बनाए रखा है।
युवा डॉक्टरों से समाज सेवा का आह्वान
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में नए एम्स संस्थानों के विस्तार से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले सुविधाओं की कमी थी। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए नए मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना की दिशा में केंद्र सरकार के प्रयासों की भी सराहना की।
उत्तीर्ण विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वे ऐसे समय में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, जब “एक राष्ट्र, एक स्वास्थ्य” की परिकल्पना देश में अधिक न्यायसंगत और आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार कर रही है। उन्होंने युवा डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों से नवाचार, करुणा और समाज के प्रति समर्पण की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
समारोह में कई वरिष्ठ हस्तियां रहीं मौजूद
इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और एम्स नई दिल्ली के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, एम्स नई दिल्ली के निदेशक निखिल टंडन, डीन राधिका टंडन, रजिस्ट्रार गिरिजा प्रसाद रथ, संकाय सदस्य, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

पीएम मोदी के आह्वान से जुड़ें प्रदेशवासी, ईंधन की खपत कम करें : सीएम योगी

13-May-2026
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान से जुड़ने की अपील करते हुए ईंधन की खपत कम करने और अनावश्यक सोने की खरीद से बचने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सभी को सावधानी बरतनी होगी और प्रधानमंत्री के संदेश को व्यवहार में उतारना होगा।
सरकारी फ्लीट में 50 प्रतिशत कटौती के निर्देश
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव, डीजीपी और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले में तत्काल 50 प्रतिशत तक वाहनों की संख्या कम की जाए। उन्होंने अनावश्यक वाहनों को हटाने और सरकारी बैठकों, सेमिनारों, कॉन्फ्रेंस तथा वर्कशॉप को अधिक से अधिक वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने पर जोर दिया।
वर्क फ्रॉम होम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा
योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और “नो व्हीकल डे” मनाने की अपील की। मुख्यमंत्री ने पीएनजी, मेट्रो, इलेक्ट्रिक वाहन, साइक्लिंग, कार पूलिंग और उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों के अधिक उपयोग पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक संस्थानों और बड़े स्टार्टअप्स को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने के लिए प्रेरित किया जाए। स्कूलों और कॉलेजों में स्कूली बसों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा आवश्यकता पड़ने पर परिवहन निगम की बसों को भी जोड़े जाने के निर्देश दिए गए।
बिजली बचत और स्वदेशी उत्पादों पर जोर
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से बिजली बचाने की अपील करते हुए कहा कि सरकारी भवनों, घरों और निजी प्रतिष्ठानों में अनावश्यक बिजली का उपयोग न किया जाए। उन्होंने रात 10 बजे के बाद सजावटी लाइटों के सीमित उपयोग की भी बात कही।
उन्होंने स्थानीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पादों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों और शादियों में स्वदेशी उत्पादों, ओडीओपी और जीआई टैग प्राप्त वस्तुओं को उपहार के रूप में प्रोत्साहित किया जाए।
डेस्टिनेशन वेडिंग और पर्यटन को बढ़ावा देने की अपील
मुख्यमंत्री ने लोगों से अगले छह महीनों तक गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं से बचने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में हैरिटेज, ईको साइट्स, किले और धार्मिक स्थलों पर डेस्टिनेशन वेडिंग को बढ़ावा दिया जाए।
उन्होंने “विजिट माई स्टेट” अभियान शुरू करने के निर्देश दिए, जिसके तहत वेलनेस, ईको, ग्रामीण, वन्यजीव और खानपान आधारित पर्यटन को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही संग्रहालयों और स्मारकों को कुछ समय के लिए निःशुल्क करने के निर्देश भी दिए गए।
खाद्य तेल की खपत कम करने और प्राकृतिक खेती पर बल
योगी आदित्यनाथ ने लोगों से खाद्य तेल के उपयोग में कमी लाने की अपील करते हुए कहा कि यह स्वास्थ्य, घरेलू बचत और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, कैंटीन, छात्रावासों और पुलिस मेस में कम तेल वाले भोजन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
सीएम योगी ने कृषि विभाग को प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने और गोशालाओं में मौजूद गोवंश के गोबर के उपयोग को बढ़ाने के निर्देश भी दिए। साथ ही फॉर्मर रजिस्ट्री और पीएनजी नेटवर्क विस्तार को मिशन मोड में आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
रूफटॉप सोलर और ऊर्जा बचत पर फोकस
मुख्यमंत्री ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को बढ़ावा देने और लोगों को रूफटॉप सोलर अपनाने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऊर्जा बचत और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाना समय की जरूरत है। 
 

नीट पेपर लीक मामले की जांच के लिए जयपुर पहुंची सीबीआई की टीम

13-May-2026
नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) 2026 पेपर लीक मामले की जांच अब आधिकारिक रूप से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है। सीबीआई की एक टीम मंगलवार देर शाम जयपुर में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप मुख्यालय पहुंची। इसके बाद राजस्थान एसओजी ने मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अब तक गिरफ्तार आरोपियों की जानकारी सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और अब जांच पूरी तरह उसके हाथ में है।
एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी और सबूत नष्ट करने जैसे आरोप शामिल हैं। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स प्रिवेंशन) एक्ट 2024 की धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत के अनुसार, नीट परीक्षा 3 मई को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद एनटीए को कई शिकायतें और खुफिया जानकारी मिली कि परीक्षा से पहले ही कुछ गोपनीय दस्तावेज अवैध रूप से प्रसारित किए गए थे।
पिछले कुछ दिनों में एसओजी ने जयपुर, जमवारामगढ़, सीकर और अन्य जिलों में लगातार छापेमारी की और करीब 15 लोगों को गिरफ्तार किया। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों को पूरे नेटवर्क की जांच के लिए दिल्ली ले जाया जा सकता है, जहां उनसे ‘गेस पेपर’ तैयार करने, उसके वितरण और छात्रों तक पहुंचने के पूरे नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जाएगी।
जांच में सामने आया है कि सीकर और झुंझुनूं के कई छात्रों को परीक्षा से दो दिन पहले ही ‘गेस पेपर’ मिल गया था। दावा किया जा रहा है कि इसमें से 120 से अधिक प्रश्न असली परीक्षा में आए। एसओजी जांच मई 8 को शुरू हुई थी, जब सीकर और झुंझुनूं से शिकायतें सामने आई थीं।
अधिकारियों के अनुसार, पेपर लीक नेटवर्क ने टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर प्रश्न पत्र फैलाया था। जांच में यह भी पता चला कि ‘गेस पेपर’ 1 मई को सीकर के छात्रों में पहली बार वितरित किया गया था। यह भी सामने आया है कि कुल 720 अंकों में से लगभग 600 अंकों के सवाल उस गेस पेपर में शामिल थे और 120–140 प्रश्न सीधे परीक्षा में पूछे गए।
जांच में यह भी पता चला कि यह ‘गेस पेपर’ केरल में पढ़ाई कर रहे चुरू जिले के एक एमबीबीएस छात्र ने सीकर के एक दोस्त को भेजा था। वहां से यह पीजी आवास संचालक के जरिए छात्रों तक पहुंचा। जांच एजेंसियों ने बताया कि एक ही पीजी संचालक ने पहले खुद यह प्रश्न बैंक प्राप्त किया और बाद में उसे छात्रों व कोचिंग सलाहकारों को भेज दिया।
पुलिस का मानना है कि गिरफ्तारी के डर से उसने बाद में खुद ही शिकायत दर्ज करा दी। कई छात्रों ने भी एनटीए को ईमेल के जरिए पेपर लीक की शिकायत भेजी है। जांच में कई कोचिंग सेंटर भी रडार पर हैं और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

समय से पहले दस्तक देगा मॉनसून, दिल्ली-एनसीआर में बादलों का जमावड़ा

13-May-2026
नई दिल्ली। भारत में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन जल्दी हो सकता है। मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल बन रही हैं। इस सप्ताह के अंत तक दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में मानसून आ जाएगा।
मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र कल भी इसी क्षेत्र में था, और इससे संबंधित चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से 4.5 किलोमीटर ऊपर तक फैला हुआ था। आईएमडी ने कहा कि अगले 24 घंटों में इसके और अधिक प्रभावी होने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर हर साल 1 जून के आसपास केरल में शुरू होता है।
वहीं आज भी दिल्ली एनसीआर में मौसम ने करवट ले ली है। आसमान में बादलों की आवाजाही जारी है। ऐसे में लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचने को कहा गया है। तेज हवाओं और बारिश के कारण यातायात प्रभावित हो सकता है। वहीं किसानों और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को भी सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है। आने वाले दिनों की बात करें तो 13 मई को भी आंशिक रूप से बादल छाए रहने और गरज-चमक विकसित होने की संभावना जताई गई है। इस दिन अधिकतम तापमान 35 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
 

सोने-चांदी के दाम में तेजी, कस्टम ड्यूटी बढ़ने का दिख रहा असर

13-May-2026
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से कस्टम ड्यूटी बढ़ाने के बाद सोने और चांदी में बड़ी तेजी देखी जा रही है और दोनों कीमती धातुओं के दाम बुधवार को 6.66 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 05 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट सुबह 9:52 पर 6.09 प्रतिशत या 9,348 रुपए की मजबूती के साथ 1,62,790 रुपए पर था।
वहीं, चांदी में इसी तरह की तेजी देखी जा रही है। चांदी का 5 जुलाई 2026 कॉन्ट्रैक्ट 6.66 प्रतिशत या 18,593 रुपए की तेजी के साथ 2,97,655 रुपए पर था। सोने और चांदी में तेजी की वजह कीमती धातुओं पर केंद्र सरकार की ओर से कस्टम ड्यूटी या आयात शुल्क में वृद्धि करना है।
सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क (उपकर सहित) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, प्लेटिनम पर आयात शुल्क को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दिया है। इस कदम के जरिए सरकार की कोशिश वैश्विक अस्थिरता के दौर में चालू खाते घाटे को कम करना और विदेशी मुद्रा की बचत करना है।
सरकारी सूत्रों ने बताया कि कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में वृद्धि विदेशी मुद्रा संरक्षण, चालू खाते की सुरक्षा, आवश्यक आयातों को प्राथमिकता देने और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती को बढ़ाने के उद्देश्य से अपनाई गई व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
उन्होंने आगे कहा कि यह कदम असाधारण बाहरी परिस्थितियों के प्रति संतुलित, आनुपातिक और राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार प्रतिक्रिया है, साथ ही इसमें व्यापक आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती का भी पूरा ध्यान रखा गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में तेजी देखने को मिल रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.52 प्रतिशत बढ़कर 4,710 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.28 प्रतिशत की मजबूती के साथ 87.54 डॉलर प्रति औंस पर थी।
 

पोखरण परमाणु परीक्षण भारत की अटल इच्छाशक्ति का प्रतीक: पीएम मोदी

13-May-2026
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 1998 में इसी दिन भारत ने जो परमाणु परीक्षण किए थे, उनसे दुनिया को पता चला कि हमारे देश की इच्छाशक्ति कितनी अटल है! 11 मई के टेस्ट के बाद पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था, लेकिन हमने दिखाया कि कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती।
सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर अपने संदेश में पीएम मोदी ने एक संस्कृत श्लोक भी साझा किया, “एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता । न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः।।”
इसका अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि शक्ति और सामर्थ्य एक-दूसरे के पूरक होते हैं। केवल क्षमता होना पर्याप्त नहीं, उसे कार्यरूप देने वाली शक्ति भी आवश्यक है; और शक्ति भी तभी सार्थक होती है जब उसके पीछे समर्थ आधार हो। जैसे शिव और शक्ति का अस्तित्व परस्पर अविभाज्य माना गया है, वैसे ही सामर्थ्य और ऊर्जा के समन्वय से ही सृजन, प्रगति और सफलता संभव होती है।
गौरतलब है कि 13 मई 1998 का दिन भारत के इतिहास में बहुत अहम माना जाता है। इस दिन राजस्थान के पोखरण में ‘ऑपरेशन शक्ति’ के तहत भारत ने दो और सफल परमाणु परीक्षण किए, जिन्हें शक्ति-IV और शक्ति-V नाम दिया गया। ये परीक्षण 11 मई 1998 को हुए पहले तीन परीक्षणों की शृंखला का ही आगे का हिस्सा थे।
इन परीक्षणों का उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को और मजबूत करना था। यह भी बताया गया कि ये सभी परीक्षण भूमिगत तरीके से किए गए और पूरी तरह नियंत्रित थे, जिससे किसी तरह की रेडियोएक्टिविटी बाहर नहीं फैली। इन परीक्षणों से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल कंप्यूटर सिमुलेशन और भविष्य की परमाणु तकनीक को बेहतर बनाने में किया गया।
इस पूरे अभियान का नेतृत्व तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था। इन सफल परीक्षणों के बाद भारत को दुनिया में एक परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में पहचान मिली। 


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