
मुंबई (शोर सन्देश) देश में कोरोना तेजी से बढ़ते ही जा रहा है। इसका असर अब गणेश उत्सव से पहले भी देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र के सबसे मशहूर गणपति मंडलों में शुमार लालबाग इस बार गणपति विसर्जन का उत्सव नहीं मनाएगा। लालबाग गणपति मंडल ने कोरोना वायरस के खतरे के चलते ये फैसला किया है। सरकार के इस निर्णय के बाद बाकी गणपति मंडलों ने दो मूर्तियां बनाने का फैसला किया है। एक बड़ी मूर्ति बनाई जाएगी और एक छोटी. पूजा सिर्फ छोटी मूर्ति की ही की जाएगी। लेकिन लालबाग राजा मंडल की एक ही मूर्ति है। यहां छोटी मूर्ति नहीं है, इसलिए पूजा भी बड़ी मूर्ति की ही की जाएगी। दरअसल, पूरे देश में मुंबई सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित शहरों में है। इसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सभी मंडलों को आदेश दिया था कि इस साल गणपति उत्सव हर साल की तरह न मनाया जाए, क्योंकि इसमें बड़ी तादाद में लोग जमा होते हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि गणपति की मूर्ति की ऊंचाई 4 फीट तक ही रखी जाए।

भोपाल (शोर सन्देश) शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार आज हो सकता है। वैसे अभी तक औपचारिक तौर पर शपथ ग्रहण सामरोह की घोषणा नहीं हुई है। इसके बावजूद भी यह तय माना जा रहा है कि कोई बड़ी दिक्कत रहीं आई तो नवनियुक्त मंत्रियों का शपथ समारोह हो जाएगा। इसके साथ ही राज्य मंत्रिमंडल में दो उप मुख्यमंत्री भी हो सकते हैं। राजभवन में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार मिलने के कारण शपथ समारोह पुरानी विधानसभा यानि मिंटो हाल में हो सकता हैं। इसके लिए तैयारियां प्रारंभ हो गई है। कार्यवाहक राज्यपाल आनंदी बेन पटेल नवनियुक्त मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगी। मंत्रिमंडल विस्तार में लगभग दो दर्जन लोगों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। केंद्रीय नेतृत्व से मिले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गौरतलब है कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीडी शर्मा और संगठन मंत्री सुहास भगत के साथ दिल्ली गए थे। इसी बीच गृह और स्वास्थ्य मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा को भी दिल्ली बुला लिया गया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, भाजपा के केन्द्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया से प्रमुख रूप से मुलाकात की। जानकर सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल के विस्तार में नए चेहरों को ज़्यादा स्थान देने के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के बाध बाद अब, पूर्व मंत्रियों राजेंद्रप्रसाद शुक्ला, अजय विस्नोई, गौरीशंकर विसेन, रामपाल सिंह के नामों पर पेंच फँस गया है. मुख्यमंत्री इसको लेकर पार्टी नेतृत्व से देर रात तक मशविरा कर रहे थे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब कल सुबह 30 जून को सुबह 7 बजे दिल्ली से भोपाल के लिए रवाना होंगे.पहले तय कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री आज रात को ही भोपाल वापस आने वाले थे। चौहान संभावित मंत्रियों के नामों पर भाजपा नेतृत्व से अंतिम बात करने के लिए आज रात्रि भी दिल्ली में ही रहेंगे। इसी बीच यह सूचना आई है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान संभावित मंत्रियों के नामों पर भाजपा नेतृत्व से अंतिम बात करने के लिए आज रात्रि भी दिल्ली में ही रहेंगे। क्योंकि अभी भी कई नामों पर पेंच फंसा हुआ है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कल सुबह विशेष विमान से ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ दिल्ली से भोपाल लौटेंगे. बताया जा रहा है कि सिंधिया के साथ भाजपा में आए 22 में से 10 लोगों को मंत्री बनाया जा सकता है. भाजपा के पुराने और नए चेहरों के बीच सामंजस्य बनाते हुए लगभग 15 लोगों को शपथ दिलाई जा सकती है. इसके साथ ही माना जा रहा है कि राज्य में दो मुख्यमंत्री भी हो सकते हैं. इनमें एक डा. नरोत्तम मिश्रा और दूसरे तुलसी सिलावट का नाम लगभग तय माना जा रहा है।
जिन सिंधिया समर्थकों का मंत्री बनना लगभग तय सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री इमरती देवी, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया, पूर्व मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, पूर्व मंत्री डा. प्रभुराम चौधरी, पूर्व विधायक राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, पूर्व विधायक एंदल सिंह कंसाना, पूर्व विधायक हरदीप सिंह डंग, पूर्व विधायक रणवीर जाटव और पूर्व विधायक बिसाहूलाल सिंह का मंत्री बनना तय माना जा रहा है।
भाजपा के पुराने चेहरे जो हैं मंत्री बनने की दौड़ में पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव , पूर्व मंत्री रामपाल सिंह, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह पूर्व मंत्री विजय शाह, पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन, पूर्व मंत्री यशोधरा राजे, पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला, पूर्व मंत्री संजय पाठक, पूर्व मंत्री अजय विश्नोई, पूर्व मंत्री नागेंद्र सिंह नागौद,पूर्व मंत्री जगदीश देवड़ा, पूर्व मंत्री बृजेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री हरिशंकर खटीक के नाम संभावित मंत्रियों की सूची में प्रमुखता से लिए जा रहे हैं. इसके साथ ही भोपाल से पूर्व राज्य मंत्री विश्वास सांरग और विधायक रामेश्वर शर्मा में से कोई एक इंदौर से विधायक रमेश मेंदोला और विधायक मालिनी गौड़ में से कोई एक मंत्री बन सकता है।

दिल्ली (शोर सन्देश) कोरोना काल में छठी बार पीएम मोदी देश को सम्बोधित करेंगे। पीएम मोदी राष्ट्र के नाम संबोधन करेंगे। इसके अलावा देश में कोरोना वायरस के मामलों की बढ़ती रफ्तार और सीमा पर चीन के साथ जारी तनातनी के बीच होने वाले इस संबोधन पर हर किसी की नज़र है। आज होने वाला उनका संबोधन ये छठा होगा। इससे पहले जनता कर्फ्यू के ऐलान से लेकर 20 लाख करोड़ के पैकेज तक पीएम ने राष्ट्र को संबोधित किया है। कोरोना संकट में कब-कब राष्ट्र के नाम संबोधन?
19 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट पर पहली बार इसी दिन देश को संबोधित किया था. इस दिन जनता कर्फ्यू का ऐलान किया गया था, जो 22 मार्च को रखा गया।
24 मार्च: दूसरे संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में लॉकडाउन का ऐलान किया. जो 25 मार्च से शुरू हुआ और 21 दिन तक के लिए लगाया गया।
3 अप्रैल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में लोगों से दीया जलाने की अपील की. देश में कोरोना वॉरियर्स के सम्मान में रात को नौ बजे नौ मिनट तक दीया जलाया गया।
4 बजे राष्ट्र के नाम मोदी का संदेश, कोरोना की रफ्तार या चीन विवाद, किसपर होगी बात?
14 अप्रैल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में लॉकडाउन 2.0 का ऐलान किया, जो कि 3 मई तक जारी रहा. इसके बाद के सभी लॉकडाउन गृह मंत्रालय की ओर से लगाए गए।
12 मई: प्रधानमंत्री ने आखिरी बार 12 मई को संबोधन दिया था, जिसमें उन्होंने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था. इसके तहत देश के छोटे व्यापारियों, श्रमिक मजदूरों, गरीबों को आर्थिक मदद, लोन की मदद का ऐलान किया गया।
30 जून: अब आज शाम को चार बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के नाम अपना संबोधन देंगे।

सरकारी प्रतिबंध 59 मोबाइल ऐप जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए पूर्वाग्रहपूर्ण हैं।
नयी दिल्ली (शोर सन्देश)। भारत की सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 ए के तहत सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा प्रावधानों के तहत इसे लागू करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसे लागू किया है। भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए पूर्वाग्रहपूर्ण हैं। पिछले कुछ वर्षों में, भारत एक प्रमुख प्रर्वतक के रूप में उभरा है जब तकनीकी प्रगति और डिजिटल अंतरिक्ष में एक प्राथमिक बाजार की बात आती है। इसी समय, डेटा सुरक्षा से जुड़े पहलुओं और 130 करोड़ भारतीयों की गोपनीयता की सुरक्षा के लिए चिंताएँ बढ़ गई हैं। हाल ही में यह ध्यान दिया गया है कि इस तरह की चिंताओं से हमारे देश की संप्रभुता और सुरक्षा को भी खतरा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को विभिन्न स्रोतों से कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें चोरी के लिए एंड्रॉइड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कुछ मोबाइल ऐप के दुरुपयोग और उपयोगकर्ताओं के डेटा को अनधिकृत तरीके से सर्वर से प्रसारित करने के बारे में हैं, जिनमें भारत से बाहर के स्थान हैं। इन आंकड़ों का संकलन, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा के लिए शत्रुतापूर्ण तत्वों द्वारा खनन और इसकी रूपरेखा, जो अंततः भारत की संप्रभुता और अखंडता पर लागू होती है, बहुत गहरी और तत्काल चिंता का विषय है जिसे आपातकालीन उपायों की आवश्यकता है।
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, गृह मंत्रालय ने भी इन दुर्भावनापूर्ण ऐप्स को अवरुद्ध करने के लिए एक संपूर्ण सिफारिश भेजी है। इस मंत्रालय को कुछ ऐप के संचालन से संबंधित डेटा से सुरक्षा और गोपनीयता के लिए जोखिम के बारे में नागरिकों की चिंताओं को उठाने वाले कई प्रतिनिधित्व भी मिले हैं। कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-IN) को सार्वजनिक आदेश के मुद्दों पर डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता के उल्लंघन के बारे में नागरिकों से कई प्रतिनिधित्व मिले हैं। इसी तरह, भारत के संसद के बाहर और अंदर दोनों ही तरह के जनप्रतिनिधियों द्वारा झंडारोहण की गई है। भारत की संप्रभुता के साथ-साथ हमारे नागरिकों की गोपनीयता को नुकसान पहुंचाने वाले ऐप्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए सार्वजनिक स्थान पर एक मजबूत कोरस किया गया है।
इनके आधार पर और हाल के विश्वसनीय इनपुट्स प्राप्त करने पर कि ऐसे ऐप्स भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करते हैं, भारत सरकार ने मोबाइल और गैर-मोबाइल इंटरनेट सक्षम उपकरणों में उपयोग किए गए कुछ ऐप्स के उपयोग को अस्वीकार करने का निर्णय लिया है। ये ऐप संलग्न परिशिष्ट में सूचीबद्ध हैं।
यह कदम करोड़ों भारतीय मोबाइल और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के हितों की रक्षा करेगा। यह निर्णय भारतीय साइबरस्पेस की सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए एक लक्षित कदम है।
00 भारत में प्रतिबंधित किये गए एप की सूची :
1. TikTok
2. Shareit
3. Kwai
4. UC Browser
5. Baidu map
6. Shein
7. Clash of Kings
8. DU battery saver
9. Helo
10. Likee
11. YouCam makeup
12. Mi Community
13. CM Browers
14. Virus Cleaner
15. APUS Browser
16. ROMWE
17. Club Factory
18. Newsdog
19. Beutry Plus
20. WeChat
21. UC News
22. QQ Mail
23. Weibo
24. Xender
25. QQ Music
26. QQ Newsfeed
27. Bigo Live
28. SelfieCity
29. Mail Master
30. Parallel Space 31. Mi Video Call – Xiaomi
32. WeSync
33. ES File Explorer
34. Viva Video – QU Video Inc
35. Meitu
36. Vigo Video
37. New Video Status
38. DU Recorder
39. Vault- Hide
40. Cache Cleaner DU App studio
41. DU Cleaner
42. DU Browser
43. Hago Play With New Friends
44. Cam Scanner
45. Clean Master – Cheetah Mobile
46. Wonder Camera
47. Photo Wonder
48. QQ Player
49. We Meet
50. Sweet Selfie
51. Baidu Translate
52. Vmate
53. QQ International
54. QQ Security Center
55. QQ Launcher
56. U Video
57. V fly Status Video
58. Mobile Legends
59. DU Privacy

क्या 1967 दोहराना चाहता है चीन
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भाती-चीन का विवाद इन दिनों गलवान घाटी पर गरमाया हुआ है, लेकिन ऐसा क्या है जो चीन भारत के गलवान पर ही कब्जा करना चहता है। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीनी सेना के बीच तनाव की शुरुआती हो गई थी। जून में यह तनाव चरम पर पहुंच गया और हिंसक झड़प में बदल गया। इस झड़प में जहां भारत ने अपने 20 जवानों को खोया वहीं चीन को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। इससे पहले चीन के साथ भारत की 1967 में भारी तना-तनी हुई थी, जिसका खामियाजा दोनों देशों को बड़े नुकसान से चुकाना पड़ा था। जिस तरह के हालात वर्तमान में दोनों देशों के बीच बन रहे हैं, इसका अर्थ कही चीन 1967 दोहराना तो नहीं चाहता।
आखिर भारत के गलवान पर ही क्यों कब्जा करना चाहता है चीन। इसका जवाब जानने जब गहरी चिंतन हुई तब एक बात सामने आई जो है अक्साई चिन। अक्साई चिन पर हमेशा से भारत का दावा रहा है, लेकिन गलवान के इलाके को चीन ने कब्जा कर रखा है। यहां की भौगोलिक स्थिति पठारी है। इस इलाके में चीन सामरिक तौर पर अपनी मौजूदगी और मजबूत करना चाहता है, इसलिए वो इसके आगे के हिस्सों पर भी अपना कब्जा चाहता है।
भारत के जिस इलाके में गलवान है, वह भारत के उत्तरी इलाके में सुदूर, बेहद संकरे और कटीले पहाड़ों और तेजी से बहती नदियों के बीच स्थित है, यह क्षेत्र लगभग 14,000 फीट (4,250 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है और तापमान अक्सर शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे ही रहता है।
सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा फेस-ऑफ का सबसे प्रमुख कारण भारत का ट्रांसपोर्ट लिंक को बेहतर बनाने के लिए सड़कों और हवाई अड्डों का निर्माण करना है। चीन इस इलाके में भारत की मजबूत स्थिति से पूरी तरह बौखलाया हुआ है।
बता दें कि एलएसी के किनारे चीन ने पहले ही मजबूत बुनियादी ढांचा बना लिया है। ऐसे में भारत के सीमाई क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर चीन बुरी तरह भड़का हुआ है। चीन को लग रहा है कि इससे इन दुर्गम इलाकों में भी भारत भारी पड़ सकता है। भारत की इस तैयारी से दोनों देशों के बीच जो सैन्य ताकतों का फासला है वो भी कम हो सकता है।
बता दें कि दोनों देशों के बीच 1993 में हुए एक समझौते के मुताबिक वास्तविक सीमा रेखा पर कोई भी पक्ष बल का प्रयोग नहीं करेगा, लेकिन चीन ने अपनी चालबाजी के जरिए बिना एक भी गोली चलाए तनाव को शीर्ष स्तर पर पहुंचा दिया।
इस क्षेत्र में दोनों देश के बीच 4,056 किमी (2,520 मील) लंबी सीमा रेखा है। हिमालय के इस क्षेत्र में चीन भारत के विशाल भूखंड पर अपना दावा करता रहा है। जब इसी घुसपैठ को सेना रोकती है और उन्हें पीछे जाने पर मजबूर करती है तो एलएसी पर तनाव बढ़ जाता है। इस इलाके में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद भारत के पूर्व ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासकों द्वारा किए गए सीमांकन के बाद से ही शुरू हो गया था।
गलवान में चीन की आपत्ति के बाद भी भारत ने अपनी तरफ एक सड़क का निर्माण बीते साल अक्टूबर में ही पूरा कर लिया था। इससे पहले साल 1967 में भारत और चीनी सेना के बीच ऐसी ही झड़प हो चुकी है, जिसमें सैकड़ों चीनी सैनिक मारे गए थे। भारत के भी कई जवान शहीद हो गए थे।

नयी दिल्ली (शोर सन्देश)। भारत सरकार ने हाल ही में सभी सेवाओं में सरकारी खरीद व अन्य के लिए अपनी ‘मेक इन इंडिया’ नीति में संशोधन किया है। संशोधित नीति के तहत, 200 करोड़ रुपये से कम की खरीद के अनुमानित मूल्य के लिए, सभी सेवाओं की खरीद के लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के अलावा कोई वैश्विक निविदा जारी नहीं की जाएगी।
केंद्रीय पोत परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनसुख मंडावियाने सरकार की कार्गो परिवहन नीति के कार्यान्वयन के लिए भारतीय शिपिंग की तैयारी की समीक्षा की।
यह अनुमान है कि मेक इन इंडिया नीति, तात्कालिक तौर पर भारतीय फ्लैग जहाज़ों की संख्या को कम से कम दोगुनी (3 साल की अवधि में वर्तमान के लगभग 450 से बढ़कर900जहाज) करने का अवसर प्रदान करेगी। इसके अलावा भविष्य में भारतीय फ्लैग टन भार में अतिरिक्त निवेश होने की भी सम्भावना रहेगी।
आधुनिक समुद्री प्रशासन के साथ, प्रशिक्षित नाविकों की निरंतर आपूर्ति व पहले से ही उपलब्ध जहाज प्रबंधन कौशलके साथ दुनिया भर के जहाज मालिकों कोसरकारी कार्गो के परिवहन के सन्दर्भ में सरकार की मेक इन इंडिया नीति का लाभ उठाने हेतुभारत में अपने जहाजों को फ्लैग करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

दिल्ली (शोर सन्देश)। पूरा विश्व मानसिक तनाव सेे गुजर रहा है, इससे मुक्ति का सरल समाधान सिर्फ एक ही है, योग ध्यान सभी को जरूरत है कि वह घर पर रहकर ही योग व ध्यान सीखे करे और स्वस्थ रहें। ध्यान के अभ्यास से व्यक्ति का जीवन पूर्ण और व्यवस्थित होता है। ध्यान से मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत में भारत की बड़ी भूमिका है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग के अनेक लाभों को देखते हुए योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए देशवासियों को प्रेरित किया है। भारत में विश्व योग दिवस को भव्य रुप में मनाया जाता है, लेकिन इस साल कोरोनावायरस के चलते विश्व योग दिवस फ ीका न रहे इसके लिए योग दिवस को अपने घर पर योग करके अवश्य मनाए। योग ध्यान से शरीर पूर्णता स्वस्थ रहता है इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति इस विश्व योग दिवस को अवश्य मनाए और दैनिक जीवन में योग को अवश्य उतारे। आज पूरा विश्व मानसिक तनाव को झेल रहा है, इससे मुक्ति का सरल समाधान सिर्फ एक ही है वह है ध्यान और योग सभी को जरूरत है कि वह घर पर रहकर ही योग व ध्यान सीखे और करे और स्वस्थ रहें।
ध्यान से मानसिक शक्ति को केंद्रित और नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे अनेक शारीरिक और मानसिक रोगों से छुटकारा मिल जाएगा। रोग प्रतिरोधक क्षमता में पाचन प्रणाली में सुधार, आना ,रक्तचाप में कमी आना मानसिक तनाव में कमी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का आसान और स्थाई तरीका है ध्यान का अभ्यास के मानसिक लाभ। मन हमारे शरीर का चालक है यदि हमारा मन शांत एवम व्यवस्थित और नियंत्रित रहता है तो अनेक लाभ मिलते हैं जैसे मानसिक तनाव में कमी बेहतर नींद एवम मन शांत एवम व्यवस्थित और नियंत्रित रहता है । रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढोतरी होती हैं। इससे अपने स्मरण शक्ति को भी विकसित किया जा सकता है, संकल्प शक्ति का विकास करके अपने क्रोध को द्वेष आदि को दूर करके मानसिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है।
ध्यान का अर्थ भीतर से जाग जाना ध्यान है। सदा निर्विचार की दशा में रहना ही ध्यान हैं। ध्यान या मेडिटेशन एक ऐसी मानसिक अवस्था है, जिससे व्यक्ति अपने दिमाग और मन को एकाग्र चित्त करने की कोशिश करता है। चिंता तनाव डर मानसिक रोग शारीरिक रोग डिप्रेशन चिंता कुंठा से बचाव का उत्तम उपाय सिर्फ योग और ध्यान ही हैं। अशांति तनाव या अवस्था हमारी प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बना देती है, योग करें स्वस्थ रहें शरीर को शक्तिशाली बनाते हैं योगिक आसन और ध्यान।
तनाव हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत हानिकारक प्रभाव डालता है
ध्यान वास्तव में ध्यान क्या है। अपनी आंख बंद करके बैठ जाना भी ध्यान नहीं किसी मूर्ति का समरण करना भी ध्यान नहीं माला जपना भी ध्यान नहीं अक्सर ये कहा जाता है कि पांच 10 मिनट के लिए इशवर का ध्यान करो यह भी ध्यान नहीं समरण हैं।
ध्यान का अभ्यास करने की विधि।
आराम से किसी भी ध्यानात्मक आसन या किसी भी आरामदायक स्थिति में बैठकर ध्यान के अभ्यास को किया जा सकता है। अपनी आंखों को बंद करें और सांस को नियंत्रित करने की कोशिश न करें स्वाभाविक तरीके से ही सांस लें। सांस पर अपना ध्यान केंद्रित न करें और सांस अंदर लेने और बाहर निकालने पर शरीर की गतिविधियों पर गौर करने के साथ-साथ अपने शरीर के हर अंग का निरीक्षण भी करेंगे। जैसे छाती कंधा पसलियां पेट आदि। बस सिर्फ अपनी श्वास पर अपना ध्यान केंद्रित करें बिना उसकी गति या तीव्रता को नियंत्रित किये गहरी सांस ले गहरी सांस लेने के साथ साथ ही नाड़ी शोधन प्राणायाम अवश्य करें।
इससे रक्त वाहिकाओं मे रक्त पवाह को बेहतर बनाने वाले योग करना हमेशा अच्छा होता है। ध्यान करते समय अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट रखें। इससे आपको आराम शांति और ध्यान में मन लगाने में मदद मिलती है। बैठकर ध्यान करते वक्त अपनी आंखें बंद रखें। इससे ध्यान करते समय मन नहीं भटकता। अभ्यास खत्म होने के बाद धीरे-धीरे अपनी आंखें खोले। मन के अब अपने अंदर आई स्फूर्ति को महसूस करने की कोशिश करें। आपको ताजगी का एहसास होगा। ध्यान से ही मानसिक शक्ति को केंद्रित और नियंत्रित किया जा सकता है। जिससे अनेक शारीरिक और मानसिक रोगों से छुटकारा मिल जाएगा और अपने स्मरण शक्ति को भी विकसित किया जा सकता है , संकल्प शक्ति का विकास करके अपने क्रोध को द्वेष आदि को दूर करके मानसिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है। ध्यान के अभ्यास से व्यक्ति का जीवन पूर्ण तथ ध्यान के अभ्यास से व्यक्तिगत जीवन को नियंत्रित और सयमित भी होता है। ध्यान के परिणीति यही है कि हम सभी अपने स्वरूप में स्थित हो जाएं मेडिटेशन के बिना हमारे मन बुद्धि कर्म जीवन सभी में अंधकार रहता है ।
ध्यान अभ्यास करने से हमारा शरीर पूरी तरह से शांत हो जाता है और हमारा समस्त तनाव दूर हो जाता है। ध्यान पर किए गए परीक्षण बताते हैं कि ध्यान अभ्यास के दौरान हमारे दिमाग की तरंगे धीमी होकर 4 से 10 हर्टज पर काम करने लगते हैं। जिससे कि हमें पूरी तरह से शांत होने का एहसास मिलता है। इससे हमारे शरीर को भी अनेक लाभ मिलते हैं जैसे बेहतर नींद आना रक्तचाप में कमी आना, रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन प्रणाली में सुधार और दर्द के एहसास में कमी आना । यह सभी लाभ ध्यान से हमें अपने आप ही मिलने लगते हैं। जब भी आप व्यवस्था और भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं तब ध्यान से आप को शांति मिलती है।दिल्ली (वीएनएस)। पूरा विश्व मानसिक तनाव सेे गुजर रहा है, इससे मुक्ति का सरल समाधान सिर्फ एक ही है, योग ध्यान सभी को जरूरत है कि वह घर पर रहकर ही योग व ध्यान सीखे करे और स्वस्थ रहें। ध्यान के अभ्यास से व्यक्ति का जीवन पूर्ण और व्यवस्थित होता है। ध्यान से मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत में भारत की बड़ी भूमिका है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग के अनेक लाभों को देखते हुए योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए देशवासियों को प्रेरित किया है। भारत में विश्व योग दिवस को भव्य रुप में मनाया जाता है, लेकिन इस साल कोरोनावायरस के चलते विश्व योग दिवस फ ीका न रहे इसके लिए योग दिवस को अपने घर पर योग करके अवश्य मनाए। योग ध्यान से शरीर पूर्णता स्वस्थ रहता है इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति इस विश्व योग दिवस को अवश्य मनाए और दैनिक जीवन में योग को अवश्य उतारे। आज पूरा विश्व मानसिक तनाव को झेल रहा है, इससे मुक्ति का सरल समाधान सिर्फ एक ही है वह है ध्यान और योग सभी को जरूरत है कि वह घर पर रहकर ही योग व ध्यान सीखे और करे और स्वस्थ रहें।
ध्यान से मानसिक शक्ति को केंद्रित और नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे अनेक शारीरिक और मानसिक रोगों से छुटकारा मिल जाएगा। रोग प्रतिरोधक क्षमता में पाचन प्रणाली में सुधार, आना ,रक्तचाप में कमी आना मानसिक तनाव में कमी कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का आसान और स्थाई तरीका है ध्यान का अभ्यास के मानसिक लाभ। मन हमारे शरीर का चालक है यदि हमारा मन शांत एवम व्यवस्थित और नियंत्रित रहता है तो अनेक लाभ मिलते हैं जैसे मानसिक तनाव में कमी बेहतर नींद एवम मन शांत एवम व्यवस्थित और नियंत्रित रहता है । रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढोतरी होती हैं। इससे अपने स्मरण शक्ति को भी विकसित किया जा सकता है, संकल्प शक्ति का विकास करके अपने क्रोध को द्वेष आदि को दूर करके मानसिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है।
ध्यान का अर्थ भीतर से जाग जाना ध्यान है। सदा निर्विचार की दशा में रहना ही ध्यान हैं। ध्यान या मेडिटेशन एक ऐसी मानसिक अवस्था है, जिससे व्यक्ति अपने दिमाग और मन को एकाग्र चित्त करने की कोशिश करता है। चिंता तनाव डर मानसिक रोग शारीरिक रोग डिप्रेशन चिंता कुंठा से बचाव का उत्तम उपाय सिर्फ योग और ध्यान ही हैं। अशांति तनाव या अवस्था हमारी प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बना देती है, योग करें स्वस्थ रहें शरीर को शक्तिशाली बनाते हैं योगिक आसन और ध्यान।
तनाव हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत हानिकारक प्रभाव डालता है
ध्यान वास्तव में ध्यान क्या है। अपनी आंख बंद करके बैठ जाना भी ध्यान नहीं किसी मूर्ति का समरण करना भी ध्यान नहीं माला जपना भी ध्यान नहीं अक्सर ये कहा जाता है कि पांच 10 मिनट के लिए इशवर का ध्यान करो यह भी ध्यान नहीं समरण हैं।
ध्यान का अभ्यास करने की विधि।
आराम से किसी भी ध्यानात्मक आसन या किसी भी आरामदायक स्थिति में बैठकर ध्यान के अभ्यास को किया जा सकता है। अपनी आंखों को बंद करें और सांस को नियंत्रित करने की कोशिश न करें स्वाभाविक तरीके से ही सांस लें। सांस पर अपना ध्यान केंद्रित न करें और सांस अंदर लेने और बाहर निकालने पर शरीर की गतिविधियों पर गौर करने के साथ-साथ अपने शरीर के हर अंग का निरीक्षण भी करेंगे। जैसे छाती कंधा पसलियां पेट आदि। बस सिर्फ अपनी श्वास पर अपना ध्यान केंद्रित करें बिना उसकी गति या तीव्रता को नियंत्रित किये गहरी सांस ले गहरी सांस लेने के साथ साथ ही नाड़ी शोधन प्राणायाम अवश्य करें।
इससे रक्त वाहिकाओं मे रक्त पवाह को बेहतर बनाने वाले योग करना हमेशा अच्छा होता है। ध्यान करते समय अपने चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट रखें। इससे आपको आराम शांति और ध्यान में मन लगाने में मदद मिलती है। बैठकर ध्यान करते वक्त अपनी आंखें बंद रखें। इससे ध्यान करते समय मन नहीं भटकता। अभ्यास खत्म होने के बाद धीरे-धीरे अपनी आंखें खोले। मन के अब अपने अंदर आई स्फूर्ति को महसूस करने की कोशिश करें। आपको ताजगी का एहसास होगा। ध्यान से ही मानसिक शक्ति को केंद्रित और नियंत्रित किया जा सकता है। जिससे अनेक शारीरिक और मानसिक रोगों से छुटकारा मिल जाएगा और अपने स्मरण शक्ति को भी विकसित किया जा सकता है , संकल्प शक्ति का विकास करके अपने क्रोध को द्वेष आदि को दूर करके मानसिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है। ध्यान के अभ्यास से व्यक्ति का जीवन पूर्ण तथ ध्यान के अभ्यास से व्यक्तिगत जीवन को नियंत्रित और सयमित भी होता है। ध्यान के परिणीति यही है कि हम सभी अपने स्वरूप में स्थित हो जाएं मेडिटेशन के बिना हमारे मन बुद्धि कर्म जीवन सभी में अंधकार रहता है ।
ध्यान अभ्यास करने से हमारा शरीर पूरी तरह से शांत हो जाता है और हमारा समस्त तनाव दूर हो जाता है। ध्यान पर किए गए परीक्षण बताते हैं कि ध्यान अभ्यास के दौरान हमारे दिमाग की तरंगे धीमी होकर 4 से 10 हर्टज पर काम करने लगते हैं। जिससे कि हमें पूरी तरह से शांत होने का एहसास मिलता है। इससे हमारे शरीर को भी अनेक लाभ मिलते हैं जैसे बेहतर नींद आना रक्तचाप में कमी आना, रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन प्रणाली में सुधार और दर्द के एहसास में कमी आना । यह सभी लाभ ध्यान से हमें अपने आप ही मिलने लगते हैं। जब भी आप व्यवस्था और भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं तब ध्यान से आप को शांति मिलती है।

गुलाम रसूल गलवान ने गलवान घाटी की खोज की थी, अंग्रेजों ने उन्हीं के नाम पर इस घाटी का नाम रखा था. उनके पोते का कहना है कि 1962 में भी चीन ने घाटी पर कब्जा करने की कोशिश की थी. लद्दाख की गलवान घाटी, जहां एलएसी पर भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ा है, उसका गलवान परिवार के साथ संबंध गहरा और भावनात्मक है. इस घाटी का नाम एक स्थानीय एक्सप्लोरर गुलाम रसूल गलवान के नाम पर रखा गया था. वास्तविक नियंत्रण रेखा पर मौजूदा स्थिति के बारे में बात करते हुए उनके पोते मोहम्मद अमीन गलवान ने कहा कि वह उन जवानों को सलाम करते हैं, जिन्होंने चीनी सैनिकों के साथ लड़ते हुए जीवन का बलिदान दिया. मोहम्मद गलवान कहते हैं, `युद्ध विनाश लाता है, आशा है कि एलएसी पर विवाद शांति से हल हो जाएगा.` परिवार के साथ घाटी के गहरे संबंध को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनके दादा पहले इंसान थे जो इस गलवान घाटी में ट्रैकिंग करते हुए अक्साई चीन क्षेत्र में पहुंचे थे. उन्होंने 1895 में अंग्रेजों के साथ इस घाटी में ट्रैकिंग की थी. मोहम्मद गलवान के मुताबिक, `अक्साई चीन जाने के दौरान रास्ते में मौसम खराब हो गया और ब्रिटिश टीम को बचाना मुश्किल हो गया. मौत उनकी आंखों के सामने थी. हालांकि फिर रसूल गलवान ने टीम को मंजिल तक पहुंचाया. उनके इस काम से ब्रिटिश काफी खुश हुए और उन्होंने उनसे पुरस्कार मांगने के लिए कहा, फिर उन्होंने कहा कि मुझे कुछ नहीं चाहिए बस इस नाले का नामकरण मेरे नाम पर कर दिया जाए.`

दिल्ली (शोर सन्देश)। लद्दाख में LAC पर चीन के साथ हिंसक झड़प में 20 जवानों के शहीद होने को लेकर देशभर में गुस्सा है. इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख पर सवाल खड़ा किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि न तो वहां कोई हमारी सीमा में घुसा हुआ है और न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है. राहुल गांधी ने कहा कि पीएम ने भारतीय क्षेत्र को चीनी आक्रमकता के सामने खुद को सरेंडर कर दिया है. राहुल गांधी ने सवाल किया कि वह जमीन चीन की थी जहां भारतीय जवान शहीद हुए तो हमारे सैनिकों को क्यों मारा गया? उन्हें कहां मारा गया? असल में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक के बाद कहा था कि न तो कोई हमारी सीमा में घुसा हुआ है और न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्जे में है. लद्दाख में हमारे 20 जांबाज शहीद हुए, लेकिन जिन्होंने भारत माता की तरफ आंख उठाकर देखा था, उन्हें वो सबक सिखाकर गए. प्रधानमंत्री मोदी के इसी बयान पर राहुल गांधी ने सवाल किया है और पूछा है कि अगर वह जमीन चीन की थी, जहां भारतीय जवान शहीद हुए तो हमारे सैनिकों को क्यों मारा गया? उन्हें कहां मारा गया?

इसके बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल होने की संभावना
दक्षिण-पश्चिम मानसून के 25 जून 2020 के आसपास हरियाणा सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) में पहुंचने की संभावना मानसून की उत्तरी सीमा (एनएलएम) का कांडला, अहमदाबाद, इंदौर, रायसेन, खजुराहो, फतेहपुर और बहराइच से होकर गुजरना जारी
नयी दिल्ली (शोर सन्देश)। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र/क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, नई दिल्ली के अनुसार: अनुकूल मौसम विज्ञान-संबंधी परिस्थितियों के तहत, पिछले सप्ताह (11वें-16वें) के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून में निरंतर प्रगति हुई थी और इस अवधि के दौरान, दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत, पश्चिम के अधिकांश हिस्सों, मध्य भारत और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों तक पहुँच गया है। 16 जून 2020 को मानसून की उत्तरी सीमा (एनएलएम) अक्षांश.23 ° उत्तर / देशान्तर.60 ° पूर्व, कांडला, अहमदाबाद, इंदौर, रायसेन, खजुराहो, फतेहपुर, बहराइच और अक्षांश.28 ° उत्तर / देशान्तर.8.5.5 ° पूर्व से होकर गुजरी और यह आज 18 जून 2020 तक समान स्थिति में रहा। वर्तमान मौसम संबंधी परिदृश्य के कारण, दक्षिण पश्चिम मानसून की 21 जून 2020 तक आगे बढ़ने की संभावना नहीं है। इसके पश्चात, दक्षिण पश्चिम मानसून के उत्तर प्रदेश और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में 22 से 24 जून 2020 तक आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल होने की संभावना है।
दक्षिण पश्चिम मानसून के 25 जून 2020 के आसपास हरियाणा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) में पहुंचने की संभावनाएं बनी हुई हैं। दक्षिण पश्चिम मानसून की प्रगति के दौरान, 22 से 24 जून, 2020 के दौरान उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में पर्याप्त वर्षा से भारी वर्षा/गरज गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है।
इस दौरान, मॉनसून की उत्तरी सीमा (एनएलएम) का कांडला, अहमदाबाद, इंदौर, रायसेन, खजुराहो, फतेहपुर और बहराइच से होकर गुजरना जारी है।
मध्य पाकिस्तान से मणिपुर तक के निचले ट्रोफोस्फेरिक स्तरों पर एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है और झारखंड एवं इससे सटे निचले क्षेत्रों और मिडट्रोपोस्फ़ेरिक स्तरों पर एक चक्रवाती दबाव बना हुआ है। इन परिस्थितियों के कारण होने वाले प्रभाव के तहत, आगामी 5 दिनों के दौरान ,पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में भारी से बहुत भारी वर्षा के साथ व्यापक वर्षा जारी रहने की संभावना है। आज, 18 जून, 2020 को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और मेघालय में भारी वर्षा होने की संभावना है। आगामी 5 दिनों के दौरान मध्य भारत में भी पर्याप्त से भारी वर्षा और पूर्व मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में पर्याप्त से भारी वर्षा होने की संभावना है।
आगामी 4 से 5 दिनों के दौरान उत्तराखंड (अलग-अलग क्षेत्रों में तेज गर्जन के साथ भारी वर्षा होने की संभावना है) के अतिरीक्त उत्तर पश्चिम भारत में हलकी वर्षा/गर्जन के साथ छीटें पड़ने की संभावना है।
राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में निचले ट्रोपोस्फ़ेरिक स्तरों पर संभावित उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण, आगामी 2 से 3 दिनों के दौरान लू से भीषण लू चलने की संभावना है।