ब्रेकिंग न्यूज

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वकील ने की पत्नी की जलाकर ह्त्या, मृत्यु पूर्व बयान में कबूला *

07-Jul-2020

बालोद (शोर सन्देश) बालोद में एक वकील ने अपनी मृत्यु पूर्व बयान में अपनी पत्नी पर जिंदा जलाने का आरोप लगाया है। बयान देने के बाद घायल वकील की मौत हो गई है। पुलिस के समक्ष दर्ज कराए अपने बयान में वकील ने बताया कि उसका 28 जून को उसका खाना बनाने को लेकर पत्नी से विवाद हुआ था, इस दौरान उसकी पत्नी ने घर पर ऱखा कैरोसीन छिड़ककर उसे आग लगा दी। वकील की मौत के बाद कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है।


भारत-चीन की लद्दाख सीमा पर चल रहा तनाव -प्रधानमंत्री ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

17-Jun-2020

नयी दिल्ली (शोर सन्देश ) भारत-चीन की लद्दाख सीमा पर चल रहा तनाव अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। भारतीय सेना का कहना है कि गलवान घाटी के पास चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए हैं, इनमें एक कमांडिंग अफसर भी शामिल हैं। इस झड़प में चीन को भी काफी नुकसान हुआ है. दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है और कूटनीति के स्तर पर सुलझाने की कोशिश है। वहीं इस मसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब सर्वदलीय बैठक बुलाई है। 


देश में 24 घंटों में सामने आए 10667 कोरोना के नए मामले, छत्तीसगढ़ में अब 875 एक्टिव केस

16-Jun-2020

दिल्ली (शोर सन्देश) देश में जानलेवा कोरोना वायरस के मामले दिन पर दिन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहे हैं। पिछले 24 घंटों के अंदर देश में 10 हजार 667 नए मामले सामने आए हैं। वहीं पिछले एक दिन में 380 लोगों की मौत हुई है. इसी के साथ देश में मरने वालों का आंकड़ा 9 हजार 900 पहुंच गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अबतक तीन लाख 43 हजार 91 मामले सामने चुके हैं. वहीं एक लाख 80 हजार 13 लोग ठीक भी हुए हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में स्वस्थ होने की दर बढ़कर 51.08 प्रतिशत हो गई है यानी आधे से अधिक संक्रमण के मामलों में मरीज स्वस्थ हो गए हैं. बता दें कि कई अन्य राज्यों ने भी अपने यहां नमूनों के परीक्षण ढांचे और कोविड-19 मरीजों के लिए बिस्तरों की संख्या बढ़ाने की घोषणा की है।
छत्तीसगढ़ में सोमवार को 44 नए कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले हैं। वहीं 116 मरीज डिस्चार्ज हुए है। सोमवार को धमतरी के 1 पॉजिटिव मरीज की रायपुर एम्स में इलाज के दौरान मौत हुई है। वह किडनी की बीमारी से पीड़ित होने के कारण डायलिसिस पर था। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी पुष्टि की है। बताया गया कि 44 नए कोरोना पॉजिटिव में कोरबा से 16, बिलासपुर और रायपुर से 7-7, मुंगेली से 4, बलौदाबाजार से 3, बलरामपुर, दुर्ग और कोंडागांव से 2-2, कोरिया से 1 मरीज मिला है। वहीं रायपुर की निजी लैब से एक प्रकरण की पहचान हुई है। प्रदेश में अब 875 एक्टिव केस है। वहीं पॉजिटिव केस का आंकड़ा 1715 पहुंच गया है।  


सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी कहा-पेट्रोल-डीजल के दाम वापस लें

16-Jun-2020

दिल्ली (शोर सन्देश) देश इस वक्त कोरोना वायरस के संकट से गुजर रहा है और लॉकडाउन के कारण कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है। इस संकट के बीच पिछले करीब दस दिन से हर रोज पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी की जा रही है। इस मसले पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। सोनिया गांधी ने लिखा कि संकट के वक्त में भी आपकी सरकार लगातार दाम बढ़ा रही है और इससे सैकड़ों करोड़ रुपये कमा चुकी है. सोनिया की मांग है कि सरकार तुरंत बढ़े हुए दाम वापस ले।

सोनिया गांधी ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि सरकार ने लॉकडाउन के बीच पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ाकर करीब 2.6 लाख करोड़ रुपये कमा लिए हैं। ऐसे वक्त में जब लोग संकट में हैं, तब इस तरह दाम बढ़ाना उनपर और भी संकट पड़ रहा है। ऐसे में सरकार का फर्ज बनता है कि लोगों के संकट को दूर करें। 


दुनियाभर में 80 लाख के करीब पहुंची कोरोना मरीजों की संख्या, छत्तीसगढ़ में 956 सक्रिय मरीज

15-Jun-2020

दिल्ली (शोर सन्देश) जानलेवा कोरोना वायरस ने दुनियाभर के 213 देशों को अपनी चपेट में ले रखा है। कोरोना से संक्रमितों की संख्या अब 80 लाख के करीब पहुंच गई है. वहीं लगभग साढ़े चार लाख लोगों की इस बीमारी मौत हुई है. वर्ल्डोमीटर के मुताबिक, दुनियाभर में अब तक 79 लाख 84 हजार 432 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 4 लाख 357 हजार 177 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 41 लाख 04 हजार 373 लोग संक्रमण मुक्त भी हुए हैं। दुनिया के करीब 60 फीसदी कोरोना के मामले सिर्फ 8 देशों से आए हैं. इन देशों में कोरोना पीड़ितों की संख्या 45 लाख से अधिक है।
कोरोना ने सबसे ज्यादा कहर अमेरिका में बरपाया है। अमेरिका में करीब 22 लाख लोग अबतक कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं। एक लाख से ज्यादा यहां मौतें हो चुकी हैं। लेकिन अब हर दिन ब्राजील में अमेरिका से ज्यादा मौतें दर्ज की जा रही हैं. ब्राजील के बाद रूस और भारत में संक्रमितों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ रही है।

छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 113 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने देर रात अपडेटेड कोरोना बुलेटिन जारी कर बताया कि, कोरबा में 44, बलरामपुर में 28, जांजगीर चांपा में 14, दुर्ग, रायगढ़ और रायपुर में 6-6, बलौदाबाजार में 3, गरियाबंद, बिलासपुर और जशपुर से 2-2 कोरोना संक्रमित मिले हैं। अब प्रदेश में कुल एक्टिव मामले 939 हो गए हैं। सभी मरीजों का इलाज जारी है। 


सुशांत का अंतिम संस्कार मुंबई में होगा

15-Jun-2020

मुंबई (शोर सन्देश) बॉलीवुड के लिए 2020 काफी मुश्किलों भरा रहा है। उभरते हुए सितारे और पर्दे पर महेंद्र सिंह धोनी का किरदार निभाने वाले सुशांत सिंह राजपूत ने रविवार को आत्महत्या कर ली. वह पिछले 6 महीने से डिप्रेशन में थे। रविवार को उन्होंने अपने मुंबई के फ्लैट में आत्महत्या कर ली। आज मुंबई में ही सुशांत का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

मुंबई के कूपर अस्पताल ने सुशांत सिंह राजपूत के पोस्टमार्टम का एडवांस सर्टिफिकेट दे दिया है। जिसके मुताबिक, मौत की वजह लटकने की वजह से दम का घुटना बताया गया है। बता दें कि सुशांत ने फांसी लगाई थी। शुरुआती जांच रिपोर्ट में किसी तरह के जहर देने की बात सामने नहीं आई है। अब विसरा को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। 


कोरोना के होने का शक ऐसा, मौत को ही अफसर ने लगा लिया गले

15-Jun-2020

दिल्ली (शोर सन्देश) दिल्ली के द्वारका में एक 56 वर्षीय आईआरएस अधिकारी ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। आईआरएस अधिकारी की लाश कार में मिली। अधिकारी को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत करार दिया। आईआरएस अधिकारी का नाम शिवराज सिंह है। 56 साल के शिवराज सिंह डी..एम.एस आर.के पुरम में एडिशनल सी.आई.टी के पद पर तैनात थे। द्वारका के समती कुंज अपार्टमेंट में रहते थे. 2006 बैच के थे। सूत्रों के मुताबिक, एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें कोरोना के शक के चलते सुसाइड की बात कही गई है।
2006
बैच के आईआरएस आधिकारी
दिल्ली पुलिस को शनिवार की शाम साढ़े 6 बजे डीडीयू हॉस्पिटल से फोन गया कि एक शख्स की मौत हो गई है. पुलिस की टीम फौरन हॉस्पिटल पहुंची तो उन्हें पता लगा कि मृतक का नाम शिवराज सिंह है और वो 2006 बैच के आईआरएस आधिकारी थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती जांच में उन्हें पता लगा है शिवराज की मौत एसिड पीने की वजह से हुई है, लेकिन पुलिस को फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।  


भारत के दो अफसर पाकिस्तान से लापता

15-Jun-2020

दिल्ली (शोर सन्देश) पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दो भारतीय अधिकारियों के लापता होने की खबर है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग के दो अधिकारी पिछले दो घंटे से लापता हैं। उनकी तलाश की जा रही है. इसके साथ ही यह मामला पाकिस्तान के जिम्मेदार अधिकारियों के सामने उठाया गया है।
बताया जा रहा है कि सीआईएसएफ के दो ड्राइवर ड्यूटी पर बाहर गए थे, लेकिन वह अपने गंतव्य स्थान तक नहीं पहुंचे हैं। आशंका जताई जा रही है कि कहीं उनका अपहरण तो नहीं कर लिया गया। ड्राइवर की तलाश की जा रही है। साथ ही पाकिस्तान सरकार को गुमशुदगी के बारे में बता दिया गया है।  


छत्तीसगढ़ में अब 13 घंटे मिलेगी शराब

14-Jun-2020

रायपुर (शोर सन्देश) छत्तीसगढ़ में अब शराब दो घंटे ज्यादा खुलेंगी प्रदेश की शराब दुकानें। आबकारी विभाग ने इसके लिए नया आदेश जारी कर दिया है। शराब दुकान खुलने का समय बढ़ाया गया है। नए समय के मुताबिक अब सुबह 8 से रात 9 बजे तक शराब दुकानें संचालित होंगी। शराब के शौकीनों को अब 24 घंटे में 13 घंटे मदिरा उपलब्ध कराया जाएगा। आबकारी विभाग ने नया आदेश जारी कर दिया है। 


कोविड-19 से उत्पन्न छ: संकट

14-Jun-2020

रामचंद्र गुहा
आज़ादी के बाद से ही भारत कई मुश्किल दौर से गुज़रा है। भारत ने विभाजन की पीड़ा; 1960 के दशक का अकाल और युद्ध; 1970 के दशक में इंदिरा गांधी का आपातकाल; और 1980 के दशक के अंत एवं 1990 की शुरुआत में सांप्रदायिक दंगों का दर्द झेला है। हमारा देश एक बार फिर अब तक के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुज़र रहा है। कारण यह है कि कोविड-19 महामारी ने कम से कम छह अलग-अलग संकटों को जन्म दिया है।
सबसे पहला और सबसे प्रत्यक्ष संकट चिकित्सा सम्बंधी है। जैसे-जैसे वायरस संक्रमण के मामले बढ़ेंगे, हमारे पहले से कमज़ोर और अति-व्यस्त स्वास्थ्य तंत्र पर और अधिक दबाव पड़ेगा। ऐसे समय में, महामारी से निपटने के प्रबंधन पर अत्यधिक ध्यान देने का मतलब होगा कि अन्य प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएं उपेक्षित रह जाएंगी। टीबी, ह्रदय रोग, उच्च रक्तचाप और कई अन्य रोगों से पीड़ित करोड़ों भारतीयों को पता चल रहा है कि इलाज के लिए डॉक्टर अस्पताल मिलना मुश्किल है, जो पहले उपलब्ध थे। इससे अधिक चिंता तो भारत में हर माह पैदा होने वाले लाखों शिशुओं की है। कई वर्षों की मेहनत से इन नवजात शिशुओं को खसरा, मम्स, पोलियो, डिप्थीरिया जैसी घातक बीमारियों के विरुद्ध टीकाकरण का एक संस्थागत ढांचा तैयार किया गया था। लेकिन हालिया ज़मीनी रिपोर्ट्स से पता चला है कि कोविड-19 की ओर अधिक ध्यान होने से राज्य सरकारें बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रमों में पिछड़ रही हैं।
दूसरा और स्पष्ट संकट आर्थिक संकट है। महामारी ने कपड़ा, एयरलाइन्स, पर्यटन और आतिथ्य उद्यमों जैसे रोज़गार पैदा करने वाले उद्योगों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। इस तालाबंदी का अनौपचारिक क्षेत्र पर और भी अधिक प्रभाव पड़ा होगा। कई हज़ारों लाखों मज़दूरों, पथ-विक्रेताओं और दस्तकारों का रोज़गार छिन गया है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनॉमी का अनुमान है कि मार्च की शुरुआत में जो बेरोज़गारी दर 7 फीसदी थी वह अब 27 फीसदी से अधिक हो गई है। पश्चिमी युरोप के अमीर और बेहतर प्रबंधित देशों में बेरोज़गार लोगों को इस संकट से निपटने के लिए पर्याप्त वित्तीय राहत प्रदान की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, हमारे गरीब और खराब ढंग प्रबंधित गणराज्य में राज्य द्वारा निराश्रित लोगों की थोड़ी ही सहायता की जाती है।
हमारे सामने तीसरा सबसे बड़ा संकट मानवीय संकट है। इस महामारी को परिभाषित करने वाली छवियां वे फोटो और वीडियो होंगे जिनमें प्रवासी मज़दूर अपने पैतृक गांव या कस्बों तक पहुंचने के लिए सैकड़ों मील की दूरी पैदल तय करते दिख रहे हैं। महामारी की गंभीरता को देखते हुए शायद एक अस्थायी राष्ट्रव्यापी तालाबंदी तो अनिवार्य थी लेकिन इसकी योजना ज़्यादा अकलमंदी से बनाई जानी चाहिए थी। हालात की थोड़ी-बहुत समझ रखने वाला कोई भी व्यक्ति यह जानता है कि लाखों भारतीय प्रवासी कामगार हैं जो एक बेहतर ज़िंदगी के लिए अपने परिवारों से दूर रहकर काम कर रहे हैं। पता नहीं यह तथ्य प्रधानमंत्री या उनके सलाहकारों की नज़रों में क्यों नहीं आया। यदि देश के नागरिकों को ट्रेनों और बसों की मौजूदा सुव्यवस्थित प्रणाली के साथ एक हफ्ते ( कि 4 घंटे) का समय दिया जाता तो वे सुरक्षा और सहजता से अपने घर पहुंच जाते।
जैसा कि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है, तालाबंदी की उपयुक्त योजना बनाने में विफलता ने जन स्वास्थ्य संकट को बढ़ाया है। बेरोज़गार श्रमिकों को मार्च के शुरू में ही अपने-अपने घर लौटने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। उस समय वायरस के वाहकों की संख्या बहुत कम थी। लेकिन अब दो महीने के बाद केंद्र सरकार द्वारा ट्रेनों को दोबारा से शुरू करने से हज़ारों वायरस-वाहक अपने गृह-ज़िलों में वायरस ले जाएंगे।
वास्तव में यह मानवीय संकट एक व्यापक सामाजिक संकट का हिस्सा है जिसका देश आज सामना कर रहा है। कोविड-19 से काफी पहले से ही भारतीय समाज वर्ग और जाति के आधार पर बंटा ही था, धर्म को लेकर भी काफी पूर्वाग्रह से ग्रस्त था। महामारी और इसके कुप्रबंधन ने इन विभाजनों को और बढ़ावा दिया है। पहले से ही आर्थिक रूप से वंचित लोगों पर इन कष्टों का बोझ अनुपात से अधिक पड़ा है। इसी दौरान, सत्तारूढ़ दल के सांसदों (और चिंताजनक रूप से वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों) द्वारा कोविड-19 मामलों का धार्मिक चित्रण करने से भारत के पहले से ही कमज़ोर मुस्लिम अल्पसंख्यक और भी असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। एक ओर तो मुसलमानों पर दोषारोपण बेरोकटोक चलता रहा और इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री चुप रहे। खाड़ी देशों की तीखी आलोचना के बाद ही उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि यह वायरस किसी धर्म के बीच फर्क नहीं करता। लेकिन उस समय तक सत्तारूढ़ दल और उसकेपालतू मीडियाद्वारा फैलाया गया ज़हर आम भारतीयों की चेतना में गहराई से घर बना चुका था।
चौथा संकट पहले के तीन संकटों की तरह स्पष्ट तो नहीं है फिर भी यह काफी गंभीर हो सकता है। यह एक उभरता हुआ मनोवैज्ञानिक संकट है। बेरोज़गार और अपने घरों के लिए पैदल निकलने के लिए मजबूर लोगों में शायद ही छोड़े गए शहरों में वापस जाने का हौसला पैदा हो पाए। एक बड़ी चिंता स्कूली बच्चों और कॉलेज के छात्रों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव की है जिनका सामना आने वाले महीनों में उनको स्वयं करना है। आर्थिक असुरक्षा के कारण वयस्कों में भी अवसाद और अन्य मानसिक बीमारियों में वृद्धि हो सकती है। इसके परिणाम स्वयं उनके लिए और उनके परिवार के लिए काफी गंभीर हो सकते हैं।
पांचवां संकट भारत के संघीय ढांचे का कमज़ोर होना है। आपदा प्रबंधन अधिनियम के आधार पर केंद्र को स्वयं में अत्यधिक शक्तियों को केंद्रित करने की अनुमति मिल गई है। कम से कम महामारी के शुरुआती महीनों में, राज्यों को इतनी ज़रूरी स्वायत्तता भी नहीं दी गई कि अपने स्थानीय संदर्भों के अनुकूल सर्वोत्तम तरीकों से चुनौतियों से निपट सकें। केंद्र ऊपर से एक के बाद एक मनमाने और परस्पर विरोधी निर्देश जारी करता रहा। इस बीच, केंद्र द्वारा राज्यों को वित्तीय संसाधनों से वंचित रखा गया; यहां तक कि उनके हिस्से के जीएसटी संग्रहण के उनके हिस्से का भुगतान भी नहीं किया गया।
छठा संकट, जो पांचवे संकट से जुड़ा है, भारतीय लोकतंत्र का कमज़ोर होना है। इस महामारी की आड़ में बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) जैसे निष्ठुर कानूनों के तहत हिरासत में लिया जा रहा है। कई अध्यादेश पारित किए जा रहे हैं और संसद में चर्चा किए बिना ही महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए जा रहे हैं। समाचार पत्रों और टीवी चैनलों के मालिकों पर सरकार की आलोचना करने का दबाव डाला जा रहा है। इसी बीच, राज्य और सत्तारूढ़ दल प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व को चमकाने में लगे हैं। आपातकाल के दौरान, एक अकेले देवकांत बरुआ ने कहा था किइंदिरा भारत है और भारत इंदिरा है’; लेकिन अब तो चाटुकारिता की होड़ लगी है।
भारतीय चिकित्सा तंत्र अत्यंत दबाव में रहा है; भारतीय अर्थव्यवस्था जर्जर स्थिति में है; भारतीय समाज विभाजित और नाज़ुक है; भारत का संघीय ढांचा पहले से कहीं अधिक कमज़ोर है। भारतीय राज्य तेज़ी से सत्तावादी बन रहा है। इन सबका मिला-जुला प्रभाव ही इसे देश के विभाजन के बाद का सबसे बड़ा संकट बना देता है।
एक देश के रूप में हम कैसे अपनी अर्थव्यवस्था, समाज और राजतंत्र के लिए इस कठिन समय में से बगैर किसी बड़े नुकसान के उबर सकते हैं? सबसे पहले तो, सरकार को उन समस्याओं के विभिन्न (और परस्पर सम्बंधित) आयामों को पहचानना होगा जिनका सामना वर्तमान में हमारा राष्ट्र कर रहा है। दूसरा, सरकार को 1947 में जवाहरलाल नेहरु और वल्लभभाई पटेल द्वारा लिए गए फैसलों से कुछ सीख लेना चाहिए। उन्होंने उस समय की चुनौतियों की गंभीरता को पहचानते हुए अपने वैचारिक मतभेदों को अलग रखकर बी. आर. अंबेडकर जैसे भूतपूर्व विरोधियों को भी कैबिनेट में शामिल किया था। इस तरह की एक राष्ट्रीय सरकार बनाना तो अब संभव नहीं है लेकिन प्रधानमंत्री जानकार और समझदार विपक्षी नेताओं से सक्रिय परामर्श तो ले ही सकते हैं। तीसरा, प्रधानमंत्री को बिना सोचे-विचारे लिए गए नाटकीय असर वाले आकस्मिक फैसले लेने की बजाय अर्थशास्त्र, विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञों का सम्मान करना चाहिए और उन पर भरोसा करना सीखना चाहिए। चौथा, केंद्र और सत्तारूढ़ दल को उन राज्यों को परेशान करने की अपनी इच्छा को पूरी तरह छोड़ देना चाहिए जहां उनका शासन नहीं है। पांचवां, केंद्र को सिविल सेवाओं, सशस्त्र बलों, न्यायपालिका और जांच एजेंसियों को सत्ता का हथियार बनाने के बजाय पूर्ण स्वायत्तता प्रदान करनी चाहिए।
यह हमारे अतीत और वर्तमान पर एक व्यक्ति की समझ पर आधारित सुझावों की एक आंशिक सूची है। यह कोई साधारण संकट नहीं है, बल्कि शायद गणतंत्र के इतिहास की सबसे बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए हमारे सारे संसाधनों और संवेदना की आवश्यकता होगी 




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