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शासन और नागरिकों के बीच सेतु बन रही ‘सेवा सेतु’, घर के करीब पहुंच रहीं सरकारी सेवाएं

20-Sep-2026
रायपुर । ( शोर संदेश )  नागरिकों को शासकीय सेवाएं सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन की ‘सेवा सेतु’ पहल शासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम करने का प्रभावी माध्यम बन रही है। विभिन्न विभागों की सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर लाकर अब प्रदेशवासियों को 900 से अधिक शासकीय सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में डिजिटल सुशासन को प्राथमिकता देते हुए सेवाओं की पहुंच शहरों के साथ-साथ गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक बढ़ाई जा रही है।
सेवा सेतु का मूल उद्देश्य केवल सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि नागरिकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना और सेवा को नागरिक के घर अथवा उसके नजदीकी केंद्र तक पहुंचाना है। आवेदन, दस्तावेजों की प्रक्रिया, स्थिति की जानकारी और प्रमाण पत्र प्राप्त करने जैसी सुविधाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़कर सेवा वितरण को अधिक सहज बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
अम्बिकापुर निवासी डॉली गंधर का अनुभव सेवा सेतु की उपयोगिता को जमीन पर सामने लाता है। उनके आधार कार्ड में नाम संबंधी त्रुटि के कारण बैंक खाता खुलवाने में परेशानी आ रही थी। बैंक खाता नहीं होने के कारण छात्रवृत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही थी।
डॉली ने अपनी समस्या के समाधान के लिए सेवा सेतु केंद्र में आवेदन किया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आधार कार्ड में नाम संबंधी त्रुटि का निराकरण किया गया। अब उनके लिए बैंक खाता खुलवाने और छात्रवृत्ति से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाना आसान हो गया है। समस्या के समाधान पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया।
डॉली का अनुभव बताता है कि किसी दस्तावेज में छोटी सी त्रुटि भी नागरिक के लिए बैंकिंग, शिक्षा और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच में बाधा बन सकती है। ऐसे मामलों में सेवा सेतु केंद्र नागरिक को समस्या से समाधान तक पहुंचाने का सरल माध्यम बन रहे हैं।
सेवा सेतु के माध्यम से आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, भू-अभिलेख एवं राजस्व संबंधी सेवाएं, नाम संशोधन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तथा श्रम विभाग से जुड़ी विभिन्न सेवाओं सहित अनेक सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।
नागरिक घर बैठे अथवा नजदीकी सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं और अपने आवेदन की स्थिति भी देख सकते हैं। डिजिटल प्रमाण पत्रों में क्यूआर आधारित सत्यापन, एसएमएस और व्हाट्सऐप अलर्ट जैसी सुविधाएं सेवा प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने में सहायक हैं।
इस व्यवस्था का लाभ यह है कि नागरिक को आवेदन की स्थिति जानने के लिए बार-बार संबंधित कार्यालय जाने की आवश्यकता कम होती है। डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध होने से सेवा वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ावा मिलता है।
सेवा सेतु की महत्वपूर्ण विशेषता इसका ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक विस्तार है। ग्राम पंचायत स्तर पर भी विभिन्न नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इनमें विवाह प्रमाण पत्र, भवन अनुज्ञा, स्ट्रीट लाइट, साफ-सफाई व्यवस्था और नाम परिवर्तन जैसी सेवाएं शामिल हैं।
स्थानीय स्तर पर सेवा वितरण को मजबूत करने के लिए पंचायत सचिवों, सेवा सेतु केंद्र संचालकों और संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए जिला या तहसील मुख्यालय जाने की आवश्यकता कम होगी।
इसका सीधा लाभ नागरिकों के समय, श्रम और आने-जाने के खर्च की बचत के रूप में सामने आएगा। गांव में ही डिजिटल माध्यम से सेवा उपलब्ध होने से शासन की सुविधाएं नागरिकों के और करीब पहुंचेंगी।
ऑनलाइन आवेदन और ट्रैकिंग व्यवस्था नागरिकों को अपने आवेदन की प्रगति जानने का अवसर देती है। डिजिटल माध्यम से सेवा वितरण में मैनुअल प्रक्रिया को कम करने, जवाबदेही बढ़ाने और कागज रहित व्यवस्था को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में नागरिक सेवाओं के डिजिटलीकरण की यात्रा 2003 में ब्भ्व्प्ब्म् के माध्यम से शुरू हुई और वर्ष 2015 में ई-डिस्ट्रिक्ट के विस्तार के साथ आगे बढ़ी। सेवा सेतु इस यात्रा को एकीकृत स्वरूप देते हुए विभिन्न विभागों की सेवाओं को एक मंच पर लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इस क्रम में तकनीक केवल सुविधा का माध्यम नहीं रह जाती, बल्कि शासन की कार्यप्रणाली को नागरिक-केंद्रित बनाने का साधन बनती है। आवेदन की डिजिटल प्रक्रिया, ऑनलाइन स्थिति की जानकारी और डिजिटल प्रमाण पत्र जैसी व्यवस्थाएं नागरिकों को सेवा प्रक्रिया से सीधे जोड़ती हैं।
सेवा सेतु का व्यापक उद्देश्य केवल सेवाओं को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि शासन को नागरिक के और करीब लाना है। जब प्रमाण पत्र, पंजीयन, दस्तावेज संशोधन और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए नागरिक को बार-बार सरकारी कार्यालय नहीं जाना पड़े, तो यह व्यवस्था सुशासन के उस स्वरूप को सामने लाती है जिसमें प्रशासन नागरिक की सुविधा को केंद्र में रखकर काम करता है।
डॉली गंधर जैसे नागरिकों की समस्याओं का समाधान इस व्यवस्था की वास्तविक उपयोगिता को रेखांकित करता है। दस्तावेज संबंधी समस्या दूर होने से उनके लिए बैंक खाता और छात्रवृत्ति की राह आसान हुई। यह एक छोटे से दस्तावेज सुधार का मामला जरूर है, लेकिन इसके पीछे शिक्षा और वित्तीय सुविधा से जुड़ा बड़ा प्रभाव दिखाई देता है।
सेवा सेतु के माध्यम से छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक को नागरिक सुविधा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। एक मंच पर 900 से अधिक सेवाओं की उपलब्धता, ऑनलाइन आवेदन और ट्रैकिंग, डिजिटल प्रमाण पत्र, क्यूआर आधारित सत्यापन तथा गांवों तक सेवाओं के विस्तार से सेवा वितरण की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
सेवा सेतु की मूल भावना यही हैकृसेवा के लिए नागरिक को शासन तक पहुंचने की जरूरत कम हो और शासन स्वयं सेवा लेकर नागरिक के करीब पहुंचे। तकनीक के माध्यम से सेवा प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाते हुए यह पहल छत्तीसगढ़ में नागरिक-केंद्रित सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन रही है।

औद्योगिक नीति 2024-30 से प्रदेश में निवेश और रोजगार को नई गति, अब तक 8.23 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त

20-Sep-2026
रायपुर । ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंबिकापुर में आयोजित दो दिवसीय ‘अग्र महाकुंभ-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने अग्रवाल समाज की उद्यमिता, दानशीलता, परोपकार और समाजसेवा की समृद्ध परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में अग्रवाल समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। व्यापार और व्यवसाय से आगे बढ़कर समाज के उद्यमियों ने उद्योगों की स्थापना, रोजगार सृजन और जनसेवा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है।
मुख्यमंत्री ने महाराजा अग्रसेन जी के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सामाजिक समानता, करुणा, सहयोग और सहभागिता पर आधारित समाज की कल्पना की थी। उनका संदेश था कि समाज की वास्तविक उन्नति तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर मिले और जो सक्षम हैं, वे जरूरतमंद लोगों का हाथ थामकर उन्हें भी प्रगति की राह पर आगे बढ़ाएं। अग्रवाल समाज ने महाराजा अग्रसेन जी के इन आदर्शों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने आचरण में उतारा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अग्रवाल समाज की पहचान केवल सफल व्यापार और उद्यमिता तक सीमित नहीं है। अर्थाेपार्जन के साथ परमार्थ की भावना इस समाज की विशिष्टता रही है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों, धर्मशालाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी संस्थाओं तथा अनेक जनसेवा गतिविधियों के माध्यम से समाज निरंतर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाता आया है।
कोरोना महामारी के कठिन समय का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब पूरा देश अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा था, तब अग्रवाल समाज ने आगे बढ़कर जरूरतमंदों की सहायता की। मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था हो, जरूरतमंद परिवारों तक राशन पहुंचाना हो अथवा स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से लोगों की मदद करना हो, समाज ने सेवाभाव का परिचय देते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में ऐसा सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जहां व्यापार और उद्योगों का विस्तार हो, निवेश बढ़े और युवाओं के लिए रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित हों। उन्होंने कहा कि व्यापार और उद्योग जगत से जुड़े अग्रवाल समाज के अनुभवी लोगों के सुझाव शासन की नीतियों को और अधिक व्यावहारिक एवं जनोपयोगी बनाने में सहायक रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने अग्र महाकुंभ में महिला शक्ति को विशेष स्थान दिए जाने की सराहना करते हुए कहा कि आज हमारी बेटियां और बहनें परिवार की जिम्मेदारियां संभालने के साथ व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग, स्टार्टअप और समाजसेवा सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता का परिचय दे रही हैं। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी परिवार, समाज और प्रदेश की आर्थिक प्रगति को नई शक्ति प्रदान कर रही है।
उन्होंने युवाओं के लिए आयोजित विशेष सत्र को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बदलते समय में नई पीढ़ी के सामने अवसरों का एक विशाल संसार है। युवाओं को अपने संस्कारों और सामाजिक मूल्यों से जुड़े रहते हुए आधुनिक तकनीक, नवाचार और उद्यमिता को अपनाना होगा। मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे स्वयं को केवल नौकरी खोजने तक सीमित न रखें, बल्कि नए विचारों और उद्यमों के माध्यम से स्वयं आगे बढ़ें और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार करें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की औद्योगिक नीति 2024-30 को रोजगार केंद्रित बनाया गया है। इसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन देने के साथ महिलाओं सहित विभिन्न वर्गों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए पर्यटन को भी उद्योग का दर्जा दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को अब तक लगभग 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होने के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। 
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं की उद्यमशीलता को नई दिशा देने के उद्देश्य से हाल ही में ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं निपुण मिशन’ को मंजूरी दी है। इसके लिए आगामी पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मिशन के अंतर्गत प्रदेश के सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र स्थापित किए जाने की योजना है। इसके साथ ही 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। इससे युवाओं को नई तकनीकों, कौशल, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य प्रदेश के छोटे उद्योगों, स्थानीय उत्पादों तथा मूल्य संवर्धित कृषि एवं औद्योगिक उत्पादों को देश और दुनिया के बड़े बाजारों से जोड़ना है। इससे स्थानीय उद्यमियों के लिए नए बाजार खुलेंगे और छत्तीसगढ़ के उत्पादों को व्यापक पहचान मिलेगी।
मुख्यमंत्री साय ने सरगुजा अंचल की आर्थिक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां पर्यटन, कृषि आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय उत्पादों के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद होटल, होम-स्टे और पर्यटन सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में निवेश एवं रोजगार के नए अवसर विकसित हो रहे हैं।
उन्होंने अग्रवाल समाज के अनुभवी उद्यमियों से आह्वान किया कि वे इन संभावनाओं से जुड़ें और अपने अनुभव तथा उद्यमशीलता के माध्यम से प्रदेश के युवाओं और छोटे उद्यमियों को भी आगे बढ़ने में सहयोग करें। बड़े और अनुभवी उद्यमियों का मार्गदर्शन नई पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्यमंत्री ने अग्र महाकुंभ में स्वास्थ्य एवं योग जैसे विषयों को शामिल किए जाने की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि व्यापार और कार्य की व्यस्तता के बीच स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति से ही स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज का निर्माण होता है तथा स्वस्थ समाज ही निरंतर प्रगति की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
मुख्यमंत्री साय ने ‘दशम अग्र अलंकरण’ के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की और सम्मानित होने वाली सभी विभूतियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि समाज की प्रतिभाओं का सम्मान नई पीढ़ी को भी अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन, अग्रवाल सभा अंबिकापुर, सरगुजा संभागीय अग्रवाल महासभा सहित आयोजन से जुड़े सभी पदाधिकारियों और सदस्यों को अग्र महाकुंभ-2026 के आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कामना की कि अग्रवाल समाज की उद्यमिता, सेवा, सहयोग और परोपकार की गौरवशाली परंपरा इसी तरह निरंतर आगे बढ़ती रहे और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में समाज अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अग्र महाकुंभ हमारी सामूहिक चेतना, संगठन शक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और भविष्य की दिशा पर विचार करने का महत्वपूर्ण अवसर है। महाराजा अग्रसेन जी ने जिस सामाजिक व्यवस्था की कल्पना की थी, उसके मूल में समानता, सहयोग, संवेदनशीलता और सहभागिता की भावना थी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अग्र महाकुंभ के अवसर पर कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए ट्रेड फेयर का फीता काटकर शुभारंभ किया। उन्होंने मेले में लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया और उद्यमियों से उनके उत्पादों तथा गतिविधियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने मंच से ‘अग्रकुल दर्शन’ पत्रिका का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम में  सरगुजा सांसद चिंतामणी महाराज, बसना विधायक संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री अमर अग्रवाल, कलेक्टर अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल सहित देशभर से अग्रवाल समाज के राष्ट्रीय एवं प्रांतीय स्तर के अनेक पदाधिकारी, समाजसेवी और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान और सुलभ उपचार के लिए सरकार, चिकित्सा जगत और समाज को मिलकर करने होंगे प्रयास : मुख्यमंत्री साय

19-Sep-2026
रायपुर 19 सितम्बर 2026/ कैंसर के विरुद्ध लड़ाई केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं है। मरीज को आधुनिक और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने के साथ उसका मनोबल बनाए रखना तथा उसे यह विश्वास दिलाना भी उतना ही आवश्यक है कि इस कठिन लड़ाई में वह अकेला नहीं है। चिकित्सकों का संवेदनशील व्यवहार और परिवार एवं समाज का भावनात्मक सहयोग मरीज के भीतर बीमारी से लड़ने का हौसला बढ़ाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मेफेयर में बालको मेडिकल सेंटर द्वारा आयोजित चौथे बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव-2026 के शुभारंभ अवसर पर संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कैंसर आज पूरी दुनिया के सामने गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। कैंसर का नाम सुनते ही मरीज के साथ पूरा परिवार चिंता और अनिश्चितता से घिर जाता है। बीमारी का प्रभाव केवल मरीज के शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी मानसिक, पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों पर भी पड़ता है। इसलिए कैंसर के उपचार में समग्र दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सक जब आत्मीयता और संवेदनशीलता के साथ मरीज से जुड़ते हैं तो वे केवल बीमारी का उपचार नहीं करते, बल्कि मरीज और उसके परिवार के लिए विश्वास और हौसले का आधार भी बनते हैं। चिकित्सा विज्ञान में हो रही प्रगति के साथ मानवीय संवेदना का यह पक्ष कैंसर के विरुद्ध लड़ाई को और मजबूत बनाता है।

समय पर पहचान से बढ़ती हैं प्रभावी उपचार की संभावनाएं

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कैंसर से लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक बीमारी की समय पर पहचान है। शुरुआती अवस्था में कैंसर की पहचान होने पर प्रभावी उपचार की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैंसर सहित गंभीर बीमारियों की समय पर स्क्रीनिंग और रोकथाम को प्राथमिकता दी है।
मुख्यमंत्री साय ने कॉन्क्लेव में उपस्थित विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे ऐसी आधुनिक तकनीकों, अनुसंधानों और प्रभावी उपायों पर विचार करें, जिनसे कैंसर की जल्द पहचान हो सके और उपचार को अधिक सस्ता, सुलभ तथा आम लोगों की पहुंच में लाया जा सके। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कॉन्क्लेव चिकित्सा जगत के अनुभव, शोध और नवाचार को साझा करने का महत्वपूर्ण मंच हैं। यहां होने वाला विचार-विमर्श भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों और उपचार पद्धतियों को नई दिशा देने में सहायक होगा।

प्रदेश में लगातार मजबूत हो रही स्वास्थ्य अधोसंरचना

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। आज शासकीय और निजी मेडिकल कॉलेजों को मिलाकर इनकी संख्या 15 हो गई है। इसके साथ ही पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन चिकित्सा संस्थानों में कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आवश्यक विशेषज्ञता, आधुनिक उपकरण और अधोसंरचना विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के लोगों को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूर न जाना पड़े और उन्हें अपने राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।

आर्थिक कठिनाई उपचार में न बने बाधा

मुख्यमंत्री ने कहा कि गंभीर बीमारी के समय उपचार के खर्च की चिंता परिवार की परेशानी को और बढ़ा देती है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक कठिनाई किसी जरूरतमंद व्यक्ति के उपचार में बाधा न बने। आयुष्मान भारत योजना ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान की है। पात्र परिवारों को योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपए तक उपचार की सुविधा मिल रही है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को 25 लाख रुपए तक की उपचार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य यही है कि बीमारी के कठिन समय में परिवार को आर्थिक चिंता के बजाय मरीज के स्वास्थ्य और उपचार पर ध्यान देने का संबल मिले।

बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत लगभग 34 लाख लोगों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई है। इनमें करीब 40 हजार लोगों में विभिन्न बीमारियों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा गया है।
उन्होंने कहा कि व्यापक स्क्रीनिंग का उद्देश्य बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही पहचान करना और मरीज को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। सरगुजा सहित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी कैंसर सहित गंभीर बीमारियों की पहचान और उपचार के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।

नवा रायपुर में आकार ले रही 5 हजार बिस्तरों की मेडिसिटी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में नवा रायपुर में लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में 5 हजार बिस्तरों की क्षमता वाली मेडिसिटी विकसित की जा रही है। यह परियोजना प्रदेश में विशेषज्ञ और सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
उन्होंने कहा कि मेडिसिटी के विकसित होने से प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ेगी और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी।

स्वस्थ नागरिक विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2047 के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अपना विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प में छत्तीसगढ़ तभी प्रभावी योगदान दे सकेगा, जब प्रदेश का प्रत्येक नागरिक स्वस्थ और सशक्त होगा।
उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति में चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका है। समाज डॉक्टरों को अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखता है, क्योंकि वे कठिन परिस्थितियों में लोगों का जीवन बचाने और उन्हें स्वस्थ जीवन देने का कार्य करते हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि चौथा बीएमसी छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव कैंसर की रोकथाम, समय पर स्क्रीनिंग, शोध और आधुनिक उपचार के क्षेत्र में उपयोगी निष्कर्षों तथा नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त करेगा। यहां देश-दुनिया के विशेषज्ञों द्वारा साझा किए जा रहे अनुभव और नवाचार छत्तीसगढ़ में कैंसर के विरुद्ध सामूहिक प्रयासों को नई दिशा और मजबूती देंगे।

कैंसर मरीजों का तैयार होगा व्यवस्थित डेटाबेस : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चौथा छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। देश-दुनिया के कैंसर विशेषज्ञों का एक मंच पर आकर रोकथाम, स्क्रीनिंग, अनुसंधान और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर अपने अनुभव साझा करना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने में सहायक होगा।
उन्होंने कहा कि बालको मेडिकल सेंटर द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से प्रदेश में 500 से अधिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए हैं। इन शिविरों के माध्यम से लोगों में कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने और समय पर जांच के लिए प्रेरित करने का कार्य किया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री  जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार कैंसर की समय पर पहचान के लिए स्क्रीनिंग का दायरा लगातार बढ़ा रही है। प्रदेश में कैंसर को नोटिफाई करने का निर्णय लिया गया है। इससे कैंसर मरीजों का व्यवस्थित डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा और उनके उपचार तथा स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों का बेहतर ढंग से संधारण संभव होगा।
उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी टीकाकरण को भी मिशन मोड में आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि स्क्रीनिंग और रोकथाम के उपायों के माध्यम से बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो तथा मरीज को समय पर आवश्यक उपचार मिल सके।
‘Restoring Balance to Cancer Care’ थीम पर आयोजित इस कॉन्क्लेव में देश-विदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सक, कैंसर विशेषज्ञ, शोधकर्ता और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञ कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग, उपचार, अनुसंधान और चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नवाचारों पर मंथन कर रहे हैं। कॉन्क्लेव में 200 से अधिक राष्ट्रीय और 11 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। इस वर्ष स्त्री रोग संबंधी कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर पर विशेष रूप से चर्चा की जा रही है।

कैंसर की जांच और उपचार की नवीन तकनीकों से रूबरू हुए मुख्यमंत्री

कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कैंसर जागरूकता, प्रारंभिक पहचान, स्क्रीनिंग तथा जांच एवं उपचार की नवीनतम तकनीकों से संबंधित विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन परियोजना का शुभारंभ भी किया।
मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रतिनिधियों से आधुनिक तकनीकों की कार्यप्रणाली, कैंसर की समय रहते पहचान में उनकी उपयोगिता तथा उपचार के क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों और नवाचारों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने विशेषज्ञों से कैंसर की जांच और उपचार में उभरती नई संभावनाओं पर भी चर्चा की।
मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से यह जानकारी ली कि आधुनिक तकनीक और नवाचारों की सहायता से कैंसर की प्रारंभिक पहचान को किस प्रकार अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और इन सुविधाओं को प्रदेश के आम नागरिकों, विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक किस प्रकार अधिक सुलभता से पहुंचाया जा सकता है।
इस अवसर पर बालको मेडिकल सेंटर की डायरेक्टर डॉ. भावना सिरोही, पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति मेडिकल कॉलेज रायपुर के डीन डॉ. विवेक चौधरी, ई-कैंसर की प्रतिनिधि डॉ. सुज़ाना स्टेनवे, वाइस एडमिरल आरती सरीन सहित देश-विदेश से आए विशेषज्ञ चिकित्सक, शोधकर्ता और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित थे।

 

लोकभवन में धूमधाम से मनाई गई विश्वकर्मा जयंती, राज्यपाल रमेन डेका ने की पूजा-अर्चना

17-Sep-2026
रायपुर,। (शोर संदेश)   लोकभवन में आज विश्वकर्मा जयंती धूमधाम से मनाई गई। राज्यपाल रमेन डेका एवं  प्रथम महिला रानी डेका काकोटी ने भगवान विश्वकर्मा का विधि विधान से पूजा अर्चना कर देश-प्रदेश के खुशहाली के लिए कामना की। उन्होंने सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, विधिक सलाहकार सत्यभामा दुबे एवं लोक भवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

 


सृजन, कौशल और श्रम के सम्मान का संदेश देती है भगवान विश्वकर्मा की आराधना: मुख्यमंत्री साय

17-Sep-2026
रायपुर । (शोर संदेश)  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में सृजन, शिल्प और निर्माण के अधिष्ठाता भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा से प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह सहित मुख्यमंत्री निवास के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री साय ने भगवान विश्वकर्मा को नमन करते हुए प्रदेशवासियों, विशेषकर श्रमवीरों, शिल्पकारों, कारीगरों, अभियंताओं, तकनीशियनों तथा उद्योग और निर्माण क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजनशीलता, कौशल, कर्मनिष्ठा और उत्कृष्टता के प्रतीक हैं। उनकी आराधना हमें अपने ज्ञान, हुनर और परिश्रम से समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देती है। विश्वकर्मा जयंती केवल हमारी आस्था और परंपरा से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि यह श्रम की प्रतिष्ठा, कौशल के सम्मान और सृजन की शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी अवसर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी प्रदेश और राष्ट्र की प्रगति के पीछे उसके श्रमवीरों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों और निर्माणकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान होता है। खेत-खलिहानों से लेकर कारखानों तक, छोटे-छोटे प्रतिष्ठानों से लेकर बड़े उद्योगों तक और पारंपरिक शिल्प से लेकर आधुनिक तकनीक तक, हमारे कुशल हाथ अपने परिश्रम और प्रतिभा से विकास को आकार देते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान सदैव मेहनतकश लोगों और समृद्ध शिल्प परंपरा की रही है। हमारे शिल्पकारों और कारीगरों ने पीढि़यों से अपने हुनर के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजा है। वहीं आज के श्रमिक, अभियंता और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े युवा आधुनिक छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। परंपरागत कौशल और आधुनिक तकनीक का यह समन्वय प्रदेश के विकास को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रम केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि सृजन और राष्ट्र निर्माण की शक्ति है। प्रत्येक श्रमिक के परिश्रम और प्रत्येक कारीगर के हुनर का सम्मान करना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। छत्तीसगढ़ के श्रमिक, कारीगर और निर्माण से जुड़े लाखों हाथ अपने परिश्रम से प्रदेश की प्रगति को निरंतर गति दे रहे हैं। उनका श्रम और कौशल समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत नींव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वकर्मा जयंती हमें यह संदेश भी देती है कि हम अपने प्रत्येक कार्य को पूरी निष्ठा, अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता के साथ करें। बदलते समय के अनुरूप कौशल को निरंतर निखारना और नई तकनीक को अपनाना आज की आवश्यकता है। कौशलयुक्त और परिश्रमी मानव संसाधन के बल पर ही हम आत्मनिर्भर, आधुनिक और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार कर सकते हैं। मुख्यमंत्री साय ने भगवान विश्वकर्मा से प्रार्थना की कि वे प्रदेश के सभी श्रमवीरों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों, अभियंताओं और उद्यमियों को अपने कार्य में निरंतर सफलता प्रदान करें तथा उनके कौशल और परिश्रम से छत्तीसगढ़ प्रगति, समृद्धि और खुशहाली के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।

मुख्यमंत्री निवास में विराजे विघ्नहर्ता गणेश, CM साय ने विधि-विधान से की पूजा-अर्चना

15-Sep-2026
रायपुर: गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने परिवारजनों के साथ पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाज से विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की मंगलकामना की।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्री गणेश बुद्धि, और विवेक के प्रतीक हैं। किसी भी शुभ कार्य का प्रारंभ भगवान गणेश की आराधना से करने की हमारी प्राचीन परंपरा रही है। गणेशोत्सव हमारी आस्था का पर्व होने के साथ ही समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकजुटता को सुदृढ़ करने वाला उत्सव भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में तीज-त्योहारों और उत्सवों का विशेष महत्व है। हमारे पर्व हमें अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ परिवार और समाज को भी एक सूत्र में पिरोते हैं। गणेशोत्सव का उल्लास भी हमें सामूहिकता, सद्भाव और लोकमंगल की भावना से जोड़ता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के परिवारजन, मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. धीरेंद्र तिवारी, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह तथा मुख्यमंत्री निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मंच पर सशक्त हुई भारत की भूमिका : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

14-Sep-2026
रायपुर। (शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत आज विश्व पटल पर एक विश्वसनीय और प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभरा है। वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता और 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का परिचायक है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह प्रत्येक भारतवासी के लिए गौरव का अवसर है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज न केवल अपने राष्ट्रीय हितों को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है, बल्कि विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को भी वैश्विक मंचों पर सशक्त स्वर दे रहा है।
उन्होंने कहा कि “Building Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability” की थीम के साथ भारत की BRICS अध्यक्षता वैश्विक सहयोग, नवाचार और सतत विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर है। भारत का दृष्टिकोण सदैव दुनिया को साथ लेकर चलने और साझा प्रगति के नए मार्ग तैयार करने का रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक मंचों पर सदैव स्पष्ट और दृढ़ रुख रखा है। साथ ही डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय समावेशन और तकनीक के माध्यम से जनसामान्य के जीवन में बदलाव का भारत का मॉडल आज दुनिया के लिए प्रेरणा बन रहा है। BRICS जैसे मंच इन अनुभवों और विकास की संभावनाओं को साझा करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका देश और राज्यों के लिए निवेश, प्रौद्योगिकी, नवाचार और रोजगार के नए अवसर भी लेकर आ रही है। विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि भारत का नेतृत्व वैश्विक सहयोग को मजबूत करने, ग्लोबल साउथ की आवाज को सशक्त बनाने और साझा समृद्धि के नए मार्ग प्रशस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 


जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने का सबसे सशक्त माध्यम है शिक्षा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

14-Sep-2026
रायपुर। (शोर संदेश)  शिक्षा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा आवश्यक है और इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक बच्चों को केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व को गढ़ते हैं, उन्हें संस्कार और सही दिशा देते हैं तथा उनके माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बेमेतरा के बेसिक स्कूल मैदान में आयोजित जिला स्तरीय शिक्षक सम्मान एवं प्रतिभावान विद्यार्थी सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री साय ने समारोह में जिले के 81 सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर बोर्ड एवं महाविद्यालयीन परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिले के 42 मेधावी छात्र-छात्राओं को भी विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की ओर से गोल्ड मेडल एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने सम्मानित शिक्षकों और विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारे देश में गुरु के सम्मान की गौरवशाली परंपरा रही है। शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से पीढि़यों का निर्माण करते हैं। एक शिक्षक द्वारा दी गई शिक्षा का प्रभाव केवल एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार, समाज और आने वाली पीढि़यों तक पहुंचता है। इसीलिए शिक्षक को राष्ट्र निर्माता कहा गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा ज्ञान का वह प्रकाश है, जो अज्ञानता के अंधकार को दूर करता है। शिक्षा व्यक्ति को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाने के साथ उसमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है। शिक्षित और संस्कारित नागरिक ही सशक्त समाज तथा विकसित राष्ट्र का निर्माण करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ज्ञान और शिक्षा की भूमि रहा है। तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्व प्रसिद्ध शिक्षा केंद्रों में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने आते थे। हमारी यह समृद्ध ज्ञान परंपरा आज भी हमें प्रेरणा देती है। बदलते समय और नई तकनीकों के दौर में शिक्षा के स्वरूप में भी तेजी से बदलाव आ रहा है। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ उन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अधोसंरचना और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का कोई भी बच्चा संसाधनों या अवसरों के अभाव में पीछे न रहे। गांव हो या शहर, गरीब हो या संपन्न परिवार - हर बच्चे को अपनी प्रतिभा निखारने, अच्छी शिक्षा प्राप्त करने और अपने सपनों को साकार करने के समान अवसर मिलें।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए आईआईटी, आईआईएम, एम्स और ट्रिपल आईटी जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थाएं स्थापित हैं। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को बेहतर वातावरण और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए नालंदा परिसर जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर लाइब्रेरी, स्टडी मटेरियल और आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। नई दिल्ली में भी छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
उन्होंने कहा कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभावान विद्यार्थी की शिक्षा और उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें, इसके लिए राज्य सरकार छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को सहयोग प्रदान कर रही है। हमारा उद्देश्य केवल शिक्षित युवा तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे आत्मविश्वासी, कुशल और सक्षम युवा तैयार करना है जो विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर बेमेतरा जिले के विकास के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बेमेतरा शहर में गौरव पथ के निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत किए जाने तथा ग्राम पंचायत तिवरिया में नवीन विद्युत सब-स्टेशन के निर्माण की घोषणा की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा के साथ-साथ सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शहरों और गांवों में बेहतर अधोसंरचना का निर्माण विकास की गति को तेज करने के साथ नागरिकों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाएगा।
समारोह में “मोर गांव मोर पानी” महाअभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं भू-जल स्तर में सुधार के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों को भी सम्मानित किया गया। बेमेतरा जिले को क्रिटिकल जोन से सेमी-क्रिटिकल जोन की दिशा में लाने के लिए किए गए प्रयासों के लिए जनपद पंचायत बेमेतरा, बेरला एवं नवागढ़ को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री साय ने जल संरक्षण को भविष्य की पीढि़यों से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। शासन के प्रयासों के साथ जनभागीदारी जुड़ने पर बड़े बदलाव संभव होते हैं। उन्होंने जल संरक्षण के क्षेत्र में जिले में किए गए प्रयासों की सराहना की।
समारोह में प्रबुद्ध नागरिकों एवं समाजसेवी संस्थाओं द्वारा प्रकाशित “शिक्षक स्मृति” पत्रिका का भी विमोचन किया गया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ गरीब, किसान, महिला और युवा सहित समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों के पक्के आवास का सपना पूरा किया जा रहा है। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल मिला है। वहीं तकनीक के उपयोग से शासन की सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और नागरिक-केंद्रित बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, सेवा सेतु और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी पहलों के माध्यम से शासन और नागरिकों के बीच की दूरी कम करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि योजनाओं और सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सरलता और समयबद्धता के साथ पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत के निर्माण में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कुशल युवा शक्ति तथा सशक्त गांवों और शहरों से तैयार होगी।
मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर का उल्लेख करते हुए प्रदेशवासियों से 17 सितंबर की शाम अपने घरों में एक दीप प्रज्ज्वलित कर सेवा, विकास और जनकल्याण के संकल्प को और मजबूत करने का आह्वान किया।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु का स्थान सदैव सर्वाेपरि रहा है। शिक्षक अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं और नई पीढ़ी को सही दिशा प्रदान करते हैं। शिक्षक केवल विद्यार्थी का ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं।
उन्होंने सम्मानित शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षकों का ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन आने वाली पीढि़यों के लिए अमूल्य धरोहर है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री दयाल दास बघेल ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की शक्ति पैदा करती है। शिक्षक विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ उन्हें संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक दीपक की तरह ज्ञान का प्रकाश फैलाकर बच्चों का भविष्य संवारते हैं।
मंत्री बघेल ने सम्मानित सभी शिक्षकों एवं मेधावी विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर विधायक दीपेश साहू, विधायक ईश्वर साहू, रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद रजक, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष स्वामी राजीव लोचन दास, तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष जितेन्द्र साहू, कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं, जिला पंचायत अध्यक्ष कल्पना योगेश तिवारी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
 

विष्णु भैया’ का घर बना बहनों का मायका, मुख्यमंत्री निवास में उल्लास से मना तीजा-पोरा तिहार

13-Sep-2026
रायपुर। (शोर संदेश) नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास तीजा-पोरा तिहार के अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारिवारिक आत्मीयता और मातृशक्ति के उल्लास का साक्षी बना। प्रदेश के विभिन्न अंचलों से बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं, बहनों और बेटियों के स्वागत में मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव और मायके की तरह सजाया गया था। पारंपरिक बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, लोक शिल्प और ग्रामीण परिवेश की सजावट के बीच फुगड़ी, रस्साकशी, कुर्सी दौड़, मेहंदी और झूलों ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में रंग दिया। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच माताओं-बहनों ने पूरे उत्साह के साथ तीजा-पोरा की खुशियां साझा कीं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माताओं-बहनों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में तीजा पर बेटियों और बहनों के मायके आने की सुंदर परंपरा है। आज प्रदेशभर से आप सभी बहनें मेरे घर आई हैं, इसलिए मुख्यमंत्री निवास आज आप सभी का मायका है। अपने भाई के घर आपका आना मेरे लिए सौभाग्य और आनंद की बात है। मुख्यमंत्री के इस आत्मीय संबोधन के साथ पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तीजा-पोरा हमारी माटी, परिवार, रिश्तों, खेती-किसानी, पशुधन और लोकजीवन से जुड़ा जीवंत उत्सव है। हरेली से शुरू होने वाली छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहारों की सुंदर श्रृंखला हमारे सामाजिक और पारिवारिक जीवन को आत्मीयता के सूत्र में बांधती है। हमारी लोक परंपराएं पीढ़ियों को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का काम करती हैं।
शिव-पार्वती की पूजा कर मांगी प्रदेश की सुख-समृद्धि
कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेश की माताओं-बहनों सहित सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा का पर्व माता पार्वती की तपस्या, समर्पण और अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। हमारी माताएं और बहनें आज भी इस महान परंपरा को श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की माताओं-बहनों के सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य के साथ छत्तीसगढ़ के निरंतर विकास और खुशहाली की प्रार्थना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पोरा का पर्व हमारी कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में खेती-किसानी केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। तीजा और पोरा का यह संगम हमारी लोकसंस्कृति की उसी आत्मीयता और व्यापकता को अभिव्यक्त करता है।
सुपोषित छत्तीसगढ़ के लिए ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान
तीजा-पोरा के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशव्यापी ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का शुभारंभ किया और अभियान के लोगो का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुनगा पोषक तत्वों और आवश्यक मिनरल्स से भरपूर है। इसकी पत्तियां और फलियां पोषण की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं। विशेषकर महिलाओं और बच्चों के आहार में इसका उपयोग बेहतर पोषण में सहायक हो सकता है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि अपने घरों और आसपास मुनगा लगाएं और इसके पोषण गुणों को जन-जन तक पहुंचाएं। घर-घर मुनगा लगाने की यह पहल जनभागीदारी के माध्यम से सुपोषित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और मजबूत करेगी।
राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, सुपोषण रथ करेगा जागरूक
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर प्रदेश में राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किया। उन्होंने राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के पोस्टर का विमोचन किया और उपस्थित माताओं-बहनों को सुपोषण की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक प्रदेशभर में पोषण माह आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। सुपोषण रथ भी अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर पोषण संबंधी जानकारी लोगों तक पहुंचाएगा।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ मां और सुपोषित बच्चा स्वस्थ समाज की मजबूत नींव हैं। केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण तथा बेहतर भविष्य के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से पोषण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव को और गति दी जा रही है।
नन्हे बच्चों को खीर खिलाकर कराया अन्नप्राशन
कार्यक्रम में आत्मीयता का एक विशेष दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री  साय ने नन्हे बच्चों को अपने हाथों से खीर खिलाकर उनका अन्नप्राशन कराया। उन्होंने बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद देते हुए उनके स्वस्थ, खुशहाल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
तीजा-पोरा के पारिवारिक उत्सव के बीच अन्नप्राशन संस्कार और पोषण से जुड़ी गतिविधियों ने कार्यक्रम को सुपोषण के संदेश से भी जोड़ा। मुख्यमंत्री ने बच्चों की माताओं से भी आत्मीय संवाद किया और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण की जानकारी ली।
महतारी वंदन से माताओं-बहनों को मिल रहा आर्थिक संबल
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि माताओं-बहनों के बैंक खातों में सीधे अंतरित की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रवास के दौरान माताओं-बहनों से मिलने पर इस योजना से उनके जीवन में आए बदलाव की अनेक प्रेरक कहानियां सामने आती हैं। कोई बहन महतारी वंदन की राशि को बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में जमा कर रही है, तो कोई सिलाई मशीन खरीदकर आजीविका का साधन तैयार कर रही है। अनेक माताएं-बहनें सब्जी-भाजी, किराना दुकान और छोटे व्यवसायों में इस राशि का उपयोग कर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं।
उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों के हाथ में अपनी राशि होने से उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ी है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आजीविका, कौशल, स्वामित्व और उद्यमिता के अवसर भी उपलब्ध हों।
लखपति दीदी से ड्रोन दीदी तक - बदल रही मातृशक्ति की तस्वीर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। छत्तीसगढ़ में 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जबकि निर्धारित लक्ष्य 8 लाख महिलाओं का था। यह उपलब्धि माताओं-बहनों की मेहनत, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि महिलाएं अब पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर अनेक नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे घरों के लिए निर्माण सामग्री की आपूर्ति से जुड़कर महिलाएं ‘डीलर दीदी’ बन रही हैं। निर्माण क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाएं ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में काम कर रही हैं। खेती में आधुनिक तकनीक अपनाते हुए ‘ड्रोन दीदी’ खेतों में उर्वरक और दवाइयों का छिड़काव कर आय के नए अवसर तैयार कर रही हैं। कई ड्रोन दीदियां एक दिन में 20 से 25 एकड़ खेतों में छिड़काव कर लगभग सात हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम दानसरा की माताओं-बहनों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां महिलाओं ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम का मंदिर बनाने का प्रेरणादायी संकल्प लिया है। उन्होंने इसे मातृशक्ति की आस्था, सामूहिकता और दृढ़ संकल्प का सुंदर उदाहरण बताया।
महिलाओं के नाम संपत्ति को प्रोत्साहन, स्वामित्व से बढ़ रहा आत्मविश्वास
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें संपत्ति में स्वामित्व देने की दिशा में भी राज्य सरकार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी जा रही है। इससे महिलाओं के नाम पर संपत्ति के पंजीयन को प्रोत्साहन मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को अवसर, सम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय में भागीदारी देना है। सरकार इसी व्यापक सोच के साथ माताओं-बहनों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है।
हर जरूरतमंद परिवार के सिर पर पक्की छत का संकल्प
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण हो रहा है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं और इनमें से साढ़े 11 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान प्रदेश के लिए 3 लाख 65 हजार नए प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति प्रदान की है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी जरूरतमंद परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार मिलकर हर जरूरतमंद परिवार के पक्के घर के सपने को तेजी से साकार कर रही है।
मुख्यमंत्री निवास में साकार हुआ छत्तीसगढ़ी गांव का परिवेश
तीजा-पोरा तिहार के लिए मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव की थीम पर विशेष रूप से सजाया गया था। बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, पारंपरिक खिलौनों और ग्रामीण परिवेश के बीच प्रदेश की लोकसंस्कृति की जीवंत झलक दिखाई दी। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग बिखेर दिए।
माताओं-बहनों ने फुगड़ी, रस्साकशी और कुर्सी दौड़ में उत्साह से भाग लिया। मेहंदी लगवाने और झूला झूलने के साथ उन्होंने तीजा के मायके वाले उल्लास का आनंद लिया। मुख्यमंत्री निवास का पूरा वातावरण ऐसा था मानो प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की लोक परंपराएं एक ही आंगन में साकार हो उठी हों।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास वास्तव में माताओं-बहनों के मायके में बदल गया है। हमारी कामना है कि प्रदेश की हर माता और बहन के सपनों को नई उड़ान मिले, उनके परिवारों में सुख-समृद्धि बनी रहे और मातृशक्ति की भागीदारी से छत्तीसगढ़ विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।
तीजा हमारी समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति का पर्व : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रदेश की माताओं-बहनों को तीजा-पोरा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तीजा हमारी समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिलाओं के कल्याण, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। यह योजना माताओं-बहनों को आर्थिक संबल देने के साथ उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत कर रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण तथा समग्र विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है।
मंत्री राजवाड़े ने ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान को पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए माताओं-बहनों से अपने घरों और आसपास मूनगा लगाने तथा इसे नियमित आहार में शामिल करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मंत्री गजेंद्र यादव, मंत्री दयाल दास बघेल, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, राज्य सभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, महापौर मीनल चौबे, वीणा सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, विभिन्न संस्थाओं की पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में माताएं-बहनें उपस्थित थीं।

 


खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए संसाधनों और अवसरों की नहीं होगी कमी: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

12-Sep-2026
रायपुर। (शोर संदेश)  छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के गांवों, वनांचलों और दूरस्थ क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। आवश्यकता है कि उनकी समय पर पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं। राज्य सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। प्रदेश में खेल अधोसंरचना का विस्तार करने के साथ खिलाडि़यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के खिलाडि़यों को आगे बढ़ने के लिए संसाधनों और अवसरों की कमी नहीं होने दी जाएगी।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित न्यू सर्किट हाउस में आयोजित छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की एग्जीक्यूटिव बॉडी मीटिंग एवं जनरल काउंसिल मीटिंग को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता और पदक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं। प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को बेहतर मंच उपलब्ध कराना और उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के अनुरूप तैयार करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए खेल अधोसंरचना के विकास के साथ प्रशिक्षण और प्रतिभा चयन की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के विभिन्न खेल संघों को उद्योग समूहों से जोड़ने की पहल में तेजी लाने की बात कही। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अनेक बड़े उद्योग समूह कार्यरत हैं। इन समूहों के सहयोग को खेलों के विकास से जोड़ा जाए तो खिलाडि़यों के प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, प्रतियोगिताओं के आयोजन और खेल अधोसंरचना के विस्तार में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने उद्योग जगत और खेल गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय के सकारात्मक परिणामों को करीब से देखा है। यदि अलग-अलग उद्योग समूह विभिन्न खेलों और खेल संघों के साथ जुड़कर सहयोग करें, तो प्रदेश में खेलों के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे और खिलाडि़यों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने इस दिशा में सुनियोजित ढंग से पहल करने को कहा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ और राज्य शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। खेल संघों से जुड़े विषयों, उनकी आवश्यकताओं और शासन स्तर पर जरूरी प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को विशेष रूप से छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के साथ समन्वय की जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे खेल संघों की आवश्यकताओं और विभिन्न प्रस्तावों पर शासन स्तर पर प्रभावी समन्वय सुनिश्चित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि खेलों के विकास से जुड़े विषयों का समयबद्ध समाधान हो और खिलाडि़यों को योजनाओं तथा सुविधाओं का पूरा लाभ मिले, इसके लिए शासन और खेल संगठनों के बीच निरंतर संवाद आवश्यक है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित करने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है। रायपुर में लगभग 60 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक आर्चरी अकादमी का निर्माण भी किया जा रहा है। इन सुविधाओं के विकसित होने से प्रदेश के खिलाडि़यों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और अभ्यास की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी खेल अधोसंरचना तैयार करने का प्रयास है, जहां प्रतिभाशाली खिलाड़ी आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ प्रशिक्षकों और आवश्यक संसाधनों के साथ अपनी क्षमता को निखार सकें। इससे प्रदेश के खिलाडि़यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री साय ने जशपुर अंचल में तीरंदाजी की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के युवाओं में तीरंदाजी की नैसर्गिक प्रतिभा है। विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा समुदाय में यह खेल जीवन और परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। इन प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर बड़े खेल मंचों तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि जशपुर के पंडरापाठ में लगभग 20 से 25 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी की स्थापना की जा रही है। अकादमी के माध्यम से जशपुर सहित आसपास के वनांचल के प्रतिभाशाली खिलाडि़यों को अपने क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी। इससे ग्रामीण और जनजातीय अंचलों की खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त होगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर और सरगुजा जैसे अंचलों में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं। बस्तर ओलंपिक ने दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का बड़ा मंच उपलब्ध कराया है। राज्य सरकार बस्तर ओलंपिक का आयोजन प्रत्येक वर्ष करेगी। सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी क्षेत्र की प्रतिभाओं को आगे आने के अवसर मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और विकास के नए वातावरण के बीच खेलों को भी नई गति देने का समय है। क्षेत्र के युवाओं में खेलों के प्रति स्वाभाविक रुचि और असाधारण क्षमता है। उन्हें उचित प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं। खेल युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का भी प्रभावी माध्यम हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से प्रदेश की प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी चाहे किसी बड़े शहर से हो या दूरस्थ गांव और वनांचल से, उसे आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों और खिलाडि़यों को अभूतपूर्व प्रोत्साहन मिला है। प्रधानमंत्री खिलाडि़यों से नियमित संवाद करते हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनके प्रदर्शन का उत्साहवर्धन करते हैं। इससे देश में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण बना है और खिलाडि़यों का आत्मविश्वास बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी भावना के साथ प्रदेश के खिलाडि़यों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। राज्य में खेल अलंकरण समारोह की पुनः शुरुआत की गई है। उत्कृष्ट खिलाडि़यों को सम्मानित और प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें आवश्यक आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। खेल प्रतिभाओं को शासकीय सेवा में अवसर देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
बैठक में 40वें नेशनल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ में कराने के विषय पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ अब बड़े राष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी की दिशा में भी गंभीरता से आगे बढ़ने का समय है। 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को दिलाने के लिए शासन स्तर पर आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिलती है, तो इसके आयोजनों को बस्तर से भी जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। बस्तर में शांति, विकास और विश्वास का नया वातावरण बन रहा है। राष्ट्रीय स्तर का बड़ा खेल आयोजन यहां के युवाओं को प्रेरणा देने के साथ देश-दुनिया के सामने बदलते और आगे बढ़ते बस्तर तथा छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर प्रस्तुत करने का अवसर भी बनेगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेलों जैसे बड़े आयोजन से प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विकास को और गति मिलेगी, स्थानीय खिलाडि़यों को देश के श्रेष्ठ खिलाडि़यों को करीब से देखने और उनसे सीखने का अवसर मिलेगा तथा प्रदेश में खेल संस्कृति व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित होगी।
’वनांचल में तीरंदाजी और मलखम्ब की अपार संभावनाएं: वन मंत्री केदार कश्यप’
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। खेल अधोसंरचना के निर्माण और खिलाडि़यों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बजट में आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं। लंबे अंतराल के बाद खेल अलंकरण समारोह आयोजित कर खिलाडि़यों को सम्मानित करने से प्रदेश की खेल प्रतिभाओं का उत्साह बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के वनांचलों में तीरंदाजी जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। यहां प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन देने की है। बस्तर के जनजातीय युवा मलखम्ब में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। सामूहिक खेलों के साथ व्यक्तिगत खेलों में भी खिलाडि़यों की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता है।
सांसद विजय बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेल गतिविधियों का तेजी से विस्तार हुआ है। प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाडि़यों से सीधे संवाद कर उनका उत्साहवर्धन करते हैं। इससे खिलाडि़यों का आत्मविश्वास बढ़ा है और भारतीय खिलाड़ी दुनिया के विभिन्न खेल मंचों पर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इसी भावना के अनुरूप मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय भी छत्तीसगढ़ में खिलाडि़यों और खेल अधोसंरचना के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। खेल अलंकरण की पुनः शुरुआत और उत्कृष्ट खिलाडि़यों को शासकीय सेवा में अवसर प्रदान करने जैसे निर्णयों ने खिलाडि़यों का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने खेल संबंधी विषयों में बेहतर समन्वय के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी दिए जाने की पहल का स्वागत किया।

’अन्य जिलों में भी गठित किए जाएंगे जिला ओलंपिक संघ’
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया ने पिछली एग्जीक्यूटिव बॉडी बैठक का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रदेश में खेलों के क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों, संघ की गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी।
बैठक में 23 जून को ओलंपिक दिवस के आयोजन, विभिन्न खेल गतिविधियों, नेशनल गेम्स, खेल संघों की आवश्यकताओं और आगामी गतिविधियों के लिए जरूरी बजटीय प्रावधानों पर चर्चा हुई। संघ की आय-व्यय की जानकारी भी प्रस्तुत की गई। प्रदेश में वर्तमान जिला ओलंपिक संघों के अतिरिक्त अन्य जिलों में भी जिला ओलंपिक संघ गठित करने के लिए समिति बनाए जाने पर सहमति प्रदान की गई। हैंडबॉल एसोसिएशन सहित विभिन्न खेल संघों से जुड़े विषयों तथा प्रदेश में खेल गतिविधियों के विस्तार पर भी विचार-विमर्श किया गया। बैठक में ओलम्पिक संघ के उपाध्यक्ष विजय बघेल, डॉ. हिमांशु द्विवेदी शरद शुक्ला रमेश कुमार श्रीवास्तव और सुनील कुमार अग्रवाल समेत छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के पदाधिकारी, विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधि एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।


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