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नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता के बाद बस्तर में विकास की नई गति : मुख्यमंत्री साय

22-Aug-2026
रायपुर। (शोर संदेश) लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण विकास की दौड़ में पीछे रहे बस्तर में अब शांति, विश्वास और विकास का नया दौर शुरू हुआ है। सुरक्षा के साथ-साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, रोजगार और आजीविका के क्षेत्र में तेजी से काम किया जा रहा है। बस्तर की प्राकृतिक संपदा, संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं को विकास से जोड़कर क्षेत्र के लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव लाना हमारी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय ने विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पत्र सूचना कार्यालय, चेन्नई के निदेशक पी. अरुण कुमार के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए चेन्नई के पत्रकारों के दल  से चर्चा के दौरान यह बात कही। 
मुख्यमंत्री साय ने पत्रकारों से छत्तीसगढ़ में विकास की बदलती तस्वीर, बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलता के बाद तेज हुई विकास गतिविधियों, राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति, निवेश एवं रोजगार की संभावनाओं तथा शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हो रहे विस्तार पर चर्चा की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद ने बस्तर के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित किया। दुर्गम क्षेत्रों में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। सुरक्षा बलों के साहस और स्थानीय लोगों के बढ़ते विश्वास से बस्तर तेजी से शांति और विकास की ओर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कभी नक्सलवाद के कारण शासन की पहुंच कठिन थी, वहां आज विकास की योजनाएं तेजी से पहुंच रही हैं। सुरक्षा कैंपों के आसपास के गांवों में ‘नियद नेल्लानार’ योजना के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, राशन, बैंकिंग और आजीविका की सुविधाओं में वृद्धि हुई है। सरकार का लक्ष्य केवल नक्सलवाद का अंत करना नहीं, बल्कि बस्तर में विकास और समृद्धि की ऐसी मजबूत नींव तैयार करना है, जिससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बेहतर हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की भी अपार संभावनाएं हैं। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपातों, वन संपदा, जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं की विशिष्ट पहचान है। शांति स्थापित होने के साथ पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के लिए नए अवसर बन रहे हैं। सरकार का प्रयास है कि बस्तर की विशिष्टताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले तथा पर्यटन से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अधिक अवसर सृजित हों।
मुख्यमंत्री साय ने पत्रकारों को राज्य में औद्योगिक विकास की संभावनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन और कृषि संपदा से समृद्ध होने के साथ ऊर्जा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर है। राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में रोजगार सृजन, स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन और नए एवं उभरते क्षेत्रों के उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। सरल प्रक्रियाओं और उद्योग अनुकूल वातावरण के कारण देश-विदेश के निवेशकों का छत्तीसगढ़ के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि राज्य अब परंपरागत उद्योगों तक सीमित नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, फार्मास्युटिकल, टेक्सटाइल और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं तेजी से विकसित हो रही हैं। पर्याप्त विद्युत उपलब्धता, मजबूत अधोसंरचना, देश के मध्य में भौगोलिक स्थिति और बेहतर कनेक्टिविटी छत्तीसगढ़ को निवेश के लिए अनुकूल बनाती है। सरकार का विशेष जोर ऐसे निवेश पर है, जिससे प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर तैयार हों।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि रायपुर और नवा रायपुर देश के महत्वपूर्ण एजुकेशन हब के रूप में विकसित हो रहे हैं।  उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के इन संस्थानों की उपलब्धता से छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतर अवसर अपने ही राज्य में मिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार पर भी लगातार काम कर रही है। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने, मेडिकल शिक्षा का विस्तार करने और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में अनेक कदम उठाए गए हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि विकास का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे व्यक्ति तक पहुंचे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने चेन्नई से आए पत्रकारों को छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कोसा फैब के शॉल भेंट कर सम्मानित किया। पत्रकारों के दल ने मुख्यमंत्री को तमिलनाडु के प्रसिद्ध महाबलीपुरम मंदिर की प्रतिकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
 

उत्कृष्ट शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से संवर रहा छत्तीसगढ़ के बच्चों का भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

20-Aug-2026
रायपुर।(शोर संदेश)  शिक्षा किसी भी समाज और राज्य के विकास का मूल आधार है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देती है और रोजगार उनके सपनों को साकार करने का मजबूत आधार बनता है। छत्तीसगढ़ सरकार उत्कृष्ट शिक्षा, आधुनिक तकनीक और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से प्रदेश के बच्चों और युवाओं का भविष्य संवारने के लिए प्रतिबद्ध है। गांवों से लेकर सुदूर वनांचलों तक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य की तकनीक के लिए तैयार किया जा रहा है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  राजधानी रायपुर के जोरा स्थित एक निजी होटल में आयोजित आईबीसी24 ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  ने टॉपर बेटियों को सम्मानित कर उन्हें स्कॉलरशिप प्रदान की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इन बेटियों की उपलब्धि उनके परिवार और विद्यालय के साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर हमारी बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।
कार्यक्रम में कक्षा बारहवीं की परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बेमेतरा की ओमनी वर्मा को मुख्यमंत्री साय ने एक लाख रुपए का चेक और सम्मान पत्र प्रदान किया। उनके विद्यालय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम कन्या विद्यालय, बेमेतरा को भी एक लाख रुपए की राशि का चेक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों का सम्मान किया तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित पुस्तक ‘मेधा’ का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री साय ने प्रतिभावान विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि होनहार बेटियों के बीच आकर उन्हें अपने बचपन के दिन याद आ रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृहग्राम बगिया की प्राथमिक शाला में हुई। पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने के लिए उन्हें अपने गांव से कुछ दूर दूसरे गांव जाना पड़ा था। उस समय गांव के स्कूल का भवन मिट्टी का था और उसकी मरम्मत में गांव के लोग मिलकर सहयोग करते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने राज्य निर्माण के 25 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज प्रदेश में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक संस्थानों का व्यापक नेटवर्क विकसित हुआ है। प्रत्येक विकासखंड में महाविद्यालय उपलब्ध हैं। आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान आज छत्तीसगढ़ में संचालित हैं। इससे प्रदेश के बच्चों को अपने राज्य में ही उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना के साथ शिक्षा का नया अध्याय भी शुरू हो रहा है। जगरगुंडा और ओरछा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी की शुरुआत की जा रही है। जिन इलाकों में कभी परिस्थितियों के कारण शिक्षा तक पहुंच चुनौतीपूर्ण थी, वहां अब बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक अधोसंरचना और अवसर विकसित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास केवल शैक्षणिक संस्थान स्थापित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सुविधाएं और वातावरण उपलब्ध कराना भी है। प्रदेश में 34 स्थानों पर नालंदा परिसर विकसित किए जा रहे हैं, जहां युवाओं को शांत और सुविधायुक्त वातावरण में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा।
उन्होंने बताया कि देश की राजधानी नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के जनजातीय युवाओं के लिए 200 बिस्तरों वाला ट्राइबल यूथ हॉस्टल संचालित किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस वर्ष यहां रहकर तैयारी करने वाले 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। यह उपलब्धि बताती है कि सही अवसर और सुविधाएं मिलने पर छत्तीसगढ़ के युवा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा सिद्ध कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राज्य के विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित नई तकनीकों से परिचित हों और भविष्य की संभावनाओं का लाभ उठा सकें, इसके लिए छत्तीसगढ़ एआई मिशन शुरू किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसके लिए 500 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें भविष्य के रोजगार और नवाचार के अवसरों के लिए तैयार करना है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास में बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। इसके परिणामस्वरूप बस्तर में शांति और विश्वास का वातावरण मजबूत हुआ है तथा विकास की गति तेज हुई है।
उन्होंने कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर के 92 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया। यह बदलते बस्तर की नई तस्वीर है। नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, राशन और अन्य बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। बस्तर मुन्ने और नियद नेल्लानार जैसी पहलों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। एक लाख से अधिक लोगों के राशन कार्ड भी बनाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफा सहित अनेक प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। बस्तर के धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों की सूची में शामिल किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने कहा कि धुड़मारास में विदेशी पर्यटक होमस्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन, संस्कृति, खान-पान और परंपराओं को करीब से जान रहे हैं। राज्य सरकार बस्तर सहित प्रदेश के पर्यटन क्षेत्रों में होमस्टे को प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए ऋण एवं सब्सिडी की सुविधा दी जा रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत माध्यम बनाने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में भी पर्यटन को शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा के साथ युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर तैयार करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति 2024-30 को देश-विदेश में सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। नई नीति के अंतर्गत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश के एमओयू हुए हैं और इन निवेश प्रस्तावों का प्रभाव धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी औद्योगिक इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन दे रही है, जो स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराएंगी। एक हजार स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्यमियों के लिए बीस्पोक नीति के अंतर्गत विशेष इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है। बारिश के मौसम के बाद प्रदेश में रोजगार मेलों का आयोजन भी किया जाएगा, जिनके माध्यम से युवाओं को विभिन्न उद्योगों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप से सम्मानित सभी छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि वे बड़े सपने देखें, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें और निरंतर मेहनत करें। राज्य सरकार उनके सपनों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, तकनीक और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, सांसद रूपकुमारी चौधरी, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन जी महाराज, गोयल ग्रुप एंड कंपनीज के चेयरमैन  सुरेश गोयल, राजीव गोयल,दिनेश गोयल, रविकांत मित्तल सहित जनप्रतिनिधिगण, शिक्षाविद्, विद्यार्थी, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

19-Aug-2026
रायपुर।(शोर संदेश)  नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति, कृषि और समृद्धि की जीवनधारा हैं। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा बनाने में प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिन नदियों ने हमारी सभ्यता को पोषित किया और हमें समृद्धि दी, उनका संरक्षण हम सभी का साझा दायित्व है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के ओमाया गार्डन में आयोजित ‘स्रोत महोत्सव 2026’ एवं राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री साय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम स्थलों एवं जलग्रहण क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण, जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा देने तथा नदी संरक्षण को व्यापक जन अभियान का स्वरूप देना है। कार्यशाला में जल संरक्षण, नदी पुनरुद्धार और जल प्रबंधन से जुड़े विषय विशेषज्ञों के साथ राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य तथा विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों द्वारा मंथन किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नदी बचेगी तो जल बचेगा और जल बचेगा तो जीवन बचेगा। इसी भावना के साथ राज्य सरकार नदियों के उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आधुनिक तकनीक, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के समन्वय से व्यापक कार्ययोजना पर आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान नदियों से गहराई से जुड़ी हुई है। महानदी सहित प्रदेश की अनेक नदियों ने कृषि, आजीविका और सामाजिक जीवन को समृद्ध किया है। नदियों का अस्तित्व उनके उद्गम स्थलों और कैचमेंट एरिया के स्वास्थ्य पर निर्भर है। इसलिए नदी संरक्षण का कार्य केवल उसके प्रवाह क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता। हमें नदी के स्रोत से लेकर उसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को समझकर संरक्षण की समग्र योजना बनानी होगी।
उन्होंने कहा कि नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। स्रोत महोत्सव में विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों के आधार पर ऐसी ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसे धरातल पर समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में नदी संरक्षण के लिए मानचित्रण, संरक्षण, पुनर्भरण, जनभागीदारी और कार्ययोजना के पांच प्रमुख स्तंभों पर काम किया जाएगा। प्रत्येक नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र का वैज्ञानिक तरीके से मानचित्रण किया जाएगा। नदी का उद्गम कहां है, उसके प्रवाह क्षेत्र की प्रकृति कैसी है, भू-उपयोग में किस प्रकार के बदलाव हुए हैं और किन कारणों से नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रभाव पड़ रहा है - इन सभी पहलुओं का अध्ययन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक मानचित्रण और अध्ययन के आधार पर नदी के पूरे इकोसिस्टम के संरक्षण की योजना तैयार की जाएगी। इसमें वन एवं वनस्पति संरक्षण, मृदा क्षरण की रोकथाम, पारंपरिक जल संरचनाओं का संरक्षण एवं पुनर्जीवन, आवश्यकतानुसार नई जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और भू-जल पुनर्भरण जैसे कार्य शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षाजल हमारे नदी तंत्र और भू-जल का मूल आधार है। इसलिए बारिश के पानी को तेजी से बहकर निकल जाने देने के बजाय उसे अधिक से अधिक मात्रा में धरती के भीतर पहुंचाने के उपाय करने होंगे। इससे भू-जल स्तर में सुधार होगा, जल स्रोतों को पुनर्जीवन मिलेगा और नदियों में लंबे समय तक जल प्रवाह बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जल संरक्षण का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। नदियों के किनारे बसे गांवों और वहां रहने वाले लोगों का नदी से सीधा संबंध है, इसलिए उन्हें नदी संरक्षण की प्रक्रिया का प्रमुख भागीदार बनाना होगा।
उन्होंने जिला स्तरीय समितियों के सदस्यों से कहा कि नदियों के किनारे बसे गांवों में स्थानीय समितियां गठित कर पंचायतों के सहयोग से नदी संरक्षण एवं पुनरुद्धार के कार्य आगे बढ़ाए जाएं। स्थानीय समुदाय को नदी की स्थिति, उसके महत्व और संरक्षण के उपायों की जानकारी दी जाए। जब समाज स्वयं अपनी नदी और जल स्रोतों के संरक्षण की जिम्मेदारी लेता है, तब ऐसे प्रयास अधिक प्रभावी और स्थायी होते हैं।
मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों से भी आग्रह किया कि जल संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान को सरल एवं सहज भाषा में लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ धरातल पर दिखाई दे और आम नागरिक उसे समझकर अपने जीवन में अपना सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ है। नदियों ने पीढि़यों से मानव जीवन को जल, भोजन और आजीविका प्रदान की है। इसलिए एक सभ्य समाज के रूप में हमारा दायित्व है कि हम अपनी आने वाली पीढि़यों के लिए नदियों और जल स्रोतों को सुरक्षित रखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्रोत महोत्सव 2026 से निकलने वाले निष्कर्ष छत्तीसगढ़ में नदी संरक्षण और जल सुरक्षा की दिशा में एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।
कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की संस्थागत और तकनीकी क्षमता को मजबूत बनाने के उद्देश्य से दो महत्वपूर्ण एमओयू किए गए। नेशनल वाटर एकेडमी, पुणे के साथ हुए एमओयू के माध्यम से जल संरक्षण एवं जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों और मैदानी अमले के प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इससे आधुनिक जल प्रबंधन, नवीन तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
इसी प्रकार एंट्रिक्स कॉरपोरेशन, बेंगलुरु के साथ हुए एमओयू के माध्यम से इसरो की विशेषज्ञता और आधुनिक भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग जल संसाधनों के वैज्ञानिक विश्लेषण एवं निगरानी में किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में कुनकुरी तहसील के लगभग 1540 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उन्नत भू-स्थानिक तकनीक के माध्यम से जल संसाधनों की स्थिति का अध्ययन, निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक तकनीक से प्राप्त वैज्ञानिक आंकड़ों को स्थानीय अनुभव और पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़कर जल संरक्षण की अधिक प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकती हैं। इससे क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुरूप समाधान तैयार करने और उनके परिणामों की निगरानी करने में भी मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में जल संरक्षण पर आधारित ‘नीर-नारी-निधि’ पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक नीर की रक्षा, नारी की भागीदारी और जल संपदा के संरक्षण की अवधारणा को रेखांकित करती है। पुस्तक में जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न अनुभवों, प्रयासों और नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया गया है।
सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नदियों के उद्गम और उन्हें पोषित करने वाले जल स्रोतों की पहचान एवं संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। बारिश का पानी ही नदियों और भू-जल का प्रमुख आधार है। वर्षाजल के तेज बहाव को नियंत्रित कर उसे अधिक से अधिक मात्रा में जमीन के भीतर पहुंचाना होगा, जिससे भू-जल स्तर बढ़े और भविष्य के लिए जल सुरक्षित किया जा सके।
डॉ. तारे ने कहा कि जल संरक्षण के लिए प्राचीन ज्ञान, स्थानीय एवं पारंपरिक अनुभव और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के बीच समन्वय जरूरी है। इन तीनों को एक साथ जोड़कर तैयार की गई कार्ययोजना ही जल स्रोतों के दीर्घकालिक संरक्षण और जल के सतत उपयोग का आधार बन सकती है।
जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने कहा कि स्रोत महोत्सव 2026 का उद्देश्य प्रदेश की नदियों के उद्गम और कैचमेंट एरिया के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक, व्यवहारिक और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करना है। नदी संरक्षण में केवल डाउनस्ट्रीम फ्लो का अध्ययन पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सोर्स एरिया, भूमि उपयोग, मिट्टी की नमी, भू-जल रिचार्ज, वनस्पति और मृदा क्षरण सहित नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को एक साथ समझना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला में नौ नदी समूहों पर अलग-अलग चर्चा की जा रही है। इन समूहों में क्षेत्र विशेष की परिस्थितियों के अनुरूप साइट स्पेसिफिक और साइंस बेस्ड समाधान तैयार किए जाएंगे। इसमें समस्या की स्पष्ट पहचान के साथ समाधान, क्रियान्वयन की जिम्मेदारी और परिणामों के आकलन की समय-सीमा भी निर्धारित करने पर जोर रहेगा।
टोप्पो ने कहा कि जल संरक्षण केवल अधोसंरचना निर्माण का विषय नहीं है। स्थानीय समुदाय की भागीदारी ही संरक्षण कार्यों की दीर्घकालिक सफलता और स्थायित्व की कुंजी है। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर छत्तीसगढ़ के लिए समयबद्ध रिवर सोर्स रेस्टोरेशन रोडमैप तैयार करने की दिशा में आगे कार्य किया जाएगा।
कार्यशाला में सीगंगा के संस्थापक एवं आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. विनोद तारे, नमामि गंगे मिशन से जुड़े विषय विशेषज्ञ, एनआईटी रायपुर के प्राध्यापक, राज्य एवं जिला स्तरीय समितियों के सदस्य, विभिन्न जिलों के कलेक्टर एवं अधिकारी तथा जल एवं नदी संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत विशेषज्ञ उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का किया शुभारंभ, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को नई मजबूती

17-Aug-2026
रायपुर।  (शोर संदेश) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल परिसर में अत्याधुनिक रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने नई कैंसर इकाई में उपलब्ध उपचार सुविधाओं एवं अत्याधुनिक मशीनरी का अवलोकन किया तथा अस्पताल प्रबंधन एवं चिकित्सकों को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान साय ने डॉ. संदीप दवे के भाई प्रदीप दवे को पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल पिछले 36 वर्षों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. संदीप दवे के भाई स्वर्गीय प्रदीप दवे का कैंसर से निधन हुआ था। इस व्यक्तिगत पीड़ा ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ व्यापक स्तर पर काम करने का संकल्प मजबूत किया। आज उसी संकल्प का परिणाम रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आने वाले समय में हजारों-लाखों लोगों को बेहतर कैंसर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ा है। कैंसर मरीजों को अब एक ही परिसर में जांच, उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने डॉ. संदीप दवे और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की ऐसी पहल से प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार को गति मिली और वर्तमान सरकार भी पिछले ढाई वर्षों से प्रदेश के कोने-कोने तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेशवासियों को उपचार के लिए प्रदेश से बाहर न जाना पड़े और उन्हें आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं अपने ही प्रदेश में उपलब्ध हों।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ को छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान के पीछे सेवा और संवेदना की भावना जुड़ी हुई है। डॉ. दवे के भाई की कैंसर से मृत्यु ने उन्हें गहरा आघात दिया और संभवतः इसी पीड़ा ने कैंसर के उपचार के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की प्रेरणा दी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कैंसर केवल मरीज की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक पीड़ा होती है। उन्होंने कैंसर की समय पर पहचान के लिए नियमित स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान होने पर उपचार की संभावनाएं काफी बेहतर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में पहले से उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के साथ अब कैंसर उपचार की सुविधा जुड़ने से मरीजों को एक ही छत के नीचे व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण नई कड़ी जुड़ी है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य हिस्सों के मरीजों को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 10 हुई और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के बाद प्रदेश में अब 15 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का भी विस्तार हुआ है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में दो नए सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों पर काम हो रहा है। बस्तर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की सुविधा शुरू होने से गंभीर मरीजों को उपचार के लिए एयरलिफ्ट कर रायपुर लाने की आवश्यकता में कमी आई है और जगदलपुर में हृदय जैसी जटिल सर्जरी भी संभव हो रही है। बिलासपुर में भी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का शुभारंभ हो चुका है।
इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक मोतीलाल साहू, चिकित्सक, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।
 

 


देश की आजादी में छत्तीसगढ़ के वीर नायकों का योगदान नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा दायित्व : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

16-Aug-2026
रायपुर(शोर संदेश)। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान, अमर सेनानियों के शौर्य एवं बलिदान, ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा और राज्य में सुशासन एवं विकास की उपलब्धियों को समेटे यह प्रदर्शनी अतीत के गौरव से वर्तमान की उपलब्धियों और भविष्य की आकांक्षाओं तक छत्तीसगढ़ की यात्रा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रदर्शनी के विभिन्न खंडों का अवलोकन किया और वहां प्रदर्शित दुर्लभ छायाचित्रों, दस्तावेजों एवं सूचनात्मक सामग्री में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए छत्तीसगढ़ की धरती के अनेक वीर सपूतों ने संघर्ष और बलिदान किया। उनके योगदान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरक गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा दायित्व है। ऐसी प्रदर्शनियां युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के साथ उनमें राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यबोध और देश के प्रति समर्पण की भावना को और मजबूत करती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल इतिहास का स्मरण नहीं कराती, बल्कि विरासत से प्रेरणा लेकर विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को भी सुदृढ़ करती है। एक ओर इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की अमर गाथाएं हैं, तो दूसरी ओर जनकल्याणकारी योजनाओं, सुशासन, आधुनिक अधोसंरचना और नई तकनीक के माध्यम से बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर भी दिखाई गई है।
प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर केंद्रित खंड है। इसमें ‘वंदे मातरम्’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन में इसके राष्ट्रजागरण के मंत्र के रूप में स्थापित होने तक की यात्रा को ऐतिहासिक संदर्भों और छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने देशवासियों को एक सूत्र में बांधने और मातृभूमि के लिए त्याग एवं बलिदान की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके स्वर ने स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों में नई ऊर्जा का संचार किया। 150 वर्ष की इस ऐतिहासिक यात्रा को प्रदर्शनी में विशेष स्थान देकर नई पीढ़ी को ‘वंदे मातरम्’ के राष्ट्रभाव और उसके ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराया गया है।
प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ की भूमिका को विस्तार से प्रदर्शित किया गया है। प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों, जननायकों और अमर बलिदानियों के योगदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रसंग यहां दर्शकों को स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर से रूबरू कराते हैं, जब छत्तीसगढ़ की धरती पर भी ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष और जनजागरण की आवाज बुलंद हुई थी।
महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा यहां के सामाजिक एवं राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया है। इन ऐतिहासिक दस्तावेजों के माध्यम से नई पीढ़ी यह जान सकेगी कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ का योगदान कितना व्यापक और गौरवपूर्ण रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर की दो महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों - टाउन हॉल और शहीद स्मारक - के संरक्षण, साज-सज्जा एवं नवीनीकरण के लिए 50-50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद स्मारक राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों की स्मृतियों को संजोए हुए है, जबकि ऐतिहासिक टाउन हॉल रायपुर की समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन धरोहरों का संरक्षण हमारी गौरवशाली विरासत के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘विरासत से विकास तक’ की सोच के साथ आगे बढ़ रही है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक विकास की गति के साथ प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की गरिमा भी अक्षुण्ण रहे। इन स्थलों को बेहतर स्वरूप मिलने से नई पीढ़ी अपने इतिहास, संस्कृति और बलिदान की परंपरा को और निकटता से जान सकेगी।
प्रदर्शनी का एक महत्वपूर्ण खंड राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उनसे आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों पर केंद्रित है। इसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने वाली योजनाओं एवं पहलों को छायाचित्रों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।
महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, कृषक उन्नति योजना से किसानों को मिल रहे संबल तथा प्रधानमंत्री आवास योजना से जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर के सपने के साकार होने की तस्वीर यहां दिखाई गई है। युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल, रोजगार एवं नए अवसरों के विस्तार और श्रमिकों सहित विभिन्न वर्गों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है।
प्रदर्शनी यह संदेश देती है कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाकर उसके जीवन में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाना है।
प्रदर्शनी में राज्य की विकास यात्रा को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। डिजिटल पंजीयन के माध्यम से प्रशासन में पारदर्शिता, सुशासन तिहार के माध्यम से जनसमस्याओं के समाधान, हरित छत्तीसगढ़ की दिशा में किए जा रहे प्रयास तथा शिक्षा और अधोसंरचना के विस्तार की झलक यहां देखने को मिलती है।
बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश और रोजगार के नए अवसरों सहित विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को भी प्रदर्शित किया गया है। इस प्रकार प्रदर्शनी छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत और तेजी से आकार लेते भविष्य को एक साथ प्रस्तुत करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से हमें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की प्रेरणा मिलती है और यही प्रेरणा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में हमारी ऊर्जा बनती है।
प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक और छत्तीसगढ़ की विरासत का अभिनव संगम भी आकर्षण का केंद्र है। विशेष एआई आधारित पहल के माध्यम से आगंतुक प्रदेश के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ अपनी डिजिटल तस्वीर तैयार करा सकते हैं। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में इसे लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
इस पहल के माध्यम से तकनीक का उपयोग कर नई पीढ़ी को प्रदेश की पर्यटन, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से रोचक तरीके से जोड़ने का प्रयास किया गया है। आगंतुक इन डिजिटल तस्वीरों को प्रदर्शनी की स्मृति के रूप में भी प्राप्त कर सकते हैं।
प्रदर्शनी स्थल पर रखी गई विजिटर डायरी में आगंतुक स्वतंत्रता दिवस, राष्ट्रप्रेम और छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा से जुड़े अपने विचार एवं अनुभव दर्ज कर सकते हैं। राज्य की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास यात्रा पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भी प्रदर्शन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने विजिटर बुक में अपने विचार दर्ज करते हुए प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और शासन की योजनाओं एवं उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का यह उपयोगी प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों से प्रदर्शनी देखने की अपील करते हुए कहा कि अपने इतिहास और विरासत को जानना हमें वर्तमान के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराता है और बेहतर भविष्य के निर्माण की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, विधायक पुरंदर मिश्रा, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, कलेक्टर गौरव सिंह, अपर संचालक उमेश मिश्रा, संजीव तिवारी, आलोक देव सहित जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में यह सात दिवसीय प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10.30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी।

स्वतंत्रता दिवस-2026 : राज्यपाल डेका ने लोेकभवन में किया ध्वजारोहण

15-Aug-2026
 रायपुर (शोर संदेश)। राज्यपालरमेन डेका ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आज सुबह लोकभवन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया एवं परेड की सलामी ली। उन्होंने परेड का निरीक्षण किया। इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी भी उपस्थित थी।
    राज्यपाल ने लोकभवन सचिवालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने लोकभवन के कर्मचारियों के परिजनों एवं बच्चों से आत्मीयता से मुलाकात की और बच्चों को टॉफी-मिठाई वितरित की।
   इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर प्रसन्ना, विधिक सलाहकार सत्यभामा अजय दुबे, उप सचिव निधि साहू सहित लोकभवन के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
राज्यपाल ने मोबाइल एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया
    राज्यपाल रमेन डेका ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोकभवन से 6 मोबाइल एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये एम्बुलेस भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी  को  महारत्न कंपनी आरईसी के सीएसआर के अंतर्गत दी गई है। ये एम्बुलेंस उत्तर छत्तीसगढ़ के जशपुर, सूरजपुर, बलरामपुर जिले में निःशुल्क सेवा देंगी।
 

नक्सलवाद से मुक्त छत्तीसगढ़ अब शांति, विकास और समृद्धि की नई यात्रा पर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

15-Aug-2026
रायपुर 15 अगस्त 2026 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य समारोह में ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों और अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस माँ भारती की वंदना, हमारे गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेने और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को और मजबूत करने का पावन अवसर है।
मुख्यमंत्री साय ने महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव अंबेडकर और वीर सावरकर सहित स्वतंत्रता संग्राम के असंख्य सेनानियों के त्याग और बलिदान का स्मरण किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की धरती पर स्वतंत्रता और स्वाभिमान की अलख जगाने वाले धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुंडाधुर, गेंद सिंह, धुरवा राव, यादव राव, वेंकट राव, डेबरी धुर और आयतु माहरा सहित जननायकों को भी श्रद्धापूर्वक नमन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी का संदेश - ‘पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं’, संत कबीर की वाणी और बाबा गुरु घासीदास जी का ‘मनखे-मनखे एक समान’ का उद्घोष हमें स्वतंत्रता, समानता और मानवीय गरिमा के मूल्यों की निरंतर प्रेरणा देता है। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का उल्लेख करते हुए उनके राष्ट्रीय एकता के संकल्प का स्मरण किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साहसिक नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से नक्सलवाद के विरुद्ध ऐतिहासिक सफलता मिली है। माओवाद से मुक्त बस्तर में आज तिरंगा यात्राओं के माध्यम से स्वतंत्रता का उत्सव मनाया जा रहा है। जो क्षेत्र कभी हिंसा और भय से प्रभावित थे, वहां आज शांति, विश्वास और विकास की नई सुबह हुई है। उन्होंने कहा कि बस्तर की सर्वांगीण प्रगति डबल इंजन सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में है। जगदलपुर में राष्ट्रीय स्तर की मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक का आयोजन बदलते बस्तर की नई पहचान का प्रतीक है। अब बस्तर के नवनिर्माण का स्वर्णिम समय है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुन्ने अभियान’ के माध्यम से 31 योजनाओं और 14 सामुदायिक सुविधाओं का शत-प्रतिशत सेचुरेशन सुनिश्चित करते हुए बस्तर संभाग के 39 लाख से अधिक लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। नक्सल हिंसा के कारण बंद पड़े स्कूलों को पुनः प्रारंभ करने के साथ 36 नए स्कूल स्वीकृत किए गए हैं। ओरछा और जगरगुंडा जैसे सुदूर क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है।
‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ में 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच कर हेल्थ प्रोफाइल तैयार की गई है। लगभग 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के लिए 4,824 करोड़ रुपए की ‘आजीविका उन्नयन योजना’ तैयार की गई है। सुरक्षा कैंप अब सेवा और विकास के केंद्र बन रहे हैं तथा वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार से शुरू ‘सेवा डेरा’ के माध्यम से नागरिक सुविधाओं, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में सड़क, बिजली, परिवहन और संचार की मजबूत बुनियाद तैयार की जा रही है। सौर ऊर्जा से ऊर्जीकृत 461 गांवों को ग्रिड आधारित बिजली प्रणाली से जोड़ने तथा 234 अंदरूनी बसाहटों को मुख्य सड़कों से जोड़ने की दिशा में काम हो रहा है। ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा’ से बस्तर और सरगुजा संभाग के 814 गांवों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिल रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अन्नदाता हमारे भाग्य विधाता हैं और उनका सुख, सम्मान तथा समृद्धि सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदा जा रहा है। ‘कृषक उन्नति योजना’ की राशि का एकमुश्त भुगतान होली से पहले किया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दे रही है। धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसल लेने पर ‘कृषक उन्नति योजना’ के अंतर्गत 15 हजार रुपए की आदान सहायता देने का निर्णय लिया गया है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद किसानों के लिए खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘सहकार से समृद्धि’ की संकल्पना के अनुरूप प्रदेश के 2,028 पैक्स का कंप्यूटरीकरण पूरा किया गया है और इनमें से 1,988 पैक्स कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में भी सेवाएं दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की नदियों को जोड़ने की सोच को आगे बढ़ाते हुए ‘सिकासार-कोडार नहर लिंकिंग परियोजना’ के लिए 3,047 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक की मंजूरी दी गई है।
अटल सिंचाई योजना के माध्यम से बंद पड़ी सिंचाई परियोजनाओं का पुनरुद्धार किया जा रहा है। इंद्रावती नदी पर लगभग 2 हजार करोड़ रुपए की लागत से मटनार और देउरगांव बैराज बनाए जाएंगे, जिनसे 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें साढ़े पांच हजार रुपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक दिया जा रहा है तथा ‘चरण पादुका योजना’ पुनः प्रारंभ की गई है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘मोदी की गारंटी’ के अनुरूप प्रत्येक जरूरतमंद परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। कैबिनेट की पहली बैठक में 18 लाख आवासों की   स्वीकृति के बाद अब तक 24 लाख 50 हजार आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 1,600 घर बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ और ‘मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना’ के माध्यम से 73 लाख परिवारों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘महतारी वंदन योजना’ के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है। योजना के अंतर्गत अब तक 19 हजार 444 करोड़ रुपए महिलाओं के खातों में अंतरित किए गए हैं। प्रदेश में 13 लाख 85 हजार महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से 56 हजार से अधिक पीवीटीजी परिवारों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंची हैं, वहीं 6,691 जनजातीय बहुल गांवों में ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ का लाभ दिया जा रहा है। वनाधिकार पत्र वितरण में छत्तीसगढ़ की अग्रणी भूमिका का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वारिसों के पट्टों के नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए टास्क फोर्स गठित की गई है।
मुख्यमंत्री साय ने स्वामी विवेकानंद के युवा शक्ति पर विश्वास का स्मरण करते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए रोजगार, शिक्षा, कौशल, खेल और नवाचार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऐतिहासिक सुधार किए गए हैं। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती के लिए ‘छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल’ बनाया गया है तथा परीक्षाओं में नकल और अनुचित साधनों को रोकने के लिए सख्त कानून पारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस में 7 हजार युवाओं की भर्ती की गई है। शिक्षक एवं सहायक शिक्षकों के 3,946 पदों तथा बिजली कंपनियों में 1,235 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। नीट, जेईई, क्लैट, रेलवे, एसएससी, बैंकिंग, पीएससी और यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ‘सीजी असिस्टेंस फॉर कॉम्पिटिटिव एक्जाम योजना’ शुरू की जा रही है। चार वर्ष की सैन्य सेवा पूरी करने वाले छत्तीसगढ़ के अग्निवीरों को पुलिस आरक्षक, वनरक्षक और जेल प्रहरी की सीधी भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय भी लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 500 करोड़ रुपए के ‘छत्तीसगढ़ राज्य एआई मिशन’ को मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत 100 एआई डेटा लैब, पांच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 50 से अधिक एआई आधारित सेवाएं विकसित की जाएंगी। छह लाख विद्यार्थियों तथा डेढ़ लाख शासकीय कर्मचारियों को एआई का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ‘छत्तीसगढ़ स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति’ के अंतर्गत 100 करोड़ रुपए का स्टार्टअप फंड बनाया गया है। पीएम सेतु के अंतर्गत 30 आईटीआई का उन्नयन किया जा रहा है। प्रदेश में फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी कैंपस, निफ्ट और नाइलिट जैसे संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। गीदम, कुनकुरी, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़ और कवर्धा में पांच मेडिकल कॉलेज इसी सत्र से प्रारंभ किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी वैश्विक मंच पर तिरंगा लहराएं, इसके लिए खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के साथ ‘मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन’ प्रारंभ किया जा रहा है। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने वाली छत्तीसगढ़ की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव को डीएसपी के पद पर पदोन्नत करने तथा 30 लाख रुपए की सम्मान राशि देने का निर्णय लिया गया है। राज्य के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए शासकीय सेवा के द्वार खोले गए हैं। देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की सफल मेजबानी के बाद अगले वर्ष भी इन खेलों का आयोजन छत्तीसगढ़ में होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के माध्यम से कोर सेक्टर के साथ नए और उभरते क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। देश-दुनिया में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट से अब तक 8 लाख 23 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लगभग 1 लाख 74 हजार रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
नवा रायपुर में प्रदेश की पहली गारमेंट इकाई स्विफ्ट टेक्सटाइल से 4,600 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। मुंगेली में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड का प्लांट स्थापित किया जाएगा। प्रदेश में 23 नए औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किए जा रहे हैं। राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर 2.0, नवा रायपुर में फर्नीचर क्लस्टर तथा जांजगीर-चांपा एवं राजनांदगांव में स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में देश का पहला एआई एसईजेड विकसित किया जा रहा है। रायपुर, नवा रायपुर और दुर्ग-भिलाई को शामिल करते हुए स्टेट कैपिटल रीजन का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए उत्पादन, पारेषण और वितरण तीनों क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीति के साथ काम किया जा रहा है। एनर्जी समिट में 3 लाख 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना’ से 12 लाख से अधिक उपभोक्ताओं का 910 करोड़ रुपए का सरचार्ज माफ किया गया है।
प्रदेश के 90 हजार से अधिक उपभोक्ता ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ का लाभ ले रहे हैं। भारतमाला परियोजना, रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे, रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर और रावघाट-जगदलपुर रेल नेटवर्क प्रदेश के आर्थिक विकास को नई गति देंगे।
सीजी वायु योजना’ के माध्यम से प्रमुख हवाई अड्डों से हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। ढाई वर्षों में दूरस्थ क्षेत्रों में 829 मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं तथा ‘भारतनेट 3.0’ के माध्यम से 5,659 ग्राम पंचायतों को हाईस्पीड इंटरनेट से जोड़ने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के सुशासन के आदर्शों पर आगे बढ़ रही है। पारदर्शी ई-ऑफिस प्रणाली अपनाई गई है। ‘सीएम हेल्पलाइन 1076’ के माध्यम से 80 हजार से अधिक शिकायतों का निराकरण किया गया है और ‘सेवा सेतु पोर्टल’ के जरिए शासन की 700 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों की स्थापना, रजिस्ट्री में सुधार और ऑटो म्यूटेशन जैसी व्यवस्थाओं से नागरिक सेवाओं को सरल बनाया गया है। 7,524 ग्राम पंचायतों में ‘अटल पंचायत डिजिटल सुविधा केंद्र’ स्थापित कर ग्रामीणों को डिजिटल और बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन जिलों में ‘नियद नेल्ला नार’ योजना लागू नहीं है, वहां ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान’ के माध्यम से 31 योजनाओं का लाभ सेचुरेशन मोड में पहुंचाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान प्रारंभ करने की घोषणा की। इसके तहत प्रदेश के 6,671 शासकीय विद्यालयों में बेटियों के लिए शौचालय बनाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ से प्रदेश में रोजगार एवं विकास का नया अध्याय प्रारंभ हुआ है। योजना के माध्यम से प्रदेश के 6,524 गांवों में मुक्तिधाम एवं प्रतीक्षालय बनाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत कानून-व्यवस्था सुशासन की पहली शर्त है। नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ साइबर अपराध की चुनौती से निपटने के लिए राज्य में नौ नए साइबर पुलिस थाने बनाए गए हैं। डायल-112 सेवा पूरे प्रदेश में लागू की गई है।
पर्यटन और लोक-संस्कृति को मिलेगी वैश्विक पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री पर्यटन मिशन’ के माध्यम से बस्तर और सरगुजा में पर्यटन सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जाएगा। बस्तर ओलम्पिक, सरगुजा ओलम्पिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने प्रदेश की जनजातीय संस्कृति, खेल प्रतिभा और प्राकृतिक सुंदरता को राष्ट्रीय पहचान दी है।
चित्रकोट को ग्लोबल टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करते हुए वहां टेंट सिटी बनाई जाएगी। सिरपुर को विश्व धरोहर स्थल के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक-संस्कृति हमारी अमूल्य धरोहर है। पद्मविभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई की विरासत को सहेजने के लिए ‘डॉ. तीजन बाई लोककला अलंकरण’ प्रारंभ करने तथा छत्तीसगढ़ी सिनेमा के विकास के लिए ‘चित्रोत्पला फिल्म सिटी’ के निर्माण का निर्णय लिया गया है। संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश और उनके नाम पर राज्य अलंकरण पुरस्कार देने का निर्णय भी लिया गया है। उन्होंने आरंग के रीवां में उत्खनन के दौरान 2,750 वर्ष पुरानी मानव बस्ती की खोज को छत्तीसगढ़ की प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्धि का महत्वपूर्ण प्रमाण बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अधोसंरचना और आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत प्रदेश में अब तक सात करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि ‘रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना’ के माध्यम से 49 हजार से अधिक तथा ‘मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना’ के माध्यम से 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन कराए गए हैं।
विकसित भारत के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संदेश के समापन में कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ हम सभी का सामूहिक लक्ष्य है। उन्होंने ऋग्वेद के मंत्र - “संगच्छध्वं, सं वदध्वं, सं वो मनांसि जानताम्।” का उल्लेख करते हुए प्रदेशवासियों से एकजुट होकर छत्तीसगढ़ और भारत के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्वतंत्रता के अमृत मूल्यों से प्रेरणा लेकर, अपने कर्तव्यों को सर्वाेपरि रखते हुए और ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की भावना से हम विकसित छत्तीसगढ़ के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को साकार करेंगे।






 

 


बड़े सपने देखें और कड़ी मेहनत से उन्हें साकार करें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

14-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश)। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से शाम उनके निवास कार्यालय में सरगुजा जिले के ग्रामीण अंचलों से शैक्षणिक भ्रमण पर आए मेधावी छात्र-छात्राओं ने सौजन्य मुलाकात की। अंबिकापुर क्षेत्र के सात शासकीय विद्यालयों के लगभग 50 विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री साय ने आत्मीय संवाद किया और उनके अनुभव, रुचियों तथा भविष्य के सपनों के बारे में जाना। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें जीवन में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने और उसे हासिल करने के लिए पूरी लगन, अनुशासन और परिश्रम के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से कहा कि विद्यार्थी जीवन भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण समय है। इस दौर में देखा गया सपना और उसे पूरा करने के लिए किया गया परिश्रम जीवन की दिशा तय करता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को हमेशा बड़े सपने देखने चाहिए और उन सपनों को साकार करने के लिए पूरे मनोयोग से प्रयास करना चाहिए। कठिन परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण से जीवन में कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सफलता का अर्थ केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनना नहीं है। आज युवाओं के लिए शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, खेल, तकनीक, प्रशासन, उद्यमिता सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। प्रत्येक विद्यार्थी की अपनी प्रतिभा और रुचि होती है। आवश्यकता इस बात की है कि वह अपनी क्षमता को पहचाने, सही लक्ष्य चुने और पूरी प्रतिबद्धता के साथ उसे हासिल करने में जुट जाए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रदेश की विभिन्न प्रतिभाओं और उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्तित्वों के प्रेरक प्रसंग भी सुनाए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर विस्तार हुआ है। आज छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्तर के अनेक प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित हैं, जहां प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध हों। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण बच्चों के मन में नई जिज्ञासा पैदा करने के साथ उनके सपनों को नया विस्तार देते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचल के बच्चों को प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से परिचित कराने और उन्हें भविष्य की संभावनाओं के प्रति जागरूक करने की यह पहल सराहनीय है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने माता-पिता, विद्यालय तथा प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन व्यक्ति के संपूर्ण जीवन की नींव होता है। जिस प्रकार किसी मजबूत भवन के लिए उसकी नींव मजबूत होना आवश्यक है, उसी प्रकार उज्ज्वल भविष्य के लिए विद्यार्थी जीवन में अनुशासन, परिश्रम और समय का सदुपयोग आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस महत्वपूर्ण समय का उपयोग अपने लक्ष्य को पहचानने, ज्ञान अर्जित करने और व्यक्तित्व निर्माण में करने का आह्वान किया।
शैक्षणिक भ्रमण में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कनकालों, बकिरमा, सुखरी, रामपुर, मेंड्राकला एवं करजी तथा शासकीय सेजेस केशवपुर के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। 
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी), ट्राइबल म्यूजियम और छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग कार्यालय सहित विभिन्न प्रमुख संस्थानों एवं स्थलों का अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने इन संस्थानों की शैक्षणिक गतिविधियों, अध्ययन के अवसरों और भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। राजधानी और नवा रायपुर के प्रमुख संस्थानों को नजदीक से देखने का अनुभव विद्यार्थियों के लिए उत्साहवर्धक रहा।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर, जिला पंचायत सदस्य पायल सिंह तोमर सहित शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
 

छत्तीसगढ़ के स्टील का प्रदेश में ही हो अधिकतम मूल्य संवर्धन: डाउनस्ट्रीम और स्पेशियलिटी उत्पादों के निर्माण पर दें जोर - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

14-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के सहयोग से आयोजित ‘छत्तीसगढ़ इंडस्ट्री डायलॉग ऑन ग्रीन स्टील’ में ₹13,840 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश में 10,921 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्टील और खनन छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान की मजबूत नींव हैं और आगे भी हमारी ताकत बने रहेंगे। अब समय इस मजबूत नींव पर औद्योगिक विकास की नई इमारत खड़ी करने का है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल स्टील उत्पादन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि छत्तीसगढ़ में उत्पादित स्टील का अधिकतम मूल्य संवर्धन भी प्रदेश के भीतर ही होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का स्टील प्राथमिक रूप में प्रदेश से बाहर जाने के बजाय यहीं ऑटो कम्पोनेंट्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, रेलवे, रक्षा और सौर ऊर्जा उपकरणों जैसे डाउनस्ट्रीम एवं स्पेशियलिटी उत्पादों में परिवर्तित हो। जब मूल्य संवर्धन छत्तीसगढ़ में होगा, तो रोजगार भी छत्तीसगढ़ में ही सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में निवेश करने वाले प्रत्येक निवेशक के साथ पूरी प्रतिबद्धता से खड़ी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शून्य कार्बन उत्सर्जन के वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप दुनिया तेजी से ग्रीन स्टील की ओर बढ़ रही है और छत्तीसगढ़ देश के उन अग्रणी राज्यों में है, जिन्होंने इस बदलाव को समय रहते अपनाया है। प्रदेश में 26 हजार मेगावाट से अधिक विद्युत उपलब्धता तथा प्रतिस्पर्धी औद्योगिक विद्युत दरें ऊर्जा-आधारित डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग के लिए छत्तीसगढ़ को विशेष रूप से अनुकूल बनाती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 ने निवेश के नए द्वार खोले हैं। पिछले 18 महीनों में प्रदेश को लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें स्टील और खनन जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी बड़े निवेश प्रस्ताव शामिल हैं।
प्रदेश में निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने कारोबारी प्रक्रियाओं में व्यापक सुधार किए हैं। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट’ लागू किया है। इसके तहत कम जोखिम वाले उद्यमों के लिए स्व-प्रमाणीकरण, जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था तथा निर्धारित समय-सीमा में आवेदन का निराकरण नहीं होने पर डीम्ड अप्रूवल जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। इन सुधारों से प्रदेश के लगभग 15 लाख एमएसएमई को लाभ मिलने की उम्मीद है।
CRISIL-NITI Aayog Investment Friendliness Index 2026 में छत्तीसगढ़ ने प्रमुख राज्यों के बीच ‘रेगुलेटरी ईज’ और ‘इंस्टीट्यूशनल एनवायरनमेंट’ में प्रथम स्थान तथा ‘एनवायरनमेंटल रेजिलिएंस’ में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। हाल ही में नई दिल्ली में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के दसवें स्थापना दिवस समारोह में छत्तीसगढ़ को ‘GeM Sustainable Procurement Award’ से भी सम्मानित किया गया है।
औद्योगिक विकास का विस्तार अब नए क्षेत्रों तक
राज्य सरकार औद्योगिक विकास को रायपुर-भिलाई के परंपरागत औद्योगिक क्षेत्र से आगे प्रदेश के अन्य जिलों तक विस्तार दे रही है। राजनांदगांव, धमतरी, जांजगीर-चांपा और बस्तर जिलों में चार नए औद्योगिक पार्क स्वीकृत किए गए हैं।
भारत सरकार ने राजनांदगांव में लगभग 306 एकड़ क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) को भी स्वीकृति प्रदान की है। इससे बड़े पैमाने पर निवेश और लगभग 9 हजार रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की कंपनियों ने इस क्लस्टर में रुचि दिखाई है।
मुख्यमंत्री साय ने निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा,  "हमारी नीति स्पष्ट है, प्रक्रियाएं पारदर्शी हैं और अनुमतियां तय समय-सीमा में मिल रही हैं। यहां रेड टेप के लिए कोई जगह नहीं है। हम साथ मिलकर काम करेंगे और साथ मिलकर सफलता की नई कहानी लिखेंगे।”
उन्होंने कहा कि ग्रीन स्टील और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से छत्तीसगढ़ अब अपनी खनिज संपदा को प्रदेश के भीतर ही अधिक मूल्य, अधिक निवेश और अधिक रोजगार में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हरेली तिहार पर मुख्यमंत्री निवास में साकार हुई छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कृषि परंपरा और ग्रामीण जीवन की जीवंत झांकी

13-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश)। छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सोंधी महक, खेत-खलिहानों की परंपराएं, लोकगीतों की स्वर लहरियां, मांदर की थाप, गेड़ी का उल्लास और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू – प्रदेश के प्रथम लोक पर्व हरेली तिहार पर आज नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन की जीवंत झांकी में बदल गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधि-विधान से भगवान शिव, गौमाता और कृषि औजारों की पूजा-अर्चना कर प्रदेश में अच्छी वर्षा, भरपूर फसल, किसानों की समृद्धि और सभी परिवारों की सुख-खुशहाली की कामना की। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित मंत्रीगण, जनप्रतिनिधि, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारी, किसान और बड़ी संख्या में नागरिक इस उत्सव के साक्षी बने।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों, विशेषकर किसान भाई-बहनों को हरेली तिहार की गाड़ा-गाड़ा बधाई देते हुए कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के बीच आत्मीय रिश्ते का उत्सव है। यह पर्व हमें अपनी धरती, पशुधन, कृषि उपकरणों और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है और प्रदेश की बड़ी आबादी की आजीविका खेती-किसानी से जुड़ी है। किसान की समृद्धि ही गांव और प्रदेश की खुशहाली का मजबूत आधार है।
हरेली के उत्सव में मुख्यमंत्री साय पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंगे नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा धारण कर वे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के साथ महिला ऑटो चालक श्रीमती संगीता यादव के पिंक ऑटो में मुख्यमंत्री निवास परिसर से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। इस अनूठे अंदाज ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और उत्सव के माहौल में आत्मीयता का रंग घोल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत गौरी-गणेश एवं नवग्रह पूजन के साथ हुई। मुख्यमंत्री ने मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग का अभिषेक किया और नांगर, रापा, कुदाल, फावड़ा सहित खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि औजारों की विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को नमन किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हरेली के समय तक खेती के अनेक प्रमुख कार्य पूरे हो चुके होते हैं और किसान प्रकृति एवं अपने कृषि साधनों की पूजा कर अच्छे कृषि वर्ष की कामना करते हैं। यह परंपरा हमारे पुरखों की प्रकृति के प्रति गहरी समझ और सम्मान को दर्शाती है।
मुख्यमंत्री साय ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में निर्मित गौशाला पहुंचकर गौमाता की आरती और पूजा-अर्चना की। उन्होंने गाय और बछड़े को हरा चारा, चना-गुड़ तथा पारंपरिक ‘लोंदी’ खिलाई। हरेली पर पशुधन को लोंदी खिलाने की लोक परंपरा पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और रोगों से बचाव की कामना से जुड़ी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन में पशुधन परिवार और कृषि व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। हमारी लोक संस्कृति हमें पशुओं के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और संरक्षण की सीख देती है। आधुनिकता के साथ अपनी ऐसी उपयोगी और प्रकृति-सम्मत परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी हमारी जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में शुरू हुए किसान क्रेडिट कार्ड ने किसानों को खेती के लिए सहज रूप से पूंजी उपलब्ध कराने का रास्ता खोला। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने सहकारी कृषि ऋण की ब्याज दरों को चरणबद्ध ढंग से कम करते हुए अंततः शून्य प्रतिशत तक पहुंचाया। आज किसानों को सहकारी बैंकों से शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध हो रहा है।
उन्होंने कहा कि फसल बीमा को सरल बनाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिक कृषि तकनीक को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में भी निरंतर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार किसानों से 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीद रही है। इससे प्रदेश के लाखों किसान परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है।
हरेली के प्रकृति संरक्षण के संदेश को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री साय ने मुख्यमंत्री निवास परिसर में पारिजात का पौधा लगाया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी पारिजात का पौधा रोपा। मंत्रीगण तथा विभिन्न निगम-मंडल और आयोगों के पदाधिकारियों ने भी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हरेली हमें प्रकृति से केवल लेने की नहीं, उसे सहेजने और लौटाने की भी सीख देती है। पौधरोपण के साथ पौधों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अधिक से अधिक पौधे लगाकर और उन्हें वृक्ष बनने तक सहेजकर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और सुरक्षित भविष्य तैयार किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में लगाए गए कृषि एवं अन्य विभागीय स्टॉलों का अवलोकन किया। कृषि अभियांत्रिकी विभाग के स्टॉल पर उन्होंने आधुनिक कृषि यंत्रों की उपयोगिता और विशेषताओं की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने रायपुर के किसान इंद्र कुमार वर्मा को हार्वेस्टर पर मिलने वाली सब्सिडी के रूप में 16 लाख रुपए का चेक प्रदान किया। उन्होंने कहा कि खेती में आधुनिक तकनीक और यंत्रीकरण से किसानों की लागत और श्रम कम करने के साथ उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल रही है।
कृषि विभाग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने ड्रोन दीदी चंद्रकली वर्मा से आत्मीय संवाद किया। वर्मा ने बताया कि वे ड्रोन के माध्यम से खेतों में नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और कीटनाशकों का छिड़काव करती हैं तथा प्रति एकड़ 300 रुपए पारिश्रमिक प्राप्त करती हैं। वे अब तक ढाई हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में ड्रोन से छिड़काव कर चुकी हैं और पिछले दो वर्षों में लगभग 7 लाख रुपए की आय अर्जित की है।
मुख्यमंत्री ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कृषि में तकनीक का उपयोग महिलाओं के लिए भी आय और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा कर रहा है। ड्रोन दीदियां आधुनिक कृषि और महिला सशक्तीकरण की एक प्रेरक कड़ी बन रही हैं।
नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के स्टॉल पर मुख्यमंत्री ने किसानों को अरहर और उड़द दाल के मिनी किट वितरित किए। उन्होंने कृषि मित्रों द्वारा तैयार ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र और मधुमक्खी के मोम से बने लिप बाम जैसे उत्पादों के बारे में जानकारी ली। उद्यानिकी विभाग के स्टॉल पर किसान श्री रामविशाल निषाद ने मुख्यमंत्री को नीम का पौधा भेंट किया।
मुख्यमंत्री निवास को हरेली के अनुरूप नीम और आम के पत्तों, गेंदे के फूलों और पारंपरिक ग्रामीण अलंकरण से सजाया गया था। परिसर में कदम रखते ही छत्तीसगढ़ के गांवों और मेलों जैसा वातावरण महसूस हो रहा था। हरियाली और लोक सज्जा के बीच गेड़ी, बिल्लस, गोटी और बाटी जैसे पारंपरिक खेल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
गेड़ी पर चढ़े कलाकारों और प्रतिभागियों ने हरेली की पहचान को जीवंत किया, वहीं ग्रामीण खेलों ने बच्चों और युवाओं को अपनी परंपरागत खेल संस्कृति से परिचित कराया। रहचुली ने भी लोगों को खूब आकर्षित किया और पूरे आयोजन में गांव के मेले जैसा आनंद घोल दिया।
मांदर, ढोलक और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के बीच लोक कलाकारों ने छत्तीसगढ़ी गीत और नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। हरेली के उल्लास में मुख्यमंत्री श्री साय भी कलाकारों के बीच पहुंचे और उनके साथ पारंपरिक लोकधुनों पर झूमे। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर कलाकारों का उत्साह दोगुना हो गया।
ठेठरी, खुरमी, बड़ा सहित विभिन्न छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉलों ने आयोजन में पारंपरिक खानपान का रंग भरा। मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का अवलोकन करते हुए नागरिकों और कलाकारों से संवाद किया तथा हरेली की खुशियां साझा कीं।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की कृषि परंपरा, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ा महत्वपूर्ण लोक पर्व है। कृषि औजारों, गौमाता और प्रकृति की पूजा हमारी कृतज्ञता की संस्कृति को अभिव्यक्त करती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर काम किया जा रहा है। किसानों को 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य मिल रहा है और महतारी वंदन योजना से माताओं-बहनों को आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है। किसान का घर खुशहाल और गांव मजबूत होगा, तभी छत्तीसगढ़ की समृद्धि का मार्ग और प्रशस्त होगा।
हरेली तिहार पर मुख्यमंत्री निवास में साकार हुई छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कृषि परंपरा और ग्रामीण जीवन की जीवंत झांकी
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की खेती-किसानी, हरियाली और प्रकृति के प्रति आस्था का महापर्व है। हमारी संस्कृति प्रकृति के संरक्षण, पशुधन के सम्मान और अन्नदाता के श्रम के प्रति आदर का संदेश देती है। हरेली अपनी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और खेती को अधिक समृद्ध बनाने का संकल्प लेने का अवसर है। किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश और देश दोनों समृद्ध होंगे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की लोक अस्मिता और हमारी जड़ों का उत्सव है। आधुनिक विकास की तेज यात्रा के बीच अपनी संस्कृति, परंपरागत ज्ञान, ग्रामीण खेल, लोककला और खानपान को सहेजकर रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बाबा भोलेनाथ, गौमाता और प्रकृति से प्रदेश पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के खेत लहलहाएं, किसानों के घर खुशहाली आए और प्रदेश निरंतर समृद्धि के पथ पर आगे बढ़े।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायकगण, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसान तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।


 


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