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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास की नई ऊँचाइयों पर – मुख्यमंत्री साय

13-Jan-2026
रायपुर ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बालोद जिले के नगर पंचायत मुख्यालय गुण्डरदेही में 233 करोड़ रुपये की लागत से 103 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इसमें ₹163.88 करोड़ के 61 कार्यों का भूमिपूजन तथा ₹69.82 करोड़ के 42 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुण्डरदेही में एक सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन के लिए ₹1 करोड़ तथा प्रत्येक वार्ड में विकास कार्यों हेतु ₹1 करोड़ की घोषणा भी की। 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज जिन विकास कार्यों का लोकार्पण शिलान्यास किया गया है, वे सिर्फ इमारतें नहीं, बल्कि अवसरों के नए द्वार हैं। उन्होंने कहा कि ₹1 करोड़ की लागत से बनने वाले व्यावसायिक परिसर से युवाओं को स्वरोजगार और व्यापार के नए अवसर मिलेंगे, वहीं सड़क, पुल एवं अधोसंरचना के निर्माण से आवागमन सुगम होगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार हर वर्ग के समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल मिल रहा है, तेंदूपत्ता संग्राहकों को उच्चतम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है, और चरण पादुका योजना को पुनः प्रारंभ कर आदिवासी श्रमिकों को राहत पहुंचाई जा रही है। वनोपज के मूल्य संवर्धन से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि रामलला दर्शन योजना से आमजन को देश की संस्कृति और विरासत से जोड़ा जा रहा है। वहीं प्रभावी पुनर्वास नीति के चलते नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति लौट रही है और बस्तर अंचल में विकास की नई रोशनी फैल रही है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद जी के विचार आज भी युवाओं को आत्मबल, राष्ट्रसेवा और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ इस वर्ष अपनी रजत जयंती मना रहा है और इस अवसर पर रायपुर में डिजिटल आदिवासी संग्रहालय का निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक विशेष सौगात है, जहां आदिवासी नायकों की गौरवगाथा सहेजी गई है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ को विकास के नए आयामों तक ले जाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
इस अवसर पर सांसद भोजराज नाग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि बस्तर, जो कभी लाल आतंक के लिए जाना जाता था, अब शांति, प्रगति और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ रहा है और इससे आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय का स्थानीय व्यापारियों द्वारा लड्डुओं से तौलकर अभिनंदन किया गया। उन्होंने विभिन्न विभागों की योजनाओं के तहत पात्र हितग्राहियों को सामग्री एवं प्रमाण पत्र वितरित किए।कलेक्टरदिव्या उमेश मिश्रा ने जिले की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन ने स्वागत उद्बोधन में नगर की विकास आवश्यकताओं की जानकारी दी। इस अवसर पर अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।








 

स्काउट एक जीवन पद्धति है, जो चुनौतियों से जूझना सिखाती है – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

13-Jan-2026
रायपुर ( शोर संदेश )   स्काउट जीवन जीने की एक पद्धति है, जो व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी आत्मनिर्भर बनना, टीम भावना से कार्य करना और समाज के लिए समर्पित रहना सिखाती है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बालोद जिले के ग्राम दुधली में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी के भव्य समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री साय ने देश के विभिन्न राज्यों से पधारे रोवर-रेंजरों एवं स्काउट-गाइड्स का भगवान श्रीराम के ननिहाल और माता शबरी की तपोभूमि छत्तीसगढ़ में आत्मीय अभिनंदन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह जंबूरी केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की विविधता में एकता का जीवंत उत्सव है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देश में पहली बार इस स्तर की राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का आयोजन होना और उसके लिए छत्तीसगढ़ का चयन होना पूरे राज्य के लिए गौरव की बात है। यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों के रोवर-रेंजरों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, झांकियों और गतिविधियों के माध्यम से भारत की समृद्ध विविधता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री साय ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा ही राज्य और देश का भविष्य हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रेरक वाक्य –"उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए" – का उल्लेख करते हुए युवाओं को आत्मविश्वास और संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि स्काउट-गाइड संगठन द्वारा सिखाए गए अनुशासन, सेवा-भाव, नेतृत्व और टीमवर्क जैसे मूल्य युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करते हैं। मुख्यमंत्री ने कोरोना काल में स्काउट-गाइड्स द्वारा किए गए सेवा कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने समाज को जागरूक और सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के तहत उपस्थित युवाओं को शपथ भी दिलाई।
09 से 13 जनवरी तक आयोजित इस पांच दिवसीय जंबूरी में देश-विदेश से 15 हजार से अधिक रोवर-रेंजरों ने भाग लिया। समापन समारोह के दौरान देशभर से आए प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को भारतीय कला, संस्कृति और सौहार्द से सराबोर कर दिया। विशाल जनसैलाब की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
स्कूल शिक्षा मंत्री एवं स्काउट-गाइड के राज्य अध्यक्ष गजेंद्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन में यह राष्ट्रीय जंबूरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि जंबूरी के दौरान युवा संसद, कौशल प्रदर्शन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आदिवासी एथनिक फैशन शो जैसे कार्यक्रमों ने युवाओं को नई दृष्टि और मंच प्रदान किया।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री यादव को राष्ट्रीय मुख्य आयुक्त डॉ. के. के. खंडेलवाल द्वारा सिल्वर एलीफेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।
भारतीय स्काउट-गाइड के राष्ट्रीय मुख्य आयुक्त डॉ. के. के. खंडेलवाल ने कहा कि स्काउटिंग का मूल मंत्र है –“अपने कार्यों से दूसरों का भला करना।” उन्होंने कहा कि परंपरा और आधुनिकता का संतुलन तथा सेवा-भाव ही एक सशक्त और विकसित राष्ट्र की नींव रखता है।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
 

महर्षि महेश योगी के आध्यात्मिक योगदान को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया नमन

12-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश )   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महर्षि महेश योगी की जयंती (12 जनवरी) के अवसर पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि वे विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक एवं योगाचार्य थे, जिन्होंने भावातीत ध्यान (ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन) के माध्यम से भारत की प्राचीन वैदिक चेतना को वैश्विक पहचान दिलाई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि राजिम के समीप पांडुका ग्राम में जन्मे महर्षि महेश योगी ने भारतीय अध्यात्म को आधुनिक विज्ञान और वैश्विक संवाद से जोड़ते हुए मानव कल्याण का एक नया मार्ग प्रशस्त किया। उनका संपूर्ण जीवन साधना, अनुशासन और मानवता की सेवा को समर्पित रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि महेश योगी का यह संदेश कि  मनुष्य के भीतर असीम ऊर्जा, ज्ञान एवं संभावनाएँ निहित हैं, आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक युग में अत्यंत प्रासंगिक है। उनकी शिक्षाएँ आत्मबोध, मानसिक शांति और संतुलित जीवनशैली के लिए समाज को निरंतर प्रेरित करती हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महर्षि महेश योगी द्वारा स्थापित संस्थाएँ, वैदिक विश्वविद्यालय, ध्यान केंद्र और आयुर्वेदिक परंपराएँ शिक्षा, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जागरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। उनके विचारों से प्रेरित होकर विश्वभर में लाखों लोग मानवता, शांति और समरसता के लिए कार्य कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि महर्षि महेश योगी की दिव्य शिक्षाएँ आने वाली पीढ़ियों को आत्मविकास, आंतरिक शांति और वैश्विक सद्भाव के मार्ग पर निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करती रहेंगी।

 

कर्मचारियों की मेहनत, निष्ठा और अनुशासन से ही धरातल पर साकार होती हैं शासन की नीतियां : मुख्यमंत्री साय

12-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश )   कर्मचारी शासन-प्रशासन की रीढ़ होते हैं और उनकी ईमानदारी, कर्मठता तथा संवेदनशीलता से ही सरकार की योजनाएं, नीतियां और निर्णय वास्तविक रूप में धरातल पर उतरते हैं। छत्तीसगढ़ का प्रशासनिक ढांचा आप सभी की मेहनत, निष्ठा और अनुशासन के कारण ही प्रभावी ढंग से कार्य कर पा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के रोहिणीपुरम स्थित सरस्वती शिक्षा संस्थान परिसर में राज्य कर्मचारी संघ, छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित त्रैवार्षिक अष्टम प्रदेश अधिवेशन को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए महंगाई भत्ता 55 प्रतिशत से बढ़ाकर केंद्र सरकार के समान 58 प्रतिशत किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच यह निर्णय कर्मचारियों को वास्तविक राहत प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सरकार की कर्मचारी-हितैषी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री साय ने अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि यह अधिवेशन  संगठनात्मक विचार-विमर्श के साथ ही सुशासन के संकल्प को सुदृढ़ करने का एक सशक्त अवसर है। जब सरकार और कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते हैं, तभी विकास का मार्ग प्रशस्त होता है और शासन व्यवस्था अधिक सशक्त बनती है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने कर्मचारियों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। स्थानांतरण नीति, पदोन्नति प्रक्रिया और कार्यस्थल संबंधी व्यवस्थाओं में सुधार कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सुचारु और कर्मचारी-अनुकूल बनाया गया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग के गठन से जन-विश्वास आधारित शासन तंत्र को और मजबूती मिली है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के समयबद्ध भुगतान पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। छत्तीसगढ़ पेंशन फंड की स्थापना कर तथा पेंशन फंड विधेयक को विधानसभा से पारित कर राज्य ने इस दिशा में एक मजबूत विधायी आधार भी प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस, ऑनलाइन सेवाओं और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से कर्मचारियों की कार्यक्षमता को सशक्त बनाया गया है, वहीं प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास कार्यक्रमों के जरिए उन्हें बदलते समय के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। एक समय नक्सलवाद प्रदेश के लिए बड़ी चुनौती था, लेकिन हमारे सुरक्षा बलों ने अद्वितीय साहस और पराक्रम से इसका डटकर मुकाबला किया है। उन्होंने मंच से सुरक्षा बलों की वीरता को नमन करते हुए कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए बेहतर और मानवीय पुनर्वास नीति लागू की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बस्तर क्षेत्र में शांति व्यवस्था तेजी से स्थापित हो रही है और ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के माध्यम से सुदूर वनांचलों तक बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप राज्य सरकार ने भी ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ तैयार कर प्रदेश के विकास को नई दिशा और गति दी है।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष गौरव कुमार सोनी, महामंत्री राजेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अरूण तिवारी, प्रदेश महामंत्री अश्वनी चेलक तथा बड़ी संख्या में कर्मचारी-अधिकारी उपस्थित थे।





 

गुड गवर्नेंस कागजों में नहीं, जनता के जीवन में दिखना चाहिए: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

11-Jan-2026
रायपुर, ।  ( शोर संदेश ) गुड गवर्नेंस कागजों पर नहीं, बल्कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव और अधिकारियों के काम-काज में दिखना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  राजधानी नवा रायपुर में आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 कार्यक्रम को सम्बोधित करतेभुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग द्वारा आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 में  सुशासन एवं नवाचारों के लिए 5 विभागों एवं 5 जिलों को मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने ई-प्रगति पोर्टल का भी शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से अब छत्तीसगढ़ के सभी विभागों के 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों की निगरानी की जाएगी। इस पोर्टल के माध्यम से निर्माण की मंजूरी से लेकर बजट, मजदूरी, भुगतान, एमआईएस, स्ट्रक्चर लेवल सहित सभी पहलुओं की मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा मॉनिटरिंग की जाएगी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुड गवर्नेंस का उद्देश्य यह है कि समाज के अंतिम व्यक्ति को बुनियादी सेवाओं के लिए भटकना न पड़े। पंचायतों में शुरू किए गए अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीणों को आधार, पेंशन, बैंकिंग और बिल भुगतान जैसी सुविधाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं। हमारी सरकार ने तकनीकी नवाचारों के माध्यम से नागरिकों तक सुशासन की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के लिए अनेक पहल की हैं। इसी क्रम में आज ई-प्रगति पोर्टल का शुभारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य की वृहद परियोजनाओं एवं योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। इस पोर्टल से योजनाओं की प्रगति का डेटा रियल-टाइम में उपलब्ध होगा। सभी विभागों, जिला प्रशासन तथा मुख्यमंत्री कार्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे राज्य में ई-गवर्नेंस को और मजबूती मिलेगी तथा नागरिकों को योजनाओं का लाभ समय पर और सहज रूप से प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने सभी कलेक्टरों, सचिवों एवं संबंधित अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति को नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद, श्रद्धेय अटल जी की अंत्योदय की अवधारणा और यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व से हमने सुशासन को गहराई से समझा है। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने देश का पहला सुशासन एवं अभिसरण विभाग बनाया है, जो सभी योजनाओं के समन्वय और प्रभावी क्रियान्वयन का केंद्र है। पिछले दो वर्षों में हमने 400 से अधिक नीतिगत सुधार किए, पुराने अनुपयोगी नियम-कानून समाप्त किए और कई में संशोधन किए। इन सुधारों से प्रदेशवासियों का जीवन सरल हुआ और प्रशासन अधिक कुशल बना। आज मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के माध्यम से 5 जिलों और 5 विभागों के नवाचारी प्रयासों को सम्मानित किया गया है। इससे अच्छा कार्य करने वाले अधिकारी प्रोत्साहित होंगे। आगामी वर्ष से 8 अलग-अलग क्षेत्रों में यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा, जिनमें ई-गवर्नेंस, सेवा वितरण, ग्रामीण और शहरी विकास जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। इससे स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में नवाचार और सुशासन की एक सशक्त संस्कृति विकसित हो रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शासन में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए “पहल” और “प्रेरणा” योजनाएँ प्रारंभ की जा रही हैं। “पहल” से नए विचारों को सहयोग मिलेगा और “प्रेरणा” से सफल योजनाओं का विस्तार होगा। शीघ्र ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन भी प्रारंभ की जाएगी, जिससे शिकायत निवारण और जनभागीदारी मजबूत होगी। सेवाओं की उपलब्धता बेहतर बनाने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा रहा है और लोक सेवा गारंटी अधिनियम को LSG-2.0 के रूप में विकसित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बदलते दौर में तकनीक जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है। इसलिए हमने डिजिटल संसाधनों की शक्ति को पहचानते हुए तकनीक को सुशासन का प्रमुख हथियार बनाया है। सभी नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ई-ऑफिस ने सरकारी कामकाज में गति और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की हैं। अब फाइलें हफ्तों-महीनों नहीं, बल्कि एक क्लिक पर आगे बढ़ती हैं। इससे कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो रही है और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है। ई-ऑफिस मंत्रालय से प्रारंभ हुआ था और अब विभागाध्यक्ष कार्यालयों में भी लागू हो चुका है। आगामी कुछ महीनों में इसे सभी संभागों और जिलों में भी लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुख्य सचिव विकास शील द्वारा ई-ऑफिस में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया जाना एक सराहनीय पहल है, जिससे कार्यसंस्कृति में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। बायोमेट्रिक उपस्थिति को भी चरणबद्ध तरीके से सभी कार्यालयों में लागू किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है, जिसके पीछे सुशासन सबसे बड़ा कारक है। डिजिटल भुगतान में भारत का विश्व में अग्रणी स्थान भी गुड गवर्नेंस का ही परिणाम है।
उन्होंने कहा कि खनिज परिवहन की परमिट व्यवस्था को ऑनलाइन किया गया है, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगी है और विकास कार्यों के लिए संसाधनों की सुरक्षा हुई है। इसी तरह शासकीय खरीदी को जेम पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। उन्होंने अधिकारियों को खरीदी प्रक्रियाओं में समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रजिस्ट्री विभाग में की गई 10 क्रांतिकारी पहल से अब नागरिक घर बैठे ही रजिस्ट्री कर पा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत पिछले वर्ष 7.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से निवेशकों को तेजी से स्वीकृति और क्लियरेंस दिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव जाकर 41 लाख आवेदनों का निराकरण किया गया। यह जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण है।उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों के पत्रों और आवेदनों का समय पर निराकरण होना चाहिए। अच्छे प्रशासन के लिए संवाद, समन्वय और फीडबैक आवश्यक हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने के साथ-साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है। सरकार के निर्णयों और उपलब्धियों का सही संचार भी उतना ही जरूरी है। 
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अंजोर विजन के अंतर्गत 2030 तक के लक्ष्यों की समीक्षा कर प्रदेश को समृद्ध और विकसित राज्य बनाने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव विकास शील ने पुरस्कार प्रक्रिया में भाग लेने वाली सभी टीमों को बधाई दी। 
दंतेवाड़ा जिले की “ब्लॉकचेन आधारित भूमि अभिलेख डिजिटलीकरण” पहल एक प्रमुख उदाहरण के रूप में सामने आई। इस नवाचार के माध्यम से मैनुअल और कागजी प्रक्रियाओं को समाप्त कर ब्लॉकचेन आधारित छेड़छाड़-रोधी प्रणाली लागू की गई, जिससे भूमि अभिलेख प्राप्त करने का समय हफ्तों से घटाकर कुछ ही मिनटों में संभव हो सका। इस पहल से दस्तावेज़ी धोखाधड़ी पूरी तरह समाप्त हुई और सेवा प्रदाय में अभूतपूर्व तेजी आई, जिसने आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में राजस्व प्रशासन के लिए एक नया मानक स्थापित किया।
जशपुर जिले की “निर्माण जशपुर” पहल ने यह दर्शाया कि एकीकृत डिजिटल मॉनिटरिंग किस प्रकार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन को प्रभावी बना सकती है। 16 विभागों की 7,300 से अधिक परियोजनाओं और 444 ग्राम पंचायतों को कवर करने वाली इस प्रणाली ने रियल-टाइम निगरानी, जियो-टैग्ड सत्यापन और GIS आधारित योजना को संभव बनाया, जिससे कार्यों की गुणवत्ता में सुधार हुआ और विलंब में उल्लेखनीय कमी आई।
मोहला–मानपुर–अंबागढ़ चौकी में लागू संवर्धित टेक-होम राशन (A-THR) नवाचार ने गंभीर कुपोषण जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से विकसित इस पोषण-घन आहार के माध्यम से गंभीर कुपोषित बच्चों में 77.5 प्रतिशत सुधार दर दर्ज की गई। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि साक्ष्य-आधारित पोषण हस्तक्षेप बड़े पैमाने पर जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
गरियाबंद जिले की “हाथी ट्रैकिंग एवं अलर्ट ऐप” ने मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने में तकनीक की भूमिका को सशक्त रूप से सामने रखा। AI आधारित ट्रैकिंग और रियल-टाइम अलर्ट व्यवस्था के माध्यम से मानव हताहतों की संख्या लगभग शून्य तक लाई गई, साथ ही फसल क्षति और मुआवजा बोझ में भी उल्लेखनीय कमी आई। राज्य के बाहर भी अपनाई जा चुकी यह पहल संघर्ष-संवेदनशील शासन का एक प्रभावी मॉडल बन चुकी है।
नारायणपुर जिले का “इंटिफाई इंटेलिजेंस टूल” आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में डेटा एकीकरण की उपयोगिता को दर्शाता है। रियल-टाइम, जियो-स्पेशियल और पूर्वानुमान आधारित इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 100 से अधिक नियोजित अभियानों का संचालन संभव हुआ, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर हुआ और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में परिस्थितिजन्य जागरूकता को मजबूती मिली।
इसी तरह विभागीय श्रेणी में शिक्षा विभाग का “विद्या समीक्षा केंद्र (VSK)” डेटा-आधारित शिक्षा शासन का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा। यह AI सक्षम प्लेटफॉर्म 56,000 से अधिक विद्यालयों, 2.83 लाख शिक्षकों और 57.5 लाख विद्यार्थियों की निगरानी करता है, जिससे ड्रॉपआउट की प्रारंभिक पहचान, संसाधनों का बेहतर उपयोग और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना संभव हो सका है।
वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की “वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम” ने व्यवसाय सुगमता सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। 16 विभागों की 136 सेवाओं को एकीकृत करते हुए इस प्रणाली ने अनुमोदन, प्रोत्साहन, शिकायत निवारण और निरीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाया, जिससे विलंब कम हुआ और पारदर्शिता के साथ निवेशकों का विश्वास बढ़ा।
वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग की समग्र ई-गवर्नेंस सुधार पहल ने राजस्व संग्रह और अनुपालन व्यवस्था को सुदृढ़ किया।एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण, ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली और रियल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से विभाग ने ₹5,425 करोड़ का राजस्व अर्जित किया और पारदर्शिता तथा नियामक निगरानी के नए मानक स्थापित किए।
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की “FDS 2.0 – ई-कुबेर डिजिटल भुगतान प्रणाली” ने मैनुअल चेक आधारित प्रक्रियाओं को समाप्त कर पूर्णतः कैशलेस, RBI एकीकृत भुगतान व्यवस्था लागू की। इसके माध्यम से ₹1,776 करोड़ से अधिक के 18 लाख लेन-देन पूर्ण हुए, जिससे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित वन क्षेत्रों में भी समय पर मजदूरी भुगतान, आजीविका सुरक्षा और पारदर्शी फंड प्रवाह सुनिश्चित हुआ।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा अंतर्गत लागू QR कोड आधारित सूचना स्वप्रकटीकरण व्यवस्था ने नागरिक-केंद्रित शासन को नई मजबूती दी। QR कोड के माध्यम से ग्रामीणों को वास्तविक समय की योजना जानकारी उपलब्ध कराकर इस पहल ने मध्यस्थों पर निर्भरता कम की और 11,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता को सुदृढ़ किया।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने दिया तथा धन्यवाद ज्ञापन संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर डीजीपी अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, एससीएस गृह मनोज पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संचालक रजत बंसल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
इन सभी नवाचारों के माध्यम से यह स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में शासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि परिणामों, प्रभाव और नागरिक विश्वास पर केंद्रित एक नई प्रशासनिक संस्कृति विकसित हो रही है। मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025–26 के अंतर्गत सम्मानित ये जिले और विभाग सुशासन, पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और जनकल्याण के नए मानक स्थापित कर रहे हैं। यह उपलब्धियाँ न केवल राज्य के प्रशासनिक तंत्र की क्षमता को दर्शाती हैं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता और भविष्य के लिए स्पष्ट दृष्टि को भी सुदृढ़ करती हैं।

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों की अहम भूमिका — मुख्यमंत्री साय

10-Jan-2026
रायपुर,   ( शोर संदेश )10 जनवरी 2026 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विगत दिवस राजधानी रायपुर में रोटरी क्लब ऑफ कॉस्मोपॉलिटन रायपुर द्वारा आयोजित कॉस्मो ट्रेड एंड बिल्ड फेयर एक्सपो 2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।  
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य कर रही है। व्यापार जगत की बेहतरी और ग्राहकों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जीएसटी दरों में कटौती की गई, जिसका सीधा लाभ जनता को मिल रहा है। जीएसटी रिफॉर्म्स से कई वस्तुओं की कीमत में कमी आई है। जीएसटी की प्रक्रिया को काफी सुगम बनाया गया है। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई उद्योग नीति को देश-विदेश में सराहा जा रहा है। लगभग आठ लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव हमें प्राप्त हो चुके हैं। हर सेक्टर में हमें ये निवेश प्रस्ताव मिले हैं जिनपर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। प्रदेश में रोजगार सृजन पर हमारा विशेष फोकस है। नई उद्योग नीति में एक हजार से अधिक रोजगार प्रदान करने वाले उद्यमियों को विशेष इंसेंटिव प्रदान करने के प्रावधान किए गए हैं। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ बनाने में रोटरी क्लब और उद्यमियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। रोटरी क्लब उद्यम के साथ ही परोपकार का भी कार्य करता है। क्लब द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्य बहुत प्रशंसनीय हैं। ये बहुत खुशी की बात है कि यह एक्सपो मध्य भारत का सबसे बड़ा एक्सपो है, जिसमें 300 से अधिक स्टॉल हैं। इस विशाल आयोजन का लाभ निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ को मिलेगा। 
रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। ये बहुत खुशी की बात है कि रोटरी क्लब द्वारा आयोजित इस एक्सपो का यह 16वां वर्ष है। रोटरी क्लब सेवा से जुड़ी एक संस्था है। रोटरी क्लब द्वारा पोलियो निर्मूलन के कार्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में मोबाइल आई क्लीनिक की एम्बुलेंस का लोकार्पण किया। उन्होंने विभिन्न सेक्टर्स में विशिष्ट योगदान दे रही 25 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया और इन महिला उद्यमियों पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, राम गर्ग सहित रोटरी क्लब ऑफ कॉस्मोपॉलिटन रायपुर के सदस्यगण व बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।













 

इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट से छत्तीसगढ़ को नई पहचान, निर्यातकों को बड़ी सौगात

10-Jan-2026
रायपुर,   ( शोर संदेश )10 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के नीजि  रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने  चावल निर्यातकों को बड़ी सौगात दी है। मंडी शुल्क में छूट की अवधि एक साल बढ़ाई है। इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान सीएम साय ने की घोषणा से चावल निर्यातकों और किसान दोनों के लिए बड़ी सौगात है। साथ ही कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है और दंतेवाड़ा में ऑर्गेनिक चावल की खेती हो रही है, जिसे और प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है।
छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट का यह दूसरा संस्करण अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस आयोजन में 12 देशों के बायर्स तथा 6 देशों के एम्बेसी प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति से छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर सभी विदेशी मेहमानों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने छत्तीसगढ़ को सोच-समझकर “धान का कटोरा” कहा था और आज प्रदेश इस नाम की सार्थकता सिद्ध कर रहा है। चावल छत्तीसगढ़ के खानपान का अभिन्न हिस्सा रहा है और यहां हजारों किस्मों की धान की प्रजातियां उगाई जाती हैं। सरगुजा अंचल के सुगंधित जीराफूल और दुबराज जैसे चावलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इनकी खुशबू दूर से ही पहचान में आ जाती है।  छतीसगढ़ से चावल के एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। चावल निर्यातक लंबे समय से मंडी शुल्क में छूट की मांग कर रहे थे। पिछले साल भी सरकार ने दी थी, छूट दिसंबर 2025 में मंडी शुल्क में छूट की अवधि खत्म हो रही थी।
त्तीसगढ़ से 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का किया जा रहा है निर्यात 
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत लघु उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे चावल के प्रसंस्करण और निर्यात को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से वर्तमान में लगभग 90 देशों को करीब एक लाख टन चावल का निर्यात किया जा रहा है। सरकार निर्यातकों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में किसानों से 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। पिछले वर्ष 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी और इस वर्ष भी खरीदी में वृद्धि की संभावना है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र व राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी भी साझा की। 
मुख्यमंत्री ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का किया अवलोकन
इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान मुख्यमंत्री साय ने चावल पर केन्द्रित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न किस्मों के चावल, क्षेत्र विशेष में उत्पादित प्रजातियों, चावल उत्पादन में हो रहे नवाचारों तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने शासकीय स्टालों का भी निरीक्षण कर चावल के उत्पादन और विपणन को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे नवाचारों से चावल की पैदावार में वृद्धि होगी, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, एपिडा के चेयरमेन अभिषेक देव, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांति लाल,  राम गर्ग, देश भर से आये मिलर्स, चावल व्यवसायी एवं स्टेक होल्डर्स उपस्थित रहे।

आदिम संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है आदि लोकोत्सव : मुख्यमंत्री साय

10-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज गोवा के आदर्श ग्राम अमोन, पोंगुइनिम, गोवा में आयोजित 'आदि लोकोत्सव' पर्व–2025 में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने लोकोत्सव को संबोधित करते हुए सभी प्रतिभागियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में गोवा के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. रमेश तावड़कर उपस्थित थे। 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 'आदि लोकोत्सव' के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह लोकोत्सव देश की आदिम संस्कृति से जुड़ने का एक जीवंत उत्सव है, जो भारत की लोक-सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। 
उन्होंने कहा कि भारत गांवों का देश है और गांव हमारी आत्मा हैं। गांवों की संस्कृति ही देश की संस्कृति है, जिसे लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और परंपराओं के माध्यम से जीवंत रखना अत्यंत आवश्यक है। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गोवा सरकार पिछले 25 वर्षों से इस सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का कार्य कर रही है, जो प्रशंसनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में आदि लोकोत्सव और भी भव्य तथा व्यापक स्वरूप में आयोजित होगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि जनजातीय इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। भगवान बिरसा मुंडा ने महज 25 वर्ष की अल्पायु में अंग्रेजों को चुनौती दी और अपने अदम्य साहस से इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के अनेक महापुरुष ऐसे हैं, जिन्हें देश के इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय सेनानियों को देशभर में सम्मान और पहचान दिलाने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री साय ने रानी दुर्गावती के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि वे जनजातीय समाज की महान वीरांगना थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके गौरव को स्थायी स्वरूप देते हुए मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक भव्य संग्रहालय का निर्माण कराया है, जो उनके शौर्य और बलिदान की अमिट स्मृति है।
मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ के जनजातीय सेनानियों के योगदान को विशेष रूप से स्मरण किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लगभग 32 प्रतिशत जनजातीय आबादी निवास करती है और यहां के 14 जनजातीय महापुरुषों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधुर, गेंद सिंह जैसे महापुरुषों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष कर देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया। शहीद वीर नारायण सिंह को अंग्रेजों ने राजधानी रायपुर के जय स्तंभ चौक में फांसी दी थी।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन जनजातीय नायकों की स्मृति को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक उनके बलिदान की गाथा पहुंचाने के उद्देश्य से नया रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह डिजिटल संग्रहालय का निर्माण किया गया है। यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है, जिसका उद्घाटन छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों से हुआ। मुख्यमंत्री साय ने आदि लोकोत्सव में उपस्थित सभी लोगों को छत्तीसगढ़ आकर इस डिजिटल संग्रहालय को देखने का आमंत्रण भी दिया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज के लिए इससे बड़ा गौरव क्या हो सकता है कि आज देश के सर्वोच्च पद महामहिम राष्ट्रपति के रूप में भी जनजातीय समाज की बेटी सुशोभित हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में आदिवासी समाज का मुख्यमंत्री बनना प्रधानमंत्री मोदी की समावेशी सोच का प्रमाण है। 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना जैसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने श्रद्धेय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदानों का स्मरण किया और कहा कि उनके कार्यकाल में ही पहली बार देश में आदिम जाति कल्याण मंत्रालय का गठन हुआ, जिसके माध्यम से आज 12 करोड़ से अधिक जनजातीय नागरिकों के विकास के लिए बड़े पैमाने पर बजट और योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल में उन्हें उनके साथ कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान पहले नक्सल प्रभावित राज्य के रूप में होती थी, लेकिन आज वह तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और राज्य अब शांति, विकास और निवेश के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जिन क्षेत्रों में पहले निवेश नहीं आते थे, वहां अब उद्योग आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव छत्तीसगढ़ को प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य के आर्थिक भविष्य की नई दिशा तय कर रहे हैं।

 

जनदर्शन में संवेदनशील निर्णय, दिव्यांग महिला को मिला बैटरी ट्राइसिकल

09-Jan-2026
रायपुर,(शोर संदेश)। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान दिव्यांगजनों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ त्वरित समाधान किया। इस अवसर पर जरूरतमंद दिव्यांगजनों को बैटरी ट्राइसिकल प्रदान किए गए।
जनदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जनदर्शन में पैरों से चलने में असमर्थ रायपुर शंकर नगर से श्रीमती बिन्दु बीरे उम्र 45 वर्ष बेट्री चालित ट्रायसायकल प्रदान किया l कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण वे ट्रायसायकल नहीं खरीद पा रही थी l उनकी समस्या सुनते ही मुख्यमंत्री ने तत्काल बेट्री चालित ट्रायसायकल  उपलब्ध कराया।
बेट्री चालित ट्रायसायकल  मिलने पर बिन्दु बीरे ने मुख्यमंत्री साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अब कहीं भी आने-जाने में कठिनाई नहीं होगी, उन्होंने मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता की प्रशंसा की।

सिरकट्टी धाम बनेगा आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

08-Jan-2026
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गरियाबंद जिले के सिरकट्टी धाम आश्रम स्थित श्रीरामजानकी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की तथा मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर धर्मध्वजा की स्थापना की। उन्होंने आश्रम को सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बताते हुए आश्रम परिसर में समरसता भवन के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद पूरे देश में जो आध्यात्मिक चेतना का वातावरण निर्मित हुआ है, उसी की अखंड धारा का विस्तार आज सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा स्थापना के रूप में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा देश ऋषि-मुनियों, साधु-संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की पवित्र भूमि है। हमें धर्म को केवल आस्था के रूप में नहीं, बल्कि कर्तव्य के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय यहीं व्यतीत किया। दंडकारण्य के रूप में विख्यात अबूझमाड़ का विशाल जंगल कभी नक्सल समस्या से प्रभावित क्षेत्र था, जो आज तेजी से नक्सलवाद से मुक्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के अंतर्गत अब तक 39 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की निशुल्क तीर्थयात्रा कराई जा चुकी है। मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा दर्शन योजना के अंतर्गत भी अब तक पांच हजार से अधिक श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के पांच शक्तिपीठों के विकास का कार्य भी निरंतर प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव क्षेत्र के समग्र विकास के लिए स्वदेश दर्शन योजना के तहत 148 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है तथा रतनपुर के विकास के लिए भी प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। उन्होंने कहा कि राजिम कल्प-कुंभ का आयोजन भी इस बार भव्य स्वरूप में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रीरामजानकी मंदिर का भव्य स्वरूप जनसहभागिता का अनुपम उदाहरण है। लगभग 22 हजार परिवारों के सहयोग से लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह मंदिर बीते 10 वर्षों की तपस्या का परिणाम है। राजस्थान के शिल्पियों द्वारा पारंपरिक शैली में बिना सीमेंट और छड़ के उपयोग के निर्मित इस मंदिर की आयु लगभग एक हजार वर्ष आंकी गई है। उन्होंने मंदिर निर्माण में सहयोग करने वाले सभी दानदाताओं और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की आस्था और एकजुटता का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने धर्मध्वजा रोहण को ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल परंपरागत ध्वजारोहण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में धर्म, अध्यात्म और सामाजिक समरसता की स्थापना का प्रतीक है। 
केबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि हम सभी के लिए सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा की स्थापना देखना अलौकिक अनुभव है। कार्यक्रम में सिरकट्टी आश्रम के महामंडलेश्वर महंत संत गोवर्धन शरण व्यास ने स्वागत उद्बोधन में सिरकट्टी आश्रम की स्थापना और महत्व पर जानकारी दी। 
इस अवसर पर सांसद रूपकुमारी चौधरी, विधायक सर्वश्री रोहित साहू, दीपेश साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप, अनेक जनप्रतिनिधि, देश के विभिन्न स्थानों से आए संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे।



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