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बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में हो रहे हैं कामयाब: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

15-Mar-2026
रायपुर,। ( शोर संदेश ) हमारी सरकार जनजातीय समाज के भविष्य को संवारने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से अब हम बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में कामयाब हो रहे हैं। बस्तर पिछले लगभग 40 वर्षों से विकास से अछूता रहा और लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित था, लेकिन अब परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश जल्द ही नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे जनजातीय समाज में अमन-चैन के साथ-साथ खुशहाली और समृद्धि का नया दौर आएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘आदि परब’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘आदि परब’ की थीम ‘परंपरा से पहचान तक’ रखी गई है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा मंच देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकारों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की 43 विभिन्न जनजातियों के लोग एक मंच पर एकत्रित हुए, जो हमारी सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने इस सफल आयोजन के लिए विभाग की पूरी टीम को बधाई दी तथा ‘आदि परब’ चित्रकला और परिधान को मिले ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ पुरस्कार के लिए भी शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से टीआरटीआई परिसर में 5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय बाहुल्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में इस प्रकार के आयोजन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की व्यापकता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में पारंपरिक चित्रकला, शिल्प, हाट-बाजार और पारंपरिक व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। हमारी लोक परंपराएँ ही हमारी असली पहचान हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां स्थित दो संग्रहालयों में से एक शहीद वीर नारायण सिंह जी की जीवनगाथा को समर्पित है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के पहले डिजिटल ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ का लोकार्पण किया था, जो हम सभी के लिए गर्व की बात है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे जनजातीय संग्रहालय में जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कारों सहित जनजातीय जीवन के विभिन्न अवसरों पर पहने जाने वाले पारंपरिक परिधानों और रीति-रिवाजों का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया गया है। आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को सहेजना होगा।
उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि आज देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे नेतृत्व के कारण आदिवासी समाज का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के लिए आदिवासी समाज की बेटी  द्रौपदी मुर्मु को अवसर मिला, जो पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ में चिन्हित 6 हजार 691 बसाहटों का कायाकल्प किया जा रहा है। अति पिछड़ी जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को सड़क, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना के तहत प्रदेश की 2300 से अधिक पीवीटीजी बसाहटों के 56 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना (आपका अच्छा गांव) हमारी सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के जनजातीय गांवों तक सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही इन क्षेत्रों के लोगों को अब सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।
इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद जनजातीय समाज के गौरव के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। इनमें शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय और जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित संग्रहालय प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि यह देश का ऐसा डिजिटल संग्रहालय है जिसका अध्ययन करने देश और विदेश से लोग आ रहे हैं। संग्रहालय में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले जनजातीय नायकों और आंदोलनों की जीवंत प्रस्तुति की गई है, जो समाज के गौरव को बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि सरकार 3357 आश्रम-छात्रावास, 17 प्रयास विद्यालय और 75 एकलव्य विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय वर्ग के भविष्य को संवारने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने एफआरए के तहत 4 लाख 25 हजार 425 हितग्राहियों को 3.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पट्टा प्रदान किया है।
इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने ‘परंपरा से पहचान तक’ की थीम पर आयोजित ‘आदि परब’ के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हमने नक्सलवाद की पीड़ा को नजदीक से देखा है और अब डबल इंजन की सरकार के दृढ़ संकल्प से नक्सलवाद समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त कराने में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने ‘आदि परब’ के माध्यम से जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को दुनिया तक पहुंचाने के इस प्रयास की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले जनजातीय समाज के अंकित साकिनी और डायमंड ध्रुव को सम्मानित किया। साथ ही प्रयास आवासीय विद्यालय के उन विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया जिनका चयन NIT और IIT में हुआ है। मुख्यमंत्री ने ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए चेक भी प्रदान किए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने सरगुजा क्षेत्र के जनजातीय इतिहास पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया तथा पारंपरिक वेशभूषा में सजे जनजातीय युवाओं द्वारा प्रस्तुत अटायर शो का आनंद लिया।
कार्यक्रम में विधायक प्रबोध मिंज एवं इन्द्रकुमार साहू, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ जनजातीय आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मण्डावी, छत्तीसगढ़ राज्य औषधि एवं पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, आदिम विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, आयुक्त डॉ. सारंश मित्तर, टीआरटीआई की संचालक हिना नेताम सहित बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के गणमान्यजन उपस्थित थे।

भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा, प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

14-Mar-2026
रायपुर । ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और अब हमारा राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हरित सम्मेलन की उपयोगिता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसके माध्यम से पॉलिसी मेकिंग से जुड़े लोग, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थान, शोधकर्ता और पर्यावरणविद एक मंच पर आकर महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु संकट लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह आवश्यक है कि हम पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर केवल चिंतन ही न करें, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतारें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार हमेशा से विरासत के साथ विकास की पक्षधर रही है। पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली हमारी हजारों वर्षों पुरानी परंपरा रही है और उसकी रक्षा के लिए सरकार नीतिगत स्तर पर लगातार ठोस कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की नीतियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों की जागरूकता और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी का परिणाम है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य में सोलर रूफटॉप योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को ऊर्जादाता बनाया जा रहा है और बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं उभर रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए संसाधनों का उपयोग करते समय पर्यावरण और धरती के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है और लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है। साय ने बताया कि वनांचल में वृक्षों को सरना (देवता) के रूप में पूजा जाता है और सरना को राजस्व रिकॉर्ड में भी देवस्थल के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव और उसके संरक्षण का भाव जनजातीय समाज से सहज ही सीखा जा सकता है।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में हरित पहल पर विशेष जोर दिया गया है और इस दिशा में कार्य करने वाले उद्योगों को विशेष रियायतें भी दी जा रही हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट के मंच से प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने तथा इसकी शुरुआत स्वयं से करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों के संकलन पर आधारित पुस्तक “एब्स्ट्रेक्ट”, सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं पर आधारित “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” तथा जनजातीय कहानियों और परम्पराओं पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” का विमोचन किया।
इस अवसर पर मेघालय के लोकायुक्त सी पी मारक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, पीसीसीएफ व्ही श्रीनिवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष शंखदीप चौधरी, विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, प्रबुद्धजन, स्कॉलर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किश्त जारी: छत्तीसगढ़ के 24 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 498.83 करोड़

14-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश )  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम की राजधानी गुवाहाटी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किश्त जारी की। इस दौरान देशभर के 9 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग 18 हजार 640 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के 24 लाख 71 हजार किसानों के खातों में 498.83 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित प्रधानमंत्री किसान निधि सम्मान योजना राशि अंतरण एवं पीएम किसान उत्सव दिवस कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन प्रदेश के किसान भाइयों और बहनों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों को हर वर्ष तीन किश्तों में कुल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जो किसानों के परिश्रम और उनके योगदान के सम्मान का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों को अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 11 हजार 283 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सरकार बनने के बाद सबसे पहले किसानों को बोनस राशि प्रदान की गई और 13 लाख किसानों के खातों में 3 हजार 716 करोड़ रुपये अंतरित किए गए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में भुगतान सुनिश्चित किया गया। इसके साथ ही कृषक उन्नति योजना के तहत 25 लाख से अधिक किसानों के खातों में 10 हजार 324 करोड़ रुपये की राशि होली से पहले अंतरित की गई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिंचाई के लिए कृषि पंपों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके लिए इस वर्ष के बजट में 5 हजार 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से दो वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये की सिंचाई 
परियोजना भी शुरू की गई है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। उन्होंने किसानों से धान के साथ-साथ अन्य फसलों की खेती की ओर भी ध्यान देने की अपील की, जिससे पानी की बचत होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। धरसीवां विधायक अनुज शर्मा ने भी किसानों को संबोधित करते हुए बधाई दी।
इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, कृषि विभाग के संचालक राहुल देव,  छत्तीसगढ़ बीज विकास निगम के एमडी अजय अग्रवाल, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

बिजली उपभोक्ताओं की पीड़ा को दूर करेगी समाधान योजना : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

13-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय स्थित सभागार से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया और अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी भी अंतरित की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान योजना के माध्यम से लंबे समय से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले प्रदेश के निम्न एवं मध्यम आय वर्ग तथा कृषि उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल की गई है। योजना के तहत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपए की राहत दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे आजादी के बाद से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हमारे अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया राशि बढ़ गई थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इस परेशानी को समझते हुए समाधान योजना लागू की है। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और अब तक लगभग 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सोलर पैनल वेंडर के रूप में कार्य किया जाना एक सकारात्मक पहल है।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और घरेलू बिजली के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की।  
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को समाधान योजना के लिए बधाई देते हुए निर्देश दिए कि शिविर लगाकर और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को समाधान योजना से जोड़ा जाए।
उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को विद्युत देयक जमा करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में अधिभार की राशि में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है।
योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा और पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा। शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा और आगामी माह में कोई अधिभार नहीं लगेगा। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी।
इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।

 


मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SCR) की पहली बैठक आयोजित

12-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में विधानसभा परिसर स्थित उनके कार्यालय में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (स्टेट कैपिटल रीजन – SCR) की पहली बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्राधिकरण के उद्देश्य, कार्यप्रणाली, गतिविधियों तथा राजधानी क्षेत्र के समग्र और योजनाबद्ध विकास की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री साय ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण की परिकल्पना शहर की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार-वाणिज्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की पहली बैठक अत्यंत सार्थक रही है और विभिन्न विषयों पर हुई विस्तृत चर्चा के सकारात्मक परिणाम आने वाले समय में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजधानी रायपुर और आसपास के शहर तेजी से विकसित होते हुए एक बड़े शहरी क्षेत्र का रूप ले रहे हैं, इसलिए महानगरों की तर्ज पर इनके संतुलित और योजनाबद्ध विकास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्टेट कैपिटल रीजन की घोषणा से जनता की अपेक्षाएँ भी बढ़ी हैं और इन अपेक्षाओं को पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित योजना और समयसीमा के अनुरूप पूरे किए जाएं तथा प्रगति की नियमित रूप से उच्चस्तरीय समीक्षा सुनिश्चित की जाए।
बैठक में बताया गया कि राजधानी रायपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों को स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें रायपुर, दुर्ग-भिलाई, नवा रायपुर अटल नगर और आसपास के क्षेत्र शामिल होंगे। यह क्षेत्र बड़े महानगरों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा और भविष्य में छत्तीसगढ़ के विकास का एक प्रमुख ग्रोथ इंजन बनेगा।
बैठक में राजधानी क्षेत्र में क्षेत्रीय मोबिलिटी और लॉजिस्टिक्स के विकास, मेट्रो संचालन के लिए टेक्नो-इकोनॉमिक फिजिबिलिटी स्टडी, सर्वेक्षण कार्यों के संचालन तथा इसके लिए विशेषज्ञ सलाहकारों की नियुक्ति पर विचार किया गया। साथ ही प्राधिकरण के प्रशासकीय और वित्तीय अधिकारों के प्रत्यायोजन, ऑडिट सेवाओं के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट की नियुक्ति और प्लानिंग प्रभाग के लिए विशेषज्ञ सलाहकारों की सेवाएं लेने के प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।
बैठक में राजधानी क्षेत्र विकास एवं निवेश योजना तैयार करने की कार्ययोजना पर भी विचार किया गया। इसके अंतर्गत निवेश क्षेत्रों का विधिवत चिन्हांकन, आवश्यक सर्वेक्षण, अनुसंधान एवं अध्ययन तथा चरणबद्ध रूप से परियोजनाओं के क्रियान्वयन की रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही राजधानी क्षेत्र में भूमि विकास और आबंटन की प्रक्रिया को सरल बनाने के संबंध में भी आवश्यक निर्देश जारी करने पर सहमति बनी। बैठक में प्राधिकरण की प्रारंभिक गतिविधियों के लिए 27 करोड़ रुपये के प्रावधान की जानकारी भी दी गई।
बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंकित आनंद, नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., एनआरडीए के सीईओ चंदन कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि भौगोलिक दृष्टि से देश के मध्य में स्थित छत्तीसगढ़ व्यापार, वाणिज्य और उद्योग के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। स्टेट कैपिटल रीजन के विकास से राजधानी और आसपास के शहरों में योजनाबद्ध शहरी विस्तार, बेहतर परिवहन कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल

12-Mar-2026
 रायपुर,। ( शोर संदेश )  महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और सशक्तिकरण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना (PMMVY) के क्रियान्वयन की फरवरी 2026 की स्टेट-वाइज राष्ट्रीय रैंकिंग में छत्तीसगढ़ ने बड़े राज्यों की श्रेणी में देश में पहला स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया है। राज्य ने अन्य बड़े राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की है।
जारी रैंकिंग के अनुसार छत्तीसगढ़ ने 93.37 प्रतिशत नामांकन, 83.87 प्रतिशत स्वीकृति दर और 93.95 प्रतिशत शिकायतों के त्वरित समाधान के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वहीं 30 दिनों से अधिक लंबित प्रकरणों की दर मात्र 7.07 प्रतिशत और लंबित शिकायत दर 4.96 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो योजना के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ ने पिछले माह की तुलना में 6 स्थानों की छलांग लगाकर पहला स्थान प्राप्त किया है।
इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मैदानी अमले को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है और छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान इस दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का प्रमाण है।
महिला एवं बाल विकास  मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि को राज्य के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए विभागीय टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के कुशल मार्गदर्शन और दूरदर्शी नेतृत्व के कारण ही छत्तीसगढ़ आज देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों-कर्मचारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आपसी समन्वय, प्रतिबद्धता और समयबद्ध कार्यशैली के परिणामस्वरूप ही राज्य यह मुकाम हासिल कर पाया है।
मंत्री राजवाड़े ने विश्वास व्यक्त किया कि विभाग भविष्य में भी इसी ऊर्जा और समर्पण के साथ कार्य करते हुए इस प्रथम स्थान को बनाए रखेगा तथा प्रदेश की प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला तक योजना का लाभ समय पर पहुंचाएगा। उन्होंने योजना के क्रियान्वयन की जानकारी देते हुए बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक प्रदेश में 1,86,586 गर्भवती महिलाओं का प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत पंजीकरण किया जा चुका है। राज्य सरकार द्वारा अब तक 72 करोड़ 24 लाख 89 हजार रुपये की राशि सीधे पात्र हितग्राही महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिली है और छत्तीसगढ़ देश के सामने एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

इंद्रावती नदी पर बैराज की स्वीकृति पर जगदलपुर नगर निगम के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

11-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से यहाँ विधानसभा भवन स्थित उनके कार्यालय में जगदलपुर के महापौर संजय पाण्डेय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। 
प्रतिनिधिमंडल ने इंद्रावती नदी पर नए बैराज निर्माण की स्वीकृति मिलने पर मुख्यमंत्री को पुष्प गुच्छ भेंट कर आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इस नए बैराज के माध्यम से जगदलपुर शहर में पेयजल आपूर्ति सुचारू रूप से हो पाएगी। 
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर में कई महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। क्षेत्र में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है और धीरे-धीरे शांति स्थापित हो रही है, जिससे विकास कार्यों को गति मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी दिशा में मटनार और देऊरगांव सिंचाई परियोजनाओं को भी सहमति दी गई है। उन्होंने बताया कि पानी के कम अपव्यय और किसानों तक बेहतर ढंग से पानी पहुंचाने के लिए सरकार पाइपलाइन के माध्यम से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की योजना पर भी कार्य कर रही है।
उल्लेखनीय है कि बजट में लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से इंद्रावती नदी के महादेव घाट पर बैराज निर्माण की घोषणा की गई है। इस बैराज के निर्माण से जगदलपुर शहर को पेयजल की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर नगर निगम के सभापति खेम सिंह देवांगन,निर्मल पाणिग्रही, सुरेश गुप्ता,योगेन्द्र पाण्डेय, राणा घोष सहित प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य उपस्थित थे।





 

ग्रामीण विकास में सरपंचों की है महत्वपूर्ण भूमिका – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

11-Mar-2026
रायपुर,। ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित उनके कार्यालय के सभा कक्ष में जशपुर जिले से चार दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर आए सरपंचों के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।मुख्यमंत्री साय ने बड़ी आत्मीयता से सरपंचों से भेंट कर उनके क्षेत्र की स्थिति तथा विकास कार्यों के बारे में जानकारी ली। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्रामीण विकास में सरपंचों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं पंच के रूप में जनसेवा का कार्य प्रारंभ किया था। पंच रहने के बाद वे सरपंच बने और आगे चलकर विधायक तथा सांसद के रूप में भी जनता की सेवा करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यदि किसी सरपंच में अपने गांव और पंचायत के विकास के लिए समर्पण और जज्बा हो, तो वह अपने क्षेत्र में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर अधोसंरचना विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की बड़ी जिम्मेदारी सरपंचों के कंधों पर होती है। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को नई गति मिल रही है। उन्होंने सरपंचों से आग्रह किया कि वे योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, ताकि ग्रामीण जनता को उनका पूरा लाभ मिल सके।उन्होंने कहा कि समर्पित नेतृत्व और योजना के सही क्रियान्वयन  से कोई भी पंचायत आदर्श पंचायत बन सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास के अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने सरपंचों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने पंचायत क्षेत्र की समस्याओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर विभागीय मंत्रियों और अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में रहें तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि अध्ययन भ्रमण का उद्देश्य अन्य क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों को देखकर सीखना और उन्हें अपने गांवों में लागू करना है।
उल्लेखनीय है कि जशपुर जिले से चार दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर आए 35 सरपंचों का दल आज विधानसभा की कार्यवाही देखने विधानसभा पहुंचा था। भ्रमण के दौरान यह दल दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत पतोरा तथा धमतरी जिले के ग्राम पंचायत सांकरा में हुए विकास कार्यों का अवलोकन भी करेगा।
इस अवसर पर विधायक गोमती साय,रायमुनि भगत सहित जशपुर जिले से आए सरपंचगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने की सौजन्य मुलाकात

10-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने सौजन्य मुलाकात की।
मुख्यमंत्री साय ने लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद के उच्च सदन राज्यसभा में छत्तीसगढ़ की  जनभावनाओं, विकास से जुड़े मुद्दों तथा आमजन की अपेक्षाओं को सशक्त रूप से रखने में लक्ष्मी वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।  
इस अवसर पर विधायक किरण सिंह देव, विधायक अनुज शर्मा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।



 

महतारी वंदन योजना से मातृशक्ति को मिला आर्थिक संबल : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

09-Mar-2026
रायपुर,। ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर के लाल बहादुर शास्त्री मिनी स्टेडियम में आयोजित वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026 में प्रदेश की माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव है और राज्य सरकार का हर निर्णय महिलाओं के कल्याण, सम्मान और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर लिया जा रहा है। 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर महतारी वंदन योजना की 25वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 69 लाख 48 हजार महिलाओं के खातों में 641 करोड़ 58 लाख रुपये अंतरित किए। इसके साथ ही इस योजना के अंतर्गत अब तक महिलाओं को 16 हजार 237 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि माताओं-बहनों के आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाला जनकल्याणकारी अभियान बन चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें 10 मार्च 2024 का वह दिन याद है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महतारी वंदन योजना का शुभारंभ किया था। उसी समय यह संकल्प लिया गया था कि प्रदेश की प्रत्येक पात्र महिला के खाते में हर महीने निर्धारित तिथि पर एक हजार रुपये की राशि पहुंचेगी। पिछले 25 महीनों से यह संकल्प लगातार पूरा किया जा रहा है और इस किश्त के साथ अब तक प्रत्येक हितग्राही महिला को 25 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाया है।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि महतारी वंदन योजना को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए राज्य सरकार ने इस वर्ष के बजट में 8 हजार 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि यह राशि माताओं-बहनों के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला रही है। महिलाएं इस सहायता का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, घरेलू जरूरतों, बचत और स्वरोजगार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों में आर्थिक स्थिरता बढ़ रही है और समाज के समग्र विकास को नई दिशा मिल रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की माताएं-बहनें केवल परिवार का संचालन ही नहीं करतीं, बल्कि वे उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधक भी होती हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का महिलाओं ने अत्यंत समझदारी से उपयोग किया है। किसी ने बेटियों के भविष्य के लिए बचत की, किसी ने स्वरोजगार शुरू किया, किसी ने परिवार के छोटे व्यवसाय को बढ़ाया, तो किसी ने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च कर घर की स्थिति को मजबूत बनाया। यह इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है कि महिलाओं ने इसे स्वयं और परिवार की उन्नति का माध्यम बनाया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार ने 15 हजार आवास स्वीकृत किए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर सहित दूरस्थ अंचलों में शांति, विकास और विश्वास का नया वातावरण बन रहा है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार अनेक स्तरों पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में 21 हजार 754 बेटियों के विवाह कराए गए हैं। महिलाओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और गरिमापूर्ण कार्यस्थल उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 368 महतारी सदन बनाने की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 137 महतारी सदन का निर्माण पूर्ण हो चुका है। ग्राम पंचायत स्तर पर इनका उपयोग महिलाओं की बैठकों, प्रशिक्षण, विपणन और सामुदायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार पहल कर रही है। प्रदेश में अब तक 8 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है और अब सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 10 लाख लखपति दीदी बनाने का है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल सहभागी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई नेतृत्वकारी शक्ति बनकर उभर रही हैं। इसी दिशा में महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से  रेडी टू ईट फूड निर्माण का कार्य पुनः प्रारंभ कराया गया है और इसे चरणबद्ध रूप से प्रदेश के शेष जिलों में भी लागू किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर महिलाओं को व्यापक रोजगार के अवसर मिल सकें।
मुख्यमंत्री ने बस्तर क्षेत्र के संदर्भ में कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पुनः प्रारंभ की गई हैं, बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू कराया गया है, बिजली पहुंची है, मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं तथा स्वच्छ पेयजल और बेहतर सड़कों की सुविधा दूरस्थ बसाहटों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि केवल सड़कों का निर्माण ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री बस सेवा योजना के माध्यम से बस्तर और सरगुजा अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा भी मजबूत की गई है, जिससे लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में आसानी हो रही है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धमतरी की नीतू साहू, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की मिथलेश चतुर्वेदी, जांजगीर-चांपा की सरस्वती केंवट, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की अनीता साहू तथा सरगुजा की निधि जायसवाल से संवाद किया। 
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की मिथलेश चतुर्वेदी ने बताया कि पति के निधन के बाद उनके सामने परिवार चलाने की बड़ी चुनौती थी। शासन से मिली सहायता राशि और महतारी वंदन योजना के संबल से उन्होंने ई-रिक्शा खरीदकर आजीविका का नया साधन शुरू किया, जिससे अब वे अपने परिवार का भरण-पोषण आत्मसम्मान के साथ कर पा रही हैं।
धमतरी की नीतू साहू ने बताया कि मजदूरी से होने वाली सीमित आय के कारण बेटियों के भविष्य के लिए बचत करना कठिन था, लेकिन महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से उन्होंने अपनी दोनों बेटियों के नाम सुकन्या समृद्धि योजना के खाते खुलवाकर हर महीने बचत शुरू की है।
इसी तरह सरगुजा की निधि जायसवाल ने महतारी वंदन योजना से मिली राशि को बचाकर “निधि मेकओवर” नाम से ब्यूटी पार्लर शुरू किया, जबकि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की अनीता साहू ने सिलाई का कार्य प्रारंभ कर “अनीता सिलाई सेंटर” स्थापित किया। जांजगीर-चांपा की सरस्वती केंवट ने भी इस राशि को अपने परिवार के व्यवसाय में लगाकर आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह अनुभव अत्यंत सुखद है कि महतारी वंदन योजना की राशि महिलाओं के हाथों में पहुंचकर परिवारों की तरक्की का आधार बन रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की माताएं-बहनें दूरदर्शिता, परिश्रम और आत्मविश्वास की अद्भुत मिसाल हैं। जब महिलाओं को अवसर और संबल मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज को आगे बढ़ाने की शक्ति बन जाती हैं।
इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से ‘लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट’ का शुभारंभ भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से पुनर्वासित महिलाओं को जोड़ा गया है, जिन्हें कृषि महाविद्यालय के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये महिलाएं मिलेट आधारित खाद्य सामग्री तैयार कर उसका विक्रय करेंगी, जिससे उन्हें सतत आजीविका और आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पशुपालन, सूक्ष्म उद्यम, प्रसंस्करण और स्थानीय विपणन से जोड़कर विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बजट में भी प्रावधान किए गए हैं।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार गठन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को लागू करने की दिशा में गंभीरता से कार्य किया गया और उसी क्रम में महतारी वंदन योजना शुरू की गई। उन्होंने कहा कि इस योजना से राज्य की लगभग 70 लाख माताएं-बहनें लाभान्वित हो रही हैं। यह योजना महिलाओं को घरेलू जरूरतों की पूर्ति के साथ आर्थिक संबल भी प्रदान कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ महिला कोष तथा सक्षम योजना के माध्यम से भी महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने में सहयोग दे रही है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने  कहा कि महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रत्येक माह नियमित रूप से सहायता राशि प्रदान किया जाना सरकार की वचनबद्धता का प्रमाण है।विधायक जगदलपुर किरण देव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से माताएं-बहनें आज घर-परिवार को खुशहाल बनाने के साथ प्रदेश के विकास में भी अहम योगदान दे रही हैं। 
कार्यक्रम के आरंभ में महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने विभागीय योजनाओं की जानकारी दी ।
कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की सफलता की कहानियों पर आधारित एक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। महतारी वंदन योजना की हितग्राही महिलाओं ने मुख्यमंत्री को फलों की टोकरी तथा धुरवा तुवाल भेंटकर योजना के लिए आभार व्यक्त किया। 
इस अवसर पर दंतेवाड़ा विधायक चैतराम आटामी, बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, महापौर संजय पांडेय, राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, राज्य बीज विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक बस्तर के अध्यक्ष दिनेश कश्यप, बस्तर संभाग के कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी सुंदरराज पी., महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव  सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।
 



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