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नारी के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन से ही बनेगा समृद्ध छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

30-Aug-2026
रायपुर 30 अगस्त 2026 जब नारी शक्ति आगे बढ़ती है तो उसके साथ परिवार, समाज और पूरा देश आगे बढ़ता है। महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और आर्थिक स्वावलंबन प्रदान करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। हमारी सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की हर बेटी को अपने सपने पूरे करने का अवसर मिले और हर महिला आत्मविश्वास एवं आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़े। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर के अटल बिहारी वाजपेयी सभागृह में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा आयोजित ‘नारी शक्ति सम्मान समारोह’ को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर चिकित्सा, शिक्षा, खेल, साइबर सुरक्षा, पत्रकारिता, कला एवं संस्कृति, कृषि, महिला उद्यमिता, सामाजिक सेवा और महिला सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया। उन्होंने नारी शक्ति सम्मान समारोह पर आधारित ब्रोशर का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित महिलाओं को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन महिलाओं ने अपने परिश्रम, प्रतिभा, साहस और संकल्प से अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं हैं, बल्कि उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा हैं, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं का सम्मान वास्तव में उस नारी शक्ति का सम्मान है, जो परिवार को संस्कार देती है, समाज को दिशा देती है और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज खेती-किसानी से लेकर उद्यमिता, शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा और आधुनिक तकनीक तक हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। लक्ष्मी-नारायण, उमा-महेश्वर, सिया-राम और राधा-कृष्ण जैसे संबोधन हमारी उस सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं, जिसमें नारी को शक्ति, करुणा, सृजन और संस्कार का आधार माना गया है। राज्य सरकार इसी भावना को योजनाओं और नीतियों के माध्यम से धरातल पर उतार रही है।
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिम्मेदारी मिली है। उनका सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन का अनुभव, कानून की समझ और उच्च शिक्षा इस दायित्व के निर्वहन में उपयोगी सिद्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. ममता साहू के नेतृत्व में राज्य महिला आयोग प्रदेश की माताओं-बहनों को न्याय दिलाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और पीड़ित महिलाओं तक कानूनी सहायता पहुंचाने में प्रभावी भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि महिला आयोग की भूमिका केवल शिकायतों के निराकरण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आयोग गांवों, कस्बों, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचे तथा महिलाओं को उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करे। महिलाओं को यह भरोसा होना चाहिए कि किसी भी कठिन परिस्थिति में शासन और उसकी संस्थाएं संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में नारी शक्ति को नई पहचान, सम्मान और आगे बढ़ने के अभूतपूर्व अवसर मिले हैं। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने बेटियों के प्रति सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में भी ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का आसीन होना पूरे देश की नारी शक्ति के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की सोच है कि विकसित भारत की यात्रा महिलाओं के नेतृत्व और उनकी सक्रिय भागीदारी के बिना पूरी नहीं हो सकती। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी संकल्प के साथ प्रदेश की मातृशक्ति को विकास की मुख्यधारा में और अधिक मजबूती से जोड़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक स्वावलंबन उनके सशक्तिकरण की सबसे मजबूत नींव है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना की 31 किस्तें महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि यह राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता को मजबूत करने का माध्यम बनी है। गांवों की महिलाएं इस राशि का उपयोग अपनी छोटी-छोटी आवश्यकताओं, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य तथा स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों में कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बहनों के खातों में सहायता राशि समय से पहले अंतरित की। प्रदेश की माताओं-बहनों की खुशियां और उनकी आवश्यकताएं सरकार की प्राथमिकता हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं आज स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। सिलाई-कढ़ाई, कृषि एवं वनोपज आधारित गतिविधियों, लघु उद्योग और स्वरोजगार के साथ महिलाएं अब ड्रोन संचालन जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं।
प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक आर्थिक परिवर्तन का प्रमाण है। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं को कौशल, पूंजी, बाजार और तकनीक से जोड़कर उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यह वर्ष छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देने के साथ उनके लिए नए अवसरों के सृजन का भी वर्ष है।
उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा से लेकर महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन तक सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। सरस्वती साइकिल योजना के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ पहल के तहत प्रदेश में 6 हजार 671 बालिका शौचालयों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, ताकि बेटियों को विद्यालयों में बेहतर और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, बैठक और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश में 481 महतारी सदनों का निर्माण किया जा रहा है। हाल ही में जशपुर प्रवास के दौरान तीन महतारी सदनों का लोकार्पण भी किया गया है। रेडी-टू-ईट कार्यक्रम का संचालन भी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक अधिकार को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उनके नाम पर संपत्ति पंजीयन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। महिलाओं के नाम जमीन और संपत्ति होने से उनका आर्थिक आधार मजबूत होता है तथा परिवार में उनकी भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में दी जा रही रियायतों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और बड़ी संख्या में संपत्तियों का पंजीयन महिलाओं के नाम पर हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है। इसके लिए समाज की सोच और व्यवस्था दोनों में सकारात्मक परिवर्तन जरूरी है। हमारी बेटियों को अच्छी शिक्षा मिले, युवतियों को रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिलें, महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान मिले तथा आवश्यकता पड़ने पर त्वरित न्याय मिले - सरकार इसी समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि जब एक बेटी पढ़ती है तो एक पीढ़ी शिक्षित होती है और जब एक महिला आत्मनिर्भर बनती है तो पूरा परिवार आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है। नारी शक्ति के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन से ही समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार किया जा सकता है।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि महिला आयोग पीड़ित और जरूरतमंद महिलाओं के लिए आशा, विश्वास और न्याय का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में आयोग महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण और उनके उत्थान के लिए प्रभावी कार्य करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति में मातृशक्ति को विशेष स्थान प्राप्त है। नारी के सम्मान और सशक्तिकरण के बिना समाज के समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रत्येक माता-पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल करें। आज यह सुखद अवसर है कि महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू के पिता कृपाराम साहू भी अपनी पुत्री को महत्वपूर्ण दायित्व संभालते हुए देख रहे हैं।उन्होंने डॉ. ममता साहू को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में महिला आयोग प्रदेश की माताओं-बहनों के सशक्तिकरण और पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा।
उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना न परिवार की प्रगति संभव है और न ही समाज एवं राष्ट्र का समग्र विकास। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ भी सशक्त, खुशहाल और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रजत उत्सव दिवस मनाया जा रहा है। यह प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा की दिशा में आयोग की लंबी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर और सशक्त बन रही हैं। महतारी वंदन योजना सहित विभिन्न योजनाओं ने महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वाभिमान को नई मजबूती दी है।
कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक मोतीलाल साहू, रायपुर महापौर मीनल चौबे, अंबिकापुर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के अध्यक्षगण, संतजन सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रबुद्ध महिलाएं उपस्थित थीं।

‘मन की बात’ देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचारों और प्रेरक प्रयासों को देती है राष्ट्रीय पहचान : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

30-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश) । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित निरंजन धर्मशाला में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी का श्रवण किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री  मोदी का देश के 140 करोड़ नागरिकों से आत्मीय संवाद का सशक्त माध्यम है। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे नवाचारों, प्रेरक प्रयासों और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले लोगों की उपलब्धियों को पूरे देश के सामने रखते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देशवासियों को प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को प्रसारित होने वाले ‘मन की बात’ कार्यक्रम की प्रतीक्षा रहती है। प्रधानमंत्री इसमें ऐसे अनेक विषयों और व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हैं, जिनके बारे में सामान्यतः देश के लोगों को जानकारी नहीं मिल पाती। इससे जहां अच्छे कार्य करने वाले लोगों का उत्साह बढ़ता है, वहीं उनके प्रयास लाखों देशवासियों के लिए प्रेरणा बनते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे देश के दूरस्थ गांवों और छोटे-छोटे क्षेत्रों में अनेक लोग बिना किसी प्रचार और स्वार्थ के समाज तथा राष्ट्रहित में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। कोई पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहा है, कोई स्वच्छता के लिए कार्य कर रहा है, तो कोई स्थानीय संसाधनों के माध्यम से नवाचार कर अपने क्षेत्र में बदलाव ला रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ‘मन की बात’ के माध्यम से ऐसे सामान्य लोगों के असाधारण कार्यों को राष्ट्रीय पहचान देते हैं। इससे देश में सकारात्मकता और जनभागीदारी की भावना मजबूत होती है तथा दूसरे लोगों को भी कुछ नया और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है।
 मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आज ‘नशामुक्त युवा, विकसित भारत’ के संकल्प को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। युवा शक्ति विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में युवाओं को नशे से दूर रखना परिवार, समाज और राष्ट्र सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा केवल किसी एक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि उसके दुष्प्रभाव पूरे परिवार और समाज को झेलने पड़ते हैं। स्वस्थ, समर्थ और ऊर्जावान युवा पीढ़ी ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकती है। उन्होंने प्रदेशवासियों से नशामुक्ति के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाने और युवाओं को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के प्रति देशवासियों के अभूतपूर्व उत्साह का भी उल्लेख किया। अभियान के अंतर्गत 8 करोड़ से अधिक देशवासियों ने तिरंगे के साथ अपनी सेल्फी अपलोड की। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि राष्ट्रध्वज के प्रति देशवासियों के सम्मान, गौरव और गहरे भावनात्मक जुड़ाव की अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर ‘हर घर तिरंगा’ आज जन-जन का अभियान बन चुका है। ऐसे अभियान राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने के साथ प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका और कर्तव्यों का स्मरण कराते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की भी चर्चा की। रेहड़ी-पटरी और छोटे व्यवसायों से जुड़ी महिलाओं को योजना के माध्यम से अपने कारोबार को आगे बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं हैं और देशभर में करीब 35 लाख महिलाएं इससे जुड़कर अपने छोटे व्यवसायों को नई गति दे रही हैं। आर्थिक रूप से सशक्त महिला न केवल अपने परिवार को मजबूत बनाती है, बल्कि समाज और देश की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वच्छता के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है। स्वच्छता में स्थायी परिवर्तन तभी संभव है, जब यह केवल सरकारी अभियान न रहकर प्रत्येक नागरिक की आदत और जिम्मेदारी बने।
उन्होंने कहा कि जब किसी गांव, शहर अथवा क्षेत्र के लोग स्वयं अपने परिवेश को स्वच्छ रखने का संकल्प लेते हैं, तो उसका प्रभाव केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उस स्थान की पहचान और वहां के लोगों के जीवन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक बदलाव आता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घर, मोहल्ले, गांव, शहर और आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज भारत की बेटियां अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास से हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रही हैं। उनकी आकांक्षाओं की उड़ान अब धरती से अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में मिशन शक्ति सैट जैसे प्रेरक प्रयास का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से भारत सहित विभिन्न देशों की हजारों छात्राओं को सैटेलाइट टेक्नोलॉजी को समझने, सीखने और नवाचार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए विशेष गौरव का विषय है कि प्रदेश की महिमा राजपूत भी इस महत्वपूर्ण मुहिम का हिस्सा बनी हैं। उन्होंने महिमा राजपूत को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, खेल और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। उनकी उपलब्धियां प्रदेश की दूसरी बेटियों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने के लिए प्रेरित करती हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ की विभिन्न कड़ियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनेक अवसरों पर छत्तीसगढ़ और यहां के उल्लेखनीय प्रयासों का उल्लेख किया है। बस्तर ओलंपिक से लेकर मल्हार में मिले प्राचीन ताम्रपत्रों और काले हिरण के संरक्षण तक, छत्तीसगढ़ की विशिष्टताओं और उपलब्धियों को प्रधानमंत्री ने देशवासियों के सामने रखा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ के नवाचारों, संस्कृति, विरासत और सकारात्मक प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर स्थान दिया जाना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गौरव की बात है। इससे छत्तीसगढ़ के अच्छे कार्यों को देशभर में पहचान मिलने के साथ प्रदेश के लोगों का उत्साह भी बढ़ता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यह देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे सकारात्मक कार्यों को एक सूत्र में जोड़ती है। यह कार्यक्रम नागरिकों को स्वच्छता, आत्मनिर्भरता, नवाचार, समाजसेवा और राष्ट्रहित से जुड़े कार्यों के लिए प्रेरित करने के साथ जनभागीदारी की भावना को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री मोदी का यह सतत संवाद देशवासियों में कर्तव्यबोध जगाकर विकसित भारत के निर्माण में अपना सकारात्मक योगदान देने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद  लक्ष्मी वर्मा, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक मोतीलाल साहू एवं पुरंदर मिश्रा, संतजन, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

 


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना का किया शुभारंभ

28-Aug-2026
जशपुर,। ( शोर संदेश )  रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज बगिया कैम्प कार्यालय में महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले की 50 महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान कर उन्हें आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह से जोड़ा।
रक्षाबंधन के आत्मीय वातावरण में स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने मुख्यमंत्री साय की कलाई पर राखी बांधी और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने भी बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें साड़ी और मिठाई उपहार स्वरूप भेंट की। बहनों के बीच मुख्यमंत्री का आत्मीय अंदाज कार्यक्रम को विशेष बना गया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना सशक्त परिवार और समृद्ध समाज की बुनियाद है। हमारी बहनें आज स्व-सहायता समूहों के माध्यम से विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर स्वावलंबन की नई इबारत लिख रही हैं। ई-रिक्शा उनके लिए केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि नियमित आय और सम्मानजनक स्वरोजगार का माध्यम बनेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि उन्हें ऐसी आजीविका गतिविधियों से भी जोड़ा जाए, जिनसे वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और परिवार की आर्थिक प्रगति में अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बहनों को स्वरोजगार से जोड़ने की यह पहल लगातार आगे बढ़ रही है। पिछले रक्षाबंधन पर्व पर भी स्व-सहायता समूहों की 14 महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान किए गए थे। इस वर्ष ‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना के माध्यम से 50 और बहनों को ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने बताया कि राजधानी रायपुर में भी महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से 92 ई-रिक्शा प्रदान किए गए हैं। ई-रिक्शा चला रही महिलाएं आज प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपए तक की आमदनी अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आय बढ़ने के साथ उनमें आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता भी बढ़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी बहन के हाथ में स्वयं की कमाई आती है तो उसका लाभ पूरे परिवार को मिलता है। बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आवश्यकताओं और भविष्य के लिए बचत जैसे अनेक कार्यों में यह आय सहारा बनती है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश की अधिक से अधिक महिलाओं को इसी तरह आयमूलक गतिविधियों से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री साय ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज हमारी दीदियां किराना दुकान, सब्जी व्यवसाय और विभिन्न छोटे उद्यमों सहित अनेक आजीविका गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। अब ई-रिक्शा जैसी सेवाओं में भी महिलाएं आगे आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। सरकार महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने की दिशा में भी लगातार कार्य कर रही है, ताकि उनके उद्यम टिकाऊ हों और उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार प्रारंभ करने और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए मुद्रा ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। महिलाओं को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेकर अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप उद्यम शुरू करना चाहिए।
‘जशपुर एक्सप्रेस’ योजना के माध्यम से महिलाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराकर उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे एक ओर महिलाओं को नियमित आमदनी का माध्यम मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर आवागमन की सुविधा भी बेहतर होगी।
मुख्यमंत्री साय ने ई-रिक्शा प्राप्त करने वाली बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और अपने परिश्रम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम करें। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं। शासन की योजनाओं और अपनी मेहनत के बल पर वे परिवार की आर्थिक शक्ति बनने के साथ प्रदेश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने बगिया क्षेत्र को विकास कार्यों की सौगात भी दी। उन्होंने लगभग 3 करोड़ रुपए की लागत से बगिया में बनने वाले विश्राम गृह का भूमिपूजन किया। इसके साथ ही बगिया में यादव मोहल्ला तक बनने वाली सीसी सड़क के निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार की प्राथमिकता है। गांवों में सड़क, भवन एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास से लोगों के जीवन में सहूलियत बढ़ने के साथ स्थानीय विकास को भी गति मिलती है।
रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बहनों और मुख्यमंत्री के बीच आत्मीय संवाद भी हुआ। स्व-सहायता समूह की दीदियों ने मुख्यमंत्री की कलाई पर राखी बांधकर अपना स्नेह व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने बहनों को साड़ी और मिठाई भेंट करते हुए उनके सुखद, समृद्ध और आत्मनिर्भर भविष्य की कामना की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बहनों का स्नेह और आशीर्वाद उन्हें प्रदेश के विकास और जनसेवा के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा देता है। सरकार का संकल्प है कि प्रदेश की प्रत्येक बहन को आगे बढ़ने का अवसर मिले, वह आर्थिक रूप से सशक्त बने और अपने परिवार के साथ छत्तीसगढ़ की समृद्धि में सहभागी बने।
इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार सहित अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित थीं।

रक्षाबंधन से पहले पंडरीपानी को बड़ी सौगात : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया एसबीआई की नवीन शाखा का शुभारंभ

27-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश) । रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के पंडरीपानी और आसपास के करीब 60 गांवों के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग आज पूरी हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंडरीपानी में भारतीय स्टेट बैंक की नवीन शाखा एवं भवन का विधिवत शुभारंभ किया। इस शाखा के प्रारंभ होने से क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों को अब बैंकिंग सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें अपने घर के नजदीक ही ऋण, बचत, बीमा तथा विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री साय ने नवीन शाखा के शुभारंभ पर क्षेत्रवासियों और भारतीय स्टेट बैंक की पूरी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सुविधाओं का गांवों तक विस्तार वित्तीय समावेशन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बैंक की शाखा खुलने से केवल आर्थिक लेन-देन की सुविधा ही नहीं बढ़ती, बल्कि किसानों, छोटे व्यापारियों, युवाओं और स्वरोजगार से जुड़े लोगों के लिए आर्थिक प्रगति के नए अवसर भी तैयार होते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडरीपानी और आसपास के ग्रामीणों को अब तक अपने बैंकिंग कार्यों के लिए लगभग पांच किलोमीटर दूर फरसाबहार जाना पड़ता था। पंडरीपानी में एसबीआई की शाखा शुरू होने से बोखी, सहसपुर, भगोरा, बनगांव, सीमाबाड़ी, मुंडाडीह और सरईटोली सहित आसपास के करीब 60 गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीणों के समय और संसाधनों की बचत होने के साथ ही बैंकिंग सेवाओं तक उनकी पहुंच और आसान होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार का प्रयास है कि गांवों तक आधुनिक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचे और समाज के अंतिम व्यक्ति को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ा जाए। बैंक शाखा के माध्यम से किसानों को कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड, छोटे व्यापारियों एवं उद्यमियों को व्यवसाय के लिए ऋण तथा आम नागरिकों को गृह ऋण, वाहन ऋण और शिक्षा ऋण जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शाखा के औपचारिक शुभारंभ से पहले ही लगभग 200 लोगों ने यहां अपने बैंक खाते खुलवा लिए हैं, जो क्षेत्र में बैंकिंग सेवाओं की आवश्यकता और ग्रामीणों के उत्साह को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर पंडरीपानी सहित आसपास के क्षेत्रों में अधोसंरचना और खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए अनेक महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने पंडरीपानी में मिनी स्टेडियम तथा पंडरीपानी बाजारपारा में मंगल भवन निर्माण की घोषणा की। इसके साथ ही अंबाकछार और सीमाबाड़ी में भी मिनी स्टेडियम बनाए जाएंगे। इन सुविधाओं के विकसित होने से ग्रामीण क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को अभ्यास और अपनी प्रतिभा निखारने के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री ने हाथीबेड़ से कोतबा गांधी चौक तक लगभग सात किलोमीटर सड़क निर्माण की भी घोषणा की। इसके अलावा मेन रोड सिसरिंगा में 10 लाख रुपये की लागत से सीसी रोड, हाईस्कूल मैदान में चेंजिंग रूम तथा हाईस्कूल प्रांगण के जीर्णोद्धार की घोषणा की। उन्होंने मूंगी दरबार में पुलिया निर्माण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क, शिक्षा, खेल और सामुदायिक अधोसंरचना का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता बेहतर करने और विकास को गति देने के लिए आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न बैंकिंग एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को ऋण स्वीकृति पत्र और बीमा दावा राशि के चेक प्रदान किए। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत तीन हितग्राहियों को ऋण स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ने के साथ ही बिजली के खर्च में बचत और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत नौ हितग्राहियों को 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख 90 हजार रुपये तक के ऋण स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत दो हितग्राहियों को ऋण स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुद्रा और विश्वकर्मा जैसी योजनाएं छोटे उद्यमियों, कारीगरों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को आर्थिक संबल देकर उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान कर रही हैं। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत चार हितग्राहियों को दो-दो लाख रुपये की बीमा दावा राशि के चेक भी प्रदान किए गए। फरसाबहार विकासखंड की किसान लक्ष्मी बाई को किसान क्रेडिट कार्ड ऋण का स्वीकृति पत्र प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर जशपुर के प्रधान आरक्षक स्वर्गीय राहुल राम प्रधान के परिवार को एक करोड़ रुपये की बीमा राशि का चेक भी प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने कर्तव्य का निर्वहन करने वाले पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के प्रति सरकार संवेदनशील है तथा उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
पंडरीपानी में एसबीआई की शाखा शुरू होने से क्षेत्रवासियों में उत्साह का वातावरण रहा। ग्रामीणों ने वर्षों पुरानी मांग पूरी होने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने कहा कि अब छोटे-बड़े बैंकिंग कार्यों के लिए फरसाबहार जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे समय और आवागमन पर होने वाले खर्च की बचत होगी तथा किसानों, व्यापारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और वरिष्ठ नागरिकों को विशेष सुविधा मिलेगी।
इस अवसर पर पत्थलगांव विधायक गोमती साय, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह सहित भारतीय स्टेट बैंक के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

नक्सलवाद के अंत से बहनों को मिला सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

25-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश) । रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले राजधानी रायपुर में आज भाई-बहन के स्नेह और राष्ट्ररक्षा के संकल्प का भावपूर्ण संगम देखने को मिला। बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में केंद्रीय सुरक्षा बलों, सेना और पुलिस के जवानों की कलाइयों पर जब स्कूली बेटियों, दिव्यांग बेटियों और महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने रक्षा सूत्र बांधे तो पूरा वातावरण आत्मीयता, सम्मान और कृतज्ञता के भाव से भर उठा।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब वर्ष 2017 में रक्षाबंधन के ठीक एक दिन पूर्व नक्सली मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए शहीद उपनिरीक्षक युगल किशोर वर्मा की धर्मपत्नी माधुरी वर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कलाई पर राखी बांधी। मुख्यमंत्री इस अवसर पर भावुक हो उठे। उन्होंने शहीद वर्मा के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए शहीद जवानों के परिवारों के साथ सदैव खड़े रहने का संकल्प दोहराया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राखी का यह धागा केवल भाई-बहन के स्नेह का बंधन नहीं, बल्कि एक शहीद परिवार के विश्वास और अपनत्व का प्रतीक है। हमारे वीर जवानों का बलिदान और उनके परिवारों का त्याग छत्तीसगढ़ कभी नहीं भूल सकता। शहीदों के परिवार हमारे अपने परिवार हैं और उनके सम्मान, स्वाभिमान तथा हर सुख-दुःख में उनके साथ खड़े रहने का यह रिश्ता सदैव अटूट रहेगा।
नक्सलवाद के अंत से बहनों को मिला सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि देश और छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के आतंक से मुक्त कराने के लिए हमारे सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है और अनेक जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ हमारी बहनों के लिए सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार है। अब वह समय आ रहा है जब नक्सल हिंसा के कारण किसी बहन का सुहाग नहीं उजड़ेगा, किसी मां को अपना बेटा नहीं खोना पड़ेगा और किसी बहन को अपने भाई के सकुशल घर लौटने की चिंता नहीं सताएगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा सुरक्षा बलों के साहस और पराक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता ने बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में शांति और विकास के नए युग का मार्ग प्रशस्त किया है। इस परिवर्तन में बस्तर की जनता का विश्वास और सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर की पहचान हिंसा से नहीं, बल्कि शांति, विकास, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, पर्यटन और नई संभावनाओं से होगी। लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण विकास से वंचित रहे क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के अवसर तेजी से पहुंचाए जा रहे हैं। सरकार का संकल्प बस्तर को देश के श्रेष्ठ और विकसित आदिवासी अंचलों में शामिल करना है।
जवानों की कलाइयों पर सजी बहनों की राखी
‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, सेना और पुलिस के लगभग 800 जवान शामिल हुए। स्कूली छात्राओं, दिव्यांग बेटियों, स्वच्छता दीदियों, ड्रोन दीदियों, लखपति दीदियों और महिला स्व-सहायता समूहों की बहनों ने जवानों की कलाइयों पर राखी बांधी और राष्ट्र तथा समाज की सुरक्षा में उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा आत्मीय और अद्भुत दृश्य पहली बार देखा है। देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए घर-परिवार से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का निर्वहन करने वाले जवानों को जब इतनी बड़ी संख्या में बहनों ने राखी बांधी तो रक्षाबंधन का पर्व अपने व्यापक अर्थ में साकार होता दिखाई दिया। हमारे जवान केवल सीमाओं और समाज के सुरक्षा प्रहरी नहीं, बल्कि प्रदेश की बहनों के भाई भी हैं।
इस अवसर पर सुरक्षा बलों के जवानों ने भी बहनों की रक्षा, सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों के जवानों के शौर्य और समर्पण को नमन करते हुए नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जवानों का सम्मान किया।
बहनों का स्नेह मेरी सबसे बड़ी शक्ति : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें छत्तीसगढ़ की लाखों-करोड़ों बहनों का अपार स्नेह और आशीर्वाद मिला है। बहनों का यही विश्वास और अपनापन जनसेवा के लिए नई ऊर्जा देता है। राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के साथ उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में महिला सशक्तिकरण आज शासन की नीतियों के केंद्र में है। छत्तीसगढ़ में 2 लाख 42 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों से करीब 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। लखपति दीदी अभियान ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है और प्रदेश की 13 लाख 85 हजार बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिलाएं अब परिवार की आर्थिक शक्ति बनने के साथ गांव और समाज के विकास का नेतृत्व भी कर रही हैं।
रक्षाबंधन से पहले लगभग 68 लाख बहनों को 631 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक स्वावलंबन और आत्मसम्मान का मजबूत आधार बनी है। योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त के रूप में लगभग 68 लाख बहनों के बैंक खातों में करीब 631 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश की माताएं-बहनें आर्थिक रूप से मजबूत बनें, अपने छोटे-बड़े निर्णय स्वयं ले सकें और अपने त्योहार पूरे उत्साह एवं सम्मान के साथ मना सकें।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने मुख्यमंत्री साय को भी रक्षा सूत्र बांधा। मुख्यमंत्री ने बहनों का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए उनके सुख, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
देश की एकता और जवानों के सम्मान का दिलाया संकल्प
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को देश की एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा के लिए जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने तथा देश के वीर जवानों के प्रति सदैव सम्मान का भाव रखने का संकल्प दिलाया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल वर्दीधारी जवानों का दायित्व नहीं है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करे तथा राष्ट्रविरोधी शक्तियों के विरुद्ध सजग रहे। जवानों के प्रति सम्मान की भावना समाज और नई पीढ़ी में और मजबूत हो, ‘स्नेह की डोर’ जैसे आयोजन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई में केंद्रीय सुरक्षा बलों और पैरामिलिट्री फोर्स का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने साहस के साथ नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई लड़ी है।
उन्होंने कहा कि एक समय नक्सल हिंसा के कारण अनेक परिवारों ने अपने बेटे, भाई और जीवनसाथी खोए, लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। वह दिन दूर नहीं जब किसी बहन को यह नहीं कहना पड़ेगा कि उसका भाई ड्यूटी पर गया था और लौटकर नहीं आया। उन्होंने समाज से वैचारिक रूप से भी सजग रहने और देश की एकता-अखंडता को कमजोर करने वाली प्रवृत्तियों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।
रायपुर जिले को मिले पांच अभिनव प्रोजेक्ट्स
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों द्वारा तैयार पांच अभिनव प्रोजेक्ट्स—‘हरित पोषणम्’, ‘प्रोजेक्ट निरामय’, ‘तिरंगा शक्ति फेस्ट’, ‘प्रोजेक्ट अहिगुण्डिकः’ और ‘रायपुर अनफिल्टर्ड’ का शुभारंभ किया।
‘हरित पोषणम्’ के माध्यम से आंगनबाड़ियों और महिला समूहों को फलदार पौधे तथा सब्जियों के उन्नत बीज उपलब्ध कराकर पोषण वाटिकाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार की उपलब्धता बढ़ाने के साथ महिलाओं और समुदाय को पोषण अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ना है।
‘प्रोजेक्ट निरामय’ के अंतर्गत रायपुर जिले के 215 उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के 65 हजार 920 छात्र-छात्राओं की स्वास्थ्य एवं रक्त जांच की जाएगी। जांच में स्वास्थ्य संबंधी समस्या पाए जाने पर आवश्यकतानुसार निःशुल्क उपचार की व्यवस्था भी की जाएगी।
‘तिरंगा शक्ति फेस्ट’ के माध्यम से रायपुर में प्रत्येक माह सामाजिक समरसता, संस्कृति, सुशासन, युवा नेतृत्व और राष्ट्रभावना से जुड़े विभिन्न आयोजन किए जाएंगे। इसका उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं को सामाजिक सरोकारों और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है।
‘रायपुर अनफिल्टर्ड’ के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित हस्तियों, कलाकारों और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों के जीवन, अनुभव और विचारों को पॉडकास्ट के माध्यम से सामने लाया जाएगा।
‘प्रोजेक्ट अहिगुण्डिकः’ के माध्यम से जिले के सौंरा (सपेरा) समुदाय के परिवारों को शासन की मुख्यधारा और जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, जॉब कार्ड सहित विभिन्न योजनाओं और आवश्यक दस्तावेजों का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने की पहल की जाएगी।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, विधायक पुरंदर मिश्रा, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कांवड़िया, महापौर  मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह सहित जनप्रतिनिधि, सुरक्षा बलों के अधिकारी-जवान, स्कूली विद्यार्थी, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
 

श्रावण के अंतिम सोमवार को अमरकंटक पहुंचे उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

25-Aug-2026
रायपुर: श्रावण मास के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने मध्यप्रदेश के पवित्र तीर्थस्थल अमरकंटक पहुंचकर मां नर्मदा के दर्शन किए। उन्होंने नर्मदा उद्गम स्थल स्थित नर्मदा कुंड में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात उन्होंने जलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का पूजन किया और प्रदेश एवं प्रदेशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की।
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने नर्मदा कुंड एवं नर्मदा उद्गम स्थल के पवित्र परिसर में पूजा-अर्चना कर मां नर्मदा का आशीर्वाद लिया। श्रावण मास के अंतिम सोमवार को अमरकंटक में श्रद्धा और आस्था का विशेष वातावरण रहा। इस दौरान शर्मा ने धार्मिक अनुष्ठानों के साथ जनकल्याण की भावना को सर्वाेपरि रखते हुए प्रदेश की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
अमरकंटक प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा कांवडि़यों के बीच भी पहुंचे। उन्होंने मृत्युंजय आश्रम में कांवडि़यों को भोजन प्रसादी वितरित की और उनके साथ बैठकर प्रसादी ग्रहण की। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से आत्मीय बातचीत कर उनकी कांवड़ यात्रा, यात्रा मार्ग और उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली। कांवडि़यों के साथ सहजता से संवाद करते हुए उन्होंने उनकी यात्रा के अनुभव भी सुने।
उल्लेखनीय है कि अमरकंटक से भोरमदेव मंदिर तक लगभग 150 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। यात्रा मार्ग पर कांवडि़यों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य, सुरक्षा, भोजन और रात्रि विश्राम सहित आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। कांवडि़यों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ पुलिस पेट्रोलिंग दल भी तैनात किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
अमरकंटक स्थित मृत्युंजय आश्रम में कांवडि़यों के लिए निःशुल्क भोजन एवं रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई है। यहां श्रद्धालुओं को दाल-भात, सब्जी के साथ खीर, पूरी और हलवा सहित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे लंबी कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को विश्राम के साथ पौष्टिक भोजन की सुविधा मिल रही है। उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि कांवडि़यों की सुविधा और सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सावन माह के इस पवित्र अवसर पर भोरमदेव से अमरकंटक तक श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी कांवड़ यात्रा को सुगम बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि सभी भक्तजन श्रद्धा, उत्साह और सुरक्षित वातावरण में अपनी कांवड़ यात्रा पूरी कर सकें।
 

 


श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिल रही उत्कृष्ट शिक्षा, उनके सपनों को पंख देना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

25-Aug-2026
रायपुर: श्रमिक हमारे विकास की मजबूत नींव हैं। अपने परिश्रम से वे सड़कें, भवन, पुल और विकास की अनेक संरचनाएं खड़ी करते हैं। ऐसे श्रमिक परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। श्रमिक परिवारों के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगे, अपने सपनों को पूरा करेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का संकल्प भी साकार होगा।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने योजना के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों से आत्मीय संवाद किया और शिक्षा, खेल, कला तथा सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों को 39 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को आज व्यवस्थित यूनिफॉर्म में, आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी में संवाद करते और शिक्षा के साथ खेल तथा अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इन बच्चों का आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि उचित अवसर और अच्छी शिक्षा मिले तो कोई भी परिस्थिति प्रतिभा को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।
उन्होंने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 100 बच्चों के साथ की गई थी। इस वर्ष इसका विस्तार करते हुए 200 बच्चों को योजना के अंतर्गत प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में शिक्षा का अवसर दिया गया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों से चयनित प्रतिभावान बच्चे राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना कभी श्रमिक परिवारों के लिए कठिन सपना हुआ करता था, आज राज्य सरकार उस सपने को साकार कर रही है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल बच्चों को अच्छे विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की योजना नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर वातावरण, आत्मविश्वास और अपने सपनों को पूरा करने के लिए समान अवसर देने की पहल है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश और देश के निर्माण में श्रमिकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि शहरों की ऊंची इमारतों से लेकर गांवों की सड़कों तक और बड़े पुलों से लेकर विकास की अनेक अधोसंरचनाओं के पीछे श्रमिकों का परिश्रम है। सरकार का दायित्व है कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से श्रमिकों के कल्याण के लिए 67 प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व सहायता, दिव्यांग सहायता, पेंशन, कौशल उन्नयन, रोजगार और आवास सहित जीवन के विभिन्न चरणों में सहायता देने वाली योजनाएं शामिल हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इन योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पात्र श्रमिकों तक पहुंचे और सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा हो।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए अपने जीवन के संघर्ष और अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बच्चों से कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, शिक्षा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अभी से बड़े सपने देखें और तय करें कि भविष्य में किस क्षेत्र में जाकर देश और प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी, तो कोई व्यवसाय, समाजसेवा अथवा अन्य क्षेत्र में जाना चाहता है। लक्ष्य कोई भी हो, उसकी मजबूत नींव शिक्षा ही है। इसलिए बच्चों को मिले इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज उच्च शिक्षा के लिए आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हेतु ऋण तथा विदेश में अध्ययन के लिए सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। सरकार चाहती है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभावान बच्चे की शिक्षा और उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन के बाद प्रदेश के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी शिक्षा और विकास की पहुंच कठिन थी, वहां अब नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के वही अवसर मिलें, जो बड़े शहरों के बच्चों को उपलब्ध हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र को ध्येय मानकर छत्तीसगढ़ सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सिद्धि के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और विकास के अवसर पहुंचाना आवश्यक है। श्रमिक परिवारों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार नई पहल की जा रही है। श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से वर्तमान में 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ श्रमिकों को दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के खातों में अंतरित की गई है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक का बच्चा परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को सीमित न करे, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, वैज्ञानिक, उद्यमी अथवा अपनी पसंद के किसी भी क्षेत्र में ऊंचाइयां हासिल करे।
श्रम मंत्री ने बताया कि बदलते रोजगार परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए श्रमिक कल्याण योजनाओं का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। पार्सल डिलीवरी से जुड़े श्रमिकों को वाहन खरीदने के लिए सहायता तथा चरवाहों को आर्थिक सहायता देने जैसी नई योजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण आवश्यक है और इसके लिए प्रत्येक परिवार को विकास की यात्रा में साथ लेकर चलना होगा। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने का बड़ा अवसर दे रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया।
डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना ने ऐसे परिवारों के प्रतिभावान बच्चों के लिए प्रतिष्ठित विद्यालयों के द्वार खोले हैं, जहां वे अपनी प्रतिभा को निखारकर जीवन में नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर पढ़ने और अपने माता-पिता तथा छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने का आह्वान किया।
समारोह में अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत अध्ययनरत विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। बच्चों की बातों में नए अवसर मिलने की खुशी के साथ भविष्य के बड़े सपनों का आत्मविश्वास भी दिखाई दिया।
राजनांदगांव के दिल्ली पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत बीजापुर के अतीश ने बताया कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उन्हें इतने प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ने का अवसर मिलेगा। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के कारण उन्हें पढ़ाई के साथ खेल और अन्य गतिविधियों में अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिला है। अतीश ने मुख्यमंत्री के सामने आईएएस अधिकारी बनकर देश और प्रदेश की सेवा करने का अपना सपना भी साझा किया।
रुंगटा पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत कबीरधाम की छात्रा इशिका डाहरे ने बताया कि पहले उन्हें विश्वास नहीं था कि वे अंग्रेजी में सहजता से बात कर पाएंगी। नए विद्यालय में मिले वातावरण और अवसरों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है। विद्यार्थियों के अभिभावकों ने भी मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना उनके लिए कठिन था, लेकिन इस योजना ने उनके बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने को साकार किया है।
समारोह का सबसे आत्मीय दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय श्रमिक परिवारों के बच्चों के साथ दोपहर का भोजन करने बैठे। मुख्यमंत्री बच्चों के बीच सहजता से बैठे और परिवार के सदस्य की तरह उनसे बातचीत करते रहे। औपचारिक कार्यक्रम से अलग इस संवाद में बच्चों ने भी मुख्यमंत्री से खुलकर सवाल किए।
किसी ने मुख्यमंत्री के बचपन के बारे में पूछा, तो किसी ने उनकी पढ़ाई, पसंदीदा भोजन और जीवन के संघर्षों के बारे में जानना चाहा। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए बच्चों के प्रत्येक सवाल का जवाब दिया और अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्हें मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा दी।
मुख्यमंत्री की सहजता और आत्मीयता ने बच्चों को खासा प्रभावित किया। एक बच्चे ने उत्साह के साथ कहा - “मुख्यमंत्री जी हमारे अच्छे टीचर जैसे हैं। उनसे जितने भी सवाल पूछो, वे परेशान नहीं होते और हर सवाल का जवाब देते हैं।” बच्चों ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ बैठकर भोजन करना, उनसे खुलकर बातें करना और अपने सपने साझा करना उनके लिए ऐसा अनुभव है, जिसे वे हमेशा याद रखेंगे।
मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से कहा कि उनकी सफलता ही सरकार और उनके माता-पिता की सबसे बड़ी खुशी होगी। वे खूब पढ़ें, अपने सपनों को बड़ा रखें और जब जीवन में सफल हों तो समाज तथा अपने प्रदेश के प्रति अपने दायित्व को भी हमेशा याद रखें।
उल्लेखनीय है कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना का उद्देश्य आर्थिक परिस्थितियों के कारण प्रतिभावान बच्चों के अवसर सीमित न होने देना और उन्हें उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
कार्यक्रम में सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, उपाध्यक्ष किशोर महानंद, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता सहित विभागीय अधिकारी, श्रमिक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

तस्वीरों ने ताजा कीं मुख्यमंत्री विष्णुदेवसाय की पुरानी यादें: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ‘दृश्य संवाद 2026’ के समापन समारोह में हुए शामिल

24-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश) । तस्वीरें बीते हुए समय को वर्तमान से जोड़ती हैं। कभी वे इतिहास का दस्तावेज बनती हैं तो कभी जीवन के भूले-बिसरे पलों को फिर से जीवंत कर देती हैं। राजधानी रायपुर में आज कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी वर्षों पुरानी तस्वीरों के माध्यम से सार्वजनिक जीवन के लंबे सफर को एक बार फिर जिया। कहीं पहली बार विधायक बनने की स्मृतियां थीं, तो कहीं गांव, खेत और मिट्टी से जुड़े जीवन की झलक। इस दौरान मुख्यमंत्री का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने स्वयं कैमरा संभाला और एक फोटो पत्रकार की तस्वीर खींचकर इस अवसर को यादगार बना दिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायपुर प्रेस क्लब द्वारा विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर आयोजित पांच दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट ‘दृश्य संवाद 2026’ के समापन समारोह में शामिल हुए। 19 अगस्त से आयोजित इस फेस्ट में मुख्यमंत्री ने फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया और फोटो पत्रकारों तथा ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों द्वारा खींची गई तस्वीरों की सराहना की।
प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री साय ने जब अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी पुरानी तस्वीरें देखीं तो उनके साथ जुड़ी अनेक स्मृतियां भी ताजा हो गईं। वर्षों पुराने चित्रों को देखते हुए उन्होंने अपने साथ मौजूद लोगों से कई रोचक संस्मरण साझा किए। अपनी पहली बार विधायक बनने के समय की एक तस्वीर देखकर मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय उन्होंने विशेष रूप से सफारी सूट सिलवाया था। इस छोटे से संस्मरण ने वहां मौजूद लोगों के बीच सहज और आत्मीय माहौल बना दिया।
प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री साय के ग्रामीण जीवन और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें भी प्रदर्शित की गई थीं। हल चलाते हुए अपनी तस्वीर देखकर उन्होंने खेती के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि गांव और खेती-किसानी से जुड़ी तस्वीरें उन्हें अपनी मिट्टी, खेत-खलिहान और पुराने दिनों की याद दिलाती हैं। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण जीवन से जुड़े अपने अनुभव भी फोटो पत्रकारों के साथ साझा किए।
प्रदर्शनी के दौरान एक दिलचस्प क्षण तब आया, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने खुद कैमरा थाम लिया। उन्होंने फोटो पत्रकार की भूमिका निभाते हुए एक फोटो जर्नलिस्ट को कैमरे में कैद किया। आमतौर पर मुख्यमंत्री की गतिविधियों और भाव-भंगिमाओं को अपने कैमरे में दर्ज करने वाले फोटो पत्रकार के सामने इस बार स्वयं मुख्यमंत्री कैमरे के पीछे थे। यह सहज और आत्मीय पल ‘दृश्य संवाद 2026’ के खास आकर्षणों में शामिल रहा।
मुख्यमंत्री साय ने फोटो पत्रकारों के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि तस्वीरें केवल किसी घटना या क्षण को दर्ज करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समय, समाज और स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजती हैं। कई बार एक तस्वीर बिना शब्दों के पूरी कहानी कह देती है। फोटो पत्रकार कठिन परिस्थितियों में भी घटनास्थल पर पहुंचकर समाज और इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को कैमरे में दर्ज करते हैं। उनका काम पत्रकारिता का महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पक्ष है।
मुख्यमंत्री ने रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ‘दृश्य संवाद 2026’ की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन फोटोग्राफी और फोटो पत्रकारिता की रचनात्मकता को मंच प्रदान करते हैं। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को अनुभवी फोटो पत्रकारों के काम को देखने, समझने और सीखने का अवसर भी मिलता है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी फोटो पत्रकारों, प्रतिभागियों और रायपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों को सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित पांच दिवसीय ‘दृश्य संवाद 2026’ में प्रेस फोटो पत्रकारों के साथ ओपन कैटेगरी के प्रतिभागियों की तस्वीरों को भी स्थान दिया गया। प्रकृति एवं पर्यावरण, संस्कृति एवं परंपरा तथा समाचार एवं जनसरोकार सहित विभिन्न विषयों पर प्रदर्शित तस्वीरों ने छत्तीसगढ़ के जीवन, समाज और परिवेश के विविध रंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। पांच दिनों के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकारों, विद्यार्थियों, फोटोग्राफी प्रेमियों और नागरिकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
समापन अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े उपस्थित थे। इस अवसर पर फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट के संयोजक दीपक पांडे, वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट गोकुल सोनी, प्रदीप डडसेना राजकुमार चतुर्वेदी, रुपेश यादव,नरेंद्र बंगाले, सुधीर सागर,रमन हलवाई, किशन लोखंडे मनोज देवांगन, विजय देवांगन, विनय घाड़गे, पंकज चौहान,हीरा मानिकपुरी, त्रिलोचन मानिकपुरी, हेमंत गोस्वामी, जय गोस्वामी, पंकज सिंह सहित बड़ी संख्या में फोटो जर्नलिस्ट एवं गणमान्यजन उपस्थित थे। 
 

‘कोहरा’ जैसी रचनाएं समाज को सजग करने और सच सामने लाने का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

24-Aug-2026
रायपुर (शोर संदेश) । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय सभागृह में युवा साहित्यकार करुणा सागर पण्डा के उपन्यास ‘कोहरा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसे सजग करने और सही दिशा दिखाने का भी सशक्त माध्यम है। ‘कोहरा’ जैसे उपन्यास सामाजिक विषयों को विमर्श के केंद्र में लाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। 
मुख्यमंत्री साय ने युवा साहित्यकार करुणा सागर पण्डा को उनके उपन्यास के प्रकाशन पर बधाई देते हुए कहा कि संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण विषय पर लेखन के लिए साहस की आवश्यकता होती है। रचनाकार जब समाज की समस्याओं और वास्तविकताओं को अपनी लेखनी का विषय बनाते हैं, तो साहित्य सामाजिक चेतना का माध्यम बनता है।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की धरती ने देश को अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार दिए हैं। विनोद कुमार शुक्ल जैसे मूर्धन्य रचनाकार को साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ मुक्तिबोध की सृजनभूमि रही है और पदुमलाल पन्नालाल बख्शी जैसे साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के रचनाकार इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और समकालीन विषयों को साहित्य के माध्यम से समाज के सामने ला रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सिनेमा और साहित्य ने समय-समय पर समाज के संवेदनशील विषयों को सामने लाने का काम किया है। उन्होंने ‘द केरल स्टोरी’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन और मार्मिक विषयों को उठाने पर मतभेद और विरोध के स्वर भी सामने आते हैं, लेकिन रचनाकार का दायित्व है कि वह अपनी दृष्टि और संवेदना के साथ समाज के सामने विषय रखे। उन्होंने ‘कोहरा’ के लेखक के साहसिक प्रयास की सराहना की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अच्छी पुस्तकें अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपने घरों में छोटी-सी लाइब्रेरी बनाने और बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि घर की समृद्धि केवल उसकी भव्यता में नहीं, बल्कि वहां उपलब्ध पुस्तकों और अध्ययन की संस्कृति में भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें पीढ़ियों के बीच ज्ञान, संस्कार और अनुभव का सेतु बनती हैं। इसलिए हर परिवार को अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकों का संग्रह अवश्य रखना चाहिए।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर नक्सलवाद का उल्लेख करते हुए साहित्यकारों और रचनाकारों से इससे प्रभावित लोगों की पीड़ा और संघर्ष को भी अपनी रचनाओं का विषय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने लंबे समय तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और राज्य सरकार के सतत प्रयासों से प्रदेश में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है और बस्तर शांति एवं विकास के नए दौर की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की हिंसा में अनेक निर्दोष लोगों ने अपने परिजनों को खोया, बच्चों की शिक्षा और भविष्य प्रभावित हुआ तथा दशकों तक अनेक क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से दूर रहे। नक्सलवाद की इस मानवीय त्रासदी और इसके कारण समाज पर पड़े प्रभावों को भी व्यापक रूप से सामने लाने की आवश्यकता है। साहित्यकार अपनी संवेदनशील लेखनी के माध्यम से उन परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और बदलते बस्तर की कहानी को देश-दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुनील गंगाराम गर्ग ने कहा कि भारत की संस्कृति विविधता और विशिष्टता के साथ सहअस्तित्व को स्वीकार करती है। उन्होंने करुणा सागर पण्डा की लेखनी की सराहना करते हुए ‘कोहरा’ को समकालीन विषय पर लिखी गई प्रासंगिक कृति बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय विचारों के संवाद का समय है और साहित्य इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक प्रश्नों पर सार्थक विमर्श पैदा करने वाली रचनाएं समाज को आत्ममंथन का अवसर देती हैं। ‘कोहरा’ भी अपने विषय के माध्यम से पाठकों को विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने कहा कि ‘कोहरा’ केवल समस्या को सामने नहीं रखता, बल्कि समाधान की दिशा में भी सोचने के लिए प्रेरित करता है। बीबीजे के स्वतंत्र निदेशक जगन्नाथ पाणिग्रही ने कहा कि नई पीढ़ी को देश की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक वास्तविकताओं से परिचित कराने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका है।
वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने ‘कोहरा’ को साहसिक लेखन का उदाहरण बताते हुए कहा कि रचनाकार को समाज के ज्वलंत प्रश्नों पर अपनी बात रखने का साहस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपन्यास में सामाजिक विषयों के साथ नक्सलवाद की समस्या को भी अभिव्यक्ति दी गई है। साहित्य समाज में वैचारिक चेतना और सकारात्मक प्रतिरोध का स्वर मजबूत करता है।
इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्य गौसेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज, जलज कुमार अनुपम सहित जनप्रतिनिधि, साहित्यकार, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

शिक्षा समाज के विकास का मूल मंत्र, भावी पीढ़ी को शिक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

23-Aug-2026
रायपुर : शिक्षा समाज के विकास का मूल मंत्र है। किसी भी समाज की प्रगति उसकी भावी पीढ़ी को मिलने वाली शिक्षा, संस्कार और अवसरों पर निर्भर करती है। समाज का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक बच्चे की प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर मिले, यह हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश कंवर समाज विकास समिति के प्रदेश अध्यक्ष सहित नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कंवर समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है। संत गहिरा गुरु जैसे महान संतों और समाज के पुरोधाओं ने शिक्षा, संस्कार, सेवा और सामाजिक एकता का जो मार्ग दिखाया है, उसी पर आगे बढ़ते हुए नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए मिलकर काम करना होगा।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को सामाजिक सेवा और अपने दायित्वों के निष्ठापूर्वक निर्वहन की शपथ दिलाई। कार्यक्रम के प्रारंभ में उन्होंने प्रकृति शक्ति तथा कंवर समाज के पुरोधाओं को नमन किया। इस अवसर पर समाज के युवक-युवतियों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
मुख्यमंत्री साय ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज द्वारा सौंपा गया दायित्व समाज को आगे ले जाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारी निष्ठा, समर्पण और सामूहिक भावना के साथ समाज के शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए कार्य करें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कंवर समाज के पदाधिकारियों का पूरा निर्वाचन निर्विरोध और सर्वसम्मति से संपन्न होना समाज की एकता और संगठन की मजबूती का प्रमाण है। समाज की यही एकजुटता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक और मजबूत बनाकर पहुंचाना होगा। उन्होंने स्मरण किया कि एक समय कंवर समाज अलग-अलग इकाइयों में बंटा हुआ था, लेकिन वरिष्ठजनों और समाज के पुरोधाओं के प्रयासों से सभी को एक सूत्र में जोड़ा गया। उन्होंने महाराष्ट्र से आए कंवर समाज के प्रतिनिधियों और सगा-बंधुओं का भी छत्तीसगढ़ में आत्मीय स्वागत किया।
मुख्यमंत्री साय ने समाज के प्रबुद्धजनों से शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शासकीय नौकरी प्राप्त करना नहीं है। एक सफल उद्यमी, व्यापारी, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि, उद्योगपति और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी अच्छी शिक्षा आवश्यक है। शिक्षा व्यक्ति को निर्णय लेने की क्षमता देती है और समाज को प्रगति की दिशा दिखाती है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध करा रही है। प्रदेश में 17 प्रयास विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। समाज के सक्षम और प्रबुद्ध लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वे जरूरतमंद परिवारों के बच्चों की शिक्षा में सहयोग करें और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अंतर्गत किए गए वादों को तेजी से पूरा करने का प्रयास किया है। सरकार गठन के दूसरे ही दिन 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 आवास बनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों से किए गए वादे के अनुरूप 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदी की जा रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है और अब तक 19 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में चरण पादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है और तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है। प्रदेश के लगभग भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना से बुजुर्गों की तीर्थयात्रा की इच्छा पूरी की जा रही है। रामलला दर्शन योजना के माध्यम से पिछले ढाई वर्षों में 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रपति के रूप में विराजमान होना पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है। पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समाज के विकास को नई दिशा देने के लिए अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण का श्रेय भी श्रद्धेय अटल जी को जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय अंचलों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और जनजातीय परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जा रहे हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 6 हजार 661 गांवों को शामिल किया गया है।
विशेष पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से सड़क, आवास, बिजली, राशन कार्ड और नल से जल जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम जनमन के अंतर्गत देशभर में बन रही लगभग 4 हजार किलोमीटर सड़कों में से 2 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कें छत्तीसगढ़ में बन रही हैं। विशेष पिछड़ी जनजातियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 57 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार की सुविधा दे रही हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर का एक बड़ा भू-भाग चार दशकों से अधिक समय तक नक्सलवाद की त्रासदी के कारण विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्रीअमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी विकास कार्य चुनौतीपूर्ण थे, आज वहां सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं।
उन्होंने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से ढाई वर्षों में 500 से अधिक गांवों तक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। बस्तर में व्यापक स्वास्थ्य अभियान के तहत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और गंभीर अथवा लंबे समय से बीमार 40 हजार से अधिक लोगों को बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया है। शांति और विश्वास के नए वातावरण के साथ बस्तर में शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी खुल रहे हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है। प्रदेश में आयरन ओर, कोयला, बॉक्साइट, लिथियम, टिन, सोना और हीरा जैसे बहुमूल्य खनिज संसाधन उपलब्ध हैं। बस्तर की वनोपज के वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़े और रोजगार के नए अवसर तैयार हों।
उन्होंने कहा कि कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में भी तेजी से अधोसंरचना का विस्तार किया जा रहा है। किसानों के खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने के लिए पिछले ढाई वर्षों में 11 हजार करोड़ रुपए से अधिक की नई सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है और इस अभियान में समाज के प्रत्येक वर्ग का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कंवर समाज से शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और सेवा के साथ प्रदेश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व राज्यसभा सांसद नंदकुमार साय ने कहा कि कंवर समाज छत्तीसगढ़ की जनजातीय समाज व्यवस्था का महत्वपूर्ण घटक है। शिक्षा समाज और प्रदेश की प्रगति का आधार है। कोई भी बालक-बालिका शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए समाज को सामूहिक प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि कंवर समाज सहित प्रदेश की 42 जनजातियों का छत्तीसगढ़ के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। समाज को शैक्षणिक, आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए संगठित होकर कार्य करने की आवश्यकता है।
कंवर समाज विकास समिति के अध्यक्ष हरवंश सिंह मिरी ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पद के साथ समाज की एकता, सेवा, शिक्षा, संस्कार और उत्थान की बड़ी जिम्मेदारी जुड़ी होती है। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को समाज के नवनिर्माण और विकास की नई संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन कंवर भवन भविष्य में समाज के शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और संगठनात्मक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में कंवर समाज के विभिन्न सामुदायिक भवनों के निर्माण, विकास और जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ 55 लाख रुपए से अधिक की राशि प्रदान करने की घोषणा की। इनमें रायपुर के लाभांडी में नवनिर्माणाधीन कंवर भवन के विकास एवं आवश्यक अधोसंरचना के लिए 70 लाख रुपए, राजनांदगांव के छुरिया परिक्षेत्र में कंवर समाज भवन के लिए 25 लाख रुपए, कंवर पैंकरा समाज सर्कल तमोरा में सामुदायिक शेड के लिए 10 लाख रुपए, ग्राम खैरझिटी में आदिवासी कंवर (पैंकरा) समाज के सामाजिक भवन के लिए 10 लाख रुपए, महासमुंद जिले के पथरी परिक्षेत्र के ग्राम नरतोरा में सामाजिक भवन के लिए 10 लाख रुपए, ग्राम झलप में सामाजिक भवन के निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए 20 लाख रुपए तथा गरियाबंद जिले के ग्राम जोजरा में कंवर समाज भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपए शामिल हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लाभांडी स्थित कंवर समाज के नवनिर्माणाधीन सामुदायिक भवन परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत सिंदूर का पौधा लगाया। मुख्यमंत्री के साथ समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों, वरिष्ठ सगा-जनों और प्रबुद्धजनों ने भी पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संदेश दिया।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर, महासचिव शिव कुमार कंवर, कार्यकारी अध्यक्ष थान सिंह दीवान, महिला प्रभाग की अध्यक्ष सविता साय, कोषाध्यक्ष प्रेम सिंह कंवर, आर.के. साय, भीम सिंह कंवर सहित कंवर समाज के वरिष्ठजन, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।


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