00 इंजेक्शन की खेप को औषधि विभाग ने किया सील
रायपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ में जिस कदर कोरोना संंक्रमण विकराल हो रहा है। रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश की राजधानी के थोक दवा बाजार में इंजेक्शन की खेप पहुंच तो गई है, लेकिन औषधि विभाग के अफसरों ने इंजेक्शन को सील कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि औषधि विभाग के अफसर इंजेक्शन की वाइल अपने रिकमंडेशन पर ही देने के निर्देश थोक दवा विक्रेताओं को दिए हैं। इसके साथ ही मरीजों के परिजनों को दवा देेने पर रोक लगा दी गई है। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि इंजेक्शन अस्पतालों में सीधे मरीज के लिए उपलब्ध होंगे, लेकिन बाजार में दवा उपलब्ध होने के बाद भी मरीजों के लिए मंगलवार दोपहर तक दवा उपलब्ध नहीं कराई गई है। यहां पर सरकार का निर्णय तो सटिक है पर औषधि विभाग के अफसरों की तरफ से दिए गए निर्देश कुछ और ही बयां कर रहे हैं। यदि बाजार में दवा है और परिजनों को उपलब्ध नहीं कराना है तो अस्पतालों को अब तक क्यों नहीं भेजा गया? और यदि नहीं भेजा गया तो परिजनों को दवा देने पर विभाग ने रापेक क्यों लगाई है। क्या विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार राजधानी में कर रहा है या फिर दवाई की सप्लाई रोक कर अफसर अपने चहेतों को देने की फिराक में हैं। यहां पर सबसे बड़ी बात यह भी है कि जिस रेमडेसिविर इंजेक्शन काो थोक दवा बाजार से मरीजों के परिजन थोक के दाम पर खरीद रहे थे तो अब अस्पताल से वहीं दवाएं खुदरा मूल्य पर उपलब्ध होंगी। औषधि विभाग का यह फरमान मरीजों को फायदा पहुंचाने के लिए है या अस्पतालों के लिए यह तो विभाग के अफसर ही जानें, लेकिन पूरा सिस्टम आज इस आपदा की स्थिति को अवसर बनाकर अस्पतालों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष फायदा पहुंचा रहा है। यहां पर विभाग यदि अस्पतालों को इंजेक्शन की सप्लाई देना खहता है तो अस्पताल के लिए विक्रय मूल्य का निर्धारण भी आवश्यक है, क्योंकि जब से इंजेक्शन की मांग प्रदेश में बढ़ी है मनचाहे दाम पर इसकी बिक्री हो रही है। पैसे के बल पर समाज का एक वर्ग तो इसे मुंहमांगे दाम पर खरीद रहा है, लेकिन उसी समाज का एक वर्ग घंटों लाइन में खड़े होने के बाद भी दवा तक नहीं पहुंच पा रहा है। अब ये तो आने वाले वक्त पर ही पता चलेगा कि दवाओं को सील कर विभाग के अफसर क्या करना चाहते हैं।