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करी पत्ता का पानी भी सेहत को बनाता है दमदार

16-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) अगर आपको भी यही लगता है कि औषधीय गुणों से भरपूर करी पत्ते का इस्तेमाल महज खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है, तो आपको अपनी इस गलतफहमी को दूर कर लेना चाहिए। करी पत्ता आपकी सेहत पर फायदों की बौछार कर सकता है। अगर आप भी करी पत्ते का पानी पीने के कुछ कमाल के फायदों के बारे में नहीं जानते हैं, तो आपको भी महज एक हफ्ते के लिए इस नेचुरल ड्रिंक को अपनी डाइट का हिस्सा बनाकर देखना चाहिए।
करी पत्ते का पानी बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में एक गिलास पानी डालें। अब इस पानी में मुट्ठीभर करी पत्ते डालकर इसे अच्छी तरह से बॉइल करें। उबलने के बाद, जब ये पानी हल्का ठंडा हो जाए, तब आप इसे छानकर पी सकते हैं। बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए आपको सुबह-सुबह करी पत्ते का पानी पीना चाहिए। करी पत्ते का पानी आपकी हार्ट हेल्थ से लेकर आपकी लिवर हेल्थ तक के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
हर रोज करी पत्ते का पानी पीकर आप अपनी वेट लॉस जर्नी को काफी हद तक आसान बना सकते हैं। करी पत्ते का पानी आपके शरीर में जमा एक्स्ट्रा फैट को बर्न करने में कारगर साबित हो सकता है। इसके अलावा अगर आप अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो भी आपको करी पत्ते का पानी पीना शुरू कर देना चाहिए। करी पत्ते का पानी आपकी गट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है यानी एसिडिटी और कब्ज जैसी पेट से जुड़ी समस्याओं से खुद का बचाव करने के लिए करी पत्ते के पानी को पिया जा सकता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि करी पत्ते में आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन्स, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-माइक्रोबियल गुणों की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है। यही वजह है कि आयुर्वेद के मुताबिक करी पत्ते को सेहत के लिए वरदान माना जाता है।


सेहत के लिए वरदान है नीम के पत्ते

16-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) अगर आपको हर समय थकान और कमजोरी महसूस होती है तो नीम के पत्तों का सेवन करना शुरू कर दीजिए। नीम के पत्ते आपकी गट हेल्थ को काफी हद तक इम्प्रूव कर सकते हैं। पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए नीम के पत्तों का सेवन किया जा सकता है। बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए हर रोज सुबह-सुबह नीम के 4-5 पत्तों को चबाएं।
अगर आप अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो आप नीम के पत्तों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। नीम के पत्तों को रेगुलरली चबाने से आप खुद को बार-बार बीमार पड़ने से बचा सकते हैं। नीम के पत्ते आपकी बॉडी को डिटॉक्सिफाई करने में कारगर साबित हो सकते हैं। नीम के पत्तों को आंखों की सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नीम के पत्तों में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन सी, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, फॉस्फोरस, पोटैशियम जैसे पौष्टिक तत्वों की अच्छी खासी मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा नीम की पत्तियां एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर होती हैं। इन तत्वों की वजह से ही आयुर्वेद एक्सपर्ट नीम की पत्तियों का सेवन करने की सलाह देते हैं।


डॉक्टरों को बताना होगा कितने मरीज डिस्चार्ज हुए, कितने की मौत हुई, रेफर क्यों किए

13-Dec-2024
रायपुर।( शोर संदेश ) रायपुर मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में सेवा दे रहे डॉक्टरों का मूल्यांकन अब सख्त होने जा रहा हैं, अब डॉक्टरों को जानकारी देनी होगी कि यूनिटवाइज कितने मरीज भर्ती हुए, कितनों ने लामा या डामा करवाया, कितने मरीजों की मौत हुई, मरीज रेफर किए हैं तो क्यों, ओपीडी से कितने मरीजों को आईपीडी में भर्ती किया गया आदि। इसके अलावा सर्जिकल विभाग के डॉक्टरों के लिए अलग से गाइडलाइन जारी की गई है। 
कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन किरण कौशल ने सभी डीन व अस्पताल अधीक्षकों को पत्र लिखकर डॉक्टरों का मूल्यांकन तत्काल शुरू करने को कहा है। हर माह के पहले सप्ताह में डॉक्टरों के काम की जानकारी सीएमई कार्यालय भेजी जाएगी। वहीं, माह के दूसरे सप्ताह में वीसी के माध्यम से चर्चा होगी। दरअसल, लामा व डामा के केस में परिजन मरीज को आंबेडकर अस्पताल से रिफर करवाकर किसी निजी अस्पताल में ले जाते हैं। इस तरह के केस में कई बार पर्याप्त इलाज नहीं मिलने की बात भी सामने आती रही है। यही नहीं, कुछ जूनियर डॉक्टर लामा को हथियार बनाकर मरीजों को जबर्दस्ती अस्पताल से चले जाने को कहते हैं। इसमें एक नोटशीट बनती है, जिसमें अटेंडेंट को हस्ताक्षर करना होता है।
अब डॉक्टरों को ये बताना होगा कि उनकी यूनिट में हर माह में कितने मरीज लामा व डामा हो रहे हैं। किसी मरीज की मौत हुई है तो भी उन्हें बताना होगा? हालांकि इसमें नोट करने वाली बात तो है, लेकिन अगर मरीज गंभीर स्थिति में अस्पताल आए तो इसमें डॉक्टरों की लापरवाही नहीं मानी जाएगी। फिर भी यूनिटवाइज मरीजों की मौत की संख्या से कुछ सवाल उठ सकते हैं।


सर्जिकल विभाग के डॉक्टरों के लिए अलग गाइडलाइन जारी की गई है। सर्जन को बताना होगा कि कौनसी सर्जरी की, सर्जरी या उसके बाद कॉम्प्लीकेशन तो नहीं हुआ? यही नहीं ये भी बताना होगा कि कितनी सर्जरी की और सर्जरी के दौरान या बाद में कितने मरीजों की मौत हुई? इसके साथ ही डॉक्टरों को अब रिसर्च का टॉपिक और कितने रिसर्च का पब्लिकेशन हुआ, ये भी जानकारी भेजनी होगी। जर्नल का नाम, कॉन्फ्रेंस में साइंटिफिक प्रेजेंटेशन भी बताना होगा। कॉन्फ्रेंस कहां हुआ या क्या अवार्ड मिला, गूगल शीट में ये जानकारी देनी होगी।
इस संबंध में कुछ डॉक्टरों का कहना हैं कि काम करने वाले डॉक्टरों के लिए यह कोई डरने वाली बात नहीं है। डरना तो उन डॉक्टरों को चाहिए जो समय बिताने के लिए कॉलेज या अस्पताल आते हैं। यानी जिनका पूरा ध्यान प्राइवेट प्रेक्टिस पर होता है। उन्हें अब बताना होगा कि कितने भर्ती हुए, कितने डिस्चार्ज, बेड की क्या स्थिति है? हाल में डीन ने सभी एचओडी को पत्र लिखकर इस तरह की जानकारी मांगी थी। चर्चा है कि डीन के कदम के बाद संचालनालय ने यह कदम उठाया है।

सर्दी में घर पर बनाएं स्वादिष्ट और हेल्दी सहजन का सूप

13-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है। इस मौसम में गर्मा-गर्म सूप पीने का एक अलग ही मजा होता है। ठंड के समय हर कोई कुछ गर्म और पौष्टिक खाना चाहते हैं, तो आप इस मौसम में सूप के ऑप्शन तलाशते हैं, तो आप घर पर बने सूप का मजा ले सकते हैं। घर पर बने सूप का एक शानदार विकल्प हो सकता है और इसे बनाना भी काफी किफायती है, क्योंकि इस बनाने के लिए सामग्रियां बेहद कम मात्रा में उपयोग किया जाता है। आइए जानते हैं सहजन का सूप घर पर कैसे सरल तरीके से बना सकते हैं।

सामग्री

- 1 कप दाल

- ताजी सहजन के छोटे टुकड़े

- 1 कटा हुआ टमाटर

- 1 कटा हुआ प्याज

- थोड़ी सी अदरक

- सर्दियों में सहजन का सूप बनाने के लिए आपको मुट्ठी भर दाल, ताजी सहजन के छोटे टुकड़े, कटे हुए टमाटर, प्याज और थोड़े से अदरक की आवश्यकता होगी।

- सबसे पहले आप सभी सब्जियों को अच्छे से धोकर, छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। इन सामग्रियों को एक बर्तन में एक चम्मच हल्दी और करीब एक से डेढ़ गिलास पानी के साथ रखें। इन सभी चीजों को नरम होने तक पकने दें।

- फिर आप इस मिश्रण को ठंडा होने दें। फिर, इसे मिक्सर में डालकर मुलायम पेस्ट बना लें। इसके बाद आप पेस्ट को छलनी के छान लें ताकि गूदा और रेशे अलग हो जाएंगे।

- अब आप जरुरत के हिसाब से गाढ़ारपन को बरकार रखने के लिए गूदे में थोड़ा सा पानी जरुर मिलाएं, लेकिन सूप के स्वाद को सही रखने के लिए आवश्यकतानुसार ही पानी डालें।

- अगर आपको थोड़ा सा मसाला पसंद हैं तो आप स्वाद के लिए थोड़ी काली मिर्च और नमक मिला सकते हैं। इस मिश्रण को उबाल लें और इसे 3 से 4 मिनट तक उबलने दें। और तैयार है आपका स्वाद और पोषक तत्वों से भरपूर सहजन सूप (ड्रमस्टिक) तैयार है। यह सूप स्वाद के साथ ही हेल्थ के लिए सबसे बेहतरीन स्वाद से भरपूर है।


हर रोज खाएं प्रोटीन से भरपूर भुने हुए चने

13-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  हेल्थ एक्सपर्ट्स अक्सर भुने हुए चने को डाइट प्लान का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भुने हुए चने में पाए जाने वाले तमाम पौष्टिक तत्व आपकी ओवरऑल हेल्थ को काफी हद तक बूस्ट कर सकते हैं। अगर आप सही मात्रा में और सही तरीके से भुने हुए चने खाते हैं, तो आपकी सेहत पर ढेर सारे पॉजिटिव असर पड़ सकते हैं। भुने हुए चने में प्रोटीन, फाइबर, एंटी ऑक्सीडेंट, फैटी एसिड और फोलेट जैसे तत्व अच्छी खासी मात्रा में पाए जाते हैं।

अगर आप अपनी वेट लॉस जर्नी को आसान बनाना चाहते हैं, तो प्रोटीन और फाइबर रिच भुने हुए चने खाना शुरू कर दीजिए। भुने हुए चने खाकर आपका पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करेगा। इतना ही नहीं, भुने हुए चने की मदद से हार्मोन के स्तर को भी कंट्रोल किया जा सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लिमिट में रहकर भुने हुए चने का सेवन करने से आपकी गट हेल्थ पर पॉजिटिव असर पड़ सकता है। पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भी भुने हुए चने को डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा भुने हुए चने आपकी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में भी कारगर साबित हो सकते हैं।

क्या आप हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं? अगर हां, तो आप भुने हुए चने खाकर अपने ब्लड प्रेशर को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। अगर आप अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो हर रोज भुने हुए चने का सेवन करना शुरू कर दीजिए। कुल मिलाकर भुने हुए चने आपकी ओवरऑल हेल्थ के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।


यूरिक एसिड कंट्रोल करने वाली सब्जी है टिंडा

12-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  सर्दियों में हाई यूरिक एसिड के मरीज की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ जाती हैं। ठंड के कारण हड्डियों में दर्द और अकड़न होने लगती है ऊपर से अगर यूरिस एसिड बढ़ जाए तो फिर दर्द के कारण चलना फिरना भी मुश्किल हो जाता है। हालांकि डाइट से यूरिक एसिड को कम किया जा सकता है। सर्जियों में ऐसी कई सब्जियां मिलती है जो हाई यूरिक एसिड को कम करने में मदद करती हैं। ऐसी ही सब्जी है टिंडा, जो स्वाद में काफी लौकी जैसा ही लगता है। यूरिक एसिड में डिंटा खाने से जोड़ों में जमा प्यूरीन आसानी से निकल जाता है। जानिए यूरिक एसिड में टिंडा खाने के फायदे और इसे कितने दिन खाने से आराम मिलेगा?
यूरिक एसिड को खाने से काबू करना है तो इसके लिए डाइट में लोग प्रोटीन और हाई फाइबर फूड शामिल करने जरूरी हैं। खाने में लौकी, तोरई और टिंडा की सब्जी जरूर शामिल करें। रोजाना इन सब्जियों के खाने से 1-2 महीने में ही शरीर में जमा यूरिक एसिड निकल जाएगा।
टिंडा खाने में भले ही लोगों को ज्यादा स्वादिष्ट न लगे, लेकिन टिंडा में कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते हैं। टिंडा खाने से शरीर को विटामिन सी, कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन, फास्फोरस, डाइट्री फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मिलते हैं। फाइबर रिच टिंडा खाने से पाचन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। टिंडा खाने से कब्ज की समस्या भी दूर भाग जाती है।
पोटेशियम, मैग्नीशियम और मैग्नीज ज्यादा होने के कारण टिंडा हार्ट के लिए भी अच्छी सब्जी माना जाता है। टिंडा पानी से भरपूर सब्जी है जो वजन घटाने और शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करती है। इसके अलावा विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन बी6 और विटामिन के ओवर ऑल हेल्थ में सुधार लाने मे मदद करते हैं। टिंडा खाने से किडनी फंक्शन में सुधार आता है और किडनी में जमा टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो लगातार 1-2 महीने टिंडा खाने से आप यूरिक एसिड को कंट्रोल कर सकते हैं। टिंडा के अलावा लौकी भी हाई यूरिए एसिड को तेजी से कम करती है। टिंडा और लौकी खाने से पेट से जुड़ी समस्याएं भी दूर होती हैं और जोड़ों के दर्द में भी आपको आराम मिलेगा।    

 


खांसी-जुकाम में गुड़ खाने के फायदे

12-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) मौसमी इंफेक्शन और खांसी जुकाम में अक्सर कहा जाता है गुड़ खा लो। आज से नहीं दादी-नानी के जमाने से गुड़ को इम्यूनिटी बूस्टर फूड्स के रूप में देखा जाता है। लोग इसे अजवाइन के साथ लेते हैं। गुड़ का शरबत पीते हैं, गुड़ की चाय लेते हैं और फिर आप गुड़ को गर्म पानी के साथ कई प्रकार से ले सकते हैं। पर समझने वाली बात ये है कि गुड़ इम्यूनिटी बूस्ट क्यों और कैसे, जानते हैं इसके तमाम उन खास गुणों के बारे में जो हमें बीमारियों से बचा सकते हैं।
गुड़ की खास बात ये है कि इसे खाने से शरीर में गर्मी बढ़ती है। ये आपके शरीर के तमाम अंगों को एनर्जी देता है और मौसमी बदलाव के साथ शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करता है। इसके अलावा ये शरीर के बाहरी और अंदरूनी तापमान के बीच एक संतुलन बनाने में मदद करता है जिससे आप अचानक मौसम में आए बदलाव के कारण बीमार नहीं पड़ते।
 गुड़ एंटी बैतक्टीरियल गुणों से भरपूर है और शरीर में सूजन को रोकने मे मदद करता है। इस वजह से सर्दी-जुकाम में इसे खाना फायदेमंद हो जाता है। इससे गले की खराश समेत कई समस्याओं में कमी आती है। इसके अलावा सिर दर्द और कमजोरी में भी ये मददगार है क्योंकि गुड़ में आयरन है और ये आयरन रेड ब्लड सेल्स को बढ़ावा देता है।
 गुड़ एंटीबैक्टीरियल है। ये टी सेल्स को बढ़ावा देता है और शरीर को मौसमी इंफेक्शन से बचाता है। इससे होता ये है कि आप कई मौसमी बीमारियों से बचे रहते हैं। जैसे अचानक से फ्लू होना। सूखी खांसी और कफ की समस्या में भी गुड़ का सेवन करना कई प्रकार से फायदेमंद है। तो, सर्दियां आ रही हैं तो अपनी डाइट में गुड़ को शामिल कर लें।


पोषक तत्वों से भरपूर है मखाना

11-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  इन दिनों लोग मोटापे की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। ऐसे में इसे कम करने के लिए न जाने कितने जतन करते हैं। लेकिन एक बात जान लें अगर डाइट सही नहीं है तो आप कितनी भी कोशिश कर लें मोटापा कम नहीं होगा। अपनी डाइट में आप इस सूखे मेवे को शामिल कर मोटापे से छुटकारा पा सकते हैं। छोटे छोटे गोल आकार के मखाने में एंटीऑक्सीडेंट्स कैल्शियम फाइबर प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पाचन क्षमता को बेहतर बनाते हैं। इसमें एंटी एजिंग गुण मौजूद होते हैं जो आपकी स्किन की बेहतर देखभाल करते हैं। अगर आप इसका सेवन सुबह के समय करते हैं तो इसके फायदे कई गुना बढ़ जाते हैं। चलिए हम आपको बताते हैं सुबह के समय इसका सेवन करने से आप सेहत को क्या फायदे होंगे।
अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो सुबह के समय एक मुट्ठी मखाना रोज़ाना खाएं। सुबह इसका सेवन करने से यह आसानी से पच जाता है। ऐसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ रहता है और फूड की क्रेविंग भी कम होती है, जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है। मखाना देसी घी में भूनकर नमक और काली मिर्च मिलाकर नमकीन की तरह खा सकते हैं और अगर आपको दूध पसंद है तो आप इसे दूध में उबालकर भी पी सकते हैं।
 मखाना ड्राई फ्रूट होने के साथ साथ शारीरिक कमजोरी दूर करने का सबसे अच्छा उपाय है। ये केवल सेहत को नहीं सुधारता, इसे डाइट में शामिल किया जाए तो ये गर्भधारण की समस्या से जूझ रहे लोगों की मदद करता है।
 कई पौष्टिक तत्वों से भरपूर होने के कारण ये डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है, इसके लगातार सेवन से शुगर कंट्रोल होता है।
 मखाना चूंकि एंटी ऑक्सिडेंट से भरपूर होता है इसलिए अगर आप रोज सुबह खाली पेट चार पांच मखा खा लेंगे तो आपके चेहरे पर उम्र के निशान कम होते जाएंगे और स्किन जवां होगी।
 मखाना किडनी के लिए बहुत ही अच्छा होता है। इसमें कैलोरी नाममात्र की होती है और कैल्शियम भरपूर होता है। इसलिए इस हड्डियों की मजबूती के लिए भी अच्छा डाइट माना जाता है।


स्किन के लिए फायदेमंद है अखरोट का सेवन

11-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) अखरोट एक ऐसा ड्राई फ्रूट है जिसका सेवन करने से आपकी सेहत को कई फायदे होंगे। हाल ही में हुई एक नई स्टडी के अनुसार, जो लोग रोज़ाना अखरोट का सेवन करते हैं, उन्हें दिल से जुड़ी बीमारी की संभावना बहुत कम होती है। इसमें मौजूद कैल्शियम, विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन हमारे शरीर को हेल्दी बनाते हैं। चलिए बताते हैं इस ड्राई फ्रूट के सेवन से आपके शरीर को क्या फायदे होते हैं।
हड्डियां बनाए मजबूत: अखरोट में मौजूद अल्फा-लिनोलेनिक एसिड कमजोर हड्डियों वाले लोगों के लिए वरदान है। अगर आपकी हड्डियों में हमेशा दर्द रहता है तो रोज़ाना सुबह के समय खाली पेट भीगे हुए अखरोट का सेवन करें।
स्किन के लिए फायदेमंद: अखरोट में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन बी6 आपकी स्किन की सेहत के लिए कारगर है। यह आपकी स्किन को जवां और चमकदार दिखने में मदद करता है। यानी आप अपनी स्किन को मुलायम बनाए रखना चाहते हैं तो रोजाना 5-6 अखरोट खाएं।
दिमाग करे तेज: जिन लोगों को हर चीज़ भूलने की आदत होती है उन्हें अपनी डाइट में इस ड्राई फ्रूट को ज़रूर शामिल करना चाहिए। अखरोट में मौजूद ओमेगा 3 फैटी एसिड और विटामिन E जैसे पोषक तत्व आपके दिमाग की सेहत को हेल्दी बनाते हैं। अखरोट खाने से दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है जिससे ऑक्सीजन आसानी से दिमाग तक पहुंच पाते हैं।
डायबिटीज करे कंट्रोल:  अखरोट डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है। दरअसल, अखरोट ब्लड में ग्लूकोज के स्तर को कंट्रोल करता है जिससे टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम कम हो जाता है।
वजन कम करने में मददगार: अगर आप बढ़ते मोटापे से परेशान हैं तो आपका वजन कम करने में अखरोट बेहद फायदेमंद हो सकता है। दरअसल इसमें है प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है जो आपकी भूख को कम करता है।
पूरे दिन एक्टिव रहने के लिए रोजाना सुबह के समय खाली पेट 5-6 भिगोया हुआ अखरोट खाएं। भिगोया हुआ अखरोट आपकी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है।


इन लोगों को नहीं खानी चाहिए फूल गोभी

10-Dec-2024

नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) गैस और ब्लोटिंग की समस्या- जिन लोगों को अक्सर खाने-पीने से गैस और एसिडिटी की समस्या रहती है उन्हें फूलगोभी का सेवन न के बराबर करना चाहिए। गोभी में कार्बोहाइट्रेट होते हैं, जिससे पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। गोभी की सब्जी या पराठे खाने के बाद आपको गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है। इसलिए गोभी का सेवन न करें।
थायराइड में गोभी नहीं खाएं- अगर आपको थायराइड की समस्या है तो फूलगोभी न खाएं। इससे आपकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फूलगोभी खाने से थायराइड ग्लैंग में आयोडीन के इस्तेमाल करने की शक्ति कम हो जाती है। जिससे मुश्किल हो सकती है। फूल गोभी खासतौर से T3 और T4 हार्मोन के लेवल को प्रभावित कर सकती है। इसलिए थायराइड के मरीज कम से कम फूलगोभी खाएं।
पथरी होने पर न खाएं गोभी- फूल गोभी का सेवन पथरी की समस्या होने पर भी नहीं करना चाहिए। इससे नुकसान हो सकता है। खासतौर से गॉलब्लैडर और किडनी में पथरी होने पर फूल गोभी खाने से बचना चाहिए। फूल गोभी में कैल्शियम होता है जिससे पथरी की परेशानी और बढ़ सकती है।
ब्लड क्लॉटिंग होने पर- अगर आपको ब्लड क्लोटिंग की शिकायत रहती है तो फूलगोभी का सेवन बिल्कुल न करें। फूलगोभी में पोटैशियम काफी ज्यादा होता है जिससे शरीर में खून और गाढ़ा हो सकता है। इसलिए गोभी का सेवन सीमित करें या फिर न खाएं।
प्रेगनेंसी में न खाएं गोभी- गर्भावस्था के दौरान भी आपको फूल गोभी का सेवन करने से बचना चाहिए। इससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। खासतौर से प्रेग्नेंसी में गैस, एसिडिटी और अपच की समस्या ट्रिगर कर सकती है। इसलिए गोभी से परहेज करना जरूरी है।




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