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स्वास्थ

ठंड आते ही शरीर में कम होने लगता है ये विटामिन

04-Dec-2024
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अलग-अलग पोषक तत्वों की जरूरत होती है। खासतौर से ठंड के मौसम में इम्यूनिटी काफी कमजोर होने लगती है। सर्दियों में शरीर में कई जरूरी विटामिन और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। खासतौर से विटामिन डी कम होने लगता है जिससे पूरे शरीर पर बुरा असर पड़ता है। सर्दियों में शरीर में विटामिन डी की कमी होने से रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि खाने में विटामिन डी से भरपूर चीजें शामिल कर लें। जिससे शरीर में विटामिन डी की दैनिक जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।

मशरूम- विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए खाने में मशरूम जरूर शामिल करें। मशरूम को विटामिन डी का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। मशरूम जब सूरज की रौशनी के संपर्क में आता है तो इससे विटामिन डी का उत्पादन होता है। मशरूम को अपनी डाइट का हिस्सा जरूर बनाएं।


सी फूड- विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए खाने में सी फूड को शामिल करें। आप समुद्री मछलियों में सैलमन, ट्यूना, और मैकेरल फिश खा सकते हैं। ये विटामिन डी और हेल्दी फैट्स का अच्छा सोर्स मानी जाती हैं।

संतरा- ठंड में कुछ लोग संतरा खाने से बचते हैं लेकिन संतरा विटामिन डी, विटामिन सी और कैल्शियम से भरपूर होता है। आप संतरा या फिर संतरे का जूस पी सकते हैं। इससे शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम दोनों की कमी पूरी होगी। इम्यूनिटी भी मजबूत बनेगी।


दूध- दूध और डेयरी उत्पाद भी विटामिन डी का अच्छा सोर्स हैं। खासतौर से गाय का दूध पीने से शरीर को विटामिन डी मिलता है। दूध में विटामिन डी के अलावा कैल्शियम और दूसरे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इसलिए दिन में 1-2 गिलास दूध जरूर पीएं।

दही- शाकाहारी लोग खाने में दही जरूर शामिल करें। सर्दियों में ताजा घर का बना दही खाएं। इससे शरीर को विटामिन डी और कैल्शियम दोनों मिल जाएंगे। रोजाना दही खाने से हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है और पाचन भी दुरुस्त रहता है।
 

नुकसान भी पहुंचा सकता है हल्दी वाला दूध

04-Dec-2024
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) हल्दी वाला दूध पीकर ज्यादातर लोग अपनी ओवरऑल हेल्थ को काफी हद तक इम्प्रूव कर सकते हैं। लेकिन कुछ लोगों के लिए हल्दी वाला दूध नुकसानदायक साबित हो सकता है। लोग दादी-नानी के जमाने से हल्दी वाले दूध को सेहत के लिए वरदान मानते हैं। हालांकि, ज्यादा हल्दी वाला दूध पीने से आपकी सेहत पर पॉजिटिव असर की जगह नेगेटिव असर भी पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि किन लोगों को हल्दी वाला दूध पीने से बचना चाहिए।

जिन लोगों को गैस या फिर ब्लोटिंग जैसी पेट से जुड़ी समस्या रहती है, उन्हें हल्दी वाले दूध को अपनी डाइट का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए। हल्दी वाले दूध में पाए जाने वाले तत्व आपकी इस समस्या को बढ़ाने का काम कर सकते हैं। इसके अलावा डायबिटीज जैसी साइलेंट किलर बीमारी के मरीजों को भी डॉक्टर की सलाह लिए बिना हल्दी वाला दूध नहीं पीना चाहिए।
अगर आपको अक्सर लो ब्लड प्रेशर रहता है, तो आपके लिए हल्दी वाला दूध काफी ज्यादा हानिकारक साबित हो सकता है। हल्दी वाला दूध ब्लड प्रेशर को और ज्यादा लो कर सकता है। इसके अलावा अगर आपको दूध से एलर्जी है, तो भी आपको हल्दी वाले दूध को अपने डाइट प्लान में शामिल करने से बचना चाहिए वरना आपकी सेहत को लेने के देने भी पड़ सकते हैं।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बरसाती मौसम में भी हल्दी वाला दूध पीने से बचना चाहिए। आयुर्वेद के मुताबिक हल्दी वाला दूध आपके लिए तभी फायदेमंद साबित हो सकता है, जब आप इसका सेवन लिमिट में रहकर करें। दरअसल, किसी भी चीज को जरूरत से ज्यादा मात्रा में कंज्यूम करने से आपकी सेहत बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है।

 


जीरा वॉटर से दूर हो जाएगी पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या

02-Dec-2024
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  आयुर्वेद के मुताबिक जीरा वॉटर आपके पेट की सेहत के लिए वरदान साबित हो सकता है। पेट से जुड़ी समस्याओं को अलविदा कहने के लिए जीरे के पानी को पिया जा सकता है। बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए जीरे के पानी को सुबह-सुबह खाली पेट पीने की सलाह दी जाती है। महज कुछ ही दिनों के अंदर आपको पॉजिटिव असर दिखाई देने लगेगा और आपका पेट साफ रहने लगेगा।
जीरे का पानी बनाने के लिए आपको रात में एक गिलास पानी में लगभग एक स्पून जीरा डालना है। अब अगली सुबह इस पानी को हल्का गर्म कर लीजिए। इसके बाद आप जीरे के पानी को छानकर पी सकते हैं। अगर आप चाहें तो आप दूसरे तरीके से भी जीरा वॉटर बना सकते हैं। सुबह-सुबह एक गिलास पानी को बॉइल कर, इसमें एक स्पून जीरा डालें। अब दोबारा से पानी को बॉइल करें और फिर इसे छानकर पी जाएं।
कब्ज की समस्या को दूर करने के अलावा भी जीरे का पानी आपकी सेहत के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। जीरा वॉटर आपके इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने में मददगार साबित हो सकता है। डायबिटीज पेशेंट्स को भी जीरे का पानी पीने की सलाह दी जाती है। बॉडी को डिटॉक्स करने से लेकर वेट लूज करने तक, जीरा वॉटर आपकी ओवरऑल हेल्थ को सुधार सकता है।

यूरिक एसिड में फायदेमंद है अलसी का बीज

02-Dec-2024
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) यूरिक एसिड बढ़ने से जोड़ों में दर्द होना, उंगलियों में सूजन और पैरों और हाथों की उंगलियों में चुभन वाला दर्द होने लगता है। ऐसे में दवाइयों के साथ-साथ कुछ घरेलू नुस्खों को आजमाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। बता दें, अलसी का बीज यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में कारगर है। जानें, अलसी का बीज किस तरह से यूरिक एसिड को कंट्रोल करता है, इसका सेवन किस समय और कितना करना चाहिए ये भी बताएंगे।
अलसी के बीज में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं। यही पोषक तत्व शरीर में बढ़े हुए यूरिक एसिड को कंट्रोल करने का काम करते हैं। अलसी के तेल में एंटी इन्फ्लामेट्री गुण होते हैं जो हाई यूरिक एसिड के कारण होने वाले दर्द में मदद कर सकते हैं।
अलसी के बीज वजन को घटाने में कारगर हैं। इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर और प्रोटीन होता है। अगर आप इन्हें खाएंगे तो ये आपकी भूख को कंट्रोल करने में मदद करेगा। बहुत की कम लोग इस बात को जानते होंगे कि अलसी में मौजूद फाइबर पाचन की प्रक्रिया को धीमा कर देती है। इससे हार्मोन नियंत्रित रहता है जो आपकी भूख को शांत करने का काम करता है। लिहाजा आपका पेट भरा-भरा लगता है और वजन अपने आप घटने लगता है। अलसी में भरपूर मात्रा में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है। ये धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम करता है जिससे दिल हेल्दी रहता है।
अलसी का सेवन आप दिन में एक बार और आप दोपहर के भोजन के बाद ही करें। दोपहर में खाना खाने के आधे घंटे बाद एक चम्मच चबा चबाकर खाएं। अलसी के बीजों को रात भर पानी में भिगोएँ और सुबह खाली पेट खाएँ।सलाद पर अलसी के बीज छिड़कें। हर दिन एक ही समय पर अलसी के बीज खाएँ। दिन में अलसी के बीज खाना ज़्यादा फ़ायदेमंद हो सकता है।

 


गुणों की खान है करेला

30-Nov-2024
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) स्वाद में कड़वा जहर जैसा लगने वाला करेला सेहत के लिए वरदान से कम नहीं है। कुछ लोगों को करेला खाना बिल्कुल पसंद नहीं होता है। क्योंकि इसका स्वाद कड़वा होता है। आपको बता दें जितना कड़वा करेला स्वाद में होता है शरीर के लिए उतना ही ज्यादेमंद है। दरअसल करेला में ऐसे पोषक तत्त्व पाए जाते हैं जो डायबिटीज और कई दूसरी बीमारियों में असरदार काम करते हैं। भले ही सब्जी के रूप में करेला आपको पसंद न हो लेकिन इसे दवा समझकर ही अपनी डाइट में शामिल कर लें। आचार्य बालकृष्ण की मानें तो करेले का उपयोग सिर्फ खाने में ही नहीं बल्कि लगाने में भी किया जाता है। आइये जानते हैं करेला कौन सी बीमारियों में फायदा करता है और इसका सेवन कैसे करें?
डैंड्रफ दूर- कुछ लोगों को डैंड्रफ यानि रूसी की समस्या रहती है। उनके लिए करेला का रस फायदेमंद हो सकता है। डैंड्रफ हटाने के लिए आप करेले के जूस का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए करेले के पत्तों का रस निकालकर बालों पर लगा लें। आप इस जूस में थोड़ी हल्की मिलाकर उपयोग करें डैंड्रफ से छुटकारा मिल जाएगा।
सिरदर्द में आराम- अगर आपको हमेशा सिरदर्द की परेशानी होती है तो आप करेले की पत्तियों को पीस कर इसका रल सिर में लगाएं। इस रस को अपने माथे पर लगा लें और सिर पर मालिश जैसी कर लें। काफी राहत मिलेगी।
मुंह के छाले दूर करे- अक्सर गर्मियों में मुंह में छाले हो जाते हैं। जिससे खाने पीने में परेशानी होती है। ऐसे में आप कई तरह के नुस्खों का उपयोग करते है, लेकिन उनका कोई खास आराम नहीं मिलता है। आप एक बार करेले का रस छालों पर लगा लें। इससे काफी फायदा मिलेगा। रस लगाने के बाद लार को बाहर निकलने दें और कुछ देर मुंह खोलकर लटकाए रखें। छाले 1 दिन में ही ठीक हो जाएंगे।
पथरी दूर करे- करेले का जूस पीने से पथरी के मरीज को आराम मिलता है। जिन लोगों को पथरी की परेशानी है, उन्हें करेले का रस जरूर पीना चाहिए। इससे पथरी को नेचुरली निकालने में मदद मिलती है।
घुटनों के दर्द में फायदेमंद- जिन लोगों को अक्सर घुटनों में दर्द होता रहता है। ऐसे लोग भी करेला का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए कच्चे करेले को आग में भून लें। अब करेला को मसल लें और रुई में लपेट कर घुटने में बांध लें। इससे जोड़ों और घुटने के दर्द में काफी आराम मिलेगा।

अमृत से कम नहीं है अंजीर का पानी

30-Nov-2024
नई दिल्ली। ( शोर संदेश ) ड्राई फ्रूट्स में अंजीर एक फायदेमंद सुपरफूड है। आप अंजीर को फल और ड्राई फ्रूट किसी भी रूप में खा सकते हैं। ज्यादातर लोग सूखे अंजीर का सेवन करते हैं। अंजीर को सुखाकर खाने से ये जल्दी खराब नहीं होती। हालांकि सूखी हुई अंजीर को पानी में भिगोकर खाने से इसके फायदे और बढ़ जाते हैं। इससे अंजीर पेट और पाचन के लिए फायदेमंद हो जाती है। अगर आप अंजीर का पानी भी पी लेते हैं तो ये आपके स्वास्थ्य के लिए अमृत समान बन जाता है। कब्ज, गैस, एसिडिटी को दूर कर अंजीर शरीर को ताकत पहुंचाती है। शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए आपको रोजाना भीगी हुए अंजीर खानी चाहिए।

पानी में भीगी अंजीर खाने के फायदे

पानी में भीगी हुई अंजीर खाने से कब्ज़ से छुटकारा मिलता है। अंजीर में फाइबर ज्यादा होता है जिससे पेट साफ होता है और वजन भी कम होता है। पानी में भीगे अंजीर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी और कम हो जाता है। जिससे डायबिटीज के मरीज भी अंजीर खा सकते हैं। हार्ट को हेल्दी रखने और ब्लड शुगर को कम करने के लिए अंजीर को भिगोकर ही खाना चाहिए। इस तरह रोजाना 2 अंजीर खाने से हड्डियों को ताकत मिलेगी। प्रेगनेंट महिलाओं के लिए और PMS और PCOD के मरीज भी अंजीर खा सकते हैं।

अंजीर का पानी पीने के फायदे

अगर आप अंजीर को रात में साफ पानी में भिगोते हैं और सुबह अंजीर खाने के बात उसका बचा हुआ पानी पीते हैं तो ये कई और फायदे भी देता है। अंजीर का पानी कई विटामिन और मिनरल से भरपूर होता है। इससे गैस एसिडिटी में आराम मिलता है। अंजीर का पानी पाचन प्रक्रिया को सुचारू बनान में मदद करता है। भीगे अंजीर और उसका पानी आंतों के लिए अच्छा माना जाता है। अंजीर का पानी वेट लॉस में भी मददगार साबित होता है। त्वचा को हेल्दी बनाने और स्ट्रेस दूर करने में भी अंजीर का पानी फायदेमंद है।

एक दिन में कितनी अंजीर खानी चाहिए?

अंजीर खाने में काफी स्वादिष्ट और मीठा ड्राई फ्रूट है। लेकिन फायदों के चक्कर में ज्यादा अंजीर खाने से उल्टा नुकसान हो सकता है। आपको 1 दिन में 2-3 अंजीर से ज्यादा नहीं खानी चाहिए। ज्यादा अंजीर खाने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है।

दाल में घी मिलाकर खाना चाहिए या फिर नहीं

29-Nov-2024
रायपुर।   ( शोर संदेश )  घी में पाए जाने वाले तमाम पौष्टिक तत्व आपकी ओवरऑल हेल्थ को काफी हद तक बूस्ट कर सकते हैं। अब सवाल ये उठता है कि घी को डाइट में शामिल करने का सही तरीका क्या है? कुछ लोग रोटी में घी लगाकर खाते हैं, तो कुछ लोग दाल में घी मिक्स कर खाना पसंद करते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आयुर्वेद के मुताबिक दाल में घी मिलाकर सेवन करना आपकी सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। दाल में महज एक चम्मच घी मिलाकर खाएं और खुद-ब-खुद पॉजिटिव असर देखें।
अगर आप दाल में घी डालकर खाएंगे तो आपकी गट हेल्थ को काफी हद तक सुधारा जा सकता है। कब्ज और अपच जैसी पेट से जुड़ी बीमारियों को दूर करने के लिए इस तरह से घी का सेवन किया जा सकता है। सही मात्रा में घी कंज्यूम करने से आप अपनी वेट लॉस जर्नी को भी आसान बना सकते हैं। दाल में घी मिक्स कर खाने से आपकी हड्डियों को मजबूती मिलेगी जिससे आप जोड़ों के दर्द की समस्या का शिकार बनने से बच सकते हैं।
अगर आपकी इम्यूनिटी कमजोर है तो आपको दाल में घी मिक्स करके जरूर खाना चाहिए। इस तरीके से घी को अपने डाइट प्लान में शामिल करके आप अपने इम्यून सिस्टम को काफी हद तक मजबूत बना सकते हैं। दिल की सेहत के लिए भी घी में पाए जाने वाले तत्व फायदेमंद साबित हो सकते हैं। शरीर की थकान और कमजोरी दूर करने के लिए भी घी को दाल में मिलाकर कंज्यूम किया जा सकता है।
घी आपकी ब्रेन हेल्थ को भी इम्प्रूव कर सकता है। हालांकि, बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए घी को लिमिटेड मात्रा में ही कंज्यूम करना चाहिए। इसके अलावा आपको घी की शुद्धता की जांच भी कर लेनी चाहिए। मिलावटी घी कंज्यूम करने से आपकी सेहत पर पॉजिटिव की जगह नेगेटिव असर भी पड़ सकता है।

 


सर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं ये 7 आयुर्वेदिक टिप्स

27-Nov-2024
आयुर्वेद, जो जीवन और स्वास्थ्य का विज्ञान है, ऋतु अनुसार आहार की महत्ता को प्रमुखता से बताता है। प्राचीन ग्रंथों में आचार्य कश्यप ने आहार को “महाभैषज्यम्” कहकर इसकी तुलना सर्वोत्तम औषधि से की है।
सर्दियों का मौसम केवल ठंड का अहसास ही नहीं लाता, बल्कि हमारे शरीर को गर्म रखने और स्वास्थ्य को बनाए रखने की चुनौती भी पेश करता है। आयुर्वेद, जो जीवन और स्वास्थ्य का विज्ञान है, सर्दियों के दौरान आहार और जीवनशैली पर विशेष ध्यान देने की सलाह देता है। आइए जानते हैं कि इस मौसम में आयुर्वेद के अनुसार कैसे स्वस्थ रह सकते हैं।

ऋतुचक्र के अनुसार खानपान

आयुर्वेद में आहार को औषधि के रूप में देखा गया है। ऋतुचक्र के साथ हमारे शरीर की पाचन अग्नि भी बदलती है। सर्दियों में पाचन अग्नि तेज होती है, इसलिए पोषण से भरपूर और गर्म तासीर वाले भोजन का सेवन करना चाहिए। ठंडे और कच्चे खाद्य पदार्थों से बचें, क्योंकि ये शरीर को सुस्त बना सकते हैं।

घी और तेल: आयुर्वेद घी, नारियल तेल और सरसों के तेल के उपयोग की सलाह देता है। ये त्वचा की नमी बनाए रखते हैं और शरीर को भीतर से गर्म रखते हैं।
मसाले: हल्दी, अदरक, काली मिर्च और दालचीनी जैसे मसाले न केवल भोजन का स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि सर्दियों में शरीर को गर्म भी रखते हैं।

गाजर, शकरकंद, चुकंदर और मूली जैसी सब्जियां विटामिन और मिनरल्स का खजाना हैं। ये पेट को भरा हुआ महसूस कराती हैं और ओवरईटिंग से बचाती हैं। इनका नियमित सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने और ऊर्जा बनाए रखने में सहायक होता है।
सर्दियों में साबुत अनाज जैसे जौ, ओट्स और मक्का ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत हैं। ये शरीर को गर्म रखने के साथ पाचन को भी सुगम बनाते हैं। इन्हें भोजन में शामिल करने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है।

गर्म पेय और सूप का सेवन
सर्दियों में ठंडे पेय पदार्थों की बजाय गर्म पेय जैसे हर्बल चाय, अदरक-हल्दी वाला दूध, और सब्जियों का सूप पिएं। ये न केवल शरीर को गर्म रखते हैं, बल्कि इम्यून सिस्टम को भी मजबूत करते हैं।

व्यायाम और मालिश का महत्व
सर्दियों में नियमित व्यायाम करना शरीर को सक्रिय बनाए रखता है। इसके साथ ही, गर्म तेल से शरीर की मालिश करना त्वचा को मुलायम और शरीर को ऊर्जावान बनाता है। व्यायाम और मालिश का संयोजन शरीर को ठंड से बचाने का सबसे बेहतर तरीका है।
सर्दियों में जंक फूड की बजाय देसी और गर्म तासीर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करें। उपवास से बचें, क्योंकि यह पाचन अग्नि को नुकसान पहुंचा सकता है। नियमित और संतुलित आहार से वात दोष को नियंत्रित किया जा सकता है।

केंद्र सरकार के फैसले से कैंसर की ये दवाएं होंगी सस्ती, सीमा शुल्क में छूट और जीएसटी दर में कटौती

03-Nov-2024
नई दिल्ली।( शोर संदेश )  सीमा शुल्क से छूट और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती के बाद तीन कैंसर रोधी दवाओं (ट्रैस्टुजुमाब, ओसिमर्टिनिब और डुरवालुमाब) की अधिकतम खुदरा कीमत (एमआरपी) तय होगी। राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने दवा निर्माताओं को इन तीन कैंसर रोधी दवाओं पर एमआरपी कम करने का निर्देश दिया है।

सीमा शुल्क में छूट और जीएसटी दरों में कटौती
रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि सीमा शुल्क में छूट और जीएसटी दरों में कटौती के बाद एनपीपीए ने दवा निर्माताओं को तीन कैंसर रोधी दवाओं की एमआरपी घटाने का निर्देश दिया है। मंत्रालय के मुताबिक एनपीपीए ने 28 अक्टूबर को जारी कार्यालय ज्ञापन में संबंधित निर्माताओं को तीन कैंसर रोधी दवाओं पर एमआरपी कम करने का निर्देश दिया है। यह वर्ष 2024-25 के लिए केंद्रीय बजट में की गई घोषणा के मुताबिक है, जिसमें इन तीन कैंसररोधी दवाओं को सीमा शुल्क से छूट दी गई है।

मंत्रालय ने कहा कि यह किफायती कीमतों पर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। ज्ञापन में विनिर्माताओं को निर्देश दिया गया है कि कि वे डीलरों, राज्य औषधि नियंत्रकों और सरकार को एक मूल्य सूची या अनुपूरक मूल्य सूची जारी करें, जिसमें बदलावों का संकेत दिया जाए और मूल्य परिवर्तन के संबंध में फॉर्म-II या फॉर्म-V के माध्यम से एनपीपीए को जानकारी प्रस्तुत की जाए।

केंद्रीय बजट वित्तीय बोझ घटाने का किया था ऐलान
केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2024-25 में कैंसर से पीड़ित लोगों के वित्तीय बोझ घटाने के लिए तीन कैंसर दवाओं पर सीमा शुल्क में छूट देने का ऐलान किया था। सरकार ने इन तीन कैंसर दवाओं पर जीएसटी दर 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।

गौरतलब हो कि ट्रैस्टुज़ुमैब डेरक्सटेकन दवा का उपयोग स्तन कैंसर के लिए किया जाता है, ओसिमर्टिनिब का उपयोग फेफड़ों के कैंसर के लिए किया जाता है, जबकि ड्यूरवालुमैब फेफड़ों के कैंसर और पित्त पथ के कैंसर दोनों के लिए है।

कलेक्टर ने जिला चिकित्सालय का किया आकस्मिक निरीक्षण

29-Oct-2024
जशपुर।  ( शोर संदेश ) कलेक्टर रोहित व्यास ने आज जिला चिकित्सालय का आकस्मिक निरीक्षण किया और मरीजों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जशपुर जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का सार्थक प्रयास कर रहे हैं। 
इसी कड़ी में कलेक्टर ने लगभग 3 घंटे अस्पताल के एक एक वार्ड का गंभीरता से निरीक्षण किया और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को दिए। उन्होंने सभी डाक्टरों और स्टाप को समय पर ओपीडी में बैठने के निर्देश दिए हैं। ताकि मरीजों को इलाज करवाने में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होने पाए।
कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान नदारद डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। जिनका छुट्टी का आवेदन नहीं, बिना सूचना के गायब डाक्टरों और कर्मचारियों का एक दिन का अवैतनिक अवकाश घोषित करने के लिए कहा गया। कलेक्टर ने कहा मरीजों को इलाज करवाने में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही। 
कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान हमर लैब, जनरल वार्ड, महिला वार्ड, पुरुष वार्ड, डाक्टरों की ओपीडी आईसीयू, रसोईघर, शौचालय, दवाई भंडारण कक्ष, सीटी स्कैन, पैथोलॉजी, एक्स रे रूप, मातृत्व और शिशु अस्पताल, सोनोग्राफी सेंटर आदि का  वार्ड का बारीकी से अवलोकन करके मरीजों के लिए व्यस्था दुरूस्त करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने शौचालय की नियमित साफ सफाई करने के लिए कहा है। साथ ही मरीजों को मेन्यू के आधार पर भोजन देने के लिए कहा और भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने मातृत्व और शिशु अस्पताल के परिसर में मरीजों को दवाई वितरण करने के अलग काउंटर बनाने के लिए कहा है ताकि मां और बच्चे को शीघ्र दवाई उपलब्ध कराई जा सके।
कलेक्टर ने भर्ती मरीजों से चर्चा करके स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। मनोरा विकास खंड के काटाबेल निवासी श्याम राम से कलेक्टर ने मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली। आयुष्मान कार्ड बन रहा है कि नहीं। कार्ड के माध्यम से मरीजों को इलाज की सुविधा दी जा रही है कि नहीं इस सब के संबंध में जानकारी ली। कलेक्टर ने शौचालय के दरवाजे, खिड़की ठीक करवाने के निर्देश दिए हैं। और पुरुष और महिला शौचालय का नाम अनिवार्य रूप से अंकित करने के लिए कहा है। कलेक्टर ने कहा कि डाक्टरों के लिए एक गुगल सीट बनाया जाएगा उसमें प्रतिदिन एक डाक्टर कितने मरीजों को चेक किया या सर्जरी की गई उसकी जानकारी अपडेट की जाएगी। 



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