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किसान

टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए अलर्ट जारी

27-May-2020

दुर्ग (शोर सन्देश)। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले टिड्डी दल (लोकस्ट स्वार्म) का प्रकोप राजस्थान होते हुए महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश राज्य तक पहुंच गया है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यह हमारे राज्य और जिले में भी प्रवेश कर सकते है। केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र के सहायक निर्देशक ने सीमावर्ती जिले के कृषि अधिकारीयों कर्मचारियों और किसानों को सचेत रहने कहा है। टिड्डी दल सायंकाल 6-9 बजे खेतों में झुड़ में रहते है, इनकी गति 80-150 किलोमीटर प्रतिदिन होती है। तदनुसार कृषकों,ग्रामीणों कृषि विस्तार अधिकारी के माध्यम से तत्काल जानकारी प्राप्त करके नियंत्रण हेतु कृषि विभाग द्वारा पूर्ण तैयारी कर ली गई है। इसके रोकथाम के लिए जिले के प्राइवेट डीलर्स के यहाँ प्रभावशील अनुसंशित दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।

किसान डेजर्ट एरिया के लिए कीटनाषक मैलाथियोन, फेनवलरेट, क्विनालफोस तथा फसलों और अन्य वृक्षों के लिए क्लोरोपायरीफोस, डेल्टामेथ्रिन, डिफ्लूबेनजुरान, फिप्रोनिल, लेमडासाइहेलोथ्रिन कीटनाशक का प्रयोग कर सकते है। 


प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत ऋणी एवं गैर ऋणी किसान (भू-धारक एवं बटाईदार) शामिल हो सकते है

27-May-2020

राजनांदगांव (शोर सन्देश)। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ मौसम वर्ष 2020-21 जिले में संचालित है। इसके तहत् खरीफ में मुख्य फसल धान सिंचित, धान असिंचित एवं अन्य फसल मक्का, सोयाबीन शामिल है। योजना के अंतर्गत ऋणी एवं गैर ऋणी किसान (भू-धारक एवं बटाईदार) शामिल हो सकते है। जिस ग्राम में अधिसूचित फसल निहित है वह किसान फसल बीमा करा सकते है। किसानों को फसल बीमा कराने के लिए जिले में फसलवार निर्धारित ऋणमान के आधार पर प्रति हेक्टेयर 2 प्रतिशत प्रीमियम दर से योजना में शामिल हो सकते है। बीमा इकाई में अधिसूचित फसल उगाने वाले सभी ऋणी एवं गैर ऋणी किसान जो इस योजना में शामिल होने के इच्छुक हो वे बुआई पुष्टि प्रमाण पत्र क्षेत्रीय पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सत्यापित कराकर तथा आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खसरा बी-1 एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज (बोनी प्रमाण पत्र) प्रस्तुत कर योजना में शामिल हो सकते है। 


टिड्डी दल (Locust Swarm) का प्रकोप राजस्थान होते हुए महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश राज्य तक पहुंच गया

25-May-2020

राजनांदगांव (शोर सन्देश)। फसलों को नुकसान पहुचाने वाले टिड्डी दल (Locust Swarm) का प्रकोप राजस्थान होते हुए महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश राज्य तक पहुंच गया है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यह हमारे राज्य और जिले भी प्रवेश कर सकते है। केन्द्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र के सहायक निर्देंशक ने सीमावर्ती जिले के कृषि अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों को सचेत रहने कहा है। किसान डेजर्ट एरिया के लिए कीटनाशक मालाथियोन, फेनवालरेट, क्विनालफोस, फसलों और अन्य वृक्षों के लिए क्लोरोपायरीफोस, डेल्टामेथ्रिन, डिफ्लूबेनजुरान, फिप्रोनिल, लामडासाइहलोथ्रिन कीटनाशक का प्रयोग कर सकते हैं।


किसानों को मिली बड़ी राहत-छत्तीसगढ़ में लाख की खेती को कृषि का दर्जा मिलेगा

25-May-2020


रायपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ में लाख की खेती को अब कृषि का दर्जा मिलेगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लाख की खेती को फायदेमंद बनाने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा इस संबंध में प्रस्तुत प्रस्ताव को उपयुक्त और किसानों के लिए लाभकारी मानते हुए अपनी सहमति प्रदान कर दी है। मुख्यमंत्री ने सहमति प्रदान करते हुए कृषि, वन और सहकारिता विभाग को समन्वय कर लाख और इसके जैसी अन्य लाभकारी उपज को कृषि में शामिल करने का प्रस्ताव मंत्रीपरिषद की अगली बैठक में रखने के निर्देश दिए है। प्रदेश में लाख की खेती को कृषि का दर्जा मिलने से लाख उत्पादन से जुड़े कृषकों को भी सहकारी समितियों से अन्य कृषकों की भांति सहजता से ऋण उपलब्ध हो सकेगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में लाख की खेती की अपार संभावनाएं है। यहां के कृषकों के द्वारा कुसुम, पलाश और बेर के वृक्षों में परंपरागत रूप से लाख की खेती की जाती रही है। परंतु व्यवस्थित एवं आधुनिक तरीके से लाख की खेती न होने की वजह से कृषकों को लागत के एवज में अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता है। वन विभाग ने लाख की खेती को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से इसे कृषि का दर्जा देने तथा कृषि सहकारी समितियों के माध्यम से अन्य कृषकों की तरह लाख की खेती करने वाले किसानों को भी ऋण उपलब्ध कराने का सुझाव देते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल को प्रेषित प्रस्ताव को मान्य किए जाने का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने वन विभाग के इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति देने के साथ ही लाख उत्पादन एवं अन्य कोई ऐसी उपज जिसे कृषि की गतिविधियों में शामिल करना हो तो कृषि, वन एवं सहकारिता विभाग के साथ समन्वय कर प्रस्ताव मंत्रिपरिषद की आगामी बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

वनमंत्री मो. अकबर ने भी लाख को कृषि का दर्जा दिए जाने मुख्यमंत्री से विशेष आग्रह किया था। और 15 सालों से छत्तीसगढ़ के किसान भी लाख को कृषि का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे थे। इससे किसानों को भी राहत मिलेगा और कृषि से संबंधित सारी सुविधाएं अब लाख किसानों को भी मिलने लगेगी। 


राजीव गांधी किसान न्याय योजना से किसानों को बड़ी राहत मिली

24-May-2020

राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)। मेहनत करने वाले किसानों के चेहरे बयां कर रहे हैं कि उनकी उन्नति और खुशी। कोविड-19 के कारण लॉकडाउन के समय विपत्ति की इस घड़ी में किसान परेशान हो रहे थे। ऐसे समय में सरकार उनके हर सुख-दुख की सहभागी बनी और उन्हें मदद पहुंचाई। राजीव गांधी किसान न्याय योजना से किसानों को बड़ी राहत मिली।
ग्राम सोमनी और अर्जुनी किसान ने कहा किे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार शिद्दत से किसानों के हित में कार्य कर रही है। लॉकडाउन के इस कठिन समय में यह राशि मेरे लिए महत्वपूर्ण है और इस राशि से बारिश से पहले खेती-किसानी के लिए तैयारी कर सकूंगा। ग्राम अर्जुनी के किसान लेखूराम देवांगन ने कहा कि लॉकडाउन में बड़ी राहत मिली और यह राशि हमें सही समय पर मिली है।
छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत जिले के किसान लाभान्वित हुए है। राज्य सरकार इस योजना के तहत किसानों को खेती किसानी के लिए प्रोत्साहित करने के लिए खरीफ 2019 से धान और मक्का लगाने वाले किसानों को सहकारी समिति के माध्यम से उपार्जित मात्रा के आधार पर अधिकतम 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से अनुपातिक रूप से सहायता राशि देगी ।


छत्तीसगढ़ शासन लाॅकडाउन के विपदा के समय किसानों को आर्थिक संबल दे रही

24-May-2020

00 किसान ने लाॅकडाउन विपदा के समय मदद मिलने पर मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद
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किसान ने की ,अंतरित राशि से प्रति क्विंटल 50 रुपए का सहयोग राशि मुख्यमंत्री सहायता कोष में देने की घोषणा
रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ शासन की राजीव गांधी किसान न्याय योजना लाॅकडाउन के विपदा के समय किसानों को आर्थिक संबल दे रही है। धरसींवा विकासखंड के ग्राम मंगसा के किसान अजय वर्मा को इस योजना के तहत 21 मई को उनके बैंक खाते में 48 हजार 909 रुपए की राशि सीधे प्राप्त हुई
है। वर्ष 2019-20 में सिलयारी धान खरीदी केन्द्र में उन्होंने अपना धान सहकारी समिति के माध्यम से बेचा था। न्यूनतम समर्थन मूल्य की यह अंतरण राशि प्राप्त हुई है।
किसान अजय वर्मा ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को धन्यवाद देते हुए कहा कि लाॅकडाउन के इस विपदा वाले घड़ी में राज्य शासन ने कठिन समय पर किसानों को पैसे दिए हैं। उन्होंने बताया कि 272 क्विंटल धान बेचा है। उन्होंने कहा कि इस बेचे गए धान की अंतरित राशि का 50 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से वे मुख्यमंत्री सहायता कोष में दान करेंगे । उन्होंने यह भी बताया कि अभी तक वे इस कोष में 16 हज़ार रुपए से अधिक की राशि दान कर चुके है। उनका मानना है कि सरकार द्वारा अभी दी जा रही इस अंतरित राशि से किसानों को खेती - बाड़ी का काम शुरू करने में आसानी होगी। किसानों को खेती बाड़ी के लिए खाद-बीज की आवश्यकता होती है ऐसे समय में पैसे आने से अपने खेतों के लिए हाईब्रीड बीज एवं खाद खरीद सकेंग। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन ने प्रदेश के किसानों की समस्याओं को समझा और राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत् लाॅकडाउन के कठिन दौर से में उनको आर्थिक मदद दी।  


राजीव गाँधी किसान न्याय योजना से खरीफ की तैयारी में पहली किश्त से किसानों को मिलेगी मदद

24-May-2020

रायपुर (छत्तीसगढ़)। खेती-किसानी को बढ़ावा देने एवं किसानों में उत्साह वर्धन के लिए शुरू किए राजीव गांधी किसान न्याय योजना का असर अब दिखने लगा है। किसानों से मिली प्रतिक्रिया के अनुसार यह राशि न केवल उनका मनोबल बढ़ाएगी, बल्कि आगामी खरीफ फसल में भी यह मददगार साबित होगी।
जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा के प्रतिष्ठित किसान राणा दिनेश सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने अपना वादा निभाया। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण छोटे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में राजीव गांधी किसान योजना किसानों के लिए मददगार साबित होगी। आगामी खरीफ फसल के लिए किसान खाद, बीज और खेती से सबंधित अन्य जरूरत का समान खरीद सकेंगे। इससे किसानों का उत्साह बढ़ा है।
दिनेश सिंह ने बताया कि उन्हें राजीव गांधी किसान योजना के तहत कुल एक लाख 76 हजार 456 राशि मिलनी है। प्रथम किश्त के रूप में 64 हजार 300 रूपए उनके खाते में जमा हो गए हैं। उन्होंने समर्थन मूल्य पर 257 क्विंटल धान बेचा था।
दिनेश सिंह ने कोरोना पीड़ित परिवारों की मदद के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्राप्त हुई प्रथम किश्त की राशि में से मुख्यमंत्री राहत कोष में 5100 रुपए जमा करवाए हैं। इसी प्रकार जांजगीर-चांपा जिले के विकासखण्ड अकलतरा के ग्राम कोटगढ़ के किसान परदेशी साहू ने बताया कि योजना के तहत प्रथम किश्त के रूप में मिली राशि का उपयोग खरीफ फसल की तैयारी करेंगे। उन्होंने राज्य सरकार के इस निर्णय को किसान हितैषी बताते हुए आभार व्यक्त किया है।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना से लाभान्वित इसी विकासखण्ड के ग्राम कोटगढ़ निवासी अलखराम ने बताया कि उनके शामिलात खाते में साढ़े चार एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने करीब 70 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचा था। राज्य सरकार ने वादे के अनुसार राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत अंतर की राशि का भुगतान किया है। पहली किस्त मिल जाने से आगे खरीफ फसल की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना ने कोरोना संक्रमण के कारण उत्पन्न विपरित आर्थिक स्थिति में किसानों का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण भयावह बेरोजगारी की स्थिति निर्मित हो गई है। न्याय योजना से युवा वर्ग भी खेती किसानी के लिए रुचि लेने प्रेरित हो रहे हैं। किसानों के हित में राजीव गांधी किसान न्याय योजना के क्रियान्वयन और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य देने के लिए उन्होंने राज्य सरकार का आभार माना।  


किसान अनूप पैकरा को राजीव गांधी किसान न्याय योजना से मिली 17 हजार की राशि

24-May-2020

00 लॉकडाउन में मदद करने के लिए मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ सरकार को दिया धन्यवाद
रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ शासन की राजीव गांधी किसान न्याय योजना लॉकडाउन के समय में जशपुर जिले के आदिवासी किसानों को आर्थिक संबल दे रही है। जशपुरनगर के फरसाबहार विकासखंड के ग्राम खुटसेरा के किसान अनूप कुमार पैकरा के बैंक खाते में इस योजना के तहत् 21 मई को प्रथम किश्त के रूप में 17 हजार रुपए की राशि जमा हुई है। वर्ष 2019-20 में कोनपारा धान खरीदी केन्द्र में उन्होंने अपना धान बेचा था। जिसके तहत् उन्हें अंतरण राशि प्राप्त हुई है। इससे श्री पैकरा को बीज और धान खरीदकर उन्नत खेती करने में मदद हो सकेगी।
उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को धन्यवाद देते हुए कहा कि लॉकडाउन के इस विपदा की घड़ी में शासन ने सही समय पर खाते में पैसे दिए हैं। जून-जुलाई में खेती बाड़ी का काम शुरू हो जाता है और किसानों को खेती बाड़ी के लिए खाद-बीज की आवश्यकता होती है ऐसे समय में पैसे आने से उनकों अपने खेतों के लिए हाईब्रीड बीज एवं खाद खरीदने में आसानी होगी ताकि वे उन्नत खेती करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें।
उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन ने प्रदेश के किसानों की समस्याओं को समझा और राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत् लॉकडाउन के कठिन दौर से गुजर रहे किसानों के खातों में बोनस राशि अंतरित की गई । इससे उनकों आर्थिक रूप से मदद मिली है।  


खाद-बीज का 30 मई तक शत-प्रतिशत भण्डारण कराने के निर्देश

23-May-2020

 कृषि उत्पादन आयुक्त ने वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिए खरीफ की तैयारियों की समीक्षा की
रायपुर (छत्तीसगढ़)। कृषि उत्पादन आयुक्त ने खरीफ सीजन के मद्देनजर राज्य के सभी सहकारी समितियों ने अनिवार्य रूप से 30 मई तक खाद एवं बीज का भण्डारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आज यहां वीडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि, सहकारिता, बीज विकास निगम के अधिकारियों की बैठक लेकर खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा की। कृषि उत्पादन आयुक्त ने मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल एवं कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे के निर्देश का पालन सुनिश्चित करने हेतु राज्य में बीज उत्पादन एवं फसल प्रदर्शन कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से संचालित करने के भी निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन में छत्तीसगढ़ के किसान स्वावलंबी बने इसके लिए खरीफ सीजन में विशेष अभियान संचालित किया जाना है। उन्होंने सुराजी गांव योजना के गांवों एवं शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों में भी बीज उत्पादन का कार्यक्रम प्राथमिकता से लिए जाने के निर्देश दिए।
कृषि उत्पादन आयुक्त ने विभागीय अधिकारियों को राज्य में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए खेतों की मेड़ों पर अरहर की खेती के लिए किसानों को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने कहा कि अरहर उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्य के 10 जिलों का विशेष रूप से चिंहाकन किया गया है, जिसमें बालोद, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, धमतरी, बलौदाबाजार, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा एवं रायगढ़ शामिल हैं। इन जिलों के सभी गांवों में अरहर की खेती के लिए किसानों को हर संभव मार्गदर्शन एवं मदद दी जानी चाहिए। अधिकारियों को खाद-बीज की गुणवत्ता एवं वितरण कार्य पर सतत् निगरानी रखने के भी निर्देश दिए गए।

समीक्षा बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि राज्य में इस साल खरीफ की विभिन्न फसलों के लिए 9 लाख 7 हजार 800 क्विंटल बीज की आवश्यकता है। सहकारी समितियों में अब तक 4 लाख 58 हजार 131 क्विंटल बीज का भण्डारण कराया गया है, जो मांग का 50 फीसद है। इसी तरह समितियों में 11 लाख 30 हजार मैट्रिक टन खाद भण्डारण के लक्ष्य के लिए अब तक 5 लाख 26 हजार 359 मैट्रिक टन खाद का भण्डारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 47 प्रतिशत है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि किसानों द्वारा खरीफ के लिए खाद-बीज का निरंतर उठाव किया जा रहा है। अब तक एक लाख 96 हजार 912 क्विंटल प्रमाणित बीज तथा 2 लाख 15 हजार 675 मैट्रिक टन खाद का उठाव हो चुका है। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि बीज उत्पादन एवं फसल प्रदर्शन के लिए ग्रामवार किसानों का चयन कर उन्हें इसके लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। 


हाईब्रिड धान बीज को बढ़ावा देने किसानों को अनुदान

23-May-2020

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत हाईब्रिड धान बीज को बढ़ावा देने के लिए 100 रुपये प्रति किलोग्राम अधिकतम या 50 प्रतिशत, जो भी कम हो अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। जिले में 100 क्विंटल हायब्रिड धान बीज का वितरण का लक्ष्य रखा गया है। योजना के अंतर्गत वर्ष 2020-21 में 630 हेक्टर क्षेत्र में धान फसल के प्रदर्शन का लक्ष्य है। हाईब्रिड धान बीज के अलावा सूक्ष्म पोषक तत्व पर 500 रुपये, पौध संरक्षण औषधि पर 500 और नींदानाशक औषधि पर 500 रुपये का अनुदान जिले में उपलब्ध लक्ष्य के अनुसार कृषकों को प्रदान किया जायेगा। एक कृषक को अधिकतम 2 हेक्टर के लिये एक हजार रुपये अनुदान दिया जायेगा। पंजीयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा और कृषकों ने देयक प्रस्तुत के पश्चात् उनके खाते में राशि सीधे हस्तांतरित की जायेगी। जिससे कृषकों को कृषि कार्य के लिये आर्थिक मदद मिलेगी। इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी के लिये 07752-426644 पर सम्पर्क किया जा सकता है।  



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