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किसान

खरपतवार नियंत्रण से धान की बेहतर पैदावार, निदानाशक का उचित इस्तेमाल जरूरी*

07-Jul-2020

बेमेतरा (शोर सन्देश) धान फसल के उत्पादन में वृद्धि के लिए हानिकारक कीट की रोकथाम और खरपतवारों का समय पर नियंत्रण आवश्यक है। सही समय में नियंत्रण नहीं होने से फसल की उत्पादकता प्रभावित तो होती ही है, साथ ही किसानों को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ता है। कृषि विकास और कृषक कल्याण विभाग के वैज्ञानिकों ने प्रदेश के किसानों को धान की खेती में होने वाले अनावश्यक खरपतवार की रोकथाम के लिए कई उपयोगी सलाह दी है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि खरीफ मौसम में धान का थरहा बोने के तीन से चार दिन के भीतर प्रति हेक्टेयर में थायोबेन्कार्प निदानाशक 1.5 किलोग्राम या आक्साडायर्जिल निदानाशक 70 से 80 ग्राम का छिड़काव करना चाहिए। बोता विधि से धान बोने पर अंकुरण पूर्व खरपतवार प्रबंधन के लिए प्रेटिलाक्लोर 300 ग्राम प्रति एकड़ की दर से बोआई के तीन से पांच दिन के अंदर डालने पर खरपतवार नियंत्रण में फायदेमंद होता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि आक्साडायर्जिल 32 ग्राम प्रति एकड़ की दर से बोआई के तीन दिन के अंदर और पायरोजोसल्युरान 10 ग्राम प्रति एकड़ के दर से बोआई के बाद दस से बारह दिन के अंदर डालना चाहिए। 


किसान मृदा स्वास्थ्य के आधार पर ही उर्वरक का उपयोग करें*

07-Jul-2020

बेमेतरा (शोर सन्देश) कृषि विज्ञान केन्द्र ढोलिया बेमेतरा के कृषि वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ राज्य के मैदानी भाग में कृषि जलवायु क्षेत्र के किसानों को खरीफ सीजन की तैयारी के संबंध मे सलाह दी है। इसके लिए भूमि की तैयारी खाद और बीजों का प्रबंध आवश्यक करें। मानसून सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में सक्रिय हैं। कीट व्याधियों के प्रतिरोध और सहनशील किस्में छत्तीसगढ़ राज्य और विकास निगम, इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में उपलब्ध है। इन पर पौध रोगों और कीटों का असर कम होता है। किसान भाई मृदा स्वास्थ्य के आधार पर ही खाद उर्वरक का उपयोग करें। अनावश्यक रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से मृदा उर्वरक बुरी तरह से प्रभावित होती है। किसान भाइयों से अनुरोध है कि वे मेघदूत एप पर रजिस्टर करें। मौसम और खेती संबंधी जानकारी प्राप्त करें। छत्तीसगढ़ के अधिकांश भागों में मानसून वर्षा प्रारंभ हो चुकी हैं। कृषक भाई आवश्यकतानुसार खेतों की जुताई कर खरीफ फसलों (धान, सोयाबीन, अरहर, तिल, मक्का, उड़द, मूंग, मूंगफली आदि) की बोआई करें। बोआई कतारों में करें। बोआई के पूर्व बीजों को उपचारित करें। कतार बोनी में दानेदार उर्वरक सीड ड्रिल के लिए उपयोग में लाये। वर्षा की मात्रा पर्याप्त मात्रा में हो चुकी है, इसलिए किसान भाई कृषि कार्यो को प्राथमिकता दे।  विभिन्न धान पद्धतियों में समन्वित खरपतवार प्रबंधन:- धान की उपज पर खरपतवारों के प्रतिकूल प्रभाव को समाप्त करना और कम से कम करना ही खरपतवार नियंत्रण का मुख्य उद्देश्य है। खरपतवार विरोधी वातावरण उत्पन्न करने के लिए परिस्थितियों के अनुसार एक से अधिक तरीकों जैसे दृयांत्रिक, सस्य क्रियाओं, जैविक रासायनिक विधियों का उपयोग लाभकारी पाया गया है (दवाओं की मात्रा सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर में दी गई है )  नर्सरी :- यथासंभव नर्सरी की जमीन तैयार कर सिंचाई कर दें और जब खरपतवार उग आयें तो जुताई से नष्ट कर दें। तत्पश्चात भूमि तैयार कर थरहा डालने पर खरपतवारों का प्रकोप कम होता है। बतर स्थिति में थरहा डालने के 3-4 दिन के अंदर थायोबेन्कार्प 1-1.5 कि./हे. या आक्साडायर्जिल 70-80 ग्राम/हे. सक्रिय तत्व का छिडकाव करें। 


खाली जमीन पर आज झूम रहे अमरूद, सीताफल, करौंदा और नीम के पेड़*

05-Jul-2020

    गाँव वालों को पौधरोपण की मजदूरी 4.32 लाख रुपए का हुआ भुगतान                                                                                                      दुर्ग (शोर सन्देश)।युवा चाहे तो पत्थर पिघला दे, युवा चाहे तो नदी की धारा मोड़ दे और अगर युवा चाहे तो बंजर धरती को उपवन में बदल दे। अपने भगीरथ प्रयास से ऐसा ही बड़ा कारनामा कर दिखाया है दुर्ग से 7 किलोमीटर दूर मरमरा गांव के युवाओं ने। पेड़ पौधे लगाओं जीवन बचाओ का नारा लेकर महमरा गांव के युवाओं ने 2017 में जो मुहिम शुरू की थी वो आज आंखों को सुकून देने वाली एक खूबसूरत जगह में तब्दील हो गई है।  युवाओं ने की पहल मिला सरपंच का साथ और रोजगार सहायक का मार्गदर्शन  यहां के युवाओं को एहसास हुआ कि शहरीकरण तथा औद्योगिकरण से विकास तो हुआ मगर पेड़-पौधे कम होने लगे। लहलहाते खेतों की जगह आसमान छूती इमारतें बनने लगीं। पेड़ों को बड़ी निर्दयता से काटा जा रहा था ये चिंता लेकर कर महमरा के युवा श्री गंगा प्रसाद रोजगार सहायक के पास पहुंचे। फिर सरपंच खेमेश्वरी निषाद और अन्य पंचों और ग्रामीणों का भी साथ मिला। अतिक्रमित जमीन को कब्जा मुक्त कर वहाँ पौधरोपण करने के लिए का ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किया गया।  गांव के लोगों ने पेड़ पौधे लगाकर पुण्य भी कमाया और घर चलाने रुपया भी  जब युवाओं ने पौधरोपण की ठानी तो उनके इस प्रयास को शासन-प्रशासन का भी साथ मिला। पौधरोपण कार्य के लिए मनरेगा मद से 4 लाख 32 हजार रुपए मंजूर किए गए। जिससे श्रमिकों को मजदूरी भुगतान किया गया। जुलाई 2017 में काम शुरू हुआ और 0.30 हेक्टेयर में मिश्रित प्रजाति के 300 पौधे रोपे गए। सप्ताह में एक बार कीटनाशक का छिडकाव भी करवाया गया। मनरेगा के माध्यम से फैन्सिग और पंचायत का पम्प मिला पौधों को पानी देने के लिए। गांव के युवाओं को काम भी मिल गया। बीरबल निषाद जो यहां काम करते हैं उन्होंने बताया कि उनको मनरेगा के माध्यम यह काम मिला। पेड़ पौधे लगाकर पुण्य भी कमाया और घर चलाने के लिए रुपए भी कमाए। बीरबल ने इस पूरे दिल से पौधों की देखभाल की काम किया। बीरबल का कहना है काम करते-करते उनको इन पौधों से लगाव सा हो गया है ये अपने लगते हैं। रोजगार सहायक गंगा प्रसाद भी जी जान से लगे हैं इन पेड़ पौधों की रक्षा में। यहाँ पर सीताफल, अमरूद, करौंदा, नीम, गुलमोहर के भी पौधे लगाए गए हैं। आज ये जगह इतनी खूबसूरत हो गई है कि अब पथिक दो क्षण रुककर ये नजारा देखने रुक जाते हैं और अपनी थकान भी मिटा लेते हैं। जल्द ये पेड़ बड़े होंगे और गांव वालों को उनके फलों का स्वाद भी मिलेगा।  गांव के पुनि ठाकुर, कुलेश्वरी निषाद, बिमला ठाकुर, धर्मेंद्र निषाद और नर्मदा निषाद बताते हैं सड़क के पास होने से पहले धूल प्रदूषण था अब वो भी कम होने लगा है।  मरमरा के ग्रामीण भी 6 जुलाई को शामिल होंगे वन होम वन ट्री अभियान में  ग्रामीणों ने अब पेड़ पौधों का महत्व समझ लिया है। इसलिए वो अब नहीं रुकेंगे। वो जानते हैं कि जीवन के लिए वृक्ष कितने जरूरी हैं। इसलिए सबने शपथ ली है कि वे 6 जुलाई को पौधा जरूर लगाएंगे। प्रगति और पर्यावरण का संतुलन जरूरी है।


टमाटर, बैगन, अमरूद, केला, पपीता, मिर्च, अदरक की फसलों का भी होगा बीमा *

30-Jun-2020

 15 जुलाई अंतिम तिथि निर्धारित, पांच प्रतिशत देना होगा प्रीमियम

कोरबा (शोर सन्देश) चालू खरीफ मौसम में जिले के सब्जी और फल उत्पादक किसानों की फसलों का भी बीमा कराया जाएगा। मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत प्रतिकूल मौसम से उद्यानिकी फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई किसानों को हो सकेगी। जिले में चालू खरीफ मौसम में टमाटर, अमरूद, बैगन, केला, पपीता, मिर्च और अदरक की फसलों का बीमा होगा। किसानों को फसलों के बीमा के लिए निर्धारित ऋणमान का पांच प्रतिशत प्रीमियम के रूप में देना होगा। जिले के ऋणी और अऋणी किसान अपनी उद्यानिकी फसलों का बीमा कराने के लिए 15 जुलाई तक उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकते है। जिले में पदस्थ उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक ने बताया कि सब्जी और फलों की फसल लेने वाले किसान अपने-अपने क्षेत्र में शासकीय नर्सरियों में जाकर फसलों का बीमा कराने के लिए उद्यानिकी विस्तार अधिकारियों से संपर्क कर सकते है। सहायक संचालक ने बताया कि चालू खरीफ मौसम में बीमित उद्यानिकी फसलों में प्रतिकूल मौसम जैसे अधिक वर्षा, कम वर्षा, बेमौसम वर्षा, ओलावृष्टि, अधिक तापमान, कम तापमान, बीमारी अनुकूल मौसम, तेज हवा, कीट और व्याधि प्रकोप से उद्यानिकी फसलों को होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति मिलेगी। उन्होंने बताया कि बीमा संबंधी जानकारी के लिए किसान शासकीय नर्सरी पताढ़ी, शासकीय नर्सरी पटियापाली, शासकीय नर्सरी पंडरीपानी, शासकीय नर्सरी नगोई और शासकीय नर्सरी पोंड़ीलाफा में संपर्क कर सकते है।


खरीफ फसल 7.65 लाख किसानों को मिला ब्याज मुक्ति

27-Jun-2020

रायपुर (शोर सन्देश)  राज्य सरकार ने प्रदेश में खेती किसानी को बढ़ावा देने और किसानों को समय पर खाद, बीज सहित अन्य कृषि आदानों की उपलब्धता के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से ब्याज मुक्त कृषि ऋण मुहैया कराया जा रहा है। खरीफ के लिए राज्य के किसानों को 4 हजार 600 करोड़ रुपए का ऋण वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। खरीफ फसल के लिए अब तक 7.65 लाख किसानों को 2 हजार 721 करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण सहकारी समितियों के माध्यम से वितरित किया गया है, जबकि गतवर्ष इसी अवधि तक 1 हजार 538 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरित किया गया था। इस प्रकार किसानों को इस खरीफ में अब तक 1183 करोड़ रुपए का अधिक ऋण वितरण हो चुका है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर किसानों को ऋण और खाद-बीज के वितरण के लिए सहकारी समितियों में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। खरीफ फसलों के लिए सहकारिता के माध्यम से कुल 6.35 मीट्रिक टन रासायनिक खाद के भंडारण का लक्ष्य रखा गया है। 26 जून तक सहकारी समितियों में 5.77 लाख मी. टन खाद का भंडारण किया जा चुका है, जो कि कुल लक्ष्य का 90.81 प्रतिशत है। सहकारी समितियों की ओर से 4.53 लाख टन खाद का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जोकि लक्ष्य का 71 प्रतिशत है। जबकि पिछले साल इसी समय तक सहकारी समितियों ने 2.43 लाख मी.टन रासायनिक खाद का वितरण किया गया था। गत वर्ष की तुलना में इस साल 2.10 लाख टन अधिक खाद का वितरण सहकारी समितियों ने किया। खरीफ फसल के लिए बीज निगम ने सहकारी समितियों के माध्यम से 5.88 लाख क्ंिवटल उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीज का भंडारण कराया गया है। 26 जून की स्थिति में कुल 4.52 लाख क्ंिवटल का उठाव किसानों ने कर लिया है। गत वर्ष इसी अवधि में सहकारी समितियों में 4.98 लाख क्ंिवटल प्रमाणित बीज का भंडारण और 2.88 लाख क्ंिवटल का वितरण किसानों को किया गया था। इसी अवधि की तुलना में गत वर्ष से 1.64 लाख क्ंिवटल का प्रमाणित बीज अधिक वितरित किया गया है। इस वर्ष राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने भी छत्तीसगढ़ राज्य को अब तक 1150 करोड़ रुपए की विशेष और अतिरिक्त साख सीमा स्वीकृत कंी गई है। जिसके विरूद्ध अब तक 740 करोड़ रुपए का आहरण राज्य सहकारी बैंकों से कर लिया गया है। राज्य सरकार की किसान न्याय योजना के अंतर्गत प्रथम किस्त के रूप में 18.35 लाख किसानों के खाते में 1492 करोड़ रुपए जमा किए जाने से खेती के प्रति किसानों में रूझान और भी बढ़ा है।


रोडमैप बनाकर खेती की तस्वीर बदलने की दिशा में काम करें-आयुक्त

23-Jun-2020

दुर्ग (शोर सन्देश) कृषि उत्पादन आयुक्त ने आज अधिकारियों की समीक्षा बैठक जिसमें खेती किसानी की तरक्की के लिए अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली जिसमें अगले तीन सालों के लिए रोडमैप बनाकर खेती की तस्वीर बदलने की दिशा में काम करें। किसानों को साल में तीन फसल लेने तैयार करें। दलहल-तिलहन के रकबे में बढ़ोत्तरी के साथ यांत्रिकीकरण की दिशा में काम हो। इसके साथ ही बायो फोर्टिफाइड राइस जैसे नवाचारों की ओर भी किसानों को शिफ्ट करें। कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम. गीता इन तीन बिन्दुओं पर जोर दिया।

इसके लिए कार्ययोजना बनाकर इनके कार्यान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुर्ग जिले में खेती-किसानी और इससे संबंधित अनुशांगिक विभागों के लिए बड़ी गुंजाइश है। रायपुर और दुर्ग-भिलाई के रूप में किसानों के लिए बड़ा मार्केट उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि गौठानों को भी ग्रामीण आजीविका केंद्र के रूप में विकसित करना है। इस दिशा में भी लगातार कार्य करें।
कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने विस्तार से जिले में चल रही कृषि गतिविधियों और नवाचारों की जानकारी दी। इस मौके पर संचालक कृषि नीलेश क्षीरसागर, संचालक उद्यानिकी वी. मथेश्वरन, संचालक मत्स्य वीके शुक्ला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  बायो फोर्टिफाइड धान जैसी किस्मों से भी किसानों को कराएं परिचित- सचिव ने वैविध्य पर विशेष फोकस किया। उन्होंने कहा कि तीन सल लें। धान की किस्मों में भी वैविध्य ले सकते हैं। जैसे किसानों को बायो फोर्टिफाइड धान, सुगंधित धान और औषधि गुण वाले धान की किस्मों को लेने का आग्रह कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कुपोषण दूर करने में बायो फोर्टिफाइड किस्म के धान की बड़ी भूमिका होती है। इसका बड़ा बाजार तैयार हो रहा है। यदि हमारे यहां के किसानों को इस दिशा में तैयार करें तो उनके लिए लाभ की गुंजाइश काफ बढ़ सकती है। 


सफलता की कहानी : मानसून की दस्तक से खेती-किसानी के कार्याें में आ रही तेजी

19-Jun-2020

राजीव गांधी किसान न्याय योजना से खुश किसान दोगुने उत्साह के साथ जुटे खेती-बाड़ी दलहन-तिलहन फसल का बढ़ेगा उत्पादन 

रायपुर (शोर सन्देश) कोरोना महामारी से आयी आर्थिक मंदी के दौरान मानसून की दस्तक आते ही खेती-किसानी के कार्याें में तेजी आयी है। राज्य शासन द्वारा किसानों के लिए गए जनहितकारी फैसलों से जहां किसानों का उत्साह बढ़ा है, वहीं सुकमा जिले के किसान दलहन-तिलहन फसल में भी दोगुने उत्साह से अपनी रुचि दिखा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने राज्य शासन की महात्वाकांक्षी योजना राजीव गांधी किसान न्याय योजना प्रारंभ कर किसानों से किए गए अपने वादे को पूरा किया। इस योजना के तहत सुकमा जिले के 7933 किसानों को पहले किश्त के तौर पर पांच करोड़ 74 लाख रुपए का भुगतान किया गया, जिससे खेती किसानी की तैयारियों में जुटे किसानों के खातों में पहुंची इस राशि से उन्हें राहत मिली और कृषि कार्य में उनका उत्साह बढा है। खेती किसानी की तैयारियों में जुटे किसानों के उत्साह को देखकर कृषि विभाग द्वारा इस वर्ष पिछले साल की अपेक्षा लगभग डेढ़ हजार हेक्टेयर क्षेत्र में अधिक बुआई का अनुमान लगाया गया है। कृषि विभाग से मिली जानकारी अनुसार पिछले साल सुकमा जिले ंमें जहां लगभग 94280 हेक्टेयर में खरीफ की फसल ली गई थी, वहीं इस साल 95830 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ फसल लिए जाने का अनुमान है। इससे दलहन और तिलहन के रकबे में भी अच्छी खासी बढ़ोत्तरी का अनुमान है। जिले में पिछले साल किसानों ने 5615 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी और अन्य दलहन की फसल ली गई थी, जो इस साल बढ़कर लगभग 8300 हेक्टेयर का अनुमान है। तिलहन की फसल भी पिछले साल 1855 हेक्टेयर में ली गई थी, जो इस साल बढ़कर 2440 हेक्टेयर होने का अनुमान है।
खेती किसानी के प्रति किसानों के उत्साह को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा भी सभी तैयारियां की गई हैं। बीज भण्डारण के संबंध में बताया गया कि पिछले साल 6255 क्विंटल बीज का वितरण किया गया था। वहीं इस साल 6629 क्विंटल बीज की मांग की गई है। अब तक 3500 क्विंटल से अधिक बीज का वितरण किया जा चुका है और लगभग 3150 क्विंटल बीज उपलब्ध है। पिछले वर्ष 1726 टन खाद की खपत को देखते हुए इस साल 2500 टन खाद के खपत होने का अनुमान है। वर्तमान में 1362 टन से अधिक खाद का वितरण किया जा चुका है और लगभग 700 टन खाद उपलब्ध है।किसानों को खेती किसानी में किसी भी प्रकार की आर्थिक समस्या आए, इसके लिए अधिक से अधिक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्पकालीन कृषि ऋण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। सुकमा में इस साल 4000 नए किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया था और अब तक 1300 से अधिक नए केसीसी जारी किए जा चुके हैं। खेती किसानी के लिए इस साल 21 करोड़ 80 लाख रुपए ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 3051 किसानों को लगभग 10 करोड़ 87 लाख रुपए बिना ब्याज का कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है। जिले में इस साल कृषि के रकबे में होने वाली वृद्धि से कोरोना वायरस के कारण दूसरे राज्यों से वापस आये मजदूरों को भी स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध उपलब्ध होगा।


किसानों के हित में शीघ्र ही फैसला नहीं लेने पर भाजपा-भाजयुमो का किसानों के साथ आन्दोलन होगा’

06-Jun-2020

 रायपुर (शोर सन्देश) भारतीय जनता पार्टी के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने किसानों को रबी पसल में उत्पादित मक्का की सरकारी ख़रीदी अथवा नेकाफ (एनजीओ) के माध्यम से ख़रीदी करने की मांग की है। श्री उसेण्डी ने मक्का फसल की ख़रीदी 1800 रु. प्रति क्विंटल की दर से करने की मांग करते हुए कहा कि किसानों के हित को देखते हुए यथाशीघ्र यह व्यवस्था की जानी चाहिए।
भाजपा के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष उसेण्डी ने प्रदेश की राज्यपाल अनुसुइया उईके और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कांकेर जिले के परलकोट (पखांजूर) क्षेत्र के किसानों, भाजपा भाजयुमो द्वारा सौंपे गए उक्ताशय के ज्ञापन के बारे में बताया और कहा कि क्षेत्र के किसानों ने सरकारी खरीदी या नेकाफ के माध्यम से मक्का की 1800 रु. प्रति क्विंटल की दर से खरीदी करने की मांग की है। उसेण्डी ने कहा कि यह व्यवस्था होने पर किसानों को फसल का सही दाम और पारिश्रमिक मिल सकेगा। फिलहाल यह व्यवस्था नहीं होने के कारण कोचिए और व्यापारी किसानों से यह मक्का हजार-12सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर पर औने-पौने खरीद रहे हैं और किसानों की विवशता का नाजायज लाभ उठाकर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुँचा रहे हैं।
भाजपा के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष श्री उसेण्डी ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा मक्का की सरकारी या नेकाफ के माध्यम से खरीदी की व्यवस्था नहीं होने के कारण एक ओर जहाँ किसान आर्थिक दिक्कतों से दो-चार हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कर्ज के बोझ तले दबे किसानों के सामने आत्मघाती फैसला लेने के अलावा और कोई विकल्प नहीं रह गया है। श्री उसेण्डी ने चेतावनी दी कि किसानों के हित में शीघ्र ही कोई फैसला सरकार नहीं लेती है तो भाजपा और भाजयुमो द्वारा किसानों को साथ लेकर बड़ा आन्दोलन पखांजूर क्षेत्र में किया जाएगा। उसेण्डी ने बताया कि राज्यपाल मुख्यमंत्री को यह ज्ञापन क्रमशः पार्टी और राजस्व अनुविभागीय अधिकारी केमाध्यम से प्रेषित किया गया है।


अंतर्गत कृषि विभाग में खरीफ सीजन के लिए दलहन व तिलहन फसलों का बीज वितरण

06-Jun-2020


उदयपुर (शोर सन्देश) ब्लॉक मुख्यालय उदयपुर अंतर्गत कृषि विभाग में खरीफ सीजन के लिए दलहन तिलहन फसलों का बीज वितरण के लिए अभी तक भंडारण नहीं हो सका है। छत्तीसगढ़ शासन के राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत खरीफ मौसम के फसल में धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरहर, मूंग, उड़द, कुरथी रामतिल कोदो कुटकी रागी शामिल है। सरकार की ओर से इस योजना के तहत फसलों के उत्पादन पर प्रोत्साहन स्वरूप प्रति एकड़? दस हजार नगद डीबीटी के माध्यम से भुगतान करने की घोषणा की गई है, इसी योजना के तहत विगत खरीफ सीजन के धान का बोनस लोगों के खाते में आने भी लगा है।
मानसून आने वाला है और कृषि विभाग की ओर से बीज भंडारण अभी तक नहीं किया गया है, बीज भंडारण नहीं होने से लोगों को किसान न्याय योजना का लाभ मिलने में भी परेशानी होगी दलहन और तिलहन बीज का भंडारण नहीं होने से किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिदिन किसान कृषि विभाग के दफ्तर का चक्कर लगाकर बीजों के संबंध में जानकारी प्राप्त कर उपलब्धता नहीं होने की बात सुनकर निराश होकर घर की ओर लौट जाते है। इस बारे में बात करने पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी जे एस पंवार ने बताया कि 120 क्विंटल प्रमाणित राजेश्वरी धान आया है। दलहन तिलहन फसलों के बीज शासन स्तर से ही उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, इस वजह से भंडारण नहीं हो सका है। एक सप्ताह में दलहन और तिलहन फसलों के बीच आने की उम्मीद है  


बीज एवं खाद भंडारण व्यवस्था बनाए रखने के दिए निर्देश

05-Jun-2020

राजनांदगांव(शोर सन्देश) कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने कल छुरिया विकासखंड के ग्राम गैंदाटोला में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति का निरीक्षण किया। श्री वर्मा ने केन्द्र प्रभारी से बीज एवं खाद के भंडारण तथा उठाव की जानकारी ली। उन्होंने इसकी समुचित व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। श्री वर्मा ने केन्द्र प्रभारी को बीज लगाने और खाद के उपयोग के बारे में किसानों को बताने के निर्देश भी दिए, ताकि फसलों की पैदावारी अच्छे से हो सकें।
कलेक्टर श्री वर्मा ने निरीक्षण के दौरान खाद और बीज लेने आए किसानों से चर्चा की। इस दौरान मातेखार के किसान श्री सुदामा साहू ने बताया कि खरीफ मौसम के लिए बीज और खाद लेने आए है। इसके पहले वे मनरेगा में काम करते थे। उन्हें बताया कि मनरेगा मजदूरी राशि प्राप्त हो गया है। साथ ही फसल बीमा राशि, राजीव गांधी किसान न्याय योजना की पहली किस्त की राशि भी प्राप्त हो गई है। श्री वर्मा ने किसानों से क्वारेन्टाइन सेंटर में रुके हुए मजदूरों की भी जानकरी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी किसान को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। इस मौके पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी तनुजा सलाम, एसडीएम डोंगरगांव विरेन्द्र सिंह, अतिरिक्त जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिलीप कुर्रे एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।  



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