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किसान

बैगा किसानों को 60 जोड़ी बैल वितरित

13-Aug-2024
बिलासपुर ।   ( शोर संदेश )  प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत जिले के बैगा किसानों को अब तक 60 जोड़ी बैल वितरित किए जा चुके हैं। योजना के तहत तखतपुर विकासखंड के ग्राम बरगन में आज आयोजित कार्यक्रम में 19 बैगाओं को बैल जोड़ी वितरित किए गए।
ये वे बैल हैं, जिन्हें सड़क से उठाकर मोपक़ा गोठान में रखा गया था। उनके मालिकों को सूचना देने के बाद भी वे छुड़ाकर नहीं ले गए।
इसलिए जिला प्रशासन के निर्देश पर उन्हें बैगा किसानों में बांट दिया गया। इस अवसर पर पशुधन विकास विभाग और नगर निगम के अधिकारियों के साथ कृषि स्थाई समिति के सभापति भारत मरकाम, जनपद पंचायत सदस्य राजकुमारी, सरपंच प्रतिनिधि कन्हैया मेहर उपस्थित थे।
 

ऋणी किसान अब 25 तक करा सकेंगे फसल बीमा

11-Aug-2024
रायपुर।   ( शोर संदेश )  केन्द्र सरकार द्वारा ऋणी किसानों के लिए खरीफ फसलों का बीमा कराए जाने की तिथि को 16 अगस्त से बढ़ाकर 25 अगस्त कर दिया गया है, जबकि अऋणी कृषकों के लिए फसलों का बीमा कराने की 16 अगस्त तक की निर्धारित तिथि यथावत रहेगी। यहां यह उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पर्वू में 31 जुलाई तक फसल बीमा कराएं की तिथि निर्धारित की गई थी। छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर केन्द्र सरकार ने ऋणी और अऋणी किसानों के बीमा कराने की तिथि 16 अगस्त तक कर दिया था। अब भारत सरकार ने ऋणी किसानों को और रियायत देते हुए फसल बीमा कराने की तिथि 25 अगस्त तक बढ़ा दी है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम ने कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने के लिए राज्य के किसानों को फसल बीमा कराने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन देने तथा  पंजीयन कराने को कहा है, ताकि प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान होने पर उन्हें क्षतिपूर्ति मिल सके।
राज्य में कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2024 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा के लिए जारी अधिसूचना के अनुसार योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को पंजीयन कराना जरूरी है। किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत धान सिंचित, असिंचित, सोयाबीन, मूंगफली, मक्का, मूंग, उड़द, कोदो-कुटकी, रागी फसल का बीमा करा सकते हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रतिकूल मौसम, सूखा, बाढ़, जलप्लावन, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को होने वाले फसल नुकसान की क्षतिपूर्ति होती है। योजना में ऋणी और अऋणी किसान, जो भू-धारक व बटाईदार हो, शामिल हो सकते हैं। ऐसे किसान जो अधिसूचित ग्राम में अधिसूचित फसल का बीमा करा सकते हैं, इसके लिए किसानों को अपना आधार कार्ड, ऋण पुस्तिका, बी-1 पॉचशाला खसरा, बैंक पासबुक की छायाप्रति एवं बोनी प्रमाण पत्र के साथ पंजीयन कराना होगा। बैंक अथवा चॉईस सेंटरों के माध्यम से भी फसल बीमा कराया जा सकता है।

किसान अब 16 अगस्त तक करा सकेंगे फसल बीमा

03-Aug-2024
रायपुर।   ( शोर संदेश )  राज्य के ऋणी और अऋणी किसान अब 16 अगस्त तक खरीफ कृषि फसल एवं मौसम आधारित उद्यानिकी फसलों का बीमा करा सकेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार के प्रस्ताव पर केन्द्र सरकार ने फसल बीमा कराए जाने की अंतिम तिथि 31 जुलाई को बढ़ाकर अब 16 अगस्त कर दिया है। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान से किसानों को राहत दिलाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित उद्यानिकी फसल बीमा योजना संचालित की जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रधानमंत्री फसल बीमा एवं मौसम आधारित उद्यानिकी फसलों के बीमा योजना का लाभ दिलाने के लिए राज्य के ऋणी एवं अऋणी किसानों को  मार्गदर्शन देने तथा उनका पंजीयन कराने को कहा है, ताकि प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान होने पर उन्हें क्षतिपूर्ति मिल सके।
राज्य में कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2024 के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा के लिए जारी अधिसूचना के अनुसार योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को पंजीयन कराना जरूरी है। इसके लिए पूर्व में अंतिम तिथि 31 जुलाई 2024 निर्धारित की गई थी। राज्य सरकार के विशेष प्रयासों से केन्द्र सरकार ने फसल बीमा की अवधि को बढ़ाकर अब 16 अगस्त कर दिया है। राज्य के किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत धान सिंचित, असिंचित, सोयाबीन, मूंगफली, मक्का, मूंग, उड़द, कोदो-कुटकी, रागी फसल का बीमा करा सकते हैं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रतिकूल मौसम, सूखा, बाढ़, जलप्लावन, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को होने वाले फसल नुकसान की क्षतिपूर्ति होती है। योजना में ऋणी और अऋणी किसान जो भू-धारक व बटाईदार हो, शामिल हो सकते हैं। ऐसे किसान जो अधिसूचित ग्राम में अधिसूचित फसल के लिए बीमा कराना चाहते हैं वे नियत तिथि 16 अगस्त के पूर्व अपना फसल बीमा करा सकते हैं। इसके लिए किसान अपना आधार कार्ड, ऋण पुस्तिका, बी-1 पॉचशाला खसरा, बैंक पासबुक की छायाप्रति एवं बोनी प्रमाण पत्र के साथ पंजीयन कराना होगा। किसान बैंक अथवा चॉईस सेंटरों के माध्यम से भी फसल बीमा कराया जा सकता है।
शासन द्वारा जारी अधिसूचना अनुसार बेमेतरा, बस्तर, कोरिया बीजापुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा, गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, सक्ती और कांकेर जिला के लिए बजाज जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड, राजनांदगांव, धमतरी, कोरबा, जशपुर, नारायणुर, खैरागढ-छुईखदान-गंडई, महासमुन्द, रायगढ़, सूरजपुर और कोण्डागांव जिला के लिए एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कम्पनी ऑफ इंडिया लिमिटेड तथा दुर्ग, बिलासपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, सुकमा, मुंगेली, सरगुजा, बलौदाबाजार-भाटापारा, बालोद, रायपुर, दंतेवाड़ा, बलरामपुर एवं गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला के लिए एचडीएफसी जनरल इंश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड को बीमा हेतु अधिकृत किया गया है। किसानों से अधिसूचित खरीफ फसलों का बीमा कराने की अपील की गई है। विस्तृत जानकारी के लिए किसान क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा नजदीकी बैंक शाखा से सम्पर्क कर सकते हैं।

बिहान समूह की दीदियां हल्दी की खेती की ओर बढ़ रही आगे

02-Aug-2024
रायपुर। ( शोर संदेश )   हल्दी का उपयोग धार्मिक कार्यों के अलावा मसाला, रंग सामग्री, औषधि तथा उबटन के रूप में  किया जाता रहा है। औषधि एवं घरेलू उपयोग के  साथ ही हल्दी में कैंसर रोधी गुण भी पाये जाते हैं। इस क्रम में दंतेवाड़ा जिले के विकासखण्ड कुआकोंडा के 5 ग्रामों को हल्दी की पैदावार के लिए चयन किया गया है।  बिहान समूह की महिलाएं हल्दी की खेती कर आगे बढ़ती जा रही हैं।
हल्दी शुभ कार्य के साथ खाने के लिए भी बेहतर उपयोग किया जाता है। हल्दी (टर्मरिक) एक भारतीय वनस्पति है यह अदरक की प्रजाति का 5 से 6 फिट बढने वाला पौधा है जिसमें जड़ की गाठो में हल्दी मिलती है। हल्दी को आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधि मानी गयी है। इसके अलावा भारतीय रसोई में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी भारतीय समाज में इसको बहुत शुभ समझा जाता है विवाह में तो हल्दीे की रस्म का एक विशेष महत्व है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ के तहत स्थानीय स्व सहायता समूह की दीदियों को हल्दी उत्पादन के लिए खेती की ओर आगे बढ़ रही है। समूह की महिलाएं ग्राम रेंगानार, गढ़मिरी, कुआकोण्डा, हल्बारास, मैलावाड़ा, गोगपाल के इच्छुक 50 महिलाओं को उद्यानिकी विभाग से 20 क्विंटल हल्दी बीज प्रदाय की गई है और समूह की दीदियों ने 40-40 किलो अपनी बाड़ी में हल्दी गाठों का रोपण किया है। इस प्रकार हल्दी उत्पादन इस वर्ष होने पर अगले वर्ष इस हल्दी को मां दन्तेश्वरी महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड कुआकोण्डा के द्वारा खरीदी भी की जायेगी। खरीदी कर इस हल्दी का समूह के द्वारा प्रसंस्करण कर दुकान तथा थोक किराना दुकानों में सप्लाई करने की योजना है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हल्दी की खेती के लिए अच्छा वातावरण है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ द्वारा हल्दी की खेती को महिलाओं की आर्थिक समृद्धि एवं आजीविका से जोड़ते हुए पहल की जा रही हैं।
 

मौसम आधारित कृषि सलाह : धान की खेती के लिए लेही विधि को अपनाएं किसान

01-Aug-2024
राजनांदगांव।   ( शोर संदेश )  कृषि विज्ञान केन्द्र राजनांदगांव द्वारा किसानों को खरीफ में विभिन्न फसलों में आने वाले मौसम आधारित कृषि सलाह दी गई है। सलाह में कहा गया है कि किसान धान फसल में लेही विधि अवस्था के तहत रोपा विधि की तरह ही मचाई कर खेत तैयार करें तथा अंकुरित बीज को खेत में पंक्ति में ड्रमसीडर या छिड़काव कर बोवाई करें। 
खुर्रा व कतार बोनी की गई धान फसल की उम्र 18-20 दिन हो जाने पर निंदा नियंत्रण के लिए विसपायरीबैक सोडियम सक्रिय तत्व (10 प्रतिशत) 250 मिली प्रति हेक्टेयर या फिनाक्साप्रापपी इथाइल सक्रिय तत्व (9.3 प्रतिशत) 625 मिली प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें। खुर्रा व सीधी विधि से बोनी की गई धान की 20 से 25 दिन की अवस्था हो जाने पर बियासी कर सघन चलाई करें। जिले में लगातार वर्षा होने अथवा बोआई में विलम्ब होने से बतर बोनी एव रोपणी (नर्सरी) की तैयारी करने का समय नहीं मिलने पर लेही विधि अपनाएं। खेत में अधिक पानी नहीं रखे अन्यथा बोये गये अंकुरित बीजों के सडऩे की संभावना रहती हैं।
जिन खेतों में धान की रोपाई हो चुकी है, वहां 15-20 दिनों बाद की जाने वाली यूरिया की टॉप ड्रेंसिग करें। देरी से रोपाई की स्थिति में अधिक अवधि का थरहा होने पर उसकी पत्तियों के ऊपरी भाग को तोड़ कर प्रति हिल 3-4 पौधे लगाये। रोपाई से पूर्व थरहा को क्लोरोपायरीफास 20 ईसी 3-4 मिली एवं 25 ग्राम यूरिया को 1 लीटर पानी में घोलकर 1 घण्टे तक जड़े डुबाकर उपचारित करें। इसके बाद रोपाई करें, जिससे तना छेदक एवं अन्य कीटों से रोकथाम हो सकेगी।
मौसम पुर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में मध्यम वर्षा होने की संभावना है। जिसे देखते हुए किसान को रोपाई वाले क्षेत्रों में मेड़ बनाकर जल संचित करने की सलाह दी जाती है। धान फसल में एसआरआई पद्धति में 10 से 12 दिन के पौधे को कतार तथा पौधे से पौधे की दूरी 25*25 सेमी रखते है। जिले में लगातार अधिक वर्षा होने की स्थिति में रोपाई नहीं करे एवं जल निकास की उचित व्यवस्था करें।
 

किसान हितैषी योजनाओं एवं निर्णयों से खुशहाल हैं किसान

31-Jul-2024
बालोद । ( शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ में किसानों की खुशहाली का एक नया दौर आ गया है। यह खुशहाली का दौर आया है मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में किसान हितैषी योजनाओं एवं निर्णयों के बेहतर क्रियान्वयन से, जिसका परिणाम है कि किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और वे खुशहाल हैं। बालोद जिले में प्रमुख रूप से कृषि कार्य ही लोगों के आर्थिक जीवन का आधार है। जिले के किसान प्रमुख रूप से धान की खेती करते है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में संचालित हो रहे किसान हितैषी योजनाओं से जिले के किसान लाभान्वित हो रहे हैं और अपनी आर्थिक स्थिति भी मजबूूत कर रहे हैं।
जिले के बालोद विकासखण्ड के ग्राम कोहंगाटोला के किसान डोमन लाल साहू ने बताया कि वे लगभग 05 एकड़ में धान की खेती करते हैं। उन्होने खुशी-खुशी बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के शासन में विगत खरीफ वर्ष  का धान उसने 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से विक्रय किया जिसका उन्हे 3100 रूपये की दर से राशि प्राप्त हुआ है इसके साथ ही उसे 02 साल का बकाया  बोनस भी प्राप्त हुआ है। यह सब उसके लिए बहुत ही सुखद समय था जब उसने इन पैसों का उपयोग अपने बनाये हुए पक्का आवास के कर्ज को पूरी तरह चुकाया और बचे हुए पैसों को अपने बच्चों की शादी के लिए जमा किया है। उसने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के किसान हितैषी योजना की सराहना करते हुए अपने जैसे किसानों के लिए अत्यंत मददगार बताया है।
जिले के बालोद विकासखण्ड के ग्राम रेवती नवागांव के किसान तुलाराम नागवंशी ने बताया कि अब उन्हं धान विक्रय का सही दाम मिला है। इसका उपयोग उन्होंने अपने निर्माणाधीन मकान में किया है इसके साथ ही उन्होने अपने खेत में सिंचाई हेतु एक बोर खनन भी कराया है। किसान नागवंशी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के किसान हितैषी योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री साय किसानों के उत्थान के लिए बेहतर काम कर रहे हैं इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में काफी ज्यादा सुधार आया है। अब समय पर हमें खेती किसानी के लिए आवश्यक खाद व उर्वरक सोसायटी से मिल रहा है। इसके साथ ही हमें कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुुशासन में संचालित योजनाएं एवं निर्णय किसानों की खुशहाली का नया दौर प्रशस्त कर रही है।

किसानों को 8.64 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित

30-Jul-2024

 रायपुर।  ( शोर संदेश )  प्रदेश के किसानों को चालू खरीफ सीजन में विभिन्न फसलों की बोनी के लिए सरकारी समितियों एवं निजी क्षेत्र के माध्यम से सुगमता के साथ प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब तक किसानों को विभिन्न खरीफ फसलों के 8 लाख 64 हजार क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण किए गए हैं, जो कि राज्य में बीज की मांग का 88 प्रतिशत है।

गौरतलब है कि राज्य में खरीफ की विभिन्न फसलों के प्रमाणित बीज की कुल मांग 9 लाख 78 हजार क्विंटल है, इसके विरूद्ध 9 लाख 78 हजार क्विंटल प्रमाणित बीज भण्डारण किया जा चुका है, जो कि बीज मांग का 97 प्रतिशत है। किसानों को अब तक 8.64 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया है, जो मांग का 88 प्रतिशत है।

कलेक्टर ने किया खेती-किसानी के कार्य का अवलोकन

19-Jul-2024
बालोद।    ( शोर संदेश ) कलेक्टर इन्द्रजीत सिंह चन्द्रवाल ने जिले के विभिन्न ग्रामों में पहुँचकर खेती-किसानी का हाल जाना। इस दौरान चन्द्रवाल ने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डाॅ. संजय कन्नौजे एवं अन्य अधिकारियों के साथ जिले के सुदूर ग्रामों में किसानों के खेतों में पैदल पहुँचकर मौजूदा खरीफ सीजन में जिले में खेती-किसानी के वास्तविक स्थिति की पड़ताल की। इस दौरान कलेक्टर चन्द्रवाल ने डौण्डी विकासखण्ड के सुदूर ग्राम चिहरो में मुख्य मार्ग से किसान अजय कुमार टेकाम के खेत तक पग डंडियों से चलकर पैडी ट्रांसप्लांटर के माध्यम से धान के रोपाई कार्य का अवलोकन किया। चन्द्रवाल ने किसान अजय कुमार टेकाम से बातचीत कर खेती-किसानी का हालचाल पुछा। उन्होंने किसान टेकाम से मशीन के माध्यम से धान की रोपाई करने की कुल लागत एवं समय आदि के संबंध में भी जानकारी ली। इसके पश्चात् कलेक्टर चन्द्रवाल डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम लखमाटोला के किसान रामाश्रय धनगुन के खेत में पहुँचकर जैविक खेती के कार्य का अवलोकन किया। इस दौरान चन्द्रवाल ने कृषि विभाग के अधिकारियों एवं किसान रामाश्रय धनगुन से ग्राम लखमाटोला में जैविक खेती की कुल रकबा तथा जैविक खेती की कुल लागत एवं उत्पादन की बिक्री आदि के संबंध में जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि ग्राम लखमाटोला में 150 किसानों के द्वारा कुल 150 एकड़ में जैविक खेती की जा रही हैै। इन सभी किसानों के द्वारा जैविक खेती के रूप में सुगंधित धान का उत्पादन किया जा रहा है। कलेक्टर ने इसकी सराहना करते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों को कृषि उत्पाद समूह के माध्यम से जैविक खेती के अंतर्गत उत्पादित सुगंधित धान की बिक्री की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। जिससे किसानों को उनके फसल का उचित दाम मिल सके। इसके पूर्व कलेक्टर चन्द्रवाल ने आज कृषि उपज मण्डी बालोद स्थित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को किसानों के द्वारा अपने खेत की मिट्टी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला केन्द्र में लाए जाने पर अनिवार्य रूप से उसका परीक्षण करने निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए किसानों को अधिक से अधिक प्रेरित करने को कहा। इस दौरान कृषि विभाग के उपसंचालक जीएस धुर्वे, सहायक संचालक कृषि एसएन ताम्रकार, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डीडी मण्डले सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी एवं कृषकगण उपस्थित थे।

किसानों को समय पर खाद, बीज एवं कीटनाशक की उपलब्धता सुनिश्चित कराने दिये निर्देश

17-Jul-2024
महासमुंद ( शोर संदेश )। कलेक्टर प्रभात मलिक की अध्यक्षता में यहाँ कलेक्टोरेट सभाकक्ष समय-सीमा की बैठक आयोजित हुई। बैठक में उन्होंने जनचौपाल में प्राप्त प्रकरणों की  विस्तार से समीक्षा की और कहा कि उनका समय पर निराकरण करें, साथ ही संबंधित को भी की गयी कार्रवाई से अवगत करायें। कलेक्टर मलिक ने अधिकारियों से कहा कि आमजन बड़ी उम्मीद से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कार्यालयों में आते है, इसलिए उनकी समस्याओं का पूरी संवेदनशीलता से त्वरित समाधान होना चाहिए। बैठक में अपर कलेक्टर रवि साहू, डिप्टी कलेक्टर मनोज खांडे सहित  जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे। 
कलेक्टर मलिक ने किसानों को  समय पर खाद, बीज एवं कीटनाशक की उपलब्धता सुनिश्चित कराने व खाद-बीज की कालाबाज़ारी की शिकायत मिलने पर संबंधित के विरुद्ध सख़्त कार्रवाई करने कहा। साथ ही उन्होंने किसान सम्मान निधि अंतर्गत दिये गये लक्ष्य की पूर्ति के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों को अधिक से अधिक पात्र किसानों  किसान सम्मान निधि के आवेदन करने की  कार्रवाई करने के निर्देश दिए। 
इसी तरह उन्होंने  उन्होंने कहा कि सीमांत किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड दिलाए जिससे कम दर पर ऋण प्राप्त कर सके। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत कृषकों को अधिक से अधिक पंजीयन कराने के निर्देश दिए। यूरिया और डीएपी खाद की उपलब्धता की जानकारी लेते हुए खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 
कलेक्टर मलिक ने महिला एवं बाल विकास विभाग को मातृत्व वंदन योजना के तहत छूटे हुए पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने के निर्देश दिए।इसी तरह बिजली विभाग को ब्लाइंड स्पॉट चिन्हांकित कर स्ट्रीट लाईट लगाने के लिए कहा। उन्होंने वनपट्टाधिकार पत्र की पोर्टल में एंट्री करने कहा। साथ ही जाति प्रमाण पत्र, आयुष्मान कार्ड, पेंशन प्रकरण, पोषण वाटिका  और अनुकम्पा नियुक्ति के प्रकरण के संबंध में  की गई कार्यवाही जानकारी ली।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनाः किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान से मिलेगी राहत

16-Jul-2024
रायपुर। ( शोर संदेश )  प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान से किसानों को राहत दिलाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित की जा रही है। कलेक्टर डाॅ. गौरव सिंह ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित रेडक्राॅस सभाकक्ष में जिला स्तरीय पर्यवेक्षण समिति की बैठक लेकर अधिक से अधिक कृषकों को बीमा आवरण में शामिल करने के लिए निर्देशित किया, जिससे कि प्राकृतिक आपदाओं से फसल प्रभावित होने पर उन्हें क्षतिपूर्ति मिल सकें।
जिले में संचालित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत खरीफ वर्ष 2024 मौसम के लिए जिले के लिए धान सिंचित, धान असिंचित, मक्का, सोयाबीन (ग्राम स्तर पर) फसलों को अधिसूचित फसलों में शामिल किया गया है। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को पंजीयन कराना जरूरी है। इसके लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई 2024 निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रतिकूल मौसम, सूखा, बाढ़, जलप्लावन, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को होने वाली नुकसान से राहत दिलाई जाती है। योजना में ऋणी और अऋणी किसान जो भू-धारक व बटाईदार हो, शामिल हो सकते हैं। ऐसे किसान जो अधिसूचित ग्राम में अधिसूचित फसल के लिए बीमा कराना चाहते हैं वे नियत तिथि के पूर्व अपना फसल बीमा करा सकते हैं। इसके लिए किसान अपना आधार कार्ड, ऋण पुस्तिका, बी-1 पॉचशाला खसरा, बैंक पासबुक की छायाप्रति एवं बोनी प्रमाण पत्र के साथ पंजीयन कराना होगा। किसान बैंक अथवा चॉईस सेंटरों के माध्यम से अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं। खरीफ फसलों में धान सिंचित के लिए राशि 60000  रूपए प्रति हे. धान असिंचित के लिए राशि रू. 45000 प्रति हेक्टेयर, मक्का के लिए 42000 रूपए प्रति हेक्टेयर एवं सोयाबीन के लिए 40000 प्रति हेक्टेयर बीमित राशि निर्धारित है एवं किसान द्वारा देय प्रीमियम दर (बीमित राशि का) 2रूपए है। स्थानीय आपदा एवं फसल कटाई के बाद होने वाले नूकसान की स्थिति में 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 18002660700 में सूचना दे सकते है।



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