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कार्बन क्रेडिट से बढ़ेगी किसानों की आय, नाबार्ड के साथ समझौते में प्रदेश के इन तीन जिलों का हुआ चयन

03-Dec-2024
कोरबा।  ( शोर संदेश )  औद्योगिक गतिविधियों के कारण हवा में बढ़ते कार्बन के उत्सर्जन से निपटने के लिए अलग-अलग मोर्चों पर तैयारी चल रही है। नाबार्ड और नीदरलैंड्स के सरकारी बैंक रेबो के साथ एक समझौता हुआ है। इसके तहत रेबो भारत में एग्रो प्लांटेशन (व्यावसायिक खेती) जैसे आम, जामुन, संतरा आदि के लिए किसानों को प्रोत्साहित करेगी। उनसे पौधे लगवाएगी।
पौधे वातावरण से जितना कार्बन डाई ऑक्साइड का अवशोषण करेंगे उसके अनुसार रेबो यूरोपीय मुद्रा यूरो में भुगतान करेगी। इस कार्य के लिए प्रदेश के तीन जिले कोरबा, सूरजपुर और जशपुर का चयन किया गया है। रविवार को रेबो बैंक और इसकी इंडिया में कंसलट्रेसी एजेंसी के प्रतिनिधि कोरबा जिले के विकासखंड करतला के रामपुर क्षेत्र पहुंचे। प्रतिनिधि मंडल ने नाबार्ड के अधिकारियों की उपस्थिति में किसानों की एक बैठक ली और उन्हें कार्बन क्रेडिट की योजना के बारे में विस्तार से बताया।
बिजली, स्पंज या अन्य औद्योगिक कारखानों में बड़े पैमाने पर ईंधन के रूप में कोयले के इस्तेमाल से कार्बन डाइऑक्साइड हवा में घुलती है। इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि आने वाले वर्षों में कंपनियों को राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ एक समझौता करना होगा।
इसके तहत औद्योगिक कंपनियां जितने टन कार्बन का उत्सर्जन करेंगी उसकी भरपाई के रूप में एक निश्चित राशि देनी होगी। यह राशि रेबो बैंक या इसके जैसी अन्य एजेंसियों के जरिए किसानों को दी जाएगी। प्रारंभिक तौर यह 8 अनुपात 2 का रहेगा। यानि 100 रुपए में से 20 रुपए रेबो बैंक और 80 रुपए किसानों को मिलेगा।

किसान सियाराम ने बेचा 96 क्विंटल धान

03-Dec-2024
नारायणपुर  ( शोर संदेश ) । खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में 14 नवम्बर 2024 से राज्य सरकार द्वारा किसानों से धान क्रय किया जा रहा है, जिसके लिए जिले के सभी 17 धान खरीदी केन्द्रों में किसानों के लिए समुचित व्यवस्था की गई है। खरीदी केन्द्रों में किसानों के लिए छाया, पेयजल, मेडिकल किट की व्यवस्था के साथ-साथ खरीदी करने के लिए काम आने वाले समस्त उपकरणों को दुरूस्त कर रखा गया है। इसके साथ ही समय-समय पर नोडल अधिकारियों द्वारा धान केन्द्रों का जायजा भी लिया जा रहा है, जिससे अभी तक किसानों को धान बेचने में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं हुई है और वे आसानी से खरीदी केन्द्रों में धान बेच रहे हैं। साथ ही किसानों समय पर धान की राशी का भुगतान भी हो रहा है। जिले में अब तक 200 से अधिक किसानों ने धान बेचा है साथ ही राज्य सरकार द्वारा 01 करोड़ 79 लाख 85 हजार से अधिक रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है।
धान बेचने आए किसान सियाराम दुग्गा ने बताया कि उनका 05 एकड़ खेत है और धान खरीदी केन्द्र बिंजली में 96 क्विंटल धान बेचा है। सियाराम दुग्गा के परिवार में 6 सदस्य है, जिसमें उनकी पत्नी, एक बेटा, बहु और 02 पोते हैं। उन्होंने धान की खेती में 05 बोरा डीएफई और 04 बोरा युरिया का उपयोग किया है। उनका कहना है कि इस बार समर्थन मूल्य पर धान बेचने की प्रक्रिया पहले से अधिक सुगम और पारदर्शी से चल रही है। ऑनलाइन टोकन प्रणाली के कारण अब उन्हें लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा कि केन्द्र पर अच्छी व्यवस्था और अधिकारियों का सहयोग देखकर खुशी हुई। अब हमें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। उन्होंने कर्मचारियों का सहयोग की प्रशंसा की। धान बेचने के दो दिवस के भीतर किसानों के खातो में राशि अंतरित कि जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों के लिए बड़ी राहत है और हमें समय पर हमारा भुगतान मिल रहा है।
किसान सियाराम ने कहा कि इस बार समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए मंडी में लंबी कतारों से बचने के लिए पहले से स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदी की जा रही है और समर्थन मूल्य भी 3100 रूपये है जो हम किसानों के लिए बड़ी राहत की बात है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग का यह प्रयास सराहनीय है। इससे हमारी मेहनत का सही दाम मिल रहा है। किसान सियाराम ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के द्वारा किये गये व्यवस्थाओं की प्रशंसा की और उम्मीद जताई कि ऐसी सुविधाएं भविष्य में भी जारी रहेंगी। किसान सियाराम ने बताया कि धान बेचकर मिलने वाली राशि से वे गर्मी की फसल लगाएगें और खेती-बाड़ी के साथ-साथ परिवारिक कार्याे में भी उपयोग करेंगे।

खरीदी केंद्रों में धान को पानी से बचाने के लिए सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने कलेक्टरों को दिए गए निर्देश

01-Dec-2024
रायपुर।  ( शोर संदेश )   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तमिलनाडू में आये चक्रवाती तूफान फेंगल के मद्देनजर छत्तीसगढ़ राज्य में बारिश की संभावना को देखते हुए धान को बारिश से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश अधिकारियो को दिए हैं।
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सभी जिलों के कलेक्टरों को धान को बारिश से बचाने पुख्ता इन्तजाम करने के निर्देश दिए है। 
 खाद्य मंत्री बघेल ने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में 14 नवंबर से धान खरीदी का महाअभियान चल रहा है। राज्य में अब तक 18.09 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है। राज्य में अब तक 3.85 लाख किसानों ने अपना धान बेचा है। धान खरीदी के एवज में इन किसानों को बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत 3706 करोड़ 69 लाख रूपए का भुगतान किया गया है। धान खरीदी का यह अभियान 31 जनवरी 2025 तक चलेगी। खरीफ वर्ष के लिए 27.68 लाख किसानों द्वारा पंजीयन कराया गया है। इसमें 1.45 लाख नए किसान शामिल है। इस वर्ष 2739 उपार्जन केन्द्रों के माध्यम से 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी अनुमानित है। 
खाद्य मंत्री बघेल ने बताया कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रदेश के पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीद रही है। किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए उपार्जन केन्द्रों में माइक्रो एटीएम से दो हजार रूपए से लेकर दस हजार रूपए तक की राशि निकालने की सुविधा दी है, प्रदेश के सभी 2058 सहकारी समितियों में माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराई गई है, इससे किसानों को धान बेचने परिवहन के लिए किराए पर लिए गए ट्रैक्टर, मेटाडोर आदि का भाड़ा और हमाली-मजदूरी का भुगतान करने में सुविधा हो रही है। मुख्यमंत्री के इस फैसले से किसान बेहद प्रसन्न है। उन्होंने बताया कि दूसरे राज्यों से धान के अवैध आवक, परिवहन की रोकथाम के लिए बॉर्डर इलाकों में विशेष निगरानी रखने के लिए चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं। धान खरीदी व्यवस्था पर निगरानी के लिए अलग अलग जिलों के लिए राज्य स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों की टीम बनाई गई है, जो लगातार इसकी मानिटरिंग कर रहे हैं।

 


मिर्च की खेती से इंजीनियर एकलव्य कमा रहे हैं लाखों

01-Dec-2024
धमतरी   ( शोर संदेश ) । इंजीनियरिंग की पढ़ाई खत्म होने के बाद इंजीनियर एकलव्य नौकरी की चाहत न रखकर सब्जी खेती में अपना कैरियर संवारने की ठानी। उद्यानिकी विभाग से जानकारी लेकर 12 एकड़ जमीन पर मिर्च खेती की शुरूआत की और इस खेती से लाखों रुपये की कमाई कर रहा है। स्वयं अपना कैरियर संवारना बल्कि हर रोज गांव की कई महिलाओं को रोजगार देकर उनका भी कैरियर संवार दी। इंजीनियर एकलव्य साहू उन युवक-युवतियों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद सरकारी नौकरी की चाह में खेती-किसानी नहीं करना चाहते हैं और इससे दूरी बनाने की कोशिश करता है।

जिले के मगरलोड ब्लाक स्थित ग्राम दुधवारा निवासी एकलव्य साहू वर्ष 2017-18 में इंजीनियरिंग की परीक्षा पास कर गांव आया। वह सरकारी नौकरी करना नहीं चाहते थे और शुरूआत से ही उनकी दिलचस्पी खेती-किसानी में था। फिर क्या सब्जी खेती में अपना कैरियर संवारने मन बनाकर उद्यानिकी अधिकारी से मिलकर मिर्च खेती की जानकारी ली। कुछ समय तक एकलव्य खेती-किसानी की तकनीकी जानकारी हासिल की। यह भी जानकारी ली कि उनका क्षेत्र सबसे सूखा क्षेत्र है, ऐसे में इंजीनियर एकलव्य साहू ने अपने खेतों में कम लागत और कम पानी के साथ ही अधिक उपज प्राप्त होने वाली मसाला क्षेत्र विस्तार के तहत मिर्ची की फसल लेने ठान ली। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत ड्रिप सिंचाई, पैक हाउस, बीज पैक योजना इत्यादि की जानकारी मिली। इसके लिए मिलने वाले अनुदान के बारे में भी पता चला। अनुदान का लाभ लेकर एकलव्य अपने 12 एकड़ खेत में मिर्च की फसल लेना शुरू कर दिए। वे बताते हैं कि उन्हें मिर्ची की खेती से शुरूआत से ही अच्छा लाभ मिला। प्रति एकड़ 100 से 110 क्विंटल उपज प्राप्त होती है और प्रति एकड़ दो लाख रुपये की शुद्ध आमदनी हासिल कर रहे हैं।उ

एकलव्य साहू ने बताया कि वैसे तो उनके द्वारा तैयार मिर्ची जिले में ही हाथों-हाथ बिक जाती हैं, किन्तु वे अन्य जिलों में भी मिर्ची को बिक्री के लिए भेजते हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त दाम भी मिलता है। मिर्ची की खेती से उन्हें कभी भी बेरोजगारी का अहसास नहीं हुआ और उनका कैरियर इस खेती से संवर चुका है। इंजीनियर एकलव्य साहू का क्षेत्र के पढ़े-लिखे युवक-युवतियों के लिए संदेश है कि आज के इस युग में कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं है। कोई भी कार्य मिले, उसे करें। कैरियर संवारने सिर्फ सरकारी नौकरी ही जरूरी नहीं है, आधुनिक खेती-किसानी करके भी लाखों रुपये कमाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय की पहल पर तिलहन फसलों पर अनुदान राशि प्रति क्विंटल 1500 रुपए प्रति क्विंटल करने की स्वीकृति

29-Nov-2024
रायपुर ( शोर संदेश )। कृषक समग्र विकास योजना के तहत अक्ती बीज संवर्धन योजना के अंतर्गत तिलहन फसलों के बीज उत्पादन एवं वितरण पर अनुदान में वृद्धि के प्रस्ताव को वित्त विभाग ने मंजूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर तिलहनी फसलों के लिए बीज उत्पादन और वितरण अनुदान को प्रति क्विंटल 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये करने की स्वीकृति दी गई है। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से विशेष रूप से तिलहन उत्पादक किसानों को लाभ होगा। उल्लेखनीय है कि अक्ती बीज संवर्धन योजना की शुरुआत से अब तक बीज उत्पादन और वितरण अनुदान में कोई वृद्धि नहीं की गई थी। अब तिलहन फसलों के बीज उत्पादन एवं वितरण पर प्रति क्विंटल 500 रुपये का अतिरिक्त अनुदान मिलेगा, जो किसानों को बीज की गुणवत्ता सुधारने और उत्पादन में वृद्धि करने में मदद करेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस पहल का उद्देश्य किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ-साथ तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा है। इस वृद्धि से किसान तिलहन फसलों की कृषि के लिए प्रोत्साहित होंगे और तिलहन की अधिक उपज सुनिश्चित करने के लिए बेहतर बीज का भी इस्तेमाल करेंगे। इस पहल से तिलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ने के साथ ही  किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।

किसान मिलाप को पैसे के लिए नहीं जाना पड़ा 12 किमी दूर स्थित बैंक

28-Nov-2024
रायपुर ।  ( शोर संदेश )  कांकेर जिले के दुर्गूकोंदल विकासखंड के ग्राम कोदापाखा में स्थित धान उपार्जन केंद्र में किसानों को धान बेचने के बाद मौके पर ही नकद राशि का भुगतान माइक्रो एटीएम के जरिए किया जा रहा है। इस सुविधा से स्थानीय किसानों को अब 10-12 किलोमीटर ब्लॉक मुख्यालय दुर्गूकोंदल जाना नहीं पड़ रहा है। कोदापाखा केंद्र में धान बेचने के बाद ग्राम बंगाचार से आए किसान मिलाप राम पटेल ने यहां उपलब्ध माइक्रो एटीएम का उपयोग किया और एक हजार रुपए निकाले। उन्होंने बताया कि माइक्रो एटीएम का उपयोग बहुत ही आसान है। आधार नंबर और फिंगर प्रिंट के माध्यम से नगद राशि प्राप्त की जा सकती है। किसान पटेल ने कहा कि शासन  द्वारा धान खरीदी केंद्रों में दी जा रही यह सुविधा वरदान साबित हुई है। उन्होंने प्रदेश सरकार की इस नवाचारी पहल के लिए आभार व्यक्त किया।

उल्लेखनीय है कि किसानों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा धान उपार्जन केंद्रों में ही अनेक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उनमें से एक है- धान खरीदी केंद्रों में माइक्रो एटीएम की सुविधा। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों में स्थित धान खरीदी केंद्रों में भी किसानों को त्वरित नकदी प्रदाय करने के उद्देश्य से माइक्रो एटीएम मशीन उपलब्ध कराई गई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर किसानों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सभी 2058 सहकारी समितियों में माइक्रो एटीएम की सुविधा दी जा रही है। धान बेचने केन्द्रों में पहुंचे किसान अब वहां माइक्रो एटीएम से दो हजार रूपए से लेकर दस हजार रूपए तक की राशि निकाल रहे हैं। किसानों ने महज 15 दिनों के भीतर ही माइक्रो एटीएम के जरिए लगभग 2.21 करोड़ रूपए की राशि निकाली है। किसानों के लिए माइक्रो एटीएम के जरिए पैसा जमा करने व पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री साय द्वारा दी गई इस सुविधा से किसानों को बड़ी राहत मिल रही है, इससे किसानों को तत्काल राशि की जरूरत पूरी हो रही है।

अपेक्स बैंक के अधिकारियों ने बताया कि 1 नवम्बर से 30 नवम्बर के मध्य किसानों ने अपेक्स बैंक से जुड़े समितियों से 4.59 लाख, रायपुर जिला सहकारी बैंक से 83.87 लाख, दुर्ग जिला सहकारी बैंक से 44.12 लाख, राजनांदगांव जिला सहकारी बैंक से 15.28 लाख, बस्तर (जगदलपुर) जिला सहकारी बैंक से 3.27 लाख, बिलासपुर जिला सहकारी बैंक से 68.83 लाख, सरगुजा(अंबिकापुर) जिला सहकारी बैंक से 0.80 लाख रूपए निकाली गई है।

उल्लेखनीय है कि राज्य में 14 नवम्बर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की जा रही है। शासन द्वारा किसानों को उनके द्वारा बेचे गए धान के एवज में 72 घंटे के भीतर उनके बैंक खातों में भुगतान की व्यवस्था भी शासन ने सुनिश्चित की है। परन्तु किसानों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने 10 हजार रूपए तक की राशि माइक्रो एटीएम से तुरन्त प्रदान किए जाने की सुविधा दी है। किसानों को धान बेचने के लिए उपार्जन केन्द्र तक उसके परिवहन के लिए किराए पर लिए गए ट्रैक्टर, मेटाडोर आदि का भाड़ा और हमाली-मजदूरी का भुगतान करने के लिए अब न तो किसी से राशि उधार लेने की जरूरत होगी, न ही बैंक का चक्कर लगाना होगा।

धान बेचने के बाद किसान चेहरे पर दिखी खुशी की झलक

26-Nov-2024
रायपुर ( शोर संदेश )  । छत्तीसगढ़ में धान खरीदी महा अभियान जारी है। धान बेचकर किसानों के चेहरे में रौनक दिख रहा है। किसानों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से धान खरीदी के लिए धन्यवाद ज्ञापित किए हैं। धान खरीदी अभियान के इसी कड़ी में बलरामपुर जिला के ग्राम संतोषी नगर के किसान अशोक सरकार ने बताया कि इस वर्ष 01 एकड़ खेत में धान का फसल लगाया था। उन्होंने पिछले सप्ताह धान बेचने के लिए टोकन लिया था। जिसके तहत आज वे अपना 45 बोरी धान बेचने समिति में आये हैं। किसान अशोक ने सुगमतापूर्वक धान खरीदी के राज्य सरकार को धन्यवाद दिया है।
किसान अशोक सरकार ने कहा कि शासन द्वारा धान खरीदी के लिए बनाई गई नीति से किसानों का मान बढ़ा है। किसान बिना किसी परेशानी के धान विक्रय कर पा रहे है। इसी प्रकार ग्राम संतोषीनगर के ही कृषक विष्णु मण्डल बताया कि इस वर्ष वे 105 बोरी धान बेचने के लिए टोकन कटवाया है। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा 31 सौ रुपए की दर से 21 क्विंटल धान की खरीदी होने से किसानों को बहुत संबल मिला है। उन्हें धान विक्रय करने में कोई परेशानी नहीं हुई। प्रशासन द्वारा उपार्जन केन्द्रों में किसानों के लिए शेड-पानी आदि आवश्यक समुचित व्यवस्था की गई है।
किसान लखनलाल ने कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं कि उनके 150 क्विंटल धान से राज्य सरकार के धान खरीदी का शुभारंभ बलरामपुर जिले में हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की बेहतर व्यवस्था से किसान खेती के लिए प्रेरित होकर समर्थन मूल्य पर धान बेच पा रहे है और किसान हमेशा उन्नति की ओर अग्रसर हो रहें हैं।
धान उपार्जन केन्द्रों में शिकायत एवं निवारण के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया हैं जिसका नंबर 0771-2425463 और 0771-2425450 है इसके माध्यम से किसानों  को धान बेचने में किसी भी प्रकार की समस्या आने पर इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

 


अब तक 96 हजार क्विंटल धान की खरीदी

22-Nov-2024
बिलासपुर। ( शोर संदेश ) जिले में आज 1056 किसानों से 45 हजार क्विंटल धान की खरीदी की गई।  इसे मिलकर अब तक  96 हजार क्विंटल से ज्यादा की खरीदी की जा चुकी है। अब तक 2050 किसानों ने धान बेचा है। खरीदी के साथ साथ भुगतान भी लगातार किया जा रहा है। अब तक 22 करोड़ से अधिक की राशि भुगतान की जा चुकी है।
बिना कोई दिक्कत के आसानी से धान बेचने की व्यवस्था से किसानों में खुशी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर  प्रति एकड़ 21 क्विंटल की दर से किसानों से धान खरीदा जा रहा है। कृषक उन्नति योजना की राशि मिलाकर उनसे 3100 प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। फिलहाल उन्हें समर्थन मूल्य मिल रहा है। अंतर की राशि का एकमुश्त भुगतान किया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक तौल से इस बार धान का वजन किया जा रहा है। 

धमतरी के तरसींवा केन्द्र में 90.80 क्विंटल धान जब्त

22-Nov-2024
रायपुर।  ( शोर संदेश ) धमतरी जिले के प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति तरसींवा के उपार्जन केन्द्र में खाद्य विभाग के अधिकारियों की टीम ने कृषक गोपीचंद द्वारा बेचने के लिए लाए गए 90 क्विंटल 80 किलो धान जब्त किया। धान जब्ती की यह कार्यवाही कोचिया से मिली भगत कर किसान द्वारा पुराने धान को नए धान के साथ मिक्स कर समर्थन मूल्य पर खपाने का आरोप सही पाए जाने पर की गई।  
गौरतलब है कि खाद्य विभाग के अधिकारियों की टीम गुरुवार तरसींवा धान उपार्जन केन्द्र में गठित निगरानी समिति से प्राप्त सूचना के आधार वहां पहुंची और किसान गोपीचंद साहू द्वारा लाए गए धान का परीक्षण किया। जिसमें मिक्स किस्म का पुराना धान लाना पाया गया। किसान गोपीचंद ने बताया कि रांवा में कुल 6 खसरों में 1.75 हेक्टे. कृषि भूमि है, जिसका पंजीयन उपार्जन केन्द्र तरसींवा में किया गया है। किसान गोपीचंद के बयान के बाद खाद्य विभाग के अधिकारियों एवं समिति के सदस्यों द्वारा किसान के सभी खसरों का मौका मुआयना किया गया, जिसमें सिर्फ एक खसरे रकबा 0.73 हेक्टे. पर ही धान की कटाई एवं मिंजाई होना पाया गया तथा शेष खसरों पर खेत में धान होना पाया गया।
खाद्य अधिकारी ने बताया कि किसान गोपीचंद द्वारा ग्राम रांवा के धान कोचिया देवेन्द्र कुमार के साथ मिलीभगत कर शेष धान की मात्रा 52.48 क्विंटल (मिक्स किस्म का पुराना धान)को उपार्जन केन्द्र में लाकर खपाने की कोशिश की गई। इस प्रकार धान कोचिया के धान को किसान गोपीचंद साहू द्वारा अपने टोकन में फर्जी तरीके से बिक्री करते पाए जाने पर बिक्री हेतु लाए गए 90.80 क्विंटल धान को उपार्जन केन्द्र तरसींवा में गठित निगरानी समिति के सदस्यों द्वारा जब्ती की कार्यवाही की गई। कार्यवाही में खाद्य विभाग एवं उपार्जन केन्द्र तरसींवा में गठित निगरानी समिति के सदस्य बसंती नेताम, चंद्रकला साहू, विकास कुमार साहू, तोषी भूआर्य उपस्थित थे।

अब धान के अलावा गेंहू, आलू, अरहर और मकई की फसल का लाभ भी ले पा रहे किसान राममिलन

21-Nov-2024
अम्बिकापुर  ( शोर संदेश ) । जिले के विकासखण्ड बतौली के ग्राम पंचायत मंगारी निवासी राममिलन वर्तमान में दोहरी फसल का लाभ ले पा रहे हैं और इसकी वजह है महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना। हितग्राही राममिलन द्वारा अपनी निजी भूमि पर मनरेगा से कुआं निर्माण कराया गया है। वे बताते हैं कि कूप निर्माण के बाद सिंचाई सुविधा मिलने से अब बारिश के पानी पर निर्भरता कम हो गई है, साथ ही फसल या सब्जियों की पैदावार के लिए साल भर पानी भी आसानी से अपने ही कुएं से मिलने लगा है। दैनिक कार्यों एवं सिंचाई में पानी की जरूरतें पूरी हो रही हैं। वे अपना अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत हितग्राही मूलक कार्यों में कुआं निर्माण हेतु उन्होंने ग्राम पंचायत को आवेदन दिया था जिस पर ग्राम के तकनीकी सहायक द्वारा तकनीकी प्राक्कलन तैयार कर जनपद से जिले को भेजा गया और फिर वहां से कुएं के निर्माण के लिए उन्हें 2.99 लाख रुपए की राशि की स्वीकृति प्राप्त हुई। कुएं के निर्माण में कार्यक्रम अधिकारी संतोषी पैंकरा एवं तकनीकी सहायक शशांक सिंह का पूरा मार्गदर्शन और सहयोग मिला जिससे जल्दी ही कुएं का निर्माण कार्य पूरा हुआ। मनरेगा योजना से, जहां राममिलन को उनका आवश्यकता अनुरूप कुएं की सुविधा मिली, वहीं इस निर्माण कार्य से 600 मानव दिवस अर्जित हुए और मनरेगा श्रमिकों को भी रोजगार मिला।
राममिलन के पास 04 एकड़ जमीन जोकि असिंचित थी, अब सिंचाई का साधन कुआं मिलने से उपयोग में आने लगी है। वर्तमान में उनके द्वारा खेती कर अच्छी आय प्राप्त की जा रही है। वे बताते हैं कि उनको अब धान का थरहा खरीदना नहीं पड़ता, पानी की सुविधा के कारण समय से धान लगाते हैं। इससे पूर्व में गेंहू की खेती नहीं कर पाते थे। वर्तमान में गेंहू की खेती के साथ आलू, अरहर, एवं मकई आदि की खेती भी कर पा रहे हैं। शासन की योजना और प्रशासन की टीम के सहयोग से हुई सहूलियत के लिए राममिलन छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
 



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