
नई दिल्ली (शोर सन्देश) । शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्यों देशों के न्याय मंत्रियों की सातवीं बैठक की मेजबानी विधि एवं न्याय, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद द्वारा की गई। भारतीय गणराज्य के विधिएवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद, कजाकिस्तान गणराज्य के न्याय मंत्री एम.बी. बेकेतायेव, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के न्याय मंत्री तांग यिजुन, किर्गिज़ गणराज्य के न्याय मंत्री एम. टी. दज़मांकुलोव, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ पाकिस्तान के कानून एवं न्याय मंत्रालय की अधिकृत प्रतिनिधि सुश्री अंबरीन अब्बासी, रूसी फेडरेशन के न्याय मंत्री के.ए. चुइचेंको, ताजिकिस्तान गणराज्य के न्याय मंत्री एम.के. अशरियोन, उज्बेकिस्तान गणराज्य के न्याय मंत्री आर.के. डेवलेटोव नेन्याय मंत्रियों की इस बैठक में भाग लिया। विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधिक मामले विभाग के सचिव अनूप कुमार मेंदिरत्ता ने न्याय मंत्रियों की इस बैठक में मुख्य संबोधन और समापन वक्तव्य दिया। एससीओ के सदस्य देशों के न्याय मंत्रियों की इस सभा को संबोधित करते हुए विधि एवं न्याय, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सभी को सस्ता और सुलभ न्याय प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा की गई पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज के हाशिए के लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए प्रो बोनो लीगल सर्विसेज शुरू करने का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 2017 में शुरू की गई टेली-लॉ सेवाओं के माध्यम से अब तक 3.44 लाख मुफ्त कानूनी परामर्श गरीब लोगों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिए गए हैं। उन्होंने पारंपरिक ईंट और मोर्टार वाले स्थापत्य से लैस कोर्ट से प्रक्रियागत स्वचालन की ओर सरकार के सफल रूपांतरण के एक हिस्से के तौर पर वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा वाली ई-कोर्ट परियोजनाओं और वर्चुअल कोर्ट्स की शुरुआत पर प्रकाश डाला। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के विभिन्न न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 25 लाख से अधिक सुनवाई हुई है, जिसमें से 9,000 आभासी सुनवाई अकेले सुप्रीम कोर्ट में हुई है। उन्होंने व्यवसायिक न्यायालय अधिनियम एवं मध्यस्थता कानून समेत सरकार द्वारा व्यापार को बढ़ावा देने वाले कानून एवं नियम बनाने को उच्च प्राथमिकता दिए जाने के निर्णय से सभा को अवगत कराया ताकि भारत को निवेश तथा व्यापार का एक पसंदीदा गंतव्य बनाया जा सके। केन्द्रीय मंत्री ने एससीओ सदस्य देशों से, न्याय मंत्रियों के फोरम की गतिविधियों के हिस्से के तौर पर, इस मंच के माध्यम से चिन्हित किए गए क्षेत्रों में विचारों, सर्वोत्तम प्रथाओं और अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने विशेष तौर परफोरम में और आम तौर पर एससीओ में की जा रही विविध गतिविधियों को और व्यापक बनाने पर जोर दिया।

नई दिल्ली (शोर सन्देश) । केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित प्रतिष्ठित आसियान पीएचडी फेलोशिप प्रोग्राम के लिए आसियान के सदस्य देशों से चुने गए छात्रों को आज वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया और उन्हें देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों आईआईटी में उनके चयन के लिए बधाई दी। केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे इस अवसर पर सम्मानित अथिति के रूप में उपस्थित थे। आसियान के सदस्य देशों के राजदूत और प्रतिनिधि; उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे; विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) सुश्री रीवा गांगुली दास; आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर वी रामगोपाल राव; आईआईटी संस्थानों से आसियान संयोजक, आईआईटी के निदेशक और स्कॉलरशिप के लिए चयनित छात्रों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।
आसियान देशों के छात्रों का स्वागत करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत और आसियान के सदस्य देशों के बीच शैक्षिक और अनुसंधान के क्षेत्रों में परस्पर संबंध दोनों के लिए फायदेमंद होंगे। उन्होंने कहा कि यह संस्कृति, वाणिज्य और संपर्क तीनों ही स्तर पर परस्पर संबंधों को और मजबूत करेगा। एपीएफपी भारत और आसियान के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के लिए प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के क्षेत्र में तालमेल के लिए कई नयी संभावनाएं लेकर आएगा। उनके द्वारा किए गए शोध और आविष्कारों का उपयोग दुनिया भर में मानव जाति की बेहतरी के लिए किया जा सकेगा। श्री निशंक ने कहा कि कोविड महामारी के कारण दुनिया की रफ्तार धीमी हो गई है लेकिन इस बात की खुशी है कि इसके बावजूद आईआईटी कभी भी बंद नहीं हुए और लगातार अपने मूल्यवान शोधों और आविष्कारों के साथ देश की सहायता करके इस महामारी के बीच नई सफलता की कहानियां लिख रहे हैं। आसियान के सदस्य देशों के छात्रों को सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संस्थानों में से एक आईआईटी में अध्ययन करने का अवसर मिला है। उन्होंने छात्रों को उनके शोध कार्यक्रमों के लिए शुभकामनाएं दीं। शिक्षा मंत्रालय आसियान छात्रों के लिए आईआईटी दिल्ली में विशेष रूप से गठित आसियान पीएचडी फैलोशिप कार्यक्रम सचिवालय को मदद देगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि आसियान पीएचडी फैलोशिप कार्यक्रम की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 जनवरी 2018 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सभी दस आसियान देशों के नेताओं की उपस्थिति में की थी। उन्होंने बताया कि एपीएफपी के तहत, 1000 फेलोशिप विशेष रूप से आसियान नागरिकों को प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने आगे बताया कि एपीएफपी विदेशी लाभार्थियों के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया सबसे बड़ा क्षमता विकास कार्यक्रम भी है। आसियान पीएचडी फेलो को संबंधित आईआईटी के पूर्व छात्रों के रूप में मान्यता दी जाएगी, जहां से वे अपनी पीएचडी पूरी करेंगे। श्री पोखरियाल ने कहा कि यह कार्यक्रम इस बात का भी प्रतीक है कि भारत हमेशा से वसुधैव कुटुम्बकम् और अथिति देवो भव की भावना के साथ `सर्वे भवंतु सुखिन` की संस्कृति को पोषित करते हुए आगे बढ़ाता रहा है। उन्होंने कहा कि हम दुनिया को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं। एक ग्लोबल माइंड सेट और दृष्टिकोण के साथ हम भारत को शिक्षा के क्षेत्र में ग्लोबल हब के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। एपीएफपी कार्यक्रम शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण की दिशा में उठाया गया एक सकारात्मक कदम है। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए श्री धोत्रे ने कहा कि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ हमारे संबंध बहुत पुराने हैं। हमारे प्राचीन महाकाव्य रामायण का प्रभाव आसियान देशों के सांस्कृतिक परिवेश में बहुत अच्छी तरह से देखा जा सकता है। हमारे बीच रिश्तों का आधार भगवान बुद्ध के संदेश के माध्यम से आगे पोषित हुआ है। हम मजबूत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बंधन साझा करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत में आसियान के छात्रों के लिए शैक्षणिक अनुसंधान यात्रा की यह शुरुआत हमारे संबंधों को और मजबूत करेगी। शोध और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग हम सभी के लिए फायदेमंद होगा। श्री धोत्रे ने कहा कि दुनिया अभी भी कोविड से जूझ रही है। हमारे अनुसंधान संस्थानों ने हमें कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए कम लागत वाले वेंटिलेटर, परीक्षण किट, मास्क आदि विकसित करने में हमारी मदद की है। उन्होंने इस फेलोशिप कार्यक्रम के तहत चुने गए सभी छात्रों को उनके भविष्य के अनुसंधान और नवाचार के लिए सर्वश्रष्ठ शिक्षाविदों और आईआईटी के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में बहुत अच्छा प्रदर्शन करने की कामना की।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। केन्द्रीय, कृषि एवं किसान कल्याण, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, ग्रामीण विकास और पंचायतीराज मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने इंडिया–इंटरनेशनल फूड एंड एग्री वीक का वर्चुअल उद्घाटन किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का भारत के खाद्य बाजार में 32 प्रतिशत हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस एग्रो एंड फूड टेक का ध्यान किसानों की आय बढ़ाने के लिए खाद्य और कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर केन्द्रित है। उन्होंने कहा कि यह 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निर्धारित किए गए लक्ष्य के अनुरूप है। खाद्य और कृषि क्षेत्र की क्षमता के बारे में उन्होंने कहा कि भारत की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत है। उन्होंने कहा कि उचित विपणन और नवीनतम प्रौद्योगिकी से कृषि क्षेत्र का बहुत अधिक विकास हो सकता है। इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि कृषि में जीडीपी विकास दर 3.4 प्रतिशत है और इस क्षेत्र ने कोविड के दौरान भी भारत के आर्थिक विकास में काफी योगदान दिया है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ने इस अवसर पर अन्न देवो भव नामक जागरूकता अभियान शुरू किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भोजन के महत्व के बारे में बढ़ती हुई जागरूकता से हमें भोजन की बर्बादी कम करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की पहलों के बारे में उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इस मंत्रालय ने 20,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ पीएमएफएमई (पीएम फॉरमेलाइजेशन ऑप माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज) योजना शुरू की है। इस योजना से क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी से 2 लाख सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को मदद मिलेगी और इससे स्वयं सहायता समूह, एफपीओ और कुटीर उद्योगों की मदद पर भी ध्यान दिया जाएगा। श्री तोमर ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग वाणिज्य मंत्रालय के साथ काम कर रहा है और इसने निर्यात बाजारों के लिए ‘रेडी टू ईट’ खाद्य फल और सब्जियां का चयन किया है। सरकार खाद्य उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केट डेवलपमेंट बोर्ड के सृजन की दिशा में काम कर रही है। श्री तोमर ने कहा कि खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने ‘फॉर्म गेट से खुदरा बिक्री केन्द्रों’ तक निपुण आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन के साथ आधुनिक बुनियादी ढांचे के लिए ‘प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना’ शुरू की है। एमएफपी योजना पीएमकेएसवाई का एक महत्वपूर्ण तत्व है जिसका उद्देश्य किसानों, प्रोसेसरों और खुदरा विक्रेताओं को एक मंच पर लाकर बाजार को कृषि उत्पादन से जोड़ना है। अभी तक 37 एमएफपी को मंजूरी दी गई हैं, जिनमें से 20 का संचालन शुरू हो गया है। मंत्रालय ने ‘टॉप टू टोटल’ नामक ऑपरेशन ग्रीन्स योजना का विस्तार किया है। इस योजना के तहत, मंत्रालय अधिक उत्पादन वाले क्ल्स्टर से उपभोक्ता केन्द्रों तक ढुलाई हेतु छह महीने के लिए या पात्र फसलों (अधिकतम तीन मास की अवधि के लिए) के लिए उचित भंडारण सुविधाएं किराए पर लेकर इन फसलों की ढुलाई के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध कराएगा। एग्रो एंड फूड टेक के 14वें संस्करण को संबोधित करते हुए, श्री तोमर ने कहा कि यह कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में उपलब्ध उत्पादों, सेवाओं और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए एक उपयुक्त मंच है। उन्होंने कहा कि इस समारोह में उपस्थित सभी हितधारक इस कार्यक्रम में प्रस्तुत की गई नवीनतम प्रौद्योगिकियों, समाधानों और अवसरों से लाभान्वित होंगे।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। आज से शारदीय नवरात्र शुरू हो गए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से शुरू होने वाला यह त्योहार अगले 9 दिनों तक चलेगा और 26 अक्टूबर को दशहरे के साथ संपन्न होगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ट्वीट करते हुए कहा, `नवरात्रि के पावन पर्व की बहुत-बहुत बधाई। जगत जननी मां जगदंबा आप सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करें। जय माता दी!`
पीएम मोदी ने एक अन्य ट्वीट करते हुए लिखा, `ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥ नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को प्रणाम। मां का आशीर्वाद हमें मिले और हमारा पूरा संसार सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध रहे। उनका आशीर्वाद हमें गरीबों और मजबूरों की दुनिया में सकारात्मक बदलाव लाने की शक्ति प्रदान करे।` गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी नवरात्रि में 9 दिनों तक व्रत भी रखते हैं।
आपको बता दें कि कोरोना वायरस महामारी के बीच शुरू हुए नवरात्रि के त्योहार को लेकर गृह मंत्रालय ने पहले ही गाइडलाइन जारी की हुई हैं। हर साल 9 दिनों तक चलने वाली रामलीला और दशहरे के मेलों को भी इस बार इजाजत नहीं दी गई है। हालांकि कुछ शर्तों के साथ दुर्गा पूजा पंडाल लगाए जा सकते हैं।
00 केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी दी शुभकामनाएं
वहीं, इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट कर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। अमित शाह ने लिखा, `नवरात्रि तप, साधना और शक्ति उपासना का प्रतीक है। नवरात्रि के महापर्व की समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। मां भगवती सभी पर अपनी कृपा व आशीर्वाद बनाये रखें। जय माता दी!` इनके अलावा नवरात्रि के अवसर पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ बलरामपुर में स्थित देवी पाटन शक्तिपीठ पहुंचें और पूजा अर्चना की। देवी पाटन शक्तिपीठ मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठों में से एक है।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना काल के दौरान सबसे ज्यादा भयावह दृश्य वही था, जब मजदूरों को वापस पैदल अपने घर लौटते देखा गया। मजबूरी में मजदूर पैदल चलकर अपने राज्य लौटे और काम ना होने पर फिर महानगरों की ओर उन्होंने रुख किया। इस बीच कितने मजदूर अपने घर वापस लौटे और कितने फिर वापस काम पर आए, इसका आंकड़ा किसी के पास नहीं है।
केंद्र सरकार तक के पास इसका आंकड़ा नहीं है, ऐसा सरकार ने लोकसभा में एक सवाल के दौरान कहा था। लेकिन अब सरकार ने इससे सबक लेकर भविष्य के लिए तैयारी करना शुरू कर दिया है। पहली बार केंद्रीय श्रम मंत्रालय देशव्यापी श्रमगणना की तैयारी करने जा रहा है।
मंत्रालय के तहत काम करने वाला लेबर ब्यूरो अब देश में हर पेशे से जुड़े व्यक्ति की गणना करेगा। इसमें देश में कितने डॉक्टर हैं, कितने इंजीनियर हैं, कितने वकील और सीए हैं के साथ-साथ कितने मजदूर, माली, कुक और ड्राइवर की गणना को भी शामिल किया जाएगा। जनवरी 2021 से सर्वे की शुरुआत हो सकती है।
अभी यह गिनती हर छह महीने और भविष्य में हर तीन महीने में की जाएगी। कमिटी के सदस्य और श्रम ब्यूरो के महानिदेशक डीपीएस नेगी ने बताया कि यह गणना वैज्ञानिक सर्वे के आधार पर की जाएगी। सर्वे के तरीके पर अगले 15 दिन में स्पष्ट नीति बनेगी।
उन्होंने बताया कि सर्वे में जिला स्तर पर फैक्ट्री, दफ्तर, अस्पताल और आरडब्ल्यूए जैसे संस्थानों से पेशेवरों का आंकड़ा लिया जाएगा। इसके साथ हर जिले में सीमित हाउसहोल्ड सर्वे भी किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि आंकड़ा जिला, राज्य और केंद्र स्तर पर तैयार किया जाएगा। सर्वे टीम का प्रशिक्षण भी अगले दो महीने में पूरा किया जाएगा।
श्रमगणना की जरूरत इसलिए भी है क्योंकि राज्य कामगारों-पेशेवरों की सूचना नहीं देते या देने में देरी करते हैं। अब कानून में बदलाव करके लेबर ब्यूरो को इसके लिए पूरी तरह से शक्ति दे दी गई है। सभी पेशेवरों को सोशल सिक्योरिटी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। आंकड़ों के आधार पर नीतियों में अपेक्षित बदलाव किए जाएंगे और कामगारों के वेतन पर भी विचार किया जाएगा।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। कोरोना वायरस महामारी से लोगों की जान बचाने में काफी हद तक कारगर मानी जा रही अमेरीकी फार्मा कंपनी गिलियड की दवा रेमडेसिविर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने फेल करार दिया है। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट में कहा गया है रेमडेसिविर दवा कोविड-19 से होने वाली मौतों पर ब्रेक लगाने में कारगर नहीं है। संगठन ने यह जानकारी दवा के क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे आने के बाद दी है। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट अमेरिकी दवा कंपनी के लिए एक बड़ा झटका है।
गौरतलब है कि कोरोना वायरस के शुरुआती महीनों ने रेमडेसिविर दवा संक्रमितों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आई थी। इस वर्ष मई में कंपनी ने ऐलान किया था कि रेमडेसिविर एंटीवायरल दवा कोरोना मरीजों पर असरदार साबित हो रही है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई थी कि ये दवा कोविड-19 मरीजों को जल्दी ठीक कर सकती है, कुछ मामलों में ऐसा हुआ भी। हालांकि अब डब्ल्यूएचओ के ट्रायल में गिलियड की दवा फेल हो गई है।
रेमडेसिविर दवा को WHO ने 30 देशों के 1,266 वयस्क कोरोना संक्रमितों पर क्लिनिकल ट्रायल किया था। इन सभी रोगियों को रेमडेसिविर के साथ-साथ एंटी-एचआईवी ड्रग कॉम्बिनेशन लोपिनवीर या रीतोनवीर, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और इंटरफेरॉन सहित चार संभावित दवाओं को डोज दिए गए थे, जिनके प्रभाव का मूल्यांकन किया गया। गुरुवार को अपने ट्रायल में डब्ल्यूएचओ ने पाया कि रेमडेसिविर दवा बीते 28 दिनों के मृत्यु दर और अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों को ठीक करने में नाकाम रही है। बता दें कि डब्ल्यूएचओ के ट्रायल के ये शुरुआती नतीजें हैं, अभी डिटेल रिव्यू किया जाना बाकी है। इस बीच कोरोना वैक्सीन को लेकर सौम्या स्वामीनाथन ने राहत की खबर दी है। सौम्या के मुताबिक 2020 के अंत तक या अगले साल की शुरुआत में कोविड-19 वैक्सीन आ जाएगी।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। देश में कोरोना वायरस का कहर जारी है। देश में हर दिन हजारों की संख्या में कोरोना संक्रमित सामने आ रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों मुताबिक, देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना के 63,371 नए केस सामने आए हैं और 895 लोगों की मौत हो गई है।
देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 74 लाख के करीब पहुंच गई है। कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या 73,70,469 हो गई। इसमें 8,04,528 केस सक्रिय हैं। वहीं, 64,53,780 लोगों को अब तक इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। कोरोना की चपेट में आकर अब तक 1,12,161 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
देश के अलग-अलग राज्यों से कोरोना के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वह बेहद चिंताजनक हैं। महाराष्ट्र में अब तक कोरोना के 15,64,615 केस सामने आ चुके हैं। कोरोना प्रभावित राज्यों में महाराष्ट्र पहले नंबर पर है। राज्य में कोरोना के 1,92,459 मामले सक्रिय हैं। अब तक 13,30,483 लोगों को डिस्चार्ज किया जा चुका है और 41,196 लोगों की मौत हो चुकी है।
कोरोना प्रभावित राज्यों में आंध्र प्रदेश दूसरे नंबर पर है। आंध्र प्रदेश में कोरोना के अब तक 7,71,503 मामले सामने आ चुके हैं। राज्य में 40,047 सक्रिय केस हैं और 7,25,099 लोगों को अस्पताल से इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। अब तक 6,357 लोगों की मौत हो चुकी है।
कोरोना प्रभावित राज्यों में कर्नाटक तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। कर्नाटक में अब तक कोरोना के 7,43,848 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 1,13,538 केस सक्रिय हैं और 6,20,008 लोगों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। राज्य में कोरोना से अब तक 10,283 लोगों की जान जा चुकी है।
वहीं, तमिलनाडु कोरोना प्रभावित राज्यों में चौथे ने नंबर पर है। राज्य में अब तक कोरोना के 6,74,802 केस सामने आ चुके हैं। इनमें 41,872 मामले सक्रिय हैं और 6,22,458 लोगों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। राज्य में अब तक कोरोना से 10,472 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
उत्तर प्रदेश कोरोना प्रभावित राज्यों में पाचंवें नंबर पर है। यूपी में कोरोना के अब तक 4,47,383 मामले सामने आए हैं। प्रदेश में कोरोना के 36,295 सक्रिय मामले हैं। अब तक 4,04,545 लोगों को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है। कोरोना की चपेट में आकर अब तक 6,543 लोगों की मौत हो चुकी है।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस के टीके से संबंधित अनुसंधान और नमूनों की जांच प्रौद्योगिकी, संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वालों का पता लगाने, औषधियों और चिकित्सा सहित समूची व्यवस्था के बारे में समीक्षा बैठक की। उन्होंने टीके का विकास करने वालों और निर्माताओं के प्रयास की सराहना की और इन सभी प्रयासों को सहायता तथा सुविधाएं जारी रखने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि सीरो सर्वेक्षण और नमूनों की जांच को बढाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नमूनों की जांच नियमित रूप से, तेजी से की जानी चाहिए और यह सुविधा सभी के लिए कम खर्च पर जल्द उपलब्ध कराई जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने टीके के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के व्यापक वितरण और डिलिवरी तंत्र का जायजा लिया। श्री मोदी ने निरंतर तथा सही वैज्ञानिक जांच और प्राचीन चिकित्सा औषधियों की वैधता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने इस मुश्किल समय में सबूत आधारित अनुसंधान करने और विश्वसनीय समाधान उपलब्ध कराने के लिए आयुष मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने नमूनों की जांच, टीके और चिकित्सा के लिए सस्ती तथा आसानी से उपलब्ध होने वाली सुविधाएं न केवल भारत बल्कि समूचे विश्व के लिए उपलब्ध कराने की देश की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इस महामारी से निपटने के लिए निरंतर, सतर्कता बरतने और पूरी तरह तैयारी करने का आह्वान किया। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन, नीति आयोग के सदस्य डॉ वी के पॉल, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर के विजयराघवन, वरिष्ठ वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भाग लिया।

जम्मू-कश्मीर (शोर सन्देश)। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती समेत कई नेताओं की रिहाई के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती समेत कईं नेता प्रदेश से हटाए गए अनुच्छेद 370 के भविष्य को लेकर एकजुट हो गए हैं। इन सभी नेताओं ने पीपल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन नाम के एक गठबंधन की घोषणा की है जो राज्य में अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग करेगा। वहीं इस बैठक के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि आर्टिकल 370 के लिए संघर्ष जारी रहेगा। हमारी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में है। अब्दुल्ला ने कहा कि कोई भी सरकार हमेशा के लिए नहीं रहती, हम इंतजार करेंगे, हार नहीं मानेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का फैसला जम्मू-कश्मीर के हित में नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिकल 370 के खिलाफ पहले भी आवाज उठाई थी और आज भी उठा रहे हैं। उन्होंंने कहा कि हम भारत सरकार से कुछ नहीं मांग रहे हैं। हमारी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास कटोरा लेकर नहीं जा रहा। इसके साथ ही उन्होंने फारूक अब्दुल्ला के बयान पर सफाई देते हुए कहा कि मेरे पिता ने जम्मू-कश्मीर के आंतरिक मामले में चीन के बयान के बारे में बात की थी। चीन की मदद से अनुच्छेद 370 की बहाली का बयान भाजपा प्रवक्ता की ओर से दिया गया। बता दें कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के आवास पर हुई बैठक में पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती, पीपल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन, पीपल्स मूवमेंट के नेता जावेद मीर और माकपा नेता मोहम्मद युसूफ तारिगामी ने भी हिस्सा लिया था। करीब दो घंटे चली बैठक के बाद अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा था कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से जो छीन लिया गया, उसकी बहाली के लिए हम संघर्ष करेंगे। हमारी संवैधानिक लड़ाई है... हम (जम्मू-कश्मीर के संबंध में) संविधान की बहाली के लिए प्रयास करेंगे, जैसा कि पांच अगस्त 2019 से पहले था।

नई दिल्ली (शोर सन्देश)। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ। हर्षवर्धन ने बुधवार को कोरोना के निवारक उपायों पर देश के सभी 16 एम्स के निदेशकों को संबोधित किया। उन्होंने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अपील को दोहराया कि उनके द्वारा बताए गए आसान उपायों का पालन करके कोरोना को उनसे दूर रखना संभव है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉ हर्षवर्धन ने यह भी कहा कि वर्तमान में, अनलॉक -5 के तहत, देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कई गतिविधियों को फिर से शुरू किया गया है।
डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि हम दुनिया के विकासशील और समृद्ध देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। देश की वसूली दर सबसे अधिक 87 प्रतिशत है, जबकि मृत्यु दर सबसे कम 1.53 प्रतिशत है। मामलों की दोहरीकरण की दर 3 दिन से 80 दिनों तक सुधरी है।
मामलों की गति बढ़ गई है और कल 63 हजार मामले सामने आए। कोरोना के खिलाफ 9 महीने के युद्ध के दौरान, हमारे कुछ समर्पित, वफादार डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिक्स ने अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपनी जान गंवा दी। हम इन कोरोना वारियर्स को सलाम करते हैं।