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श्रीलंका के चार दिवसीय दौरे पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी

22-Sep-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी 22 से 25 सितंबर तक श्रीलंका की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह यात्रा भारतीय महासागर क्षेत्र (आईओआर) में साझेदारियों को मजबूत करने के भारत के संकल्प को दोहराती है, जिसमें नौसेना सहयोग को बढ़ावा देना, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना समेत कई प्रमुख पहल शामिल हैं। भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी के श्रीलंका के दौरे की जानकारी दी।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी 22 से 25 सितंबर 2025 तक श्रीलंका की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने के भारत के संकल्प को दोहराती है। इसमें नौसेना सहयोग बढ़ाने, समुद्री सुरक्षा को सशक्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया जाएगा।”

उन्होंने आगे बताया कि इस यात्रा के दौरान एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी श्रीलंका के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे और ’12वें गाले संवाद’ में भाग लेंगे। ‘गाले संवाद’ एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा मंच है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक चर्चाओं को बढ़ावा देता है। यह यात्रा भारत-श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक मित्रता के पुलों को मजबूत करने का प्रतीक है, खासकर समुद्री डोमेन में बढ़ते सहयोग के संदर्भ में।

हाल ही में दोनों देशों के बीच रक्षा समझौतों ने इस साझेदारी को नई गति प्रदान की है। एडमिरल त्रिपाठी, जो अप्रैल 2024 से भारतीय नौसेना के 26वें प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं, पहले भी क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने वाली कई यात्राओं पर गए हैं।

इससे पहले, भारतीय नौसेना के एक कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका के रियर एडमिरल एसजे कुमारा, कमांडर वेस्टर्न नेवल एरिया से मुलाकात की थी। इस दौरान द्विपक्षीय नौसेना सहयोग को मजबूत करने और संयुक्त गतिविधियों पर चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य परिचालन समन्वय को बढ़ावा देना है। यह भारत-श्रीलंका साझेदारी को भारत सरकार की नेबरहुड फर्स्ट नीति और महासागर पहलों के तहत आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

जीएसटी 2.0 आज से लागू : जानें क्या सस्ता और क्या हुआ महंगा?

22-Sep-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। भारत के टैक्स सिस्टम में सोमवार को एक ऐतिहासिक बदलाव लागू हो गया है। नया गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी 2.0) पूरे देश में प्रभावी हो चुका है, जो टैक्स ढांचे को सरल बनाने और आम नागरिकों को राहत प्रदान करने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम है।
जीएसटी परिषद ने सितंबर की शुरुआत में इसकी मंजूरी दी थी और अब इसका सीधा असर बाजारों पर दिखने लगा है। नवरात्रि के शुभ अवसर पर ‘जीएसटी बचत उत्सव’ के रूप में इसे प्रचारित किया जा रहा है, जो स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देगा। इस नई व्यवस्था के तहत टैक्स स्लैबों को सरल बनाया गया है, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं पर बोझ कम होगा। एक नजर डालते हैं टैक्स सिस्टम पर।
जीएसटी फैसलों के अनुसार, पनीर, दूध, ब्रेड, स्टेशनरी, जीवन रक्षक दवाएं और शैक्षिक सेवाओं समेत कई आइटम्स पर जीएसटी दर शून्य हो गई है। ये बदलाव तत्काल प्रभावी आज से ही लागू होंगे, जिससे खुदरा कीमतों में कमी आएगी। नई जीएसटी दर के तहत पनीर और छेना (प्री-पैकेज्ड), दूध, रोटी, चपाती, पराठा, जीवन रक्षक दवाएं (33 प्रकार), स्वास्थ्य/जीवन बीमा और शैक्षिक सेवाएं (ट्यूशन, कोचिंग) पर जीरो टैक्स रहेगा। पहले इन सामानों पर 5 से 18 प्रतिशत तक टैक्स लगता था।
इसके अलावा, मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन और स्टेशनरी आइटम्स (शार्पनर, कॉपी, नोटबुक, पेंसिल और अन्य उत्पाद), वोकेशनल प्रशिक्षण संस्थान, कौशल विकास पाठ्यक्रम, चैरिटेबल अस्पताल सेवाएं और ट्रस्ट (स्वास्थ्य, शिक्षा) पर 12 से 18 प्रतिशत लगने वाला टैक्स घटकर शून्य हो गया है। साथ ही, एसी और फ्रिज आदि पर जीएसटी 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत हो गया है। वहीं, गाड़ियों पर टैक्स में कटौती की गई है। 350 सीसी और उससे कम की बाइक पर अब जीएसटी घटकर 18 प्रतिशत हो गया है, जो कि पहले 28 प्रतिशत था।
इसके अलावा, 1,200 सीसी और 4 मीटर से कम की पेट्रोल गाड़ियों और 1,500 सीसी और 4 मीटर से कम की डीजल गाड़ियों पर टैक्स घटकर 18 प्रतिशत हो गया है। इससे ऊपर के सेगमेंट और क्षमता वाली गाड़ियों पर अब 40 प्रतिशत का टैक्स लगेगा, जो कि पहले करीब 50 प्रतिशत होता था।वहीं, तंबाकू, बीड़ी और पान मसाला पर 40% टैक्स बरकरार रखा गया है, जबकि पेट्रोल-डीजल पर कोई बदलाव नहीं हुआ क्योंकि ये अभी भी जीएसटी के दायरे से बाहर हैं।

कम महंगाई और जीएसटी सुधार के चलते सितंबर में ब्याज दर घटा सकता है आरबीआई : रिपोर्ट

22-Sep-2025
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के दोबारा पटरी पर लौटने के बीच जीएसटी में सुधार के साथ महंगाई के 2004 के बाद अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचने की संभावना बनी हुई है। एसबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बीच सितंबर में ब्याज दर में कटौती आरबीआई के लिए सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है, इस कदम के साथ आरबीआई एक दूरदर्शी केंद्रीय बैंक के रूप में भी उभर सकता है।
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक होने वाली है
केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक होने वाली है। पिछली बैठक में ब्याज दरों में बड़ी कटौती के बाद आरबीआई ने अगस्त की बैठक में रेपो रेट को 5.50 प्रतिशत पर बनाए रखा था। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष के अनुसार, “हमारा मानना ​​है कि सीपीआई महंगाई का निचला स्तर अभी तक नहीं पहुंचा है और जीएसटी रेशनलाइजेशन के कारण यह और 65-75 बेसिस पॉइंट गिर सकता है।”
घोष ने कहा, “वित्त वर्ष 27 में भी महंगाई कम रहेगी और जीएसटी रेट में कटौती के बिना यह सितंबर और अक्टूबर में 2 प्रतिशत से नीचे रहेगी। वित्त वर्ष 27 के सीपीआई आंकड़े अब 4 प्रतिशत या उससे कम हैं और जीएसटी सुधार के साथ, अक्टूबर में सीपीआई 1.1 प्रतिशत के करीब हो सकता है, जो 2004 के बाद सबसे कम है।”
रिपोर्ट के अनुसार, “इसके अलावा, नई सीपीआई सीरीज के साथ, हमें सीपीआई में 20-30 बेसिस पॉइंट की और गिरावट की उम्मीद है
2019 का अनुभव भी बताता है कि दरों में सुधार से कुछ ही महीनों में कुल महंगाई में लगभग 35 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई। रिपोर्ट के अनुसार, “इसके अलावा, नई सीपीआई सीरीज के साथ, हमें सीपीआई में 20-30 बेसिस पॉइंट की और गिरावट की उम्मीद है। ये सभी कारक (जीएसटी, बेस में बदलाव) बताते हैं कि वित्त वर्ष 26 और वित्त वर्ष 27 के दौरान सीपीआई महंगाई, महंगाई लक्ष्य (4+2 प्रतिशत) के निचले स्तर के आसपास रहेगी।”
सितंबर में ब्याज दरें नहीं घटाने से टाइप 2 की गलती दोहराने का कोई मतलब नहीं है
घोष के अनुसार, सितंबर में ब्याज दर में कटौती करने का एक अलग तर्क और औचित्य है। घोष ने जोर देते हुए कहा, “लेकिन इसके लिए आरबीआई को सावधानीपूर्वक जानकारी देनी होगी, क्योंकि जून के बाद ब्याज दर में कटौती के लिए मानदंड वास्तव में अधिक है। लेकिन सितंबर में ब्याज दरें नहीं घटाने से टाइप 2 की गलती दोहराने का कोई मतलब नहीं है। महंगाई वित्त वर्ष 27 में भी कम रहेगी और जीएसटी रेट में कटौती के बिना, यह सितंबर और अक्टूबर में 2 प्रतिशत से नीचे रहेगी।”

अमेरिका में स्थानीय कौशल विकास व भर्ती को प्रोत्साहित करेगी भारतीय टेक इंडस्ट्री : नैसकॉम

22-Sep-2025
नई दिल्ली। भारत में टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के लिए शीर्ष निकाय नैसकॉम ने सोमवार को कहा कि भारतीय आईटी और टेक इंडस्ट्री अमेरिका में लोकल अपस्किलिंग और हायरिंग पर 1 बिलियन डॉलर से भी अधिक खर्च कर रही है और इसी के साथ अमेरिका में स्थानीय लोगों की भर्ती की संख्या में वृद्धि हुई है। 
भारतीय और भारत से जुड़ी कंपनियों ने अमेरिका में एच-1बी वीजा पर निर्भरता घटाकर स्थानीय भर्ती बढ़ाई है
पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका में काम करने वाली भारतीय और भारत से जुड़ी कंपनियों ने एच-1बी वीजा पर अपनी निर्भरता को कम किया है और लोकल हायरिंग को बढ़ाया है। नैसकॉम के अनुसार, “इसके अलावा, 2026 से फीस लागू होने से कंपनियों को अमेरिका में स्किलिंग प्रोग्राम को बेहतर बनाने और लोकल हायरिंग बढ़ाने का समय मिलेगा।”
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख भारतीय और भारत से जुड़ी कंपनियों को 2015 में कुल 14,792 एच-1बी वीजा जारी किए गए थे, जो कि 2024 में घटकर मात्र 10,162 रह गए हैं। नैसकॉम ने एक बयान में कहा, “टॉप 10 भारतीय और भारत से जुड़ी कंपनियों में एच-1बी कर्मचारी उनके कुल कर्मचारियों का 1 प्रतिशत से भी कम हैं। इस ट्रेंड को देखते हुए हमें लगता है कि इस सेक्टर पर बहुत कम असर होगा।”
एच-1बी एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा है, जो अमेरिका में स्किल गैप पूरा करता है और कर्मचारियों को स्थानीय स्तर की समान सैलरी सुनिश्चित करता है
एच-1बी एक हाई-स्किल्ड वर्कर मोबिलिटी और नॉन-इमिग्रेंट वीजा है, जो अमेरिका में जरूरी स्किल गैप को पूरा करता है, जिसमें कर्मचारी को सैलरी लोकल कर्मचारियों के बराबर ही दी जाती है। साथ ही, एच-1बी कर्मचारी अमेरिका की कुल वर्कफोर्स का एक छोटा सा हिस्सा हैं।
इंडस्ट्री बॉडी ने कहा, “नासकॉम हमेशा से स्किल वाले लोगों की आवाजाही के लिए भरोसेमंद और स्थिर फ्रेमवर्क की वकालत करता रहा है, जो देश की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बनाए रखने के लिए जरूरी है और इसने हमेशा अमेरिका में इनोवेशन और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया है।” इसमें आगे कहा गया कि स्किल वाले लोगों की आवाजाही से कंपनियों को भविष्य के लिए निवेश के फैसले लेने, रिसर्च को तेज करने और ग्लोबल इनोवेशन इकोनॉमी में देश की स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
20 सितंबर को व्हाइट हाउस ने एच-1बी वीजा आवेदन पर 1 लाख डॉलर की सालाना फीस लगाने पर सफाई दी। स्पष्ट किया गया है कि यह नियम मौजूदा वीजा होल्डर्स पर लागू नहीं होगा और केवल नए आवेदनों पर एक बार ही लागू होगा। इससे एलिजिबिलिटी और टाइमलाइन से जुड़ी उलझन दूर हुई है। साथ ही, अमेरिका के बाहर मौजूद एच-1बी होल्डर्स के लिए बिजनेस की निरंतरता और अनिश्चितता की चिंता भी कम हुई है।

GST 2.0 पर चिराग पासवान का समर्थन, कांग्रेस की राजनीति पर उठाए सवाल

22-Sep-2025
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को नवरात्रि के अवसर पर पूरे देश और बिहारवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू की गई GST 2.0 का जोरदार समर्थन किया और इसे जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग की पूर्ति बताया।
पत्रकारों से बात करते हुए पासवान ने कहा, “मैं सभी भारतीयों और बिहारवासियों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। ये माता रानी की भक्ति के दिन हैं और हम प्रार्थना करते हैं कि उनकी कृपा हमेशा हम पर बनी रहे और सभी की इच्छाएं पूरी हों। लेकिन मैं कहूँगा कि माता रानी की कृपा से, सभी नागरिकों की एक बड़ी इच्छा पहले ही हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूरी हो गई है।”
GST 2.0, जो सोमवार से लागू हुई, पुराने कई स्लैब की तुलना में अब सिर्फ दो मुख्य स्लैब – 5% और 18% में बदल गई है। इससे 375 से अधिक जरूरी और उपभोक्ता वस्तुएं सस्ती हो गई हैं। इसे पूरे देश में ‘GST बचत उत्सव’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, खासकर मध्यम वर्ग और छोटे व्यवसायों को लाभ पहुँचाने के लिए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा GST पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए पासवान ने कांग्रेस की राजनीतिक मंशा और सुसंगति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “वे असल में क्या चाहते हैं? महंगाई बढ़ाना, GST बढ़ाना? मुझे विपक्ष की स्थिति समझ नहीं आती। आपके राज्य के मुख्यमंत्री खुद इस पर सहमति दे चुके हैं। फिर आप अब हर चीज़ पर राजनीति क्यों कर रहे हैं?”
खड़गे ने पहले X पर पोस्ट करते हुए नई GST सुधारों की आलोचना की थी और पिछले आठ साल में मोदी सरकार पर “गब्बर सिंह टैक्स” के जरिए 55 लाख करोड़ रुपये वसूलने का आरोप लगाया था, जबकि अब सरकार 2.5 लाख करोड़ रुपये के बचत उत्सव से जनता का समर्थन जीतने की कोशिश कर रही है।
पासवान ने इसे “भ्रमित और गुमराह करने वाला” बताया और कहा कि कांग्रेस ने पहले राज्य स्तर पर GST सुधारों का समर्थन किया था, लेकिन अब इसे राजनीति का मुद्दा बना रही है।
उन्होंने कहा, “यह आश्चर्यजनक है कि GST काउंसिल का हिस्सा होने और सुधारों को मंजूरी देने के बाद भी, वे अब झूठी कहानी पेश कर रहे हैं।”
त्योहारों के मौसम और GST 2.0 के तहत कीमतों में राहत के साथ, बीजेपी इसे जनता-प्रधान नीति के रूप में दिखाने की कोशिश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे अल्पकालिक लोकप्रियता पाने का कदम बता रहा है।
राज्य चुनावों की तैयारी के बीच, कर सुधार फिर से राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है, जो आर्थिक नीति और चुनावी संदेश दोनों को जोड़ता है।

नई जीएसटी 2.0 प्रणाली से लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं में राहत

22-Sep-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। मेडिकल डिवाइस और फार्मा इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स ने सोमवार को जीएसटी 2.0 के तहत रिवाइज्ड टैक्स रेट्स के लागू होने की सराहना की। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे हेल्थकेयर पहले के मुकाबले सस्ता होगा और आसानी से उपलब्ध होगा।
इस महीने की शुरुआत में जीएसटी काउंसिल ने मेडिकल डिवाइस पर जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की घोषणा की थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री ने जीएसटी सुधार को एक स्वस्थ, मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया।
मेडिकल डिवाइस पर जीएसटी रेट को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद
पोस्ट में कहा गया, “मेडिकल डिवाइस पर जीएसटी रेट को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद। इस कदम के साथ हर नागरिक के लिए मेडिकल डिवाइस सस्ते हो जाएंगे।” पोस्ट में आगे कहा गया, “इस ऐतिहासिक सुधार की वजह से इलाज की लागत कम होगी और आवश्यक हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी की पूरे भारत में पहुंच बढ़ेगी।”
जीएसटी सुधार के साथ 12 प्रतिशत टैक्स वाली अधिकांश दवाएं अब केवल 5 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में आ गई हैं
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री ने यह भी वादा किया कि वह देश भर में मरीजों, अस्पतालों और लैब को किफायती, हाई-क्वालिटी मेड इन इंडिया डिवाइस उपलब्ध करवा कर लाभ पहुंचाएगा। जीएसटी सुधार के साथ 12 प्रतिशत टैक्स वाली अधिकांश दवाएं अब केवल 5 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में आ गई हैं।
कैंसर, जेनेटिक और दुर्लभ बीमारियों और हृदय रोगों के लिए 36 महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवाओं को पूरी तरह से छूट दे दी गई है
इसके अलावा, कैंसर, जेनेटिक और दुर्लभ बीमारियों और हृदय रोगों के लिए 36 महत्वपूर्ण जीवनरक्षक दवाओं को पूरी तरह से छूट दे दी गई है। जीएसटी काउंसिल ने हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, ग्लूकोमीटर और चश्मे पर टैक्स स्लैब को भी रिवाइज किया है।
ये कदम भारत के हेल्थकेयर क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे
इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (आईपीए) के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा कि इससे मरीजों को सीधे बचत होगी और परिवारों पर से बोझ कम होगा। जैन ने कहा, “ये कदम भारत के हेल्थकेयर क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। इससे मरीजों को सीधे बचत होगी, परिवारों पर से बोझ कम होगा, आवश्यक देखभाल तक पहुंच में सुधार होगा और हेल्थकेयर सुरक्षा मजबूत होगी।”उन्होंने कहा कि 23 प्रमुख रिसर्च-आधारित कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला आईपीए यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि ये लाभ नागरिकों तक तेजी से और पारदर्शिता के साथ पहुंचे। साथ ही, सभी के लिए किफायती और सुलभ हेल्थकेयर का उनका मिशन आगे बढ़े।

ईटानगर में पीएम मोदी ने जीएसटी बचत उत्सव पर की अपील, जनता ने फ्लैश लाइट से समर्थन जताया

22-Sep-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी 2.0 को ‘बचत उत्सव’ के रूप में मनाते हुए जनता से मोबाइल की फ्लैश लाइट जलवाई। वे सोमवार को अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में शामिल जनता से अपील की कि वे मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाएं। उनकी अपील पर जनता ने फ्लैश लाइट जलाई। इसके बाद, पीएम मोदी ने कहा कि यह बचत उत्सव का नजारा और उसकी ताकत है। यह नवरात्रि का पहला दिन है। इस मौके पर प्रकाश ही प्रकाश है और अरुणाचल का प्रकाश पूरे देश में फैल जाता है।

देश में सोमवार से जीएसटी की नई दरें लागू हुई हैं
देश में सोमवार से जीएसटी की नई दरें लागू हुई हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकसित भारत’ के संकल्प और ‘आत्मनिर्भरता’ की अपील को दोहराया। ईटानगर के कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा, “जब हम सब मिलकर ‘विकसित भारत’ बनाने के लिए इतनी मेहनत कर रहे हैं तो देश की भी एक अपेक्षा है। यह अपेक्षा ‘आत्मनिर्भरता’ की है। भारत तभी ‘विकसित राष्ट्र’ होगा, जब आत्मनिर्भर होगा। भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ के लिए स्वदेशी का मंत्र जरूरी है। आज समय की मांग है कि हम स्वदेशी अपनाएं। वही खरीदें जो देश में बना हो। वही बेचें, जो देश में बना हो। गर्व से कहें, ये स्वदेशी है।”

पीएम मोदी ने ‘गर्व से कहें, यह स्वदेशी है’ नारा लगाया
इस दौरान पीएम मोदी ने ‘गर्व से कहें, यह स्वदेशी है’ नारा लगाया। उन्होंने कहा, “इसी मंत्र पर चलते हुए देश का विकास होगा। अरुणाचल और नॉर्थ ईस्ट का विकास तेज होगा।” उन्होंने कहा कि बीते सालों में देश के सामने अनेक चुनौतियां आईं, लेकिन हम इनकम टैक्स घटाते गए और इसी साल हमने 12 लाख रुपए तक की वार्षिक आय पर टैक्स जीरो किया है। जीएसटी को भी दो स्लैब (5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत) तक सीमित कर दिया है, जिससे बहुत सारी चीजें टैक्स फ्री हो चुकी हैं और बहुत चीजों पर टैक्स काफी कम हो गया है।

अब आप लोग आराम से नया घर बना सकते हैं
जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “अब आप लोग आराम से नया घर बना सकते हैं। स्कूटर, बाइक खरीद सकते हैं। बाहर घूमना और खाना भी पहले से सस्ता हो गया है।” उन्होंने कहा कि यह ‘जीएसटी बचत उत्सव’ जनता के लिए बहुत यादगार बनने वाला है।
 

पीएम मोदी ने दी नवरात्रि की बधाई, कहा- ‘साहस, संयम और संकल्प का पर्व जीवन में लाए नया विश्वास’

22-Sep-2025
नई दिल्ली (शोर संदेश)। शारदीय नवरात्रि का सोमवार से आगाज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवरात्रि के पावन पर्व की देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस पावन पर्व पर भक्ति-भाव से जीवन में नई शक्ति की कामना की।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आप सभी को नवरात्रि की अनंत शुभकामनाएं। साहस, संयम और संकल्प के भक्ति-भाव से भरा यह पावन पर्व हर किसी के जीवन में नई शक्ति और नया विश्वास लेकर आए। जय माता दी।”
प्रधानमंत्री के अलावा केंद्रीय मंत्रियों ने भी देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा, “शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। मां दुर्गा का आशीर्वाद हमारे जीवन में शक्ति, साधना और समृद्धि का संचार करे। उनकी कृपा से भारत आत्मनिर्भरता, प्रगति और खुशहाली की नई ऊंचाइयों को छूते हुए विश्व में शांति और कल्याण का मार्गदर्शक बने।”
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से नवरात्रि की शुभकामनाएं दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “सर्व मंगल मांगल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरी, नारायणी नमोस्तुते। समस्त देशवासियों को नवरात्रि के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।”
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, “मां का आगमन। शारदीय नवरात्रि हर वर्ष अपने साथ अनंत खुशियों का भंडार लेकर आती है और श्रद्धालुओं के दुखों को मिटाकर जीवन में नवीन ऊर्जा और प्रकाश फैलाती है। ऐसे पावन पर्व पर मां दुर्गा में श्रद्धा रखने वाले सभी सनातन प्रेमियों को जय माता दी।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देशवासियों को नवरात्रि की बधाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, “सभी श्रद्धालुओं एवं प्रदेश वासियों को मां भगवती जगदम्बा की आराधना व उपासना के पावन पर्व ‘शारदीय नवरात्रि’ की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं। मां सभी के जीवन को सुख, स्वास्थ्य और सौभाग्य के आशीर्वाद से अभिसिंचित करें, यही प्रार्थना है।”
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने एक्स पर लिखा, “आप सभी भक्तों को मां भगवती जगदम्बा की आराधना व उपासना के पावन पर्व शारदीय नवरात्रि की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मां से मेरी यही कामना है कि आप सभी के जीवन को सुख, स्वास्थ्य और सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करें, जय माता दी।” 

एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर का वार्षिक शुल्क लगाने के ट्रंप के फैसले ने भारतीय आईटी कंपनियों के लिए खड़ी की नई मुसीबत

21-Sep-2025
नई दिल्ली। एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर का वार्षिक शुल्क लगाने से जुड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के बाद अमेरिकी बाजार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखने वाले भारतीय आईटी शेयरों पर भारी दबाव आ गया। डोनाल्ड ट्रंप के इस कदम से कंपनियों के लिए भारतीय टेक्नोलॉजी पेशेवरों को नियुक्त करना पहले से अधिक महंगा हो जाएगा।

बीते कारोबारी दिन डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा आवेदनों के लिए 1,00,000 डॉलर शुल्क लगाने संबंधी आदेश पर हस्ताक्षर करने की तैयारी की खबरों के आते ही कई तकनीकी कंपनियों के शेयरों में गिरावट आ गई। देश की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस के शेयर 4.5 प्रतिशत गिर गए। कॉग्निजेंट टेक्नोलॉजी के शेयर 4.3 प्रतिशत, एक्सेंचर के शेयर 1.3 प्रतिशत और विप्रो के शेयर 3.4 प्रतिशत गिर गए।

दरअसल, भारतीय आईटी सर्विस प्रोवाइडर एच-1बी वीजा के सबसे बड़े उपयोगकर्ताओं में से हैं। इन कंपनियों द्वारा उनकी अमेरिकी परियोजनाओं में भारत के कुशल कर्मचारियों को नियुक्त किया जाता है।

वहीं, ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा पर लगाया गया शुल्क कंपनियों के कॉस्ट-सेविंग मॉडल के लिए एक बड़ा खतरा बन जाएगा। एच-1बी वीजा अमेरिका में तीन वर्ष के लिए रोजगार प्रदान करता है और इसे तीन अतिरिक्त वर्ष के लिए बढ़ाया भी जा सकता है। एच-1बी वीजा भारतीय तकनीकी कर्मचारियों के लिए अमेरिका में एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार रहा है।

ट्रंप की नई घोषणा एच-1बी कैटेगरी के तहत देशी नागरिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाती है, जिसका इस्तेमाल खास कर विशिष्ट व्यवसायों में स्किल्ड प्रोफेशनल्स को नियुक्त करने के लिए किया जाता है।

नियोक्ताओं को अब पेमेंट का प्रमाण रखना जरूरी होगा, जिसे वीजा प्रॉसेस के दौरान राज्य सचिव द्वारा वेरिफाइ किया जाएगा।

उधर, इस फैसले की घोषणा करने के साथ ट्रंप का कहना है कि यह भारी शुल्क सुनिश्चित करेगा कि केवल अत्यंत कुशल लोगों को ही अमेरिका में एंट्री मिले। इससे कंपनियों द्वारा अमेरिकी कर्मचारियों की जगह दूसरे देशों से सस्ते कर्मचारियों को लाने पर भी रोक लगेगी।

ट्रंप ने अपनी घोषणा में कहा, “हमें वर्कर्स की जरूरत है, हमें अच्छे और बेहतरीन वर्कर्स की जरूरत है और इस फैसले के साथ यह सुनिश्चित हो सकेगा कि अमेरिका में बेहतर वर्कर्स ही काम कर सकें।

 


अमेरिकी टेक फर्मों ने अपने H-1B वीजा वाले कर्मचारियों से रविवार की डेडलाइन से पहले अमेरिका वापस लौटने का किया आग्रह

21-Sep-2025
नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट जैसी अमेरिकी टेक फर्मों ने H-1B वीजा वाले अपने उन कर्मचारियों को जो अभी अमेरिका के बाहर हैं, तुरंत अमेरिका वापस लौटने की सलाह दी है। कंपनी द्वारा यह सलाह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस लागू होने की 21 सितंबर की डेडलाइन से पहले दी गई है। अमेरिकी प्रशासन ने सभी वीजा पर सालाना 1 लाख डॉलर की फीस लगाई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह नया नियम 21 सितंबर से लागू होगा और 12 महीने तक रहेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट और जेपी मॉर्गन जैसी कंपनियों ने अमेरिका में मौजूद अपने एच-1बी वीजा कर्मचारियों को आने वाले समय में देश में ही काम जारी रखने और आगे नए निर्देश मिलने तक अंतरराष्ट्रीय यात्रा न करने का निर्देश दिया है।

माइक्रोसॉफ्ट ने कथित तौर पर एच-4 वीजा धारकों को भी अमेरिका में ही रहने की सलाह दी है। कंपनी ने कहा, “हम एच-1बी वीजा और एच-4 वीजा धारकों को कल डेडलाइन से पहले अमेरिका वापस लौटने की सलाह देते हैं।”

वहीं, माइक्रोसॉफ्ट या जेपी मॉर्गन की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को उम्मीद है कि इस नए वीजा प्रोग्राम से अमेरिकी खजाने को 100 बिलियन डॉलर से अधिक मिलेंगे, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रीय कर्ज कम करने और टैक्स में कटौती के लिए किया जाएगा। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि नई फीस से प्रतिभा की आवाजाही में रुकावट आएगी और इनोवेशन कम होगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 71 प्रतिशत एच-1बी वीजा धारक भारत से हैं, जो मुख्य रूप से इंफोसिस, विप्रो, कॉग्निजेंट और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों में काम करते हैं। अमेरिका में लिस्टेड भारतीय कंपनियों सहित प्रमुख आईटी सर्विस फर्मों के शेयर इस घोषणा के बाद 2 से 5 प्रतिशत तक गिर गए।

एच-1बी वीजा आमतौर पर तीन साल के लिए वैलिड होता है और अगले तीन अतिरिक्त साल के लिए रिन्यू किए जा सकते हैं। ऐसे में, नई 1 लाख डॉलर की सालाना फीस से भारतीय पेशेवरों को बनाए रखना कंपनियों के लिए महंगा हो सकता है, खासकर जब ग्रीन कार्ड के लिए दशकों का इंतजार करना पड़ता है।

एच-1बी प्रोग्राम अमेरिकी कंपनियों को टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में कुशल विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने की अनुमति देता है।


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