
मुंबई (शोर सन्देश)। दि वॉल्ट डिज्नी कंपनी इंडिया और स्टार इंडिया ने बुधवार को के माधवन को तत्काल प्रभाव से अपना अध्यक्ष नियुक्त किया। माधवन 2019 से भारत में स्टार और डिज्नी के कंट्री मैनेजर हैं और उसके टेलीविजन तथा स्टूडियो कारोबार की देखरेख कर रहे हैं। वॉल्ट डिज्नी के अंतरराष्ट्रीय परिचालन की अध्यक्ष रेबेका कैंपबेल ने कहा कि माधवन नई भूमिका में डिज्नी, स्टार और हॉटस्टार व्यवसायों को संभालने के साथ ही समूह की रणनीति और वृद्धि के लिए जिम्मेदार होंगे। उनकी नई भूमिका में चैनल का वितरण, विज्ञापन बिक्री और स्थानीय कटेंट निर्माण शामिल है। कैंपबेल ने कहा, पिछले कई महीनों से मैं माधवन के साथ सीधे काम कर रही हूं और मैंने देखा है कि उन्होंने हमारे भारत के कारोबार को कैसे संभाला है, जो हमारी वैश्विक और क्षेत्रीय रणनीति के लिए महत्वपूर्ण है। माधवन ने कहा कि वह वैश्विक और क्षेत्रीय पेशकश को बढ़ाने के साथ ही व्यापार को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

रायपुर (शोर सन्देश)। देश में चार दिन बाद एक बार फिर से पेट्रोल डीजल सस्ता हुआ है। पेट्रोल की कीमतों में लगभग 22 पैसे जबकि डीजल की कीमतों में 23 पैसे की कटौती की गई। राजधानी रायपुर में पेट्रोल की कीमतों में करीब 21 पैसे की कटौती हुई है, जिसके बाद इसकी कीमत 89.06 रूपए प्रति लीटर है। इसी प्रकार डीजल 24 पैसों की कटौती के बाद 87.62 रूपए प्रति लीटर चल रहा है।
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल के दाम में 22 पैसे और डीजल की कीमतों में 23 पैसे की कटौती की गई। कटौती के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 90.56 रुपये प्रति लीटर पर आ गया। वहीं, डीजल के दाम गिरकर 80.87 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया। कीमतों में कटौती के बाद मुंबई में पेट्रोल की कीमत 96.98 रुपये और डीजल की कीमत 87.96 रुपये प्रति लीटर हो गया। वहीं अगर कोलकाता में कीमतों की बात करें तो पेट्रोल के दाम 90.77 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल की कीमत 83.75 रुपये हो गया। चेन्नई में पेट्रोल 92.58 रुपये तो डीजल की कीमत 85.88 रुपये प्रति लीटर हो गया।

रायपुर (शोर सन्देश)। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज चुनाव के प्रचार अभियान के तहत आज जय व्यापार पैनल की टीम ने अभनपुर, चरामा, कांकेर व धमतरी का दौरा किया। पैनल से प्रदेश अध्यक्ष प्रत्याशी अमर पारवानी के नेतृत्व में आज प्रदेश महामंत्री प्रत्याशी अजय भसीन और सहित टीम ने आज व्यापारियों से भेंट करते हुए उनसे चुनाव में समर्थन मांगा। इस दौरान स्थानीय व्यापारियों ने सभी प्रत्याशियों सहित जय व्यापार पैनल को समर्थन देने का ऐलान करते हुए टीम का जोरदार स्वागत किया। प्रदेश अध्यक्ष प्रत्याशी अमर पारवानी ने इस दौरान सभी व्यापारी साथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे साथियों का उत्साह ही हमारी ताकत है और हम निश्चित रूप से चुनाव में जीत दर्ज करने जा रहे हैं। जय व्यापार पैनल के प्रदेश चुनाव संचालक नरेंद्र दुग्गड़ ने बताया कि चेम्बर का गत तीन वर्षों का कार्यकाल अब तक की सबसे खराब कार्यकाल रहा है। जिसमें व्यापारी हित से परे सभी प्रमुख पदाधिकारी अपने हित की लड़ाई के कारण आपस में लड़ते रहे। जिसका परिणाम यह रहा कि आज चेम्बर की साख पर बन आई है। हमारे वरिष्ठों ने इस प्रतिष्ठित व्यापारी संगठन को पिछले 60 वर्षों से अपने खून पसीने से सींचा है। लेकिन निवर्तमान पदाधिकारी अब इस संस्था पर बोझ बन चुके हैं। अगर हम सभी व्यापारी साथी अब भी नहीं जागे तो चेम्बर के कंधों पर यह बोझ और बढ़ जाएगा।
नरेन्द्र दुग्गड ने बताया कि कोरोनाकाल जैसी भयावह स्थिति हो या जीएसटी प्रावधान या नोटबंदी के दौर की असमंजस स्थिति हो, अमर पारवानी और अजय भसीन अपनी टीम के साथ हमेशा व्यापारी हित के लिए खड़े रहे और उन्हें राहत पहुंचाने का कार्य किया। अब हम सब व्यापारी साथियों की बारी कि वे इस चुनाव में सही कदम उठाते हुए यह संकल्प लें कि इस चुनाव में व्यापारी साथी जय व्यापार पैनल के प्रत्याशियों को दिया छाप में मुहर लगाकर भारी मतों से विजयी बनाये और चेम्बर में पिछले कई सालों से चल रही स्वयंभू पदाधिकारियों को मुंहतोड़ जवाब दे।
जय व्यापार पैनल से प्रदेश अध्यक्ष प्रत्याशी अमर पारवानी ने कहा कि हमारे व्यापारियों की ये आवाज छत्तीसगढ़ तक जानी चाहिए। व्यापारियों का उत्साह इस बात को साबित करती है कि सभी परिवर्तन चाहते हैं। काम करने वाले प्रत्याशी को चेंबर की कमान सौंपना चाहते हैं। वैसे ये कोई पॉलिटिकल चुनाव नहीं है। ये व्यापारिक संगठन का चुनाव है। आप उसे चुनिएगा जो 24 घंटे 365 दिन आपकी सेवा और मदद करने के लिए तत्पर रहे। कुछ लोग आर्टिफिशियल है जो रबर स्टैंप की तरह दूसरों के इशारों पर नाचकर काम करते हैं। जय व्यापार पैनल के साथियों ने कोरोनाकाल में 24 घंटे व्यापारियों की समस्याओं के समाधान में जुटा रहा। हम बगैर स्वार्थ के चुनाव लड़ रहे हैं। हमें प्रदेशभर के व्यापारियों से चुनाव लड़ाया जा रहा है। व्यापारी सबसे प्रताड़ित वर्ग है, अब उस ट्रेंड को बदलने की जरूरत है। जीएसटी के समाधान के लिए हमने 140 से ज्यादा कैंप लगाकर 70 हजार व्यापारियों की मदद की। अब व्यापारियों को एकजुट होने की जरूरत है। ट्रेडर्स को एमएसएमई में लाया जाए। इस चुनाव में सभी मार्केट के व्यापारी, समाज के लोगों का शानदार समर्थन मिल रहा है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से अभनपुर से हरीश तारवानी,, संतोष अग्रवाल, राहुल राठी,, राजेश गांधी, नितेश सरावत, संतोष पारख,, सोभराज दावड़ा मनोहर, विनोद अग्रवाल, गुरमीत सचदेवा, दिनेश गिरिपुंजे, कचरू भट्टड़, और अन्य व्यापारीगण, कांकेर से दिलीप खटवानी, हाजी वली मोहम्मद, हरनेक सिंह औजला, राधाकृष्ण मोटवानी, दीपक शर्मा, प्रदीप जायसवाल, अनूप शर्मा, महिपाल मेहरा, मुकेश खटवानी, शैलेंद्र सिंह, विजय खटवानी, राजू लछनि, राजकुमार पंजाबी, हनीफ शेखानी, रउफ शेखानी, गफ्फार मेमन, बिलाल भाई, मोहम्मद आरिफ, इसके अलावा बड़ी संख्या में व्यापारीगण चारामा से जुगल किशोर खत्री, स्वपन बोस, महेंद्र भंसाली, मदन जैन, अजय पंजवानी, मनोहर राठौड़, बिहारी देवांगन, मोहित भारद्वाज, राजकुमार पंजवानी, सुमित जैन, ओमप्रकाश साहू, और बड़ी संख्या में व्यापारीगण धमतरी से महेश रोहरा, कैलाश कुकरेजा, नारायण बजाज, रामचंद वाधवानी, धनराज लुनिया, अर्जुनदास जेठवानी और बड़ी संख्या में व्यापारीगण आदि उपस्थित थें।

बालोद (शोर सन्देश)। कलेक्टर महोबे ने कहा कि जिले में संचालित गौठानों में स्वसहायता समूहों के माध्यम से आजीविका संवर्धन के लिए लघु, कुटीर उद्योगों की स्थापना किया जाए। गौठानों में साबुन, फिनायल, अगरबत्ती, टोमैटो कैचअप, आर्गेनिक राईस, फूड प्रोसेसिंग, फाइल पैड, दोना पत्तल, मसाला उद्योग आदि स्थापित किया जाए। कलेक्टर महोबे आज जिला पंचायत के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में कृषि, उद्यान, पंचायत और ग्रामीण विकास व नगरीय निकाय आदि विभागों के अधिकारियों को निर्देशित कर रहे थे। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी लोकेश कुमार चन्द्राकर, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी हेमंत ठाकुर इस अवसर पर मौजूद थे। कलेक्टर मोहबे ने बताया कि इन उत्पादों को बाजार मुहैया कराए जाने के दृष्टिकोण से मार्केटिंग समिति का भी गठन किया गया है। उन्होंने शासन की महत्वाकांक्षी सुराजी गॉव योजना (नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी) की प्रगति की समीक्षा की और कहा कि इस योजना में किसी तरह की लापरवाही क्षम्य नही होगी। कलेक्टर ने गोधन न्याय योजना के अंतर्गत अब तक खरीदे गए गोबर और वर्मी कम्पोस्ट निर्माण व विक्रय की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि वर्मी कम्पोस्ट फसलों के लिए बहुत उपयोगी है। वर्मी कम्पोस्ट की उपयोगिता की जानकारी किसानों को दें। उन्होंने निर्माणाधीन वर्मी टंाकों का निर्माण शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने केंचुआ की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने मछलीपालन और मुर्गीपालन हेतु स्वसहायता समूहों के सदस्यों के प्रशिक्षण की जानकारी ली। बैठक में उप संचालक कृषि श्री नागेश्वर लाल पांडेे, जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी आदि उपस्थित थे।

रायपुर (शोर सन्देश)। लगातार स्थिर रहने के बाद पिछले 2 दिनों से पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि दर्ज की गई है। आज राजधानी रायपुर में 23 पैसे की वृद्धि के बाद पेट्रोल 82.95 रू प्रतिलीटर चल रहा है। वहीं 29 पैसे की वृद्धि के बाद डीजल की कीमत अब 80.66 रू प्रतिलीटर हो गई है। वहीं देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का भाव रिकॉर्ड उंचे स्तर पर चला गया है। तेल विपणन कंपनियों ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन पेट्रोल और डीजल के दाम में बढ़ोतरी की जिसके बाद दिल्ली में पेट्रोल 84.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है और डीजल भी 74.38 रुपये लीटर बिकने लगा है।
पेट्रोल के दाम में दिल्ली और मुंबई में 23 पैसे जबकि कोलकाता में 24 पैसे और चेन्नई में 21 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की है। वहीं, डीजल के दाम में दिल्ली और चेन्नई में 26 पैसे जबकि कोलकाता में 27 पैसे और मुंबई में 29 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल की कीमतें बढ़कर क्रमश: 84.20 रुपये, 85.68 रुपये, 90.83 रुपये और 86.96 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। इससे पहले चार अक्टूबर 2018 को चारों महानगरों में पेट्रोल का भाव रिकॉर्ड उंचे स्तर क्रमश: 84 रुपये, 85.80 रुपये, 91.34 रुपये और 87.33 रुपये प्रति लीटर तक चला गया था। डीजल की कीमतें गुरुवार को लगातार दूसरे दिन की वृद्धि के बाद दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में क्रमश: 74.38 रुपये, 77.97 रुपये, 81.07 रुपये और 79.72 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 54 डॉलर प्रति बैरल के उपर है जबकि अमेरिकी क्रूड डब्ल्यूटीआई का भाव 51 डॉलर प्रति बैरल के उपर बना हुआ है।

राष्ट्रीय मिति पौष 17 शक संवत् 1942 पौष कृष्ण नवमी गुरुवार विक्रम संवत् 2077। सौर पौष मास प्रविष्टे 24, जमादि उल्लावल 22, हिजरी 1442 (मुस्लिम) तदनुसार अंग्रेजी तारीख 07 जनवरी सन् 2021 ई॰। सूर्यउत्तरायण, दक्षिणगोल, शिशिर ऋतु: ।
राहुकाल मध्याह्न 01 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक। नवमी तिथि अर्धरात्रि 11 बजकर 18 मिनट तक उपरांत दशमी तिथि आरंभ, चित्रा नक्षत्र सायं 03 बजकर 46 मिनट तक उपरांत स्वाति नक्षत्र का आरंभ।
सुकर्मा योग रात 9 बजकर 12 बजकर 15 मिनट तक उपरांत धृति योग का आरंभ। वणिज करण अर्धरात्रि 11 बजकर 58 मिनट तक उपरांत विष्टि करण का आरंभ। चंद्रमा दिन रात तुला राशि पर संचार करेगा।
सूर्योदय का समय दिल्ली 7 जनवरी : सुबह 07 बजकर 16 मिनट पर।
सूर्यास्त का समय दिल्ली 7 जनवरी : शाम 05 बजकर 40 मिनट पर।
00 आज का शुभ मुहूर्त विजय मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 38 मिनट से 02 बजकर 20 मिनट तक। अमृत काल सुबह 09 बजकर 41 मिनट से 11 बजकर 12 मिनट तक। निशीथ काल रात 11 बजकर 25 से रात 12 बजकर 19 मिनट तक। दिन में 12 बजकर 26 मिनट से 3 बजकर 43 मिनट तक लाभ और दोपहर 1 बजकर 43 से 3 बजे तक अमृत चौघड़िया रहेगा।
00 आज का अशुभ मुहूर्त : राहुकाल दोपहर 01 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक। गुलिक काल सुबह 09 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक। यमगंड सुबह 06 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक।
00 आज का उपाय : विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें, केसर का तिलक लगाएं

कोण्डागांव (शोर सन्देश)। जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर स्थित ग्राम बोरगांव के 34 वर्षीय किशनु साहा की एक आम कृषक से एक सफल मत्स्य पालक होने की यात्रा चुनौतीपूर्ण रही और आज वे इस व्यवसाय की बदौलत प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपए की आमदनी अर्जित कर रहे हैं। मत्स्य पालन के व्यवसाय को अपनाने के संबंध में वे बताते हैं कि वे भी पहले एक आम कृषक की तरह लगभग अपने पांच एकड़ की जमीन में धान, मक्का एवं मिर्च, टमाटर की ही खेती करते थे परन्तु पिछले कुछ वर्षों में उन्हें अपेक्षित आमदनी नहीं हो रही थी, साथ ही सब्जी इत्यादि फसलों के लिए अधिक से अधिक मजदूरों की भी जरूरत पड़ती थी, फलस्वरूप फसलों की लागत निकल पाना भी मुश्किल हो जाता था। इसके अलावा सब्जी के बाजार भाव में उतार चढ़ाव होने से उनके सहीं मूल्य भी नही मिलते थे। अत: वर्ष 2017-18 में उन्होंने मछली पालन के क्षेत्र में उतरने का फैसला लिया, क्योकि मत्स्य पालन में अधिक मजदूरों की आवश्यकता नहीं होती साथ ही इसका बाजार भाव भी संतोषजनक रहता है। इस प्रकार उन्होंने अपने 2.5 एकड़ की जमीन में तालाब खुदवाया। शुरूवात में इस नए व्यवसाय में उन्हें कुछ दिक्कतें भी आई वे बताते हैं कि शुरू-शुरू में उन्हें तालाब के सूखने, मछलियों के मरने और उनकी बढ़ोत्तरी न होने जैसी समस्याएं भी आई परन्तु लगन और इच्छाशक्ति से इसका उन्होंने शीघ्र समाधान निकाला। इस संबंध में मत्स्य विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन से इस प्रकार की समस्याएं कम होने लगी। चूंकि इस विभाग की ओर से उन्हें तालाब खुदवाने के लिए 50 हजार रुपए का अनुदान दिया गया था, वे आज भी विभाग के बराबर संपर्क में रहते हैं। उनका यह भी मानना है कि मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने एक सहीं फैसला लिया है, वरना वे सीमित भूमि और अपर्याप्त आय में ही गुजारा करने के लिए विवश होते और विभाग की ओर से जो सहयोग दिया गया है उसके लिए वे सदैव कृतज्ञ रहेंगे। बारहवीं तक पढ़े किशनु साहा यह भी कहते हैं, कि भविष्य में वे पशुपालन के क्षेत्र में भी हाथ आजमाना चाहेंगे। मत्स्य पालन करने वाले इच्छुक किसानों को सलाह के संबंध में किशनु का कहना था, कि मत्स्य पालन में कुछ मूलभूत जानकारी के बारे में सावधानी रखना बहुत जरूरी है, जैसे जिस भूमि में तालाब खुदवाया जा रहा है, वहां मिट्टी और पानी की जांच करवाना बहुत जरूरी है क्योंकि अगर पानी सहीं नहीं रहेगा तो मछलियों की बढ़त पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा और दूसरा मुद्दा स्थानीय बाजार पर भी निर्भर करता है, क्योंकि जिस प्रजाति की मछली की खपत ज्यादा होती है, उसी का पालन करना चाहिए साथ ही मत्स्य पालन में आर्थिक पृष्ठभूमि प्रबंधन भी बेहतर होना चाहिए, क्योंकि मछलियों के चारे में 75 प्रतिशत का खर्च होता है, साथ ही मछलियों के डेटाबेस का रख-रखाव भी करना पड़ेगा, क्योंकि उनके चारे, उनके रख-रखाव के खर्चे, मत्स्य बीज की जीविता प्रबंधन के बाद ही हम अपना लाभ और नुकसान को देख सकते हैं। अगर किसान अपने एक एकड़ में मत्स्य फार्म प्रारंभ करते हैं, तो जैसे-जैसे मछलियों की खपत होगी तालाब भी बढ़ाना पड़ेगा। इस प्रकार इस व्यवसाय में दो-चार बातों का ध्यान रखा जाये तो यह एक सुरक्षित व्यवसाय है। किशनु साहा के तालाबों में तेलापिया, रोहू, इण्डियन कार्प, मृगल, कतला, आईएमसी डार्क जैसी प्रजातियों की मछलियों का पालन हो रहा है और इन मछलियों की बिक्री स्थानीय बाजारों के अलावा उड़ीसा राज्य के जिलों में भी होती है। इस कार्य के लिए उन्होंने दो व्यक्तियों को भी अपने मत्स्य फार्म में रोजगार उपलब्ध कराया है। कोण्डागांव जिले में मत्स्य पालन जैसी व्यवसायों के विकास के लिए आपार संभावनाएं है, क्योंकि वर्तमान दौर में परम्परागत कृषि के अलावा कुछ नये व्यवसायों को भी अपनाने की जरूरत है। इसके लिए जागरूकता, सहीं जानकारी और परिस्थितियों के समझने की आवश्यकता है, सहीं भी है कि जब हम जीवन में बदलाव नहीं करेंगे तो कुछ भी नही बदलेगा। किशनु साहा जैसे सफल मत्स्य पालक पर यह उक्ति सटीक बैठती है निश्चित ही उन्होंने बदलाव को अपनाया और इसका साकारात्मक परिणाम उनके जीवन में परिलक्षित हुआ।

रायपुर (शोर सन्देश)। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को एक पत्र भेजा है। पत्र में उनसे आग्रह किया है कि वे हाल के दिनों में जीएसटी नियमों में हुए सभी संशोधनों को टाल दें और 3 सिद्धांतों के आधार पर व्यापारियों से सीधा संवाद करें। केवल तीन ही है जिसमें (स) कर प्रणाली का सरलीकरण और एकीकरण जिससे व्यापारियों को राहत मीले (पप)जीएसटी कर आधार का विस्तार (पपप) केंद्र और राज्य सरकारों को पर्याप्त राजस्व पहुँचना, शामिल है। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने बताया कि जीएसटी में किए गए विभिन्न संशोधन एवं परिवर्तन से जीएसटी लागू करने का मूल उद्देश्य ही खत्म होता जा रहा है। इसके कारण देश के व्यापारियों के लिए जीएसटी सबसे जटिल कराधान प्रणाली बन गई है। क्योंकि देश के अधिकांश व्यापारी इतने शिक्षित या कम्प्यूटरीकृत नहीं हैं जोन जो जीएसटी के नियमों की पालना सरल न होने के कारण व्यापारियों के लिए पालना आसान नहीं रह गई है।
कैट जीएसटी मुद्दों को हल करने के लिए टकराव के रास्ते का सहारा लेने के बजाय बातचीत की प्रक्रिया के लिए अधिक इच्छुक है और यही कारण है कि कैट ने वित्त मंत्री को हालिया अधिसूचना के कार्यान्वयन को स्थगित करने और बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने की अपील कर रहा है।

रायपुर (शोर सन्देश)। केंद्र सरकार की 22 दिसम्बर को जीएसटी नियमों में धारा 86-बी को जोड़ कर प्रत्येक व्यापारी जिसका मासिक टर्नओवर 50 लाख रुपए से ज्यादा है। व्यापारियों को अनिवार्य रूप से 1 प्रतिशत जीएसटी जमा कराना पड़ेगा। प्रावधान पर कड़ा एतराज जताते हुए कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र भेजकर माँग की है, कि इस नियम को तुरंत स्थगित किया जाए और व्यापारियों से सलाह कर ही इसे लागू किया जाए। कैट ने यह भी माँग की है की जीएसटी एवं आय कर में ऑडिट की रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 31 दिसम्बर को भी तीन महीने के लिए आगे बड़ाया जाए । कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने निर्मला सीतारमण को भेजे पत्र में यह भी कहा कि अब समय आ गया है। जब एक बार सरकार को व्यापारियों के साथ बैठ कर अब तक जीएसटी कर प्रणाली की सम्पूर्ण समीक्षा की जाए। कर प्रणाली को सरलीकृत बनाया जाए और साथ ही किस तरह से कर का दायर बड़ाया जाए। केंद्र और राज्य सरकारों के राजस्व में किस तरह की वृद्धि की जाए। कैट ने इस मुद्दे पर सीतारमण से मिलने का समय माँगा है। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा कि नियम 86 बी देश भर के व्यापारियों के व्यापार पर विपरीत असर डालेगा। कोरोना के कारण व्यापार में आई अनेक प्रकार की परेशानियों से व्यापारी पहले ही त्रस्त हैं। ऐसे में यह नया नियम व्यापारियों पर एक अतिरिक्त बोझ बनेगा। यह एक सर्व विदित तथ्य है कि पिछले एक वर्ष से व्यापारियों का पेमेंट चक्र बुरी तरह बिगड़ गया है। लम्बे समय तक व्यापारियों के बेचे गए माल का भुगतान और जीएसटी की रकम महीनों तक नहीं आ रही है। ऐसे में एक प्रतिशत का जीएसटी नकद जमा कराने का नियम व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा जो न्याय संगत नहीं है। कैट ने कहा की जीएसटी विभाग के पास फर्जी बिलों से जीएसटी लेकर राजस्व को चूना लगाने वाले लोगों के खलिाफ शिकायत हैं। तो ऐसे लोगों को कानून के मुताबिक बहुत सख्ती से निबटना चाहिए। किंतु कुछ कथित लोगों को की वजह से सभी व्यापारियों को एक ही लाठी से हांकना न तो तर्क संगत है, न ही न्याय संगत। लिहाजा इस नियम को फिलहाल स्थगित किया जाए। श्री पारवानी ने यह भी कहा की पिछले समय में में जीएसटी के नियमों में आए दिन मनमाने संशोधन कर व्यापारियों पर पालना को बोझ लगातार बड़ाया जा रहा है। जो की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ डूइंग बिज्नेस के सिद्धांत के खलिाफ है। इससे जीएसटी कर प्रणाली बेहद जटिल हो गई है। यह बड़ा सवाल है की व्यापारी व्यापार करे या फिर करों सहित अन्य कानूनों की पालना ही करता रहे और उसका व्यापार बुरी तरह प्रभावित होता रहे। उन्होंने यह भी कहा की अनेक नियमों, अधिकारियों को असीमित अधिकार दिए जा रहे हैं जो भ्रष्टाचार को पनपाएँगे। जीएसटी का पंजीकरण रद्द करने और गिरफ्तार करने के नियम बेहद कठोर हैं, जिन पर चर्चा किया जाना आवश्यक है। यह बेहद खेद जनक है की जीएसटी के किसी भी मामले में व्यापारियों से कोई भी सलाह मशवरा कतई नहीं किया जाता। जिसके कारण से मनमाने नियम व्यापारियों के ऊपर लादे जा रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा की एक बार जीएसटी की सम्पूर्ण कर प्रणाली कर व्यापक रूप से चर्चा होनी आवश्यक है। जिससे न केवल व्यापारियों को सुविधा हो बल्कि सरकार के राजस्व में भी वृद्धि हो। व्यापारी सरकार के साथ सहयोग करने को तैय्यार हैं किंतु कर प्रणाली जितनी सरल होगी और कर पालना जितनी आसान होगी, उतनी ही अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

दुर्ग (शोर सन्देश)। जिंदगी की यही रीत है ,हार के बाद ही जीत है गीत की ये पंक्तियां मतवारी की जागृति साहू पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। जिन्होंने शिक्षिका बनने की चाहत पूरी न होने के बाद फिर से कोशिश की हारने के बाद फिर उठीं और तय किया नया रास्ता और जीत भी हासिल की। पति का साथ और प्रोत्साहन मिला और 2 साल में जागृति साहू को मिला दुर्ग की ‘‘मशरूम लेडी’’ का खिताब। सफर आसान तो नहीं था मगर खुद को साबित करने के जुनून में जागृति ये मंजिल पाई है। सीईओ जिला पंचायत सच्चिदानंद आलोक ने उनके काम को देखकर यह उपमा उन्हें दी है। पति और बेटी को पसंद था मशरूम खाना,इसलिए शुरू किया उत्पादन- जागृति साहू बीएससी और एमए पास हैं। इसलिए उनकी इच्छा थी कि नौकरी करें। जागृति बताती है कि शिक्षाकर्मी के लिए चयनित होने के बाद भी कुछ तकनीकी कारणों से जागृति का शिक्षिका बनने का सपना अधूरा रह गया था। वह कुछ उदास रहने लगी थी । लेकिन कहते हैं ना जिंदगी ठहरने का नाम नहीं है। जागृति बताती है कि उनके पति और बच्ची को मशरूम खाना बहुत पसंद था। सप्ताह में करीब दो से तीन बार उनके घर मशरूम जरूर आता था। वे 200 रुपए प्रति किलो में मशरूम खरीदा करतीं। एक दिन उनके पति ने कहा कि घर पर यूं ही खाली बैठने से अच्छा क्यों ना वह मशरूम का उत्पादन शुरू करें। जागृति को ये आइडिया जम गया पति की प्रेरणा के बाद उन्होंने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लेने की सोची। जागृति पढ़ी लिखी तो थी हीं और लगन की पक्की भी। जब उनको पता चला कि जिला पंचायत द्वारा बिहान कार्यक्रम के तहत स्व सहायता समूह की महिलाओं को उनकी इच्छा अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वह स्वरोजगार की स्थापना कर सकें। उन्होंने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लेने की इच्छा व्यक्त की 2018 में पहले पीएनबी से 3 दिवसीय और देना बैंक के प्रशिक्षण कार्यक्रम में 10 दिवसीय प्रशिक्षण लिया। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा शुरुआत में 5 हजार रुपए से मशरूम उत्पादन शुरू किया। फिर बिहान योजना के तहत बैंक लिंकेज के माध्यम से 99 हजार रुपए का ऋण मिला। जिसमें से 50 हजार रुपए से उन्होंने अपनी मशरूम उत्पादन की यूनिट को बड़ा रूप दिया। बाकी के रुपए समूह की महिलाओं को कृषि कार्य के रूप में ऋण के रूप में दिया। जागृति न केवल खुद काबिल बनी बल्कि मतवारी गांव की दूसरी महिलाओं को भी उन्होंने अपने काम से जोड़ा। आज घर बैठे महिलाएं अच्छी आमदनी अर्जित कर रही हैं।
अपनी मेहनत से गायत्री स्व सहायता समूह ने मशरूम उत्पादन कर 2 साल में 6 लाख रुपए कमाए - जागृति साहू बताती है कि उनके समूह में 12 महिलाएं हैं वर्ष 2018 से लेकर अब तक उन्होंने 6 लाख रुपए की आमदनी अर्जित की है। इस साल उनके इस समूह द्वारा 2 लाख 20 हजार रुपए का मशरूम बेचा गया है। जागृति ने बताया कि बताया कि मशरूम में लागत का दोगुना फायदा होता है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से 120 रु. प्रति किलो में मशरूम के बीज खरीदती हैं और 1 किलो बीज से 10 किलो मशरूम का उत्पादन होता है। सभी खर्चे निकाल कर भी अच्छी आमदनी हो जाती है।
बनीं मास्टर ट्रेनर, अब तक प्रदेश की 850 महिलाओं को दिया प्रशिक्षण 750 महिलाएं कर रहीं उत्पादन- जागृति ने मशरूम उत्पादन करना सीखा लेकिन उनकी यात्रा यही समाप्त नहीं हुई उनके कौशल को देखते हुए पीएनबी द्वारा राजधानी रायपुर में संचालित एकमात्र कृषक प्रशिक्षण केंद्र में मास्टर ट्रेनर के रूप में चयनित कर लिया गया। आज वह प्रदेश भर की महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं। जागृति बताती है कि अब तक उन्होंने 850 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है जिसमें से 750 महिलाएं मशरूम उत्पादन कर आमदनी अर्जित कर रही हैं। जागृति दुर्ग जिले के तीनों जनपद पंचायतों एवं आसपास की सभी जिलों की महिलाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं। जागृति कृषि विभाग की आत्मा योजना और बिहान योजना में भी प्रशिक्षण दे रही हैं। नेशनल लेवल के प्रशिक्षक के रूप में हुई चयनित- जागृति अब केवल प्रदेश में ही नहीं बल्कि प्रदेश के बाहर भी अपने गांव मतवारी और दुर्ग जिले का नाम रोशन करने वाली हैं रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट में प्रशिक्षण देने के लिए उनका चयन नेशनल लेवल ट्रेनिंग के लिए भी हुआ है।
मशरूम की डिमांड इतनी है कि लोग इंतजार करते हैं, सोशल मीडिया के माध्यम से करती हैं प्रचार- गायत्री स्व सहायता समूह द्वारा उत्पादित मशरूम की इतनी डिमांड है कि लोग कई दिन तक इंतजार करते हैं। समूह द्वारा ओयस्टर मशरूम का उत्पादन किया जाता है जुलाई 2020 से प्रोटीन रिच पिंक ओयस्टर मशरूम का उत्पादन शुरू किया है। जिसकी और भी डिमांड है। हर दिन कम से कम 4 से 5 किलो मशरूम का उत्पादन होता है इस लिहाज से यदि 200 प्रति किलो का हिसाब लगाएं तो 800 से 1000 रुपए की आमदनी ली जा सकती हैं।
मशरूम उत्पादन के साथ-साथ हर्बल फिनाइल हर्बल सोप डिटर्जेंट इत्यादि का उत्पादन भी करता है इनका समूह- जागृति बताती हैं कि उन्होंने केवल एक काम तक खुद को सीमित नहीं रखा है मशरूम उत्पादन के अलावा उनका समूह हर्बल फिनायल ,डिटर्जेंट इत्यादि का उत्पादन भी कर रहा है। जिसकी अच्छी खासी डिमांड है। इनको अच्छे ऑर्डर भी मिल रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित बिहान बाजार में भी गायत्री स्व सहायता समूह ने काफी अच्छी बिक्री की थी।