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जनप्रतिनिधि

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोनाखान में शहीद वीर नारायण सिंह को दी श्रद्धांजलि

11-Dec-2025
रायपुर,  ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलिदान दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में शहीद वीर नारायण सिंह  की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि कसडोल विकासखंड के ग्राम सोनाखान पहुंचे। उन्होंने  सोनाखान स्थित शहीद स्मारक  में श्रद्धासुमन अर्पित किया एवं शहीद वीर नारायण सिंह के आदमकद मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें  श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम, केदार कश्यप,टंकराम वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल,पूर्व विधायक बिलाईगढ़ डॉ सनम जागड़े, शहीद वीर नारायण सिंह के वंशज राजेंद्र दीवान सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ महतारी के सच्चे सपूत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद वीर नारायण सिंह को रायपुर स्थित जय स्तंभ चौक में 10 दिसम्बर को अंग्रेजों द्वारा फाँसी में चढ़ा दिया गया था। उन्हें 1857 की क्रांति में छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने का गौरव प्राप्त है। सोनाखान शहीद वीर नारायण सिंह की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि है। राज्य सरकार सोनाखान को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने लिए प्रतिबद्ध है। इसी के तहत यहां पर चरणबद्ध विकास कार्यों को लगातार मंजूरी दी जा रही है।




















 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक—नक्सली प्रकरण वापसी, जन विश्वास विधेयक और अनुपूरक बजट को मंजूरी

10-Dec-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए - 
1. मंत्रिपरिषद ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध पंजीबद्ध आपराधिक प्रकरणों के निराकरण/वापसी संबंधी प्रक्रिया को अनुमोदित किया है। 
मंत्रिपरिषद ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के विरुद्ध दर्ज प्रकरणों की समीक्षा एवं परीक्षण के लिए, जिन्हें न्यायालय से वापस लिया जाना है, मंत्रिपरिषद उप समिति के गठन को स्वीकृति दी है। यह समिति परीक्षण उपरांत प्रकरणों को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत करेगी। यह निर्णय छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 के प्रावधानों के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत आत्मसमर्पित नक्सलियों के अच्छे आचरण तथा नक्सलवाद उन्मूलन में दिए गए योगदान को ध्यान में रखकर उनके विरुद्ध दर्ज प्रकरणों के निराकरण पर विचार का प्रावधान है।
आत्मसमर्पित नक्सलियों के प्रकरण वापसी की प्रक्रिया के लिए जिला स्तरीय समिति के गठन का प्रावधान किया गया है। यह समिति आत्मसमर्पित नक्सली के अपराधिक प्रकरणों की वापसी के लिए रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को प्रस्तुत करेगी। पुलिस मुख्यालय अभिमत सहित प्रस्ताव भेजेगा। शासन द्वारा विधि विभाग का अभिमत प्राप्त कर मामलों को मंत्रिपरिषद उप समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उपसमिति द्वारा अनुशंसित प्रकरणों को अंतिम अनुमोदन हेतु मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा। केंद्रीय अधिनियम अथवा केंद्र सरकार से संबंधित प्रकरणों के लिए भारत सरकार से आवश्यक अनुज्ञा प्राप्त की जाएगी। अन्य प्रकरणों को न्यायालय में लोक अभियोजन अधिकारी के माध्यम से वापसी की प्रक्रिया हेतु जिला दण्डाधिकारी को प्रेषित किया जाएगा।
2. मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के विभिन्न कानूनों को समयानुकूल और नागरिकों के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से 14 अधिनियमों में संशोधन हेतु छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) (द्वितीय) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया। 
उल्लेखनीय है कि कई अधिनियमों में उल्लंघन पर जुर्माना या कारावास के प्रावधान होने से न्यायिक प्रक्रिया लंबी हो जाती है, जिससे आम नागरिक और व्यवसाय दोनों अनावश्यक रूप से प्रभावित होते हैं। ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देने के लिए इन प्रावधानों का सरलीकरण आवश्यक है। इससे पहले, राज्य सरकार द्वारा 8 अधिनियमों के 163 प्रावधानों में संशोधन करते हुए छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2025 अधिसूचित किया गया है। अब 11 विभागों के 14 अधिनियमों के 116 प्रावधानों को भी सरल और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह विधेयक लाया जाएगा। 
इस विधेयक में छोटे उल्लंघनों के लिए प्रशासकीय शास्ति का प्रावधान रखा गया है, जिससे मामलों का त्वरित निपटारा होगा, न्यायालयों का बोझ कम होगा और नागरिकों को तेजी से राहत मिल सकेगी। साथ ही, कई अधिनियमों में दंड राशि लंबे समय से अपरिवर्तित होने के कारण प्रभावी कार्यवाही बाधित होती थी, इस विधेयक से वह कमी भी दूर होगी। इन संशोधनों से सुशासन को बढ़ावा मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां जन विश्वास विधेयक का द्वितीय संस्करण लाया जा रहा है। 
3. मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रथम अनुपूरक अनुमान वर्ष 2025-2026 का विधानसभा में उपस्थापन बावत् छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2025 का अनुमोदन किया गया। 






 

छात्रों के सुरक्षित भविष्य निर्माण में ‘रक्षक पाठ्यक्रम’ बनेगा मील का पत्थर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

10-Dec-2025
  रायपुर ( शोर संदेश )। 10 दिसंबर 2025/ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों के मध्य “रक्षक पाठ्यक्रम” के लिए एमओयू संपन्न हुआ। बाल अधिकार एवं संरक्षण पर आधारित यह अनूठा पाठ्यक्रम देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक नवाचार है। 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता भी विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे भूलवश या भ्रमित होकर गलत दिशा में चले जाते हैं क्योंकि वे अबोध होते हैं। ऐसे बच्चों को सही मार्ग पर लाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा कर लिया है। किसानों के बकाया बोनस, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना और सबके लिए आवास जैसे महत्वपूर्ण संकल्पों को साकार किया गया है। उन्होंने कहा कि 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार लागू कर छत्तीसगढ़ सुशासन के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है और इसी उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना भी की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रक्षक पाठ्यक्रम को रिकॉर्ड समय में तैयार करने और विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने के लिए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना, परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास, और संवेदनशील मामलों का समाधान—ये सभी अत्यंत चुनौतीपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि “यह पाठ्यक्रम संवेदनशील, सजग और सेवा-भावयुक्त युवा तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।” उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर का नवाचार बताते हुए कहा कि भविष्य में छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना जाएगा।
उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने पाठ्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने आयोग और सभी छह विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम लागू करने हेतु बधाई दी।
यह एक वर्षीय स्नातकोत्तर “पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन” 
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर, एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर और शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग में प्रारम्भ होगा।
क्या है रक्षक पाठ्यक्रम
प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था, जो युवाओं को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित करते हुए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। इस आवश्यकता को देखते हुए आयोग द्वारा “रक्षक – बाल अधिकार संरक्षण पर एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम” को विकसित किया गया है। इस पाठ्यक्रम से युवाओं को सैद्धांतिक एवं विधिक ज्ञान, विभागीय योजनाओं, संस्थाओं और प्रायोगिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ, बाल संरक्षण इकाइयों आदि के सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध होगी।संवेदनशीलता, जागरूकता और बाल-अधिकारों की आत्मिक समझ विकसित करने वाला यह पाठ्यक्रम युवाओं को इस क्षेत्र में कुशल, समर्पित और प्रभावी मानव संसाधन के रूप में तैयार करेगा। आयोग द्वारा पाठ्यक्रम के संचालन, प्रशिक्षण, परामर्श और मार्गदर्शन की संपूर्ण सुविधा विश्वविद्यालयों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, ,पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से कुलसचिव प्रो शैलेंद्र पटेल,प्रो ए के श्रीवास्तव,संत गहिरा गुरु विश्विद्यालय सरगुजा कुलपति  प्रो राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव शारदा प्रसाद त्रिपाठी, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति एवं रायपुर संभाग आयुक्त महादेव कावरे, कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा,आंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. टी.रामाराव कुलसचिव डॉ. रूपाली चौधरी, एमिटी विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. पीयूष कांत पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. सुरेश ध्यानी,शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई दुर्ग चांसलर डॉ.आई.पी. मिश्रा, कुलपति डॉ ए. के झा एवं डॉ जया मिश्रा, आयोग के सचिव प्रतीक खरे सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।







 

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ

10-Dec-2025
रायपुर( शोर संदेश )।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 10 दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार मात्र अधिकारों की रक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह मानवता, समानता और व्यक्ति की गरिमा के प्रति हमारी सामूहिक संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का सर्वोच्च प्रतीक है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार प्रदान करता है। हम सबका दायित्व है कि अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी निष्ठापूर्वक पालन करें। अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा तभी संभव है जब समाज का हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति सजग, उत्तरदायी और प्रतिबद्ध हो।
उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस विश्वभर में समानता, शांति, न्याय, स्वतंत्रता और मानवीय गरिमा की स्थापना के लिए जन-जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि समाज तभी मजबूत बनता है जब हर व्यक्ति सुरक्षित, सम्मानित और समान अवसरों से सशक्त हो।
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएँ और एक ऐसे समाज के निर्माण में सहयोग करें जो न्यायसंगत, समतामूलक, संवेदनशील तथा सभी के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने वाला हो।
 

गाईडलाइन दरों पर फैली भ्रांतियों को राज्य सरकार ने किया दूर, जारी की विस्तृत स्पष्टता

10-Dec-2025
रायपुर,( शोर संदेश )। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड छत्तीसगढ़ द्वारा स्वीकृत नई गाईडलाइन दरों को लेकर आमजन के बीच उत्पन्न हो रहे भ्रम को दूर करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने विस्तृत जानकारी जारी की है। शासन ने स्पष्ट किया है कि नई गाईडलाइन दरें न केवल अधिक सरल और वैज्ञानिक हैं, बल्कि इनके माध्यम से पुराने वर्षों से चली आ रही विसंगतियों का समाधान भी किया गया है।
सरकार ने बताया कि कुछ स्थानों पर यह गलत भ्रम फैलाया जा रहा है कि गाईडलाइन दरों में अत्यधिक वृद्धि की गई है या दस्तावेज पंजीयन प्रक्रिया बाधित हो गई है, जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि नवीन गाईडलाइन 20 नवंबर 2025 से प्रभावी हो चुकी है और इस अवधि में कांकेर जिले में लगभग 98 दस्तावेजों का पंजीयन सुचारू रूप से किया जा चुका है। जिले के सभी उप-पंजीयक कार्यालयों में पूर्ववत नियमित रूप से पंजीयन का कार्य जारी है।
नगरीय क्षेत्रों में व्यापक सरलीकरण
पूर्व में एक ही वार्ड में कई कंडिकाओं के कारण समान भौगोलिक और व्यावसायिक स्थिति होने के बावजूद दरों में अंतर पाया जाता था, जिससे नागरिकों में असंतोष था। नवीन सर्वे, भौतिक सत्यापन तथा युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के बाद इन कंडिकाओं को कम किया गया है और दरों को समान किया गया है। कांकेर नगर पालिका के 21 वार्डों में पहले 56 कंडिकाएं थीं, जिन्हें घटाकर 26 कर दिया गया है। इसी प्रकार नगर पंचायत चारामा, नरहरपुर, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ और पंखाजूर की कुल 253 कंडिकाओं को कम कर 105 किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे गाईडलाइन अब अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित हो गई है।
दर वृद्धि संबंधी भ्रांति का समाधान
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में अंतिम बार गाईडलाइन दरों का पुनरीक्षण वर्ष 2019-20 में किया गया था। छह वर्षों बाद किए जा रहे इस पुनरीक्षण में नगरीय क्षेत्रों में मात्र 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह वृद्धि स्वाभाविक और तार्किक है। यदि दरों को हर वर्ष बढ़ाया जाता, तो वर्तमान दरें कहीं अधिक होतीं। अतः अत्यधिक वृद्धि की बात निराधार है।
ई-पंजीयन प्रणाली पूरी तरह सुचारू
कुछ लोगों द्वारा यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि नई गाईडलाइन ऑनलाईन अपडेट न होने से दस्तावेज पंजीयन ठप हो गया है, जबकि तथ्य यह है कि जिले के सभी उप-पंजीयक कार्यालयों में पंजीयन का कार्य निर्बाध रूप से चल रहा है और किसी भी प्रकार की व्यवधान की स्थिति नहीं है।
दर पुनरीक्षित न होने से होने वाली समस्याओं का उल्लेख
सरकार ने कहा है कि पुरानी गाईडलाइन दरें जारी रहने से काले धन के लेनदेन को प्रोत्साहन मिलता है। कई बार वास्तविक सौदा मूल्य अधिक होने के बावजूद पंजीयन पुरानी गाईडलाइन दरों पर किया जाता है, जिसके कारण अंतर की राशि काला धन बनती है और बाद में विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है। इसी प्रकार पुरानी दरों के कारण संपत्तियों का मूल्यांकन कम होता है, जिससे खरीदारों को ऋण पात्रता भी कम मिलती है।
मुआवजे के निर्धारण में भी विसंगतियां सामने आती हैं। सरकारी अधिग्रहण की स्थिति में पुराने दरों के आधार पर मुआवजा तय होने से भूमि मालिकों, विशेषकर किसानों को उनकी संपत्ति का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इसलिए नई गाईडलाइन दरें अधिक युक्तियुक्त और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप हैं।
राज्य शासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह या भ्रम में न आएं। गाईडलाइन दरों से संबंधित किसी भी सूचना या शंका के निराकरण के लिए नागरिक अपने निकटस्थ पंजीयन कार्यालय में संपर्क कर वास्तविक और प्रमाणिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
नई गाईडलाइन दरों को प्रदेश में रियल एस्टेट लेनदेन को पारदर्शी बनाने, टैक्स चोरी रोकने और जमीन संबंधी मूल्यांकन को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नक्सलवाद उन्मूलन में छत्तीसगढ़ ने बनाया नया रिकॉर्ड : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

09-Dec-2025
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजनांदगांव में आयोजित  प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष राज्य के इतिहास में निर्णायक मोड़ साबित हुए हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित लक्ष्य—“31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन”—की दिशा में छत्तीसगढ़ तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और यह अब अंतिम सांसें गिन रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। 500 से अधिक माओवादी मुठभेड़ों में न्यूट्रलाइज हुए, जबकि 4,000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण या गिरफ्तारी दी, जो नक्सलवाद के कमजोर पड़ने का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के पराक्रम से बस्तर में दशकों से जमी हिंसा के विरुद्ध निर्णायक बढ़त मिली है।
उन्होंने राज्य सरकार की नई पुनर्वास नीति की भी विस्तृत जानकारी दी। इसके तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15,000 प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति, 3 वर्षों तक 10,000 रुपये मासिक वित्तीय सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण और रोजगार-संबंधी कार्यक्रम शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि "गोलीबारी की भाषा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ना" अब बस्तर में हकीकत बन रहा है। पंडुम कैफ़े जैसे नवाचार आज सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा कि बस्तर में तेजी से सुरक्षा कैंप खुलने और प्रशासन की पहुंच बढ़ने के साथ ही 400 से अधिक गाँव पुनः आबाद हो चुके हैं। नियद नेल्ला नार  योजना के माध्यम से इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएँ और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाएँ पहुँच रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा—“जहाँ कभी गोलीबारी की आवाज आती थी, आज वहाँ स्कूल की घंटियाँ बज रही हैं। कई गाँवों में वर्षों बाद ध्वजारोहण हुआ, चुनाव में लोग निर्भीक होकर भाग ले रहे हैं और राशन-कार्ड से लेकर मोबाइल नेटवर्क तक की सुविधाएँ अब सुगमता से उपलब्ध हो रही हैं।”
मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर को भविष्य के विकास का बड़ा केंद्र बताते हुए कहा कि कृषि, सिंचाई, वन-उत्पाद, पशुपालन और छोटे उद्योगों के लिए अभूतपूर्व संभावनाएँ बन रही हैं। उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति (2024–30) में नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। वनोपज आधारित वैल्यू एडिशन, प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्थायी आय से जोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से बस्तर अब वैश्विक नक्शे पर तेजी से पहचान बना रहा है। कुटुमसर गुफा, झरने, अबूझमाड़ के जंगल और जनजातीय सांस्कृतिक धरोहर विश्व आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। होम-स्टे मॉडल तेजी से फल-फूल रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद उन्मूलन की यह ऐतिहासिक प्रगति राज्य के शहीद जवानों, सुरक्षा बलों के अथक परिश्रम और जनता के विश्वास की जीत है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप बस्तर नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास की मुख्यधारा में शामिल होगा।

 

नई गाइडलाइन दरों पर चर्चा : मुख्यमंत्री साय से क्रेडाई प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात

09-Dec-2025
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सोमवार के शाम उनके निवास कार्यालय में क्रेडाई,रियल एस्टेट और बस्तर चेंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज जगदलपुर के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। 
उल्लेखनीय है कि राज्य में 20 नवंबर 2025 से लागू नई गाइडलाइन दरों के संबंध में प्राप्त सुझावों, ज्ञापनों और आपत्तियों पर विचार करने हेतु मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश पर केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक कल 07 दिसंबर 2025 को आयोजित की गई थी। बैठक में पंजीयन एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और जनहितैषी बनाने के उद्देश्य से कई व्यापक निर्णय लिए गए, जो 08 दिसंबर से तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। प्रतिनिधि मंडल ने सरकार द्वारा लिए गए उक्त महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुख्यमंत्री साय का आभार व्यक्त किया। 
इस अवसर पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी, वन मंत्री केदार कश्यप, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन और विधायक किरण देव उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मध्यप्रदेश की ‘प्रेशर इरिगेशन नेटवर्क’ तकनीक का किया अवलोकन

08-Dec-2025
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा ने आज भोपाल में सिंचाई की नवीनतम तकनीक PIN (Pressure Irrigation Network) के संबंध में विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने बताया कि पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों की तुलना में यह प्रणाली कहीं अधिक कुशल, आधुनिक और जल संरक्षण के अनुरूप है।
अपर मुख्य सचिव राजौरा ने प्रस्तुति के दौरान बताया कि जहाँ पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में लगभग 35 प्रतिशत एफिशिएंसी प्राप्त होती है, वहीं प्रेशर इरिगेशन प्रणाली में दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत तक पहुँच जाती है। इस तकनीक में प्रेशर आधारित पाइपलाइनों से सिंचाई की जाती है, जिससे पानी का रिसाव और अपव्यय कम होता है तथा बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रणाली में भू-अधिग्रहण की आवश्यकता न्यूनतम होती है, जिससे परियोजनाएं समय पर और लागत प्रभावी तरीके से पूरी की जा सकती है।  
प्रस्तुति में उल्लेख किया गया कि मध्यप्रदेश में 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इस तकनीक से सिंचाई की जा रही है और आगामी वर्षों में इसे 40 लाख हेक्टेयर तक विस्तारित करने का लक्ष्य है। इस मॉडल से न केवल जल उपयोग दक्षता बढ़ी है, बल्कि किसानों की उत्पादकता और सिंचाई सुविधा में भी महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिला है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रेजेंटेशन की सराहना करते हुए कहा कि सिंचाई की यह उन्नत तकनीक जल प्रबंधन की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप है। उन्होंने कहा, “हम इस तकनीक का छत्तीसगढ़ में भी अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करेंगे, ताकि राज्य के किसानों को कम पानी में अधिक सिंचाई सुविधा और बेहतर उत्पादन मिल सके। जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और त्वरित क्रियान्वयन के दृष्टिकोण से यह तकनीक अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इस तकनीक के माध्यम से भूमि अधिग्रहण किए बिना भी सिंचाई का लाभ मिल सकेगा।” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विभागीय अधिकारियों को इस तकनीक के अध्ययन, परीक्षण और चरणबद्ध क्रियान्वयन के लिए दिशा-निर्देश दिए।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह,मध्यप्रदेश जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता विनोद देवड़ा,अधीक्षण यंत्री विकास राजोरिया और अधीक्षण यंत्री शुभंकर विश्वास भी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि पारंपरिक नहर आधारित सिंचाई में पानी का एक बड़ा हिस्सा रिसाव, वाष्पीकरण और अनियंत्रित बहाव के कारण व्यर्थ हो जाता है, जिससे खेतों तक वास्तविक जल आपूर्ति सीमित रहती है और पूरी कमांड एरिया में समान सिंचाई नहीं हो पाती। सामान्यतः पारंपरिक प्रणाली की कुल सिंचाई दक्षता केवल 35 प्रतिशत मानी जाती है। वहीं दूसरी ओर PIN (Pressure Irrigation Network) प्रणाली में पानी पाइपलाइनों के माध्यम से नियंत्रित दबाव के साथ सीधे खेतों तक पहुँचाया जाता है, जिससे पानी का अपव्यय लगभग शून्य हो जाता है। इस तकनीक से सिंचाई दक्षता बढ़कर 65 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, जो जल संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
PIN प्रणाली में सिंचाई पूरी तरह पाइपलाइन आधारित होने के कारण नहर निर्माण की आवश्यकता कम हो जाती है और भू-अधिग्रहण भी न्यूनतम होता है। इससे परियोजनाओं की लागत घटती है और कार्य समय पर पूरे होते हैं। पारंपरिक सिंचाई की तुलना में इस तकनीक में पंपिंग दक्षता अधिक होती है, जिससे बिजली की उल्लेखनीय बचत होती है। समान दबाव से पानी वितरण होने के कारण खेतों के टेल एंड के क्षेत्रों को भी पर्याप्त पानी मिलता है। इस प्रणाली से फसलों की उत्पादकता में वृद्धि, जल प्रबंधन में सुधार और किसानों की आय में वृद्धि जैसे व्यापक लाभ प्राप्त होते हैं।

शिक्षा ही सामाजिक विकास का मूलमंत्र : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

08-Dec-2025
रायपुर।  ( शोर संदेश ) सामाजिक विकास का वास्तविक आधार शिक्षा है। चाहे जीवन जीने की कला हो, व्यापार हो, कृषि हो या कोई अन्य क्षेत्र — हर क्षेत्र में सफलता का पहला कदम शिक्षा ही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश सर्व रविदास समाज के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री साय ने मंच पर सभी नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई और उन्हें शुभकामनाएँ दीं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रारंभ से ही शिक्षा के स्तर को उन्नत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य गठन के समय जहाँ मात्र एक मेडिकल कॉलेज था, वहीं आज प्रदेश में लगभग 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इसी प्रकार, छत्तीसगढ़ में आईआईटी, ट्रिपल-आईटी, आईआईएम, लॉ यूनिवर्सिटी, एम्स, सिपेट जैसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को बड़े अवसर प्राप्त हुए हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि समाज को मजबूत और संगठित होना समय की आवश्यकता है, क्योंकि संगठित समाज ही राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मूलमंत्र — “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” — का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हीं मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार राज्य सरकार 23 महीनों से सभी वर्गों के हित में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हाल के महीनों में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जिसमें अन्नदाताओं के लिए कृषक उन्नति योजना, प्रत्येक परिवार को पक्का मकान देने हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना, माताओं और बहनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाली महतारी वंदन योजना, दूरस्थ अंचलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु शिक्षक युक्तियुक्तकरण जैसे कदम शामिल हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अब तक विभिन्न विभागों में 10 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं पूर्ण निष्पक्षता के साथ संपन्न कराई गई हैं, जिससे युवाओं में नया विश्वास उत्पन्न हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने नई उद्योग नीति लागू की है, जिससे स्थानीय लोगों को अधिक अवसर, रोज़गार और स्वरोजगार प्राप्त हो सकेगा।
मुख्यमंत्री साय ने समाज के लोगों से आग्रह किया कि वे अधिकाधिक संख्या में शासन की योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ।
कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड के अध्यक्ष ध्रुव कुमार मिर्धा ने भी संबोधित किया और नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई दी।
इस अवसर पर सर्व रविदास समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विजय मेहरा, रायपुर संभाग आयुक्त महादेव कांवरे, दिलीप वासनीकर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से कुंभकार समाज के प्रतिनिधि मंडल की सौजन्य भेंट

07-Dec-2025
रायपुर,।  ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ कुंभकार समाज के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री साय को आगामी जनवरी 2025 में रायपुर जिले के ग्राम नवागांव (कोलियारी) में आयोजित होने वाले प्रदेश स्तरीय महाधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने हेतु आमंत्रित किया।
मुख्यमंत्री साय ने आमंत्रण के लिए समाज के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों का धन्यवाद किया तथा आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दी। उन्होंने कहा कि कुंभकार समाज की पारंपरिक कला, श्रमशीलता और सांस्कृतिक योगदान छत्तीसगढ़ की सामाजिक संरचना को समृद्ध बनाते हैं। राज्य सरकार सभी समाजों के विकास और सहभागिता के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
प्रतिनिधि मंडल में समाज के सलाहकार रतन लाल चक्रधारी, बी.पी. चक्रधर, प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार चक्रधारी, महामंत्री  हेमलाल कौशिक, कोषाध्यक्ष जयप्रकाश कुंभकार, दौवा राम चक्रधारी सहित अन्य वरिष्ठ सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
 



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