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दंतेवाडा (शोर संदेश)। जिले में पूरे उत्साह के साथ छत्तीसगढ़ के पारंपरिक और स्थानीय खेलों का आयोजन किया जा रहा है। शुरुआत से युवा, बुजुर्ग सहित महिला प्रतिभागी भी उत्साह के साथ पारंपरिक खेलों में शामिल हो रहे हैं। पिछले साल की भांति इस साल भी जिले में गिल्ली डंडा, पिट्टूल, फुगड़ी, गेड़ी और रस्सी कूद के साथ पारंपरिक खेलों का आनंद लिया जा रहा हैं।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के खिलाडि़यों को पारंपरिक खेलों से जोड़ने के लिए छत्तीसगढि़या ओलंपिक खेल की शुरुआत की है। ग्राम स्तर से लेकर सेक्टर, ब्लाक जिला, संभाग और राज्य स्तर पर खेलों का आयोजन होना है। तिथि में संशोधित करते हुए विकासखंड, नगरीय क्लस्टर स्तर पर आयोजन 18 से 23 अगस्त तक होगा। जिला स्तर पर आयोजन 25 अगस्त से 4 सितंबर तक होगा। संभाग स्तर पर आयोजन 10 से 20 सितंबर तक होगा। अंत में राज्य स्तर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसका आयोजन 25 सितंबर से 27 सितंबर तक होगा।

छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल भी है। उन्होंने अपने वनवास काल में सर्वाधिक समय छत्तीसगढ़ में बिताया, इसलिए पूरा छत्तीसगढ़ राममय है। भांजा राम की याद में यहां हर परिवार में अपने भांजे में प्रभु श्रीराम जैसी छवि देखते है। प्रभु श्रीराम के स्मृतियों को ताजा करने के लिए राज्य शासन द्वारा राम वन गमन पथ का निर्माण किया जा रहा है। प्रभु श्रीराम के वनवास काल की सुन्दर प्रस्तुति अरण्य काण्ड में है, जिसमें उनके वनवास काल का विवरण है। हाल ही में रायगढ़ में आयोजित रामायण महोत्सव में देश-विदेश की कलाकारों ने सुन्दर प्रस्तुति देकर अरण्य काण्ड को जीवन्त कर दिया। छत्तीसगढ़ में वनवासी राम का सम्पूर्ण जीवन सामाजिक समरसता का प्रतीक है, यहां उन्होंने सदैव समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को गले लगाया। राम ने दंडकारण्य की धरती से पूरी दुनिया तक “सम्पूर्ण समाज एक परिवार है” का संदेश दिया। छत्तीसगढ़ की इस गौरवशाली आध्यात्मिक विरासत से नई पीढ़ी को अवगत कराने के इस तरह का आयोजन प्रशंसनीय कदम हैं। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों मे बहुत पहले से ही नवधा रामायण के आयोजन की परंपरा रही है। नवधा रामायण के माध्यम से रामयण मंडली भगवान श्रीराम की जीवन-गाथा को गाकर लोगों को जीवन की सीख देते है और यही परंपरा आज भी चली आ रही है। बतां दें कि नवधा रामायण का आयोजन ग्रामीण क्षेत्रो में ज्यादातर चैत्र मास में किया जाता है। यह हिन्दु नववर्ष का प्रारंभ होने का समय भी होता है। इसी दिन से साल के प्रथम नवरात्रि भी प्रारंभ होता है, नौ दिनों का यह पर्व रामनवमी पर समाप्त होता है। यही सब कारण है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रामायण मानस गान की ऐतिहासिक महत्ता को देखेते हुए इसे राज्य स्तर पर आयोजन करने का निर्णय लिया। छत्तीसगढ़ को भगवान राम की माता कौशल्या की जन्मभूमि माना जाता है। इस नाते उन्हें छत्तीसगढ़ में भांजे का दर्जा प्राप्त है। प्रदेश में माता कौशल्या भी आराध्य हैं। चंदखुरी में देश का इकलौता कौशल्या माता का मंदिर निर्मित है। देश में पहली बार छत्तीसगढ़ में शासकीय रूप से राष्ट्रीय स्तर पर रामायण महोत्सव के सराहनीय आयोजन से श्री राम जी के आदर्श चरित्र को जानने-समझने का अवसर मिला। वहीं सांस्कृति आदान-प्रदान के साथ ही रामायण का एक नया स्वरूप भी देखने को मिला। छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक मानचित्र में रामायण मंडली एक अभिन्न अंग है। छत्तीसगढ़ की धरा से भगवान राम के जुड़ाव के कई प्रसंग मिलते हैं। मुख्यमंत्री बघेल की पहल पर छत्तीसगढ़ में रामायण मानस गान की ऐतिहसिक और पौराणिक महत्त को ध्यान में रखते हुए उसे सहेजने एवं संवारने का काम किया जा रहा है। रामायण महोत्सव का पहला आयोजन माता शबरी की पावन धरा शिविरीनारायण में हुआ। यह वहीं स्थान है जहां माता शबरी ने भगवान श्री राम और लक्ष्मण को वनवास काल के दौरान जुठे बेर खिलाये थे। दूसरा आयोजन छत्तीसगढ़ के प्रयागराज के रूप में प्रसिद्ध त्रिवेणी संगम राजिम में सम्पन्न हुआ। इसी कड़ी में तीसरा और भव्य आयोजन संस्कार धानी रायगढ़ में हुआ, इस आयोजन में देश-विदेश से आए रामायण मंडलियों और कलाकरों ने इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजन बना दिया। मानस गायन को लेकर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में कीर्तिमान दर्ज हुआ। रायगढ़ में हुए राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में देश के 13 राज्यों सहित इंडोनेशिया और कम्बोडिया के रामायाण मंडली के कलाकरों द्वारा भी विशेष प्रस्तुती दी गई। रामायण मानस गान को सहेजने राज्य के 4850 मंडलियों को वाद्य यंत्रों के लिए लगभग ढाई करोड़ रूपए की राशि का सहयोग दी गई। मानस गायन के लिए राज्य स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले दलों को क्रमशः पांच लाख, तीन लाख और दो लाख रूपए का पुरस्कार भी प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान किए गए।


डोंगरगढ़ (शोर संदेश)। शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म करने वाले तथा उसकी शादी तय हो जाने पर आत्महत्या करने की धमकी देकर युवती को शादी का रिश्ता तोड़ने पर मजबूर करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार 7 जुलाई को पीड़िता ने पुलिस चौकी में लिखित शिकायत की थी 5 वर्ष पूर्व उसकी मुलाकात आरोपी टोमन लाल पटेल से हुई थी। दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे,15 जुलाई 2019 को करेला भवानी मंदिर में दर्शन के बहाने आरोपी उसे लेकर गया था इसी दौरान शादी करने का झांसा देकर आरोपी टोमन लाल ने उससे दुष्कर्म किया था।इसके बाद लगातार 5 वर्षों तक विवाह करने का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाता रहा। पीड़िता का कहना है कि उसने 5 साल के दौरान कई बार आरोपी से शादी करने के लिए कहा लेकिन कोई ना कोई बहाना बनाकर वह हमेशा शादी करने की बात को टाल देता था। इस बीच युवती की शादी भी तय हो गई थी। जब इसका पता आरोपी टोमन को चला तो उसने युवती से कहा कि यदि उसने दूसरी जगह शादी की तो वह जहर खाकर आत्महत्या कर लेगा इससे डर कर युवती ने अपनी शादी भी तोड़ दी थी। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 376,376- 2 एन के तहत अपराध दर्ज किया था,तथा आरोपी को गिरफ्तार किया आरोपी बालोद जिलो के डोंडी लोहारा गांव का रहने वाला है। पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है।
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गरियाबंद (शोर संदेश)।राज्य शासन की ओर से संचालित हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ लेकर जिले के समूह के सदस्य अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। शासन की ओर से प्रदान किये जाने वाले अधोसंरचना और तकनीकी सहयोग के बदौलत ग्रामीण अधिक आय अर्जित करने के लिए आजीविका के अन्य साधनों पर भी जोर दे रहे हैं। इसी तारतम्य में समूह के सदस्यों ने कोसा धागाकरण को आजीविका का नया साधन बनाकर पिछले तीन महीनों में ही 82 हजार रुपय से अधिक का आय अर्जित कर चुके है। ग्राम किरवई के कोसा विकास स्वसहायता समूह के 17 हितग्राहियों ने जिले में संचालित रेशम केन्द्र किरवई में कोसा धागा का उत्पादन कर 2 लाख 3 हजार 650 रुपए का धागा बुनकरों को बेच चुके है। इससे कोसा फल की लागत चुकाने के बाद भी सदस्यों को 82 हजार 844 रुपए का शुद्ध लाभ हुआ है। समूह के सदस्य अपने घरेलु कामों के अलावा अतिरिक्त समय में कोसा धागाकरण का काम करके आर्थिक लाभ कमा रहे है। सहायक संचालक रेशम विभाग एस.के. कोल्हेकर ने बताया कि जिले में की गई अभिनव पहल के तहत कोसा धागाकरण से हितग्राही रोजगार प्राप्त कर रहे है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023-24 में अप्रैल से जून 2023 तक जिले में संचालित रेशम केन्द्र किरवई में समूह के सदस्यों की ओर से 82 किलो से अधिक टसर कोसा धागा का उत्पादन किया गया। समूह के सदस्यों को शासन की ओर से रेशम केन्द्र में कोसा धागाकरण के लिए अधोसंरचना व आवश्यक सुविधा प्रदान किया जाता है। रेशम विभाग की ओर से ककून बैंक से ककून खरीदी में भी सहयोग की जाती है। साथ ही सदस्यों को मशीन भी दी जाती है, जिससे ग्रामीणों को कोसा धागाकरण में सहुलियत होती है। सहायक संचालक ने बताया कि जिले के अधिक लोगों को कोसा धागाकरण के कार्य से जोड़ने के लिए मालगांव में भी धागाकरण कार्य शीघ्र प्रारंभ करने का प्रयास किया जा रहा है।

रायपुर (शोर संदेश) राज्य के ग्रामीण अंचलों में निःशुल्क घरेलू नल कनेक्शन देने का काम तेजी से किया जा रहा है। प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत घरों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत 50 लाख 11 हजार 458 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन दिया जाना है। जिसके तहत वर्तमान में 26 लाख 91 हजार 422 घरेलू नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इसके साथ-साथ राज्य के 43 हजार 981 स्कूलों, 41 हजार 725 आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा 17 हजार 290 ग्राम पंचायत भवनों और सामुदायिक उप-स्वास्थ्य केन्द्रों में टेप नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। जिसमें छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिला सर्वाधिक 2 लाख 39 हजार 943 ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन देने में अग्रणी है। इसी तरह राजनांदगांव जिला 1 लाख 84 हजार 770 तथा रायगढ़ जिला 1 लाख 60 हजार 267 परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन देने में क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरु रुद्रकुमार के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे जल जीवन मिशन के अंतर्गत राज्य में प्रति व्यक्ति, प्रतिदिन 55 लीटर के मान से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है, इसके लिए सभी जिलों में कार्ययोजना तैयार कर तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। इस मिशन के तहत घरेलू नल कनेक्शन के अतिरिक्त स्कूल, उप-स्वास्थ्य केंद्र एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों में भी रनिंग वाटर की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही साथ जमीनी स्तर पर राज्य में सिंगल विलेज स्कीम और मल्टी विलेज स्कीम सहित अन्य पेयजल योजनाओं सहित जल जीवन मिशन के कार्यों का क्रियान्वयन सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी डॉ. एस. भारतीदासन और मिशन संचालक आलोक कटियार द्वारा लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। जल जीवन मिशन के तहत अब तक रायपुर जिले में 1 लाख 40 हजार 061, बलौदाबाजार-भाटापारा में 1 लाख 31 हजार 849, महासमुंद जिले में 1 लाख 31 हजार 180, धमतरी जिले में 1 लाख 27 हजार 625, कवर्धा 1 लाख 19 हजार 303, बिलासपुर जिले में 1 लाख 16 हजार 315, दुर्ग 1 लाख 12 हजार 956 और बेमेतरा जिले में 1 लाख 09 हजार 334 नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इसी तरह मुंगेली में 1 लाख 08 हजार 862, बालोद में 01 लाख 06 हजार 686, गरियाबंद 87 हजार 047, बलरामपुर में 83 हजार 321, सरगुजा जिले के 80 हजार 668, जशपुर में 81 हजार 609, कोरबा में 79 हजार 560, सूरजपुर में 75 हजार 157, बस्तर में 74 हजार 529, कांकेर 70 हजार 693, कोण्डागांव में 70 हजार 459, कोरिया में 67 हजार 761, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में 35 हजार 715, सुकमा में 28 हजार 474, बीजापुर 25 हजार 746, दंतेवाड़ा में 24 हजार 192 और नारायणपुर जिले में 17 हजार 340 ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं।


रायपुर (शोर संदेश) नशे के विरूद्ध व्यापक जन जागरूकता अभियान ‘‘हैलो जिन्दगी’’ के तहत् रायपुर पुलिस विभिन्न स्थानों में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही है। पुलिस महानिरीक्षक रायपुर रेंज अजय यादव और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर प्रशांत अग्रवाल ने शनिवार को नशे के विरूद्ध व्यापक जन जागरूकता अभियान ‘‘हैलो जिन्दगी’’ का शुभारंभ करते हुए जन जागरूकता के लिए तैयार गाड़ियों को सिविल लाईन स्थित सी-4 भवन से झंडी दिखाकर रवाना किया था।इस जागरूकता अभियान के तहत शहर के अलग-अलग क्षेत्रों, पब्लिक प्लेसेस, हाउसिंग सोसायटी, मोहल्ले, स्कूल/कॉलेज, यूनिवर्सिटी शासकीय एवं निजी कार्यालयों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी विभिन्न माध्यमों से नागरिकों को जागरूक करना है।
इसी तारतम्य में रविवार को रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड, तेलीबांधा मरीन ड्राईव तालाब, खम्हारडीह में अमन नगर, देवेन्द्र नगर में त्रिमूर्ति नगर, सरस्वती नगर में सेंट्रल लाईब्रेरी, न्यू राजेन्द्र नगर में कलर्स मॉल एवं लालपुर ब्रिज के पास, मौदहापारा में शहीद स्मारक भवन, आमानाका में टाटीबंध बस्ती एवं वाल्मिकी नगर, बी.एस.यू.पी कॉलोनी सड्डू विधानसभा एवं भाठागांव पुरानी बस्ती, माना में माना बस्ती, नेवरा में सुभाष चौक, धरसींवा में देवरी तथा खरोरा, उरला एवं आजाद चौक के क्षेत्रों में रायपुर पुलिस के अधि./कर्म., काउंसलर, डॉक्टर आलोक शुक्ला एवं योगिता शर्मा, साया फाउंडेशन, वक्ता मंच, सहित अन्य समाज सेवी संगठनों, छात्रों एवं राग म्यूजिक के संयुक्त तत्वाधान में जन जागरूकता अभियान ‘‘हैलो जिन्दगी’’ आयोजित किया जाकर नशे के दुष्प्रभावों सहित इससे जुड़े अन्य तथ्यों के संबंध में आमजन को बताकर जागरूक किया गया। इसके साथ ही ‘‘हैलो जिंदगी’’ अभियान के तहत आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से टी-शर्ट, पोस्टर एवं पम्पलेट वितरित किये गये तथा मकानों के बाहर एवं आटो में पोस्टर/स्टीकर लगाने के साथ ही नुक्कड़, नृत्य व सोशल मीडिया के माध्यम से भी इसका प्रचार-प्रसार कर आमजन को जागरूक किया जा रहा है।
इस जन जागरूकता अभियान के तहत जिला के प्रत्येक थाना क्षेत्र के विभिन्न स्थानों में वॉल पेंटिंग कराने के साथ ही प्रमुख स्थानों में बैनर और पोस्टर भी लगवाए जा रहे है तथा जागरूकता हेतु तैयार की गई वाहनो को रायपुर के मुख्य स्थानों से लेकर अंदरूनी क्षेत्रों में घुमाकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। रायपुर पुलिस का यह अभियान 15 अगस्त तक जारी रहेगा।

धनंजय राठौर, छगन लोन्हारे
रायपुर (शोर संदेश) -छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। इस त्यौहार से ही राज्य में खेती-किसानी की शुरूआत होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत्रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। मुख्यमंत्री बघेल की पहल पर लोक महत्व के इस पर्व पर सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया है। इससे छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है। लोक संस्कृति इस पर्व में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की भी शुरूआत की जा रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के परंपरागत तीज-त्यौहार, बोली-भाखा, खान-पान, ग्रामीण खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री की पहल पर राज्य शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने लोगों तक गेड़ी की उपलब्धता के लिए जिला मुख्यालयों में स्थित सी-मार्ट में किफायती दर में गेड़ी बिक्री के लिए व्यवस्था की है। परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। वन विभाग के सहयोग से सी-मार्ट में गेड़ी किफायती दर पर उपलब्ध कराया गया है, ताकि बच्चे, युवा गेड़ी चढ़ने का अधिक से अधिक आनंद ले सके।मुख्यमंत्री की पहल पर पिछले वर्ष शुरू की गई छत्तीसगढ़िया ओलंपिक को काफी लोकप्रियता मिली। इसको देखते हुए इस बार हरेली तिहार के दिन शुरू होने वाली छत्तीसगढ़िया ओलंपिक 2023-24 को और भी रोमांचक बनाने के लिए एकल श्रेणी में दो नए खेल रस्सीकूद एवं कुश्ती को भी शामिल किया गया है। हरेली पर्व के दिन से ही प्रदेश में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक खेल की शुरूआत भी होने जा रही है, जो सितंबर के अंतिम सप्ताह तक जारी रहेगा। हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में देने की परंपरा रही हैं।सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है।हरेली तिहार के साथ गेड़ी चढ़ने की परंपरा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग सभी परिवारों द्वारा गेड़ी का निर्माण किया जाता है। परिवार के बच्चे और युवा गेड़ी का जमकर आनंद लेते है। गेड़ी बांस से बनाई जाती है। दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाई जाती है। एक और बांस के टुकड़ों को बीच से फाड़कर उन्हें दो भागों में बांटा जाता है। उसे नारियल रस्सी से बांध़कर दो पउआ बनाया जाता है। यह पउआ असल में पैर दान होता है जिसे लंबाई में पहले कांटे गए दो बांसों में लगाई गई कील के ऊपर बांध दिया जाता है। गेड़ी पर चलते समय रच-रच की ध्वनि निकलती हैं, जो वातावरण को औैर आनंददायक बना देती है। इसलिए किसान भाई इस दिन पशुधन आदि को नहला-धुला कर पूजा करते हैं। गेहूं आटे को गंूथ कर गोल-गोल बनाकर अरंडी या खम्हार पेड़ के पत्ते में लपेटकर गोधन को औषधि खिलाते हैं। ताकि गोधन को विभिन्न रोगों से बचाया जा सके। गांव में पौनी-पसारी जैसे राऊत व बैगा हर घर के दरवाजे पर नीम की डाली खोंचते हैं। गांव में लोहार अनिष्ट की आशंका को दूर करने के लिए चौखट में कील लगाते हैं। यह परम्परा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यमान है।
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हरेली के दिन बच्चे बांस से बनी गेड़ी का आनंद लेते हैं। पहले के दशक में गांव में बारिश के समय कीचड़ आदि हो जाता था उस समय गेड़ी से गली का भ्रमण करने का अपना अलग ही आनंद होता है। गांव-गांव में गली कांक्रीटीकरण से अब कीचड़ की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। हरेली के दिन गृहणियां अपने चूल्हे-चौके में कई प्रकार के छत्तीसगढ़ी व्यंजन बनाती है। किसान अपने खेती-किसानी के उपयोग में आने वाले औजार नांगर, कोपर, दतारी, टंगिया, बसुला, कुदारी, सब्बल, गैती आदि की पूजा कर छत्तीसगढ़ी व्यंजन गुलगुल भजिया व गुड़हा चीला का भोग लगाते हैं। इसके अलावा गेड़ी की पूजा भी की जाती है। शाम को युवा वर्ग, बच्चे गांव के गली में नारियल फेंक और गांव के मैदान में कबड्डी आदि कई तरह के खेल खेलते हैं। बहु-बेटियां नए वस्त्र धारण कर सावन झूला, बिल्लस, खो-खो, फुगड़ी आदि खेल का आनंद लेती हैं।