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नैनो उर्वरकों से बदली किसान दशरथ वर्मा की खेती, कम लागत में मिला बेहतर परिणाम

23-Jun-2026
कवर्धा, 23 जून 2026 कबीरधाम जिले के ग्राम पंचायत उसलापुर के किसान दशरथ वर्मा आज उन प्रगतिशील कृषकों में शामिल हैं, जिन्होंने बदलते समय के साथ खेती की नई तकनीकों को अपनाकर अपनी कृषि को अधिक लाभकारी और सुविधाजनक बनाया है। परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग शुरू किया और अब उनकी यह पहल आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
लगभग 4.50 एकड़ भूमि पर धान और गन्ने की खेती करने वाले वर्मा बताते हैं कि पहले पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों को खेत तक पहुंचाना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती हुआ करती थी। दुकान से घर और फिर खेत तक 50 किलोग्राम की बोरियां ले जाना कठिन होने के साथ समय और श्रम दोनों की मांग करता था। इसके साथ भंडारण की समस्या भी बनी रहती थी। दशरथ वर्मा ने खेती में बदलाव की शुरुआत करते हुए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग शुरू किया। उन्होंने बताया कि अब केवल 500 मिलीलीटर की एक बोतल को स्प्रेयर के माध्यम से फसल पर छिड़का जाता है, जिससे पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सीधे और प्रभावी तरीके से मिलते हैं। इससे उर्वरक की बर्बादी कम हुई और फसल की गुणवत्ता तथा उत्पादन में सकारात्मक सुधार दिखाई दिया।
दशरथ बताते हैं कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से उनकी खेती की लागत पहले की तुलना में कम हुई है और काम करने में भी सुविधा बढ़ी है। कम मात्रा में अधिक प्रभाव मिलने से समय, श्रम और संसाधनों की बचत हो रही है। वर्मा ने कहा कि खेती केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ऐसी तकनीकों को अपनाना जरूरी है जो भविष्य के लिए टिकाऊ भी हों। उनके अनुसार नैनो उर्वरकों के उपयोग से भूमि और पर्यावरण पर दबाव कम पड़ता है तथा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले प्रभावों को भी नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
 


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