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दूरस्थ बसावटों को मिलेगा बारहमासी सड़क संपर्क: पीएमजीएसवाई-IV में 2,426 किमी सड़कों की मंजूरी

20-Nov-2025
रायपुर,  । ( शोर संदेश )  प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने देशभर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान कायम की है। योजना के विभिन्न चरणों में छत्तीसगढ़ को अब तक कुल 9,722 सड़कें (48,594 किमी) और 669 पुल स्वीकृत हुए हैं। इनमें से 8,753 सड़कें (43,380 किमी) और 470 पुलों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री ने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर जानकारी दी कि  ग्रामीण सड़क संपर्क को और सुदृढ़ करते हुए PMGSY-IV के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को 774 नई सड़कें (कुल लंबाई 2,426.875 किमी) स्वीकृत की गई हैं। यह पहली बार है जब इस चरण में पात्र संपर्क-विहीन बसावटों को ‘बारहमासी सड़क संपर्कता’ प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस स्वीकृति से छत्तीसगढ़ की दूरस्थ और वंचित बसावटों तक सर्व मौसम सड़क सुविधा पहुँचाने का मार्ग खुल गया है।
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्णय की जानकारी देते हुए कहा गया है कि बारहमासी सड़क संपर्कता से इन बसावटों को बाज़ार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पोषण, आपदा प्रबंधन और दैनिक आवागमन में व्यापक सुविधा मिलेगी। इससे क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में तेजी, ग्रामीण आजीविका में वृद्धि और जन-कल्याणकारी सेवाओं तक सुगम पहुँच सुनिश्चित होगी।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने लगातार अग्रणी प्रदर्शन किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए छत्तीसगढ़ के लोगों, पीएमजीएसवाई टीम, इंजीनियरों और मैदानी अमले को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस योजना का लाभ लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए प्रयास निरन्तर जारी रहेगा और छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास की गति में तेजी आएगी।
“प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को मिली 774 नई सड़कों की स्वीकृति हमारे ग्रामीण विकास अभियान को नई गति देगी। यह निर्णय दूरस्थ और संपर्क-विहीन बसावटों को बारहमासी सड़क सुविधा प्रदान करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। हमारी सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ के प्रत्येक ग्राम तक सुरक्षित, सुदृढ़ और सर्व मौसम सड़क संपर्क सुनिश्चित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और जन-कल्याण को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जाए।” - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय






 

वनवासियों की आय बढ़ाने और सर्वांगीण विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री साय

19-Nov-2025
रायपुर, । ( शोर संदेश )   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित के नवनियुक्त अध्यक्ष रूप साय सलाम और उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा के पदभार ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने नए दायित्वों के लिए अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अध्यक्ष के रूप में सलाम को एक अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसे वे अपनी संवेदनशीलता, अनुभव और दक्षता के साथ उत्कृष्ट रूप से निभाएंगे। उन्होंने उल्लेख किया कि सलाम स्वयं जनजातीय समुदाय से आते हैं और समुदाय की समस्याओं, अपेक्षाओं एवं आवश्यकताओं को भली-भांति समझते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनवासियों की आय बढ़ाने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रदेश में निवासरत जनजातीय समाज के उत्थान को दृष्टिगत रखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया। साथ ही केंद्र में अलग जनजातीय मंत्रालय की स्थापना से समुदाय के विकास को नई गति मिली। उन्होंने कहा कि हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसी भावना और संकल्प को आगे बढ़ाते हुए ‘धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना’ तथा ‘पीएम जनमन योजना’ लागू की, जिनके माध्यम से जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्राहकों को देश में सर्वाधिक मूल्य दिया जा रहा है। वनोपजों के वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि वनवासी समुदाय की आय में वृद्धि हो और उन्हें वास्तविक आर्थिक मजबूती प्राप्त हो।
वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह प्रदेश का सौभाग्य है कि छत्तीसगढ़ के मुखिया विष्णु देव साय स्वयं जनजातीय समुदाय से आते हैं और वनवासी भाई-बहनों की पीड़ा, कठिनाइयों और आकांक्षाओं को गहराई से समझते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की 32% आबादी जनजातीय है तथा 44% क्षेत्र वनाच्छादित है, इसलिए वनोपज ही वनवासियों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता को ‘हरा सोना’ कहा जाता है और उसके अनुरूप मूल्य देने का कार्य मुख्यमंत्री साय ने किया है। तेंदूपत्ता का प्रति मानक बोरा मूल्य 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है।
वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने न केवल चरण पादुका योजना को पुनः प्रारंभ किया है, बल्कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वनोपज संग्राहक परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रभावी कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, नान के चेयरमैन संजय श्रीवास्तव, योग आयोग के अध्यक्ष रूप नारायण सिन्हा, छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, वक्फ बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सलीम राज, वनबल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव सहित लघु वनोपज संघ के सदस्य तथा प्रदेशभर से बड़ी संख्या में पहुंचे वनोपज संग्राहक उपस्थित थे।







 

छत्तीसगढ़ विधानसभा ने रचे अनेक कीर्तिमान, विशेष सत्र में बोले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

19-Nov-2025
रायपुर, । ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा के विशेष सत्र के समापन अवसर पर कहा कि यह लोकतंत्र का मंदिर है। यह विधानसभा भवन केवल एक परिसर नहीं है, यह हमारे छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ निवासियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं का प्रतीक है। इस भवन से छत्तीसगढ़ विधानसभा के अब तक के सभी सदस्यों की स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। यह संविधान का अमृत वर्ष है। हमें अपने संविधान को आत्मार्पित किए 75 वर्ष हो गए हैं, ऐसे में यह अवसर संवैधानिक मूल्यों से प्रेरणा लेते हुए लोकतांत्रिक परंपराओं को समृद्ध करने वाली विभूतियों के स्मरण का भी है। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह विधानसभा भवन अंत्योदय और जनकल्याण की उपलब्धियों का साक्षी रहा है। सभी सदस्यगणों ने अपनी पूरी ऊर्जा और प्रतिभा के साथ इस विधानसभा भवन में जो कड़ी मेहनत की है, वह अविस्मरणीय रहेगी। उन्होने कहा कि विधानसभा के इस भवन में जो विधेयक पारित हुए हैं, जो कानून बनाये गए हैं, उनके माध्यम से आज 25 वर्षों की गौरवशाली संसदीय यात्रा में समृद्ध छत्तीसगढ़ की नींव तैयार हुई है। साय ने कहा कि राज्य बनने के बाद विधानसभा के पहले सत्र का आयोजन राजकुमार कॉलेज के जशपुर हॉल में  हुआ था और उसके बाद इस भवन में विधानसभा शुरू हुई। फिर अनेक गौरवशाली पलों का यह विधानसभा भवन साक्षी रहा है।  भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से लेकर वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तक अनेक गणमान्य अतिथियों की यहां उपस्थिति एवं प्रेरक सम्बोधनों ने संवैधानिक परम्परा को मजबूत किया है। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के स्वरूप को निखरते हुए सभी सदस्यों ने देखा है।  कैसे न्यूनतम साधनों से छत्तीसगढ़ महतारी के सपूतों ने इन पच्चीस बरसों में छत्तीसगढ़ को संवारा है। प्रत्येक सदस्य इस बात के गवाह है। विधानसभा का यह भवन छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा। लोकतंत्र के इस मंदिर की बहुत सारी स्मृतियां, यहां के सत्र, तीखी और मीठी नोंक-झोंक, सबकुछ इस परिसर ने देखा है और यह दस्तावेज के रूप में संकलित है।
साय ने कहा कि 25 बरस पहले जब हमने विधानसभा की यात्रा आरंभ की थी, तब हम सभी अपने साथ अविभाजित मध्यप्रदेश विधानसभा की गौरवशाली परंपराएं लेकर आये थे। हमने हर श्रेष्ठ संसदीय परंपरा का पूरी प्रतिबद्धता से निर्वहन किया है। अविभाजित मध्यप्रदेश की विधानसभा में जिन सुंदर विधायी परंपराओं का निर्माण हुआ, उनके पीछे छत्तीसगढ़ की विभूतियों की भी प्रमुख भूमिका रही है। मुझे भी अविभाजित मध्यप्रदेश में विधायक रहने का अवसर प्राप्त हुआ। हमें गर्व है कि सभी श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं को इस विधानसभा भवन ने समृद्ध करने का काम किया है। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य स्थापना के रजत महोत्सव के दिन हमारे  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों छत्तीसगढ़ के नये विधानसभा परिसर का लोकार्पण हुआ है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि ‘‘यह केवल एक इमारत का समारोह नहीं, बल्कि 25 वर्षों की जनाकांक्षा, जन संघर्ष और जन गौरव का उत्सव है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी  के नेतृत्व में देश स्वर्णिम शिखर की ओर बढ़ा और एक नवंबर वर्ष 2000 को छत्तीसगढ़ पृथक राज्य के रूप में और हमारा यह विधानसभा अस्तित्व में आया। स्व. बाजपेयी ने राज्य का निर्माण तो किया ही, साथ ही केंद्र में जनजातीय कार्य मंत्रालय की स्थापना की। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के रूप में ग्रामीण बसाहटों को जोड़ने की महती योजना तैयार की, जिसका इसका भरपूर लाभ छत्तीसगढ़ को मिला। छत्तीसगढ़ के नवनिर्माण के लिए 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में आपने और हमारे विधानसभा के साथियों ने बहुत पसीना बहाया है। सबको खाद्य सुरक्षा दिलाने की आपकी पहल से प्रदेश के लाखों लोगों को भूख से मुक्ति मिली। छत्तीसगढ़ के पीडीएस मॉडल को देश के अन्य राज्यों ने भी अपनाया। धान खरीदी के व्यवस्थित मॉडल से लाखों किसानों को पहली बार अपने फसल का बढ़िया मूल्य प्राप्त हुआ।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विधानसभा नीति निर्माण का मंच होने के साथ सामाजिक सुधार का सेतु भी है। इसी विधानसभा भवन में मातृ शक्ति के सम्मान को सुरक्षित रखने टोनही प्रताड़ना निवारण विधेयक, शासन और लोक सेवकों की जनता के प्रति जवाबदेही तय करने छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी विधेयक तथा युवाओं को कौशल विकास का अधिकार प्रदान किया गया। उन्होेने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास को डबल इंजन की सरकार से शक्ति मिल गई और चहुँओर ऐसे कार्य आरंभ हुए, जिससे छत्तीसगढ़ के विकास का ग्राफ तेजी से उत्तरोत्तर चढ़ता गया।
साय ने कहा कि इस विधानसभा भवन ने श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी तथा वर्तमान यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के संकल्प को साकार करने अहम भूमिका निभाई है। वर्ष 2023 में जब हमारी सरकार बनी, तो सबसे पहले हमने प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी फाइल को मंजूरी प्रदान की। प्रदेश में अब तक 26 लाख से अधिक पीएम आवास स्वीकृत किये जा चुके हैं। घर भी बने और घर के अंदर रसोई भी बदली। चूल्हे की जगह उज्ज्वला सिलेंडर प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 वर्षों में हमने हर घर बिजली पहुंचाई है। अब लोग प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के माध्यम से बिजली का उत्पादन भी कर रहे हैं। इसी विधानसभा में पिछले दो साल में ज्ञान और गति आधारित ऐतिहासिक बजट पेश किया। इस सदन द्वारा जनविश्वास विधेयक, लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक, कृषि उपज मंडी संशोधन विधेयक, नगर पालिका तथा नगर निगम संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय स्थापना संशोधन विधेयक, राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण विधेयक, राजिम माघी पुन्नी मेला संशोधन विधेयक और भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक समेत अनेक जनकल्याणकारी विधेयक पारित किए गए। 
मुख्यमंत्री साय ने विधान सभा में कहा कि विधानसभा भवन को हमने धान की बालियों से सजाया है। छत्तीसगढ़ का हर किसान उम्मीद से भरा है, क्योंकि पर्याप्त पानी है, बिजली है और उनके उत्पादन का उचित मूल्य है। जब किसान भरपूर मेहनत करते हैं, खूब अन्न उपजाते हैं तो एक संवेदनशील सरकार की यह भी जिम्मेदारी होती है कि किसानों के उत्पादन के अनुरूप खरीदी का स्तर भी बढ़ाये। हमने 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी के साथ ही 21 क्विंटल प्रति एकड़ तक धान खरीदी का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 25 बरसों की इस यात्रा में मातृशक्ति की अहम भूमिका है। विधानसभा में बैठी हुईं महिला सदस्य राज्य को संवारने में कड़ी मेहनत कर रही हैं। पूर्व में भी महिला सदस्यों ने अपनी ऊर्जा और प्रतिभा से छत्तीसगढ़ को संवारा है। महिला सशक्तीकरण की दिशा में क्रांतिकारी पहल करते हुए इसी विधानसभा भवन से पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का मार्ग प्रशस्त किया गया है।
साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है, इस संकल्प में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने विज़न डॉक्युमेंट नवा अंजोर 2047 के रूप में लक्ष्य रखा है। मुख्यमंत्री ने का कि छत्तीसगढ़ की 25 बरसों की विकास यात्रा को युवा शक्ति ने लगातार गढ़ा है। इस रजत यात्रा में ऐसी अनेक संस्थाएं प्रदेश में स्थापित हुई हैं जिन्होंने प्रदेश के मानव संसाधन की प्रतिभा को उभारने में बड़ी भूमिका निभाई। हमारे यहां एनआईटी, आईआईटी, ट्रिपलआईटी, आईआईएम और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी है। यहां निफ्ट, फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट जैसी राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थाएं भी यहां आरंभ किया जा रहा है। हमारा नवा रायपुर आधुनिक भारत की सबसे नई बसाहट है। रायपुर, दुर्ग-भिलाई तथा नवा रायपुर को मिलाकर हमने स्टेट कैपिटल रीजन बनाया है। यह आईटी हब, फार्मा हब, टैक्सटाइल हब के रूप में उभरेगा। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल ने हमंे एम्स दिया, मोदी जी ने हमें मेडिकल कॉलेजों की सौगात दी, हम एम्स की तरह ही सुपर स्पेशयिलिटी हॉस्पिटलों की श्रेणी खड़ी करेंगे। इसके साथ ही हम मेडिसिटी बना रहे हैं।
साय ने कहा कि माओवाद की वजह से पिछड़ गये बस्तर जैसे इलाकों के लिए यहां से विकास की नई कहानी लिखी जा रही है। नियद नेल्ला नार योजना, पीएम जनमन योजना, प्रधानमंत्री जनजातीय उत्कृष्ट ग्राम अभियान, जैसी अनेक योजनाओं के माध्यम से बस्तर विकसित छत्तीसगढ़ के आकाश में नक्षत्र की तरह उभरने की तैयारी कर रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सल उन्मूलन पर बात करते हुए कहा कि बीते महीनों में सैकड़ों नक्सलियों का आत्मसमर्पण, टॉप कैडर की गिरफ्तारियाँ और लगातार सफल ऑपरेशन्स यह संकेत देते हैं कि नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है। नियद नेल्ला नार, नक्सलियों के पुनर्वास की प्रभावी नीति और नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना ने जनविश्वास को अत्यधिक मजबूत किया है और बस्तर के गांवों में नया आत्मविश्वास उत्पन्न किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूर्ण अंत हो जाएगा।
राज्य के विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा के विशेष सत्र में नई बिजली योजना की घोषणा की। अब प्रदेश के ऐसे घरेलू उपभोक्ताओं को जिनका 200 यूनिट तक विद्युत खपत है उन्हें 200 यूनिट तक हाफ बिजली का पूरा लाभ प्राप्त होगा। इस निर्णय से राज्य के 36 लाख घरेलू उपभोक्ता सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। 200 से 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को भी अगले 1 वर्ष तक 200 यूनिट तक हॉफ बिजली बिल का लाभ मिलेगा, इससे 6 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। इन उपभोक्ताओं को 1 वर्ष तक की छूट दी गई है ताकि इस अवधि  में वे अपने घरों में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर प्लांट स्थापित करा सके। इस तरह 200 यूनिट तक हॉफ बिजली बिल योजना से प्रदेश के 45 लाख उपभोक्ताओं में से 42 लाख उपभोक्ता लाभान्वित होंगे, वहीं प्रधानमंत्री सूर्य घर मुक्त बिजली योजना का लाभ प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं को मिलेगा। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता हर उपभोक्ता को सस्ती, सुचारू और भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है। सोलर प्लांट स्थापना प्रक्रिया में समय लगने के कारण घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 1 दिसंबर से नई योजना लागू की जा रही है, जिससे आम जनता के बिजली बिल में महत्वपूर्ण कमी आएगी।
मुख्यमंत्री साय ने यह भी बताया कि पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है, जिसके तहत 1 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्लांट पर 15,000 रुपये तथा 2 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता के प्लांट पर 30,000 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है। यह व्यवस्था राज्य में सौर ऊर्जा अपनाने को प्रोत्साहित करेगी और आने वाले समय में उपभोक्ताओं को हाफ बिजली से फ्री बिजली की ओर ले जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय न केवल जनता के बिजली बिल को कम करेगा बल्कि राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा। राजनीतिक प्रतिस्पर्धा एवं वैचारिक भिन्नता के बावजूद छत्तीसगढ़ विधानसभा ने मर्यादित और संसदीय आचरण की श्रेष्ठता को बरकरार रखा है। यह देश की अन्य विधानसभाओं के लिए अनुकरणीय है। 
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह आज विधानसभा के विशेष सत्र के समापन अवसर पर कहा कि’  सत्ता पक्ष की ओर 15 और विपक्ष की ओर से 10 सदस्यों इस तरह 25 वर्ष की विकास यात्रा में संयोग से 25 माननीय सदस्यों ने सदन में विशेष सत्र में अपनी बात रखी। मुझे इस बात की ख़ुशी है कि जिसकी बुनियाद हमारे पुरोधाओं ने रखी थी उसकी मर्यादा को यहाँ माननीय सदस्यों ने क़ायम रखा। उन्होंने कहा कि प्रेम प्रकाश पांडेय जी के विधानसभा अध्यक्ष रहते क्लोज़ डोर मीटिंग हुई। यह सदन केवल क़ानून नहीं बनाता बल्कि बेहतर भविष्य बनाता है। दिसम्बर 2023 को मेरे सार्वजनिक जीवन का वह क्षण था, जिसे मेरे लिए शब्दों में बाँध पाना संभव नहीं।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह ने आगे कहा कि आज जो दायित्व निभा रहा हूँ वह बड़ा दायित्व है। मैं इसके काबिल बनने का प्रयास कर रहा हूँ । विधानसभा अध्यक्ष का पद शक्ति का नहीं, उत्तरदायित्व का है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की विशेष पहचान बनी है। उनके नेतृत्व में राज्य और मुझे लगता है कि राष्ट्र की सबसे बड़ी समस्या माओवाद आतंक का समाधान होने जा रहा है । विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि किसानों को अल्पकालीन कृषि ऋण शून्य ब्याज दर मिलने और सड़क का नेटवर्क यही से पास हुआ । मेडिकल कॉलेज सहित जनहित के सभी विकास कार्यों और कार्यक्रमों का निर्णय यही से हुआ। उन्होंने कहा कि विधानसभा का शीतकालीन सत्र 14 दिसंबर से 17 दिसंबर 2025 तक आयोजित होगा। उन्होंने रजत जयंती वर्ष में विधानसभा के विशेष सत्र के समापन अवसर पर सदस्यों और मीडिया के साथियों ने सहयोग दिया उसके लिए धन्यवाद दिया।
 

मुख्यमंत्री साय ने विधानसभा के विशेष सत्र में पूर्व सदस्यों का किया पुण्य स्मरण

18-Nov-2025
रायपुर,। ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान छत्तीसगढ़ की रजत यात्रा में योगदान देने वाले तीन प्रमुख जनप्रतिनिधियों रजनी ताई उपासने, बनवारी लाल अग्रवाल और राधेश्याम शुक्ल का पुण्य स्मरण किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर की पहली महिला विधायक रजनी ताई उपासने राजनीतिक और सामाजिक जीवन की प्रेरक व्यक्तित्व थीं, उनका निधन प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है। बनवारी लाल अग्रवाल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष, दो बार के विधायक रहे और उनके जनसेवा से जुड़े कार्य, संगठन और समाज के प्रति समर्पण हम सब के लिए अनुकरणीय है। 
मुख्यमंत्री ने राधेश्याम शुक्ल के बारे में कहा कि वे अनुशासित एवं कर्मनिष्ठ जनप्रतिनिधि के रूप में याद किए जाएंगे। उनका पूरा जीवन जनसेवा को समर्पित रहा, उनके निधन से प्रदेश ने एक प्रतिबद्ध नेता को खो दिया है। मुख्यमंत्री साय ने तीनों दिवंगत विभूतियों की आत्मा की शांति और परिजनों को संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

 

राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर मुख्यमंत्री साय की बधाई— निष्पक्ष पत्रकारिता को बताया लोकतंत्र की आधारशिला

17-Nov-2025
रायपुर,  ( शोर संदेश )। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस 16 नवंबर के अवसर पर मीडिया जगत से जुड़े सभी लोगों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हमारे लोकतंत्र की विशेषता और आधारशिला है। निष्पक्ष प्रेस और निर्भीक पत्रकारिता स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। मीडिया नागरिकों को उनके अधिकार और दायित्व के प्रति सचेत कर देशहित व लोकहित के प्रति जागरूक करता  है। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय प्रेस दिवस भारत जैसे जीवंत लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रेस के महत्व और योगदान को याद करने का दिन है।  
मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर आशा व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया अपनी प्रखरता, संवेदनशीलता और सत्यनिष्ठा के साथ लोकतंत्र के पथ को और अधिक प्रकाशमान करता रहेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 48वें रावत नाचा महोत्सव में हुए शामिल, पारंपरिक वेशभूषा में बढ़ाया कलाकारों का उत्साह

16-Nov-2025
  रायपुर,। ( शोर संदेश )   बिलासपुर के लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में 48वें रावत नाचा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। नाचा महोत्सव में शामिल होने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय लाल बहादुर शास्त्री शाला प्रांगण पहुंचे। आगमन पर महोत्सव के संरक्षक कालीचरण यादव एवं समिति के पदाधिकारियों द्वारा पुष्पहार पहनाकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया गया। इसके पश्चात मुख्यमंत्री एवं अतिथियों ने भगवान श्रीकृष्ण के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह, बिल्हा विधायक  धरमलाल कौशिक, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, चंद्रपुर विधायक रामकुमार यादव, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया तथा महापौर पूजा विधानी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पारंपरिक रावत नाचा वेशभूषा में मंच पर पहुंचे और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि “यदुवंशी समाज वह समाज है, जहां प्रभु श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। छत्तीसगढ़ की नृत्य–गायन परंपरा हमारी सांस्कृतिक समृद्धि और एकता का सजीव प्रतीक है।” मुख्यमंत्री ने ‘तेल फूल में लइका बाढ़े…’ दोहा गाकर यदुवंशी समाज एवं नर्तन दलों को आशीर्वचन भी दिया।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने रावत नाचा को यदुवंशी समाज के शौर्य, संस्कृति और कला का अप्रतिम प्रदर्शन बताया तथा मंच से दोहे गाकर सभी को शुभकामनाएँ दीं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि “48 वर्षों से इस गौरवशाली परंपरा को बनाए रखना समाज की एकजुटता, अनुशासन और सांस्कृतिक गर्व का प्रमाण है।” उन्होंने समस्त समाज एवं नर्तक दलों को शुभकामनाएँ दीं।
बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि “रावत नाचा बिलासपुर की 48 वर्षों की गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर है, जिसका संरक्षण समिति द्वारा निरंतर किया जा रहा है। समाज के मंगल और सद्भाव के लिए यदि कोई समाज सतत प्रयासरत है, तो वह यादव समाज है।” उन्होंने सभी को महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि “बिलासा की पावन धरा पर रावत नाचा महोत्सव का आयोजन होना सौभाग्य की बात है। यदुवंशी समाज के लोग घर–घर जाकर सर्व समाज की मंगलकामना करते हैं।” उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने हेतु मुख्यमंत्री का आभार जताया।
महोत्सव के संरक्षक डॉ. कालीचरण यादव ने स्वागत उद्बोधन देते हुए रावत नाचा की गौरवशाली परंपरा पर प्रकाश डाला और कहा कि पिछले 47 वर्षों से रावत नाचा महोत्सव यदुवंशी समाज की संस्कृति, सम्मान और सांस्कृतिक पहचान का मजबूत प्रतीक बना हुआ है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पारंपरिक वेशभूषा में राउत नाचा दलों के बीच पहुंचे और ढोल–नगाड़ों की गूंजती धुन पर उनके साथ झूमकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने नर्तक दलों की मनमोहक प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि रावत नाचा जैसी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी और हमारी परंपराओं को सदैव जीवित रखेगी।

 

मुख्यमंत्री साय ने रघुराज स्टेडियम में गोंड राजा रघुराज सिंह की आदमकद प्रतिमा का किया अनावरण

16-Nov-2025
बिलासपुर। ( शोर संदेश )   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को बिलासपुर प्रवास के दौरान शहर के मध्य स्थित रघुराज स्टेडियम में दानदाता गोंड राजा रघुराज सिंह जगत की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। पंडरिया जमींदारी के राजा रघुराज सिंह जगत द्वारा शहर के बीचोबीच दान की गई लगभग 5 एकड़  भूमि पर इस ऐतिहासिक स्टेडियम का निर्माण किया गया है। क्रिकेट सहित कई इनडोर खेल प्रतियोगिताएं इसमें आयोजित होती हैं। मालूम हो कि अविभाजित बिलासपुर जिले की पश्चिम सीमा में पंडरिया जमींदारी शामिल थी। वर्ष 1958 में यहां के राजा रघुराज सिंह जगत ने बिलासपुर शहर के बीचोबीच स्थित अपनी बेशकीमती जमीन खेलों के विकास के लिए दान कर दी थी। खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उनके द्वारा दान में दी गई भूमि पर स्टेडियम बना है। फिजिकल कल्चरल सोसाइटी फिलहाल इसकी देखरेख करती है। राजा रघुराज सिंह क्रिकेट स्टेडियम कई रणजी मैचों का गवाह रह चुका है । स्टेडियम में 1978, 1979 और 1981 में विदर्भ क्रिकेट टीम के खिलाफ मध्य प्रदेश क्रिकेट टीम और रेलवे क्रिकेट टीम के खिलाफ तीन रणजी मैचों की मेजबानी भी कर चुका है। इसके अलावा यहां कई राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय मैच खेल चुके खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्टेडियम में खिलाड़ियों से मिलकर उनका उत्साह बढ़ाया। 
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव,  विधायक धरमलाल कौशिक, अमर अग्रवाल, धर्मजीत सिंह,सुशांत शुक्ला,  महापौर पूजा विधानी, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


 

कोनी में आधुनिक संभागायुक्त कार्यालय भवन का मुख्यमंत्री साय ने लोकार्पण किया

16-Nov-2025
रायपुर । ( शोर संदेश )   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर के कोनी क्षेत्र में नवीन संभागायुक्त कार्यालय भवन का लोकार्पण किया। लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस सर्वसुविधायुक्त भवन का निर्माण अरपा नदी के तट पर लगभग ढाई एकड़ क्षेत्र में किया गया है। 
उल्लेखनीय है कि संभागायुक्त कार्यालय भवन में बेसमेंट सहित भूतल तथा प्रथम तल का निर्माण किया गया है। प्रत्येक तल का निर्माण क्षेत्र 1620 वर्गमीटर है। भूतल में 10 कक्ष और एक विशाल हॉल निर्मित किए गए हैं। इसी प्रकार प्रथम तल में 12 कक्ष, एक हॉल और अलग से प्रसाधन की व्यवस्था की गई है। भवन में संभागायुक्त एवं अपर आयुक्त के कक्ष, न्यायालय कक्ष, बैठक कक्ष तथा उपायुक्त (राजस्व), विकास, लेखा अधिकारी के कार्यालय कक्षों के साथ पृथक स्टाफ रूम भी शामिल हैं। नए भवन में अधिवक्ताओं और पक्षकारों की सुविधाओं का भी समुचित ध्यान रखा गया है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, विधायक धरमलाल कौशिक, अमर अग्रवाल, धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला, अटल श्रीवास्तव, दिलीप लहरिया, महापौर पूजा विधानी, संभागायुक्त सुनील जैन, आईजी संजीव शुक्ला, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
 

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सिंचाई परियोजना मंडल की 33वीं बैठक, 14 नई परियोजनाओं को मिली सैद्धांतिक मंजूरी

15-Nov-2025
रायपुर, ( शोर संदेश )। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में  मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल की 33वीं तथा वर्तमान सरकार के कार्यकाल की पहली बैठक संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश की सिंचाई क्षमता बढ़ाने, भूजल स्तर सुधारने और शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को सुदृढ़ बनाने पर विस्तृत विमर्श किया गया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के लिए 14 नई परियोजनाओं को सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों की आय में वृद्धि और कृषि उत्पादन बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से सिंचाई नेटवर्क का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सिंचाई रकबा बढ़ने से न केवल किसानों को लाभ मिलेगा बल्कि भूजल स्तर में सुधार होगा और पेयजल आपूर्ति को बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बैठक में सरगुजा, बस्तर सहित मैदानी इलाकों तक सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर व्यापक चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने सभी परियोजनाओं की रूपरेखा, लागत और उनके लाभों की विस्तृत जानकारी ली और कहा कि प्रदेशभर में संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए इन परियोजनाओं को गति प्रदान की जाएगी।
 गौरतलब है कि इन परियोजनाओं के माध्यम प्रदेश में लगभग 01 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी। इन परियोजनाओं में बस्तर जिले के अंतर्गत देउरगांव बैराज सह उदवहन सिंचाई परियोजना, बस्तर जिले के अंतर्गत मटनार बैराज सह उद्धवहन सिंचाई परियोजना, रायपुर जिले के विकासखण्ड आरंग में महानदी पर मोहमेला सिरपुर बैराज योजना, अहिरन से गाजरीनाला जल संवर्धन निर्माण (खारंग अहिरन लिंक परियोजना) कार्य, बिलासपुर जिले के कोटा विकासखण्ड अंतर्गत छपराटोला फीडर जलाशय परियोजना, कुम्हारी जलाशय जल क्षमता वृद्धि (जलावर्धन) योजना के अंतर्गत समोदा बैराज से कुम्हारी जलाशय तक पाईप लाईन बिछाने का कार्य, दुर्ग जिले के विकासखण्ड धमधा के सहगांव उद्धवहन सिंचाई योजना, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में लमती फीडर जलाशय एवं नहरों का निर्माण कार्य, राजनांदगांव जिले में स्थित मोहारा एनीकट में पेय जल हेतु चौकी एनीकट से मोहारा एनीकट तक पाईप लाईन के माध्यम से जल प्रदाय योजना, जशपुर जिले के मैनी नदी में बगिया बैराज सह दाबयुक्त उद्ववहन सिंचाई योजना की स्वीकृति,
जांजगीर-चांपा जिले के हसदेव बांगों परियोजना अंतर्गत वृहद परियोजना ऑगमेण्टेशन के अंतर्गत परसाही दाबयुक्त उद्ववहन सिंचाई परियोजना, कोरबा जिले के अंतर्गत मड़वारानी बैराज निर्माण सह उदवहन सिंचाई योजना, गरियाबंद जिले के पैरी परियोजना के अंतर्गत सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक नहर (पाईप लाईन) योजना तथा बिलासपुर जिले के खारंग जलाशय योजना के बाएं तट नहर के आर्वधन हेतु पाराघाट व्यपवर्तन योजना से उद्धवहन फीडर सिंचाई का निर्माण कार्य शामिल किया गया है। 
बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री ओ पी चौधरी, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, ऊर्जा  विभाग के सचिव रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश कुमार बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, प्रमुख अभियंता इंद्रजीत उइके सहित जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद रहे।
 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आमजन की समस्याएँ सुनीं, मौके पर दिए त्वरित समाधान

14-Nov-2025
रायपुर (शोर संदेश)। मुख्यमंत्री निवास में गुरुवार को आयोजित जनदर्शन एक बार फिर लोगों की उम्मीदों का केंद्र बना रहा। अलग-अलग जिलों से आए लोगों ने अपनी समस्याएँ लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने हर एक आवेदक की बात ध्यान से सुनी और अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
पहली ही मुलाकात में रायपुर की 11 वर्षीय पूनम सभी का ध्यान खींच ले गई। सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रही पूनम को मुख्यमंत्री ने विशेष विद्यालय में दाखिला और छात्रवृत्ति देने की घोषणा की।
जनदर्शन के दौरान भिलाई के कलाकार अंकुश देवांगन अपनी अनोखी संगमरमर कला लेकर पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दुनिया की सबसे छोटी संगमरमर प्रतिमा भेंट की। फ्रेम में लगा माइक्रोस्कोपिक लेंस इस कलाकृति को और खास बनाता है। मुख्यमंत्री ने उनकी कला की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के कलाकारों में अद्भुत प्रतिभा है।
रायपुर के दिव्यांग युवक मनीष खुंटे भी अपनी बैटरी चालित स्कूटी से मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। कुछ दिन पहले ही उन्हें इसी जनदर्शन में स्कूटी स्वीकृत की गई थी। मनीष ने मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया और उनके साथ सेल्फी भी ली। मनीष की मुस्कान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
खेल क्षेत्र से आए युवाओं ने भी मुख्यमंत्री से सहायता की मांग रखी। वूमेन्स सेल्फ डिफेंस ऑर्गनाइजेशन के खिलाड़ियों ने स्वेच्छानुदान का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। खिलाड़ियों ने बताया कि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इसी दौरान अभनपुर के दिव्यांग रग्बी खिलाड़ी पिंटू साहू ने व्हीलचेयर और खेल सामग्री खरीदने के लिए सहायता मांगी। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही 90 हजार रुपए की आर्थिक मदद स्वीकृत की। पिंटू ने कहा कि यह सहयोग उनके खेल करियर के लिए नई शुरुआत है।
जनदर्शन में कई महिलाएँ, बुजुर्ग और किसान भी पहुंचे। आवास, स्वास्थ्य उपचार, सामाजिक सुरक्षा, छात्रवृत्ति और रोजगार से जुड़े आवेदन आए। मुख्यमंत्री ने सभी मामलों को प्राथमिकता से निपटाने को कहा। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी आवेदक निराश न लौटे।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जनदर्शन प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “हम कोशिश करते हैं कि अधिक से अधिक लोगों की समस्याएँ सुनकर मौके पर ही उसका समाधान किया जाए।"
जनदर्शन के समापन तक बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के त्वरित और व्यवहारिक समाधान से संतुष्ट दिखाई दिए। लोगों ने कहा कि यह व्यवस्था उन्हें सरकार से सीधे जुड़ने का विश्वास दिलाती है—जहाँ उनकी बात न सिर्फ सुनी जाती है, बल्कि उसी समय समाधान की दिशा में ठोस कदम भी उठाए जाते हैं। इससे आमजन में भरोसा, पारदर्शिता और सहभागिता की भावना और मजबूत हुई है।
 



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