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पिछड़ा वर्ग कल्याण को मिलेगा नया ढांचा: अलग संचालनालय गठन की तैयारी

19-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में विधानसभा स्थित समिति कक्ष में राज्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद की बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए प्रदेश में अलग से संचालनालय गठन,नवीन हॉस्टल भवन निर्माण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विकास संबंधित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा हमारी सरकार पिछड़ा वर्ग समाज के विकास लिए प्रतिबद्ध है। हम उनकी चिंता कर नये विकास का कार्य कर रही है। राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग की बड़ी संख्या निवास करती है, जिनमें  लगभग 95 जातियां एवं उनके उपसमूह निवासरत है। हमारी सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के शैक्षणिक एवं सामाजिक आर्थिक विकास की चुनौतियों के प्रति संवेदनशील है। 
हमारी सरकार समाज के महत्वपूर्ण किन्तु विकास में पीछे रह गये इन वर्गों के सामाजिक सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष बल देते हुए समग्र विकास के लिए कृत संकल्पित है।
संकल्प को पूर्ण करने हेतु हमारी सरकार ने पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग,मंत्रालय गठित किया है, जिससे इन वर्गों के विकास के लिए गति प्रदान की जा सके तथा इनके लिए नवाचार योजनाओं को लागू किया जा सके। इसके अतिरिक्त इन वर्गों के समस्याओं पर सम्यक रुप से विचार कर समस्या का समाधान किया जा सके, जिससे यह समाज भी विकास की मुख्य धारा में शामिल हो सके। 
पिछड़ा वर्ग के विकास हेतु अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया है तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग भी गठित किया गया है। इसके लिए लौहशिल्प विकास बोर्ड, रजककार विकास बोर्ड तथा तेलघानी विकास बोर्ड भी गठित किया गया है।
इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु विभाग ने नवीन मुख्य बजट में इन वर्गों के शैक्षणिक विकास हेतु छात्रावास, आश्रम, प्रयास आवासीय विद्यालय संस्थान स्थापित किये गये है। इसके अतिरिक्त पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति को ऑनलाईन पोर्टल के माध्यम से छात्रवृत्ति विद्यार्थी के खाते में सीधे भुगतान किया जा रहा है। इस हेतु रुपये 150 करोड़ का प्रावधान किया गया है। भुगतान की व्यवस्था को समय-सीमा में पूर्ण करने हेतु नवाचार करते हुए निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से छात्रवृत्ति की स्वीकृति एवं भुगतान चालू वर्ष में ही किये जाने की व्यवस्था की गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों के प्रशिक्षण हेतु आर्थिक सहायता की योजना मुख्य बजट में लाई गई है, जिसके माध्यम से इंजीनियरिंग, मेडिकल, यूपीएससी, सीजीपीएससी, एसएससी, रेल्वे, बैंकिंग आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों के छ.ग. राज्य के भौगोलिक एवं प्राकृतिक संरचनाओं के अध्ययन तथा सांस्कृतिक धरोहरों के संबंध में अभिरुचि के विकास हेतु शैक्षणिक भ्रमण के लिए प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि हमने मुख्य बजट में नवीन योजना मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना लाई गई है, जिसके माध्यम से जिन विद्यार्थियों को छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता है, उनको अध्ययन के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए वर्तमान में 55 विभागीय छात्रावास स्वीकृत है। वर्तमान में नवीन बजट में 06 जिलों (रायगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी भरतपुर, धमतरी, रायपुर, जशपुर) में अन्य पिछड़ा वर्ग पो. मैट्रिक छात्रावास स्वीकृत किये गये है।
इस दौरान राज्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
उक्त बैठक में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल,राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, मुख्य सचिव विकासशील,मुख्यमंत्री के प्रमुख  सचिव सुबोध सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि गण एवं अधिकारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विभागों के लिए 10 हजार 617 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें पारित

18-Mar-2026
रायपुर,। ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विभागों से संबंधित 10 हजार 617 करोड़ 73 लाख 49 हजार रूपए की अनुदान मांगे विधानसभा में पारित की गई। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग के लिए 612 करोड़ 29 लाख 20 हजार रूपए, सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित अन्य व्यय 30 करोड़ 92 लाख रूपए, जल संसाधन विभाग के लिए 3 हजार 105  करोड़ 11 लाख 80 हजार रूपए, खनिज साधन विभाग से संबंधित व्यय 1145 करोड़ 89 लाख 99 हजार रूपए, विमानन विभाग से संबंधित व्यय 314 करोड़ 99 लाख 90 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग 416 करोड़ 99 लाख 99 हजार रूपए, सुशासन एवं अभिसरण विभाग से संबंधित व्यय 77 करोड़ रूपए, जनसम्पर्क विभाग से संबंधित व्यय 469 करोड़ 99 लाख रूपए, ऊर्जा विभाग से संबंधित व्यय 4236 करोड़ 01 लाख 61 हजार रूपए, जिला परियोजनाओं से संबंधित व्यय 208 करोड़ 50 लाख रूपए शामिल हैं। 
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब में कहा कि पिछले दो वर्षों से राज्य सरकार संकल्पित भाव से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटी है और विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में यात्रा प्रारंभ हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को साकार करने में बजट प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। 
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में अपने विभागों से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कहा कि पहले दो बजटों की थीम ‘ज्ञान’ और ‘गति’ थी, जबकि इस बार बजट की थीम ‘संकल्प’ रखी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस और डिजिटल गवर्नेंस की नीति अपनाकर व्यवस्थागत लिकेज समाप्त किए हैं, जिसके कारण आम जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा अब सीधे जनकल्याण में खर्च हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में आबकारी विभाग का राजस्व 5 हजार 110 करोड़ रुपए था, जो वर्तमान सरकार में बढ़कर 11 हजार करोड़ रुपए अनुमानित है। यह अंतर फर्जीवाड़े पर रोक लगने के कारण आया है।
मुख्यमंत्री साय ने नक्सलवाद के विरुद्ध चल रहे अभियान को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने माओवादी आतंकवाद के अंत का लक्ष्य तय कर उसी दिशा में प्रभावी कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर लोकतंत्र और संविधान पर विश्वास जताया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए उत्सव का क्षण बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्रीअमित शाह के मार्गदर्शन, जवानों की वीरता और प्रदेशवासियों के विश्वास से राज्य माओवादी हिंसा के अंधकार से बाहर निकल रहा है। अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक तंत्र को मजबूत कर शांति, पुनर्निर्माण और समग्र विकास के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में खनिज राजस्व की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में 12 हजार 305 करोड़ रुपए रहा वहीं वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व बढ़कर 14 हजार 592 करोड़ रुपए हो गया है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 11 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक 17 हजार करोड़ रुपए राजस्व प्राप्ति का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग किसानों, माताओं-बहनों और आम नागरिकों के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा रहा है। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमएफ को पुनः पारदर्शी बनाते हुए दो वर्षों में 4 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई और 19 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए। डीएमएफ कार्यों का सोशल ऑडिट भी कराया जा रहा है तथा शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया गया है। खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को भी गति दी गई है और अब तक 62 ब्लॉकों की सफल नीलामी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ, क्रिटिकल और स्ट्रैटजिक खनिजों के अन्वेषण के लिए प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से एमओयू किए गए हैं, जिससे क्लीन एनर्जी और नए निवेश के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुव्यवस्थित खनन के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राज्य के कुल वन क्षेत्र के मात्र 0.96 प्रतिशत क्षेत्र में खनिज रियायतें स्वीकृत हैं और केवल 0.24 प्रतिशत वन क्षेत्र में ही खनन कार्य की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि खनन कार्यों के एवज में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत दो वर्षों में करीब 7 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। 
भारतीय वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि खनिज विभाग में पारदर्शिता के लिए ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल तथा डीएमएफ पोर्टल 2.0 लागू किया गया है। आम जनता को रियायती दरों पर रेत उपलब्ध कराने और माफिया पर अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत नियम 2025 लागू किए गए हैं तथा रेत की ई-नीलामी शुरू की गई है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में प्रदेश एक प्रमुख ऊर्जा प्रदाता के रूप में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पावर प्लांट्स की कुल विद्युत क्षमता 30 हजार मेगावाट है, जिसमें ताप विद्युत संयंत्रों की क्षमता 24 हजार मेगावाट है। राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता और प्लांट लोड फैक्टर देश के अग्रणी राज्यों में है। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। एनर्जी समिट के माध्यम से लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और 32 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं से एमओयू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों का काम प्रगति पर है तथा 8300 मेगावाट क्षमता की पम्प स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं के लिए 6 स्थलों का चिन्हांकन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर बिजली की सतत आपूर्ति सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक निःशुल्क बिजली देने हेतु 354 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के तहत 42 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक की खपत पर राहत देने के लिए 800 करोड़ रुपए, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े राज्य अनुदान के लिए 400 करोड़ रुपए और डॉ. खूबचंद बघेल किसान विद्युत सहायता योजना के तहत 8 लाख 83 हजार कृषि पंप उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने के लिए 5 हजार 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के अनुदान के कारण सोलर प्लांट्स की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है और उपभोक्ता अब केवल बिजली उपभोक्ता नहीं, बल्कि बिजली उत्पादक भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का अधिकाधिक लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी विकास का उजाला पहुंच रहा है और नियद नेल्ला नार योजना के तहत 158 गांवों को शतप्रतिशत विद्युतीकृत किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार ने दो वर्षों में 11 हजार 107 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजनाएं स्वीकृत की हैं और 25 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया है। बंद पड़ी सिंचाई योजनाओं को अटल सिंचाई योजना के माध्यम से फिर से शुरू किया गया है। 115 परियोजनाओं के पूर्ण होने से 76 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा। इस बार बजट में 4 हजार 400 करोड़ रुपए से अधिक राशि नई सिंचाई योजनाओं और उनके अनुरक्षण के लिए रखी गई है। उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में शामिल योजनाओं से 1 लाख 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है। बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने मटनार और देऊरगांव में बैराज तथा 68 किलोमीटर नहर निर्माण का प्रावधान बताया, जिससे 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित होगी। उन्होंने कहा कि ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ के मंत्र के अनुरूप दाबयुक्त सिंचाई प्रणाली को अपनाया जा रहा है और जल सूचना विज्ञान केंद्र स्थापित कर जल प्रबंधन को वैज्ञानिक आधार दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रालय से लेकर मैदानी अमले तक कार्य संस्कृति में बदलाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है। बायोमेट्रिक अटेंडेंस, ई-ऑफिस, ई-एचआरएमएस और स्पैरो जैसी व्यवस्थाओं ने शासन को अधिक जवाबदेह, त्वरित और पारदर्शी बनाया है। उन्होंने बताया कि 50 हजार से अधिक अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस में और 65 हजार से अधिक कर्मचारी ई-एचआरएमएस प्रणाली में ऑनबोर्ड हो चुके हैं। आई-गॉट कर्मयोगी के माध्यम से 6 लाख कर्मचारियों के प्रशिक्षण की कार्ययोजना पर काम हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी के जरिए प्रशासनिक तंत्र को ट्रांसफॉर्म किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सुशासन की दिशा में राज्य सरकार ने सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को और प्रभावी बनाने, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल से योजनाओं की सटीक निगरानी करने, ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराने तथा नई पीढ़ी के उत्कृष्ट लोकप्रशासक तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप जैसी पहलें की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के लिए 22 करोड़ रुपए, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के लिए 5 करोड़ रुपए तथा मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप के लिए 8 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज का युग आईटी और एआई का है और छत्तीसगढ़ इस डिजिटल क्रांति में अग्रणी बने, इसके लिए 417 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री एआई मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए की राशि रखी गई है, जिसके माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों, आईटीआई और पॉलीटेक्निक में एआई डेटा लैब्स और एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे युवा पीढ़ी को नई तकनीक से जुड़ने का अवसर मिलेगा और शासकीय सेवाएं भी अधिक सरल और प्रभावी होंगी। डिजिटल कनेक्टिविटी का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि दो वर्षों में 936 मोबाइल टावर स्वीकृत हुए हैं और 751 टावर ऑन एयर हो चुके हैं। भारत नेट परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों में हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए 3900 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने के लिए 36 आईएनसी-सीजी इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ की उड़ान को नई ऊंचाई देने के लिए राज्य सरकार विमानन अधोसंरचना का विस्तार कर रही है। बिलासपुर एयरपोर्ट के 3सी-आईएफआर अपग्रेडेशन से अब वहां नाइट लैंडिंग और चौबीस घंटे विमान सेवाओं का संचालन संभव होगा। इंटरनेशनल कार्गाे टर्मिनल के लिए एमओयू किया गया है, जिससे कारोबारियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर एयरपोर्ट में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। सीजी वायु योजना के माध्यम से बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर से हवाई सेवाओं का विस्तार होगा, जिसके लिए 30 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। रायगढ़ और कोरबा की हवाई पट्टियों के उन्नयन पर भी सरकार का विशेष फोकस है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ सांस्कृतिक प्रगति की भी पक्षधर है। पत्रकारों के लिए एक्सपोजर विजिट के माध्यम से उन्हें देश के विभिन्न राज्यों में अध्ययन भ्रमण का अवसर दिया गया, जिसमें दूरस्थ क्षेत्रों और महिला पत्रकारों को भी शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन राज्य की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देता है और इस बार भी इसके लिए बजट प्रावधान किया गया है। साथ ही प्रवासी छत्तीसगढ़िया सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया है, जिससे प्रदेश के बाहर अपनी पहचान बनाने वाले छत्तीसगढ़िया लोगों के अनुभवों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी।




 

मुख्यमंत्री साय ने रामानुजगंज के ओमप्रकाश जायसवाल के पिताजी के निधन पर सांत्वना देने पहुंचे

16-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रविवार को रामानुजगंज पहुंचे उन्होंने ओमप्रकाश जायसवाल के पिताजी स्व. जागेश्वर प्रसाद जायसवाल के निधन पर  उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। उन्होंने परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। ज्ञातव्य है कि विगत 05 मार्च 2026 को जागेश्वर प्रसाद जायसवाल का निधन हो गया था। 
इस दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, अखिलेश सोनी, अन्य जनप्रतिनिधिगण, पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा दीपक झा, कलेक्टर राजेन्द्र कटारा,  पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर, वनमण्डलाधिकारी आलोक बाजपेई, जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर सहित जायसवाल के परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मिलिट्री पाइप बैंड प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान: मुख्यमंत्री साय ने द ग्रेट इंडिया सैनिक स्कूल के छात्रों को दी बधाई और शुभकामनाएं

16-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश )   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में द ग्रेट इंडिया सैनिक स्कूल रायपुर के छात्रों ने सौजन्य मुलाकात की।
मुख्यमंत्री साय ने छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की मिलिट्री पाइप बैंड प्रतियोगिता में तृतीय पुरस्कार प्राप्त करने पर बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि आपकी इस उपलब्धि से न केवल आपके विद्यालय, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। यह राज्य के लिए गर्व का विषय और एक बड़ी उपलब्धि है।
इस अवसर पर स्कूल के संचालक सिद्धार्थ सिंह, कमांडेंट (सेवानिवृत्त) कर्नल आर.के. वर्मा सहित विद्यालय के अन्य शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष शिक्षा मंत्रालय एवं रक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर मिलिट्री पाइप बैंड प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिसमें देशभर के सैनिक स्कूल भाग लेते हैं। छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार द ग्रेट इंडिया सैनिक स्कूल, रायपुर ने इस प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त किया है।
यह प्रतियोगिता जिला स्तर से प्रारंभ होकर राज्य स्तरीय, जोन स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर तक आयोजित की जाती है।छत्तीसगढ़ दक्षिण जोन का हिस्सा है, जिसमें केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के सैनिक स्कूल शामिल होते हैं।

बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में हो रहे हैं कामयाब: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

15-Mar-2026
रायपुर,। ( शोर संदेश ) हमारी सरकार जनजातीय समाज के भविष्य को संवारने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से अब हम बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में कामयाब हो रहे हैं। बस्तर पिछले लगभग 40 वर्षों से विकास से अछूता रहा और लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित था, लेकिन अब परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश जल्द ही नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे जनजातीय समाज में अमन-चैन के साथ-साथ खुशहाली और समृद्धि का नया दौर आएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘आदि परब’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘आदि परब’ की थीम ‘परंपरा से पहचान तक’ रखी गई है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा मंच देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकारों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की 43 विभिन्न जनजातियों के लोग एक मंच पर एकत्रित हुए, जो हमारी सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने इस सफल आयोजन के लिए विभाग की पूरी टीम को बधाई दी तथा ‘आदि परब’ चित्रकला और परिधान को मिले ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ पुरस्कार के लिए भी शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से टीआरटीआई परिसर में 5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय बाहुल्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में इस प्रकार के आयोजन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की व्यापकता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में पारंपरिक चित्रकला, शिल्प, हाट-बाजार और पारंपरिक व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। हमारी लोक परंपराएँ ही हमारी असली पहचान हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां स्थित दो संग्रहालयों में से एक शहीद वीर नारायण सिंह जी की जीवनगाथा को समर्पित है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के पहले डिजिटल ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ का लोकार्पण किया था, जो हम सभी के लिए गर्व की बात है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे जनजातीय संग्रहालय में जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कारों सहित जनजातीय जीवन के विभिन्न अवसरों पर पहने जाने वाले पारंपरिक परिधानों और रीति-रिवाजों का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया गया है। आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को सहेजना होगा।
उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि आज देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे नेतृत्व के कारण आदिवासी समाज का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के लिए आदिवासी समाज की बेटी  द्रौपदी मुर्मु को अवसर मिला, जो पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ में चिन्हित 6 हजार 691 बसाहटों का कायाकल्प किया जा रहा है। अति पिछड़ी जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को सड़क, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना के तहत प्रदेश की 2300 से अधिक पीवीटीजी बसाहटों के 56 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना (आपका अच्छा गांव) हमारी सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के जनजातीय गांवों तक सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही इन क्षेत्रों के लोगों को अब सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।
इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद जनजातीय समाज के गौरव के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। इनमें शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय और जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित संग्रहालय प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि यह देश का ऐसा डिजिटल संग्रहालय है जिसका अध्ययन करने देश और विदेश से लोग आ रहे हैं। संग्रहालय में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले जनजातीय नायकों और आंदोलनों की जीवंत प्रस्तुति की गई है, जो समाज के गौरव को बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि सरकार 3357 आश्रम-छात्रावास, 17 प्रयास विद्यालय और 75 एकलव्य विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय वर्ग के भविष्य को संवारने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने एफआरए के तहत 4 लाख 25 हजार 425 हितग्राहियों को 3.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पट्टा प्रदान किया है।
इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने ‘परंपरा से पहचान तक’ की थीम पर आयोजित ‘आदि परब’ के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हमने नक्सलवाद की पीड़ा को नजदीक से देखा है और अब डबल इंजन की सरकार के दृढ़ संकल्प से नक्सलवाद समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त कराने में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने ‘आदि परब’ के माध्यम से जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को दुनिया तक पहुंचाने के इस प्रयास की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले जनजातीय समाज के अंकित साकिनी और डायमंड ध्रुव को सम्मानित किया। साथ ही प्रयास आवासीय विद्यालय के उन विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया जिनका चयन NIT और IIT में हुआ है। मुख्यमंत्री ने ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए चेक भी प्रदान किए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने सरगुजा क्षेत्र के जनजातीय इतिहास पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी किया तथा पारंपरिक वेशभूषा में सजे जनजातीय युवाओं द्वारा प्रस्तुत अटायर शो का आनंद लिया।
कार्यक्रम में विधायक प्रबोध मिंज एवं इन्द्रकुमार साहू, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ जनजातीय आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मण्डावी, छत्तीसगढ़ राज्य औषधि एवं पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, आदिम विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, आयुक्त डॉ. सारंश मित्तर, टीआरटीआई की संचालक हिना नेताम सहित बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के गणमान्यजन उपस्थित थे।

भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा, प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

14-Mar-2026
रायपुर । ( शोर संदेश ) छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और अब हमारा राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। 
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हरित सम्मेलन की उपयोगिता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसके माध्यम से पॉलिसी मेकिंग से जुड़े लोग, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थान, शोधकर्ता और पर्यावरणविद एक मंच पर आकर महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु संकट लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह आवश्यक है कि हम पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर केवल चिंतन ही न करें, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतारें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार हमेशा से विरासत के साथ विकास की पक्षधर रही है। पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली हमारी हजारों वर्षों पुरानी परंपरा रही है और उसकी रक्षा के लिए सरकार नीतिगत स्तर पर लगातार ठोस कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की नीतियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों की जागरूकता और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी का परिणाम है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य में सोलर रूफटॉप योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को ऊर्जादाता बनाया जा रहा है और बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं उभर रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए संसाधनों का उपयोग करते समय पर्यावरण और धरती के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है और लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है। साय ने बताया कि वनांचल में वृक्षों को सरना (देवता) के रूप में पूजा जाता है और सरना को राजस्व रिकॉर्ड में भी देवस्थल के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव और उसके संरक्षण का भाव जनजातीय समाज से सहज ही सीखा जा सकता है।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में हरित पहल पर विशेष जोर दिया गया है और इस दिशा में कार्य करने वाले उद्योगों को विशेष रियायतें भी दी जा रही हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट के मंच से प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने तथा इसकी शुरुआत स्वयं से करने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों के संकलन पर आधारित पुस्तक “एब्स्ट्रेक्ट”, सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं पर आधारित “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” तथा जनजातीय कहानियों और परम्पराओं पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” का विमोचन किया।
इस अवसर पर मेघालय के लोकायुक्त सी पी मारक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, पीसीसीएफ व्ही श्रीनिवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष शंखदीप चौधरी, विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, प्रबुद्धजन, स्कॉलर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किश्त जारी: छत्तीसगढ़ के 24 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 498.83 करोड़

14-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश )  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम की राजधानी गुवाहाटी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किश्त जारी की। इस दौरान देशभर के 9 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में लगभग 18 हजार 640 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के 24 लाख 71 हजार किसानों के खातों में 498.83 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित प्रधानमंत्री किसान निधि सम्मान योजना राशि अंतरण एवं पीएम किसान उत्सव दिवस कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन प्रदेश के किसान भाइयों और बहनों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों को हर वर्ष तीन किश्तों में कुल 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जो किसानों के परिश्रम और उनके योगदान के सम्मान का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों को अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 11 हजार 283 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सरकार बनने के बाद सबसे पहले किसानों को बोनस राशि प्रदान की गई और 13 लाख किसानों के खातों में 3 हजार 716 करोड़ रुपये अंतरित किए गए।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के 48 घंटे के भीतर किसानों के खातों में भुगतान सुनिश्चित किया गया। इसके साथ ही कृषक उन्नति योजना के तहत 25 लाख से अधिक किसानों के खातों में 10 हजार 324 करोड़ रुपये की राशि होली से पहले अंतरित की गई।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। सिंचाई के लिए कृषि पंपों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके लिए इस वर्ष के बजट में 5 हजार 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से दो वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये की सिंचाई 
परियोजना भी शुरू की गई है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। उन्होंने किसानों से धान के साथ-साथ अन्य फसलों की खेती की ओर भी ध्यान देने की अपील की, जिससे पानी की बचत होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। धरसीवां विधायक अनुज शर्मा ने भी किसानों को संबोधित करते हुए बधाई दी।
इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, कृषि विभाग के संचालक राहुल देव,  छत्तीसगढ़ बीज विकास निगम के एमडी अजय अग्रवाल, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

बिजली उपभोक्ताओं की पीड़ा को दूर करेगी समाधान योजना : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

13-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश ) मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय स्थित सभागार से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किया और अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। साथ ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 2 हजार 931 हितग्राहियों को 8 करोड़ 79 लाख रुपए की सब्सिडी भी अंतरित की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बिजली आज हमारी मूलभूत जरूरतों में शामिल हो चुकी है और इसके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कई परिवार आर्थिक कारणों से समय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाते, जिससे सरचार्ज के कारण बकाया राशि बढ़ जाती है और पूरा भुगतान करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने समाधान योजना शुरू की है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान योजना के माध्यम से लंबे समय से बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाने वाले प्रदेश के निम्न एवं मध्यम आय वर्ग तथा कृषि उपभोक्ताओं को राहत देने की पहल की गई है। योजना के तहत प्रदेश के 28 लाख 42 हजार उपभोक्ताओं को कुल 757 करोड़ रुपए की राहत दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश के लगभग 18 हजार गांवों तक बिजली पहुंचाई गई, जिससे आजादी के बाद से अंधेरे में रहे गांव भी रोशन हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में हमारे अपने संसाधनों से लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और प्रदेशवासियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कोरोना काल में आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाए थे, जिससे बकाया राशि बढ़ गई थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की इस परेशानी को समझते हुए समाधान योजना लागू की है। 
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रति प्रदेश में लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है और अब तक लगभग 36 हजार लोग इससे जुड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि महिला स्व सहायता समूहों द्वारा सोलर पैनल वेंडर के रूप में कार्य किया जाना एक सकारात्मक पहल है।
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और घरेलू बिजली के अनावश्यक उपयोग से बचने की अपील की।  
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को समाधान योजना के लिए बधाई देते हुए निर्देश दिए कि शिविर लगाकर और व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को समाधान योजना से जोड़ा जाए।
उल्लेखनीय है कि योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं की तीन श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनमें 31 मार्च 2023 की स्थिति में निष्क्रिय उपभोक्ता, सक्रिय एकल बत्ती कनेक्शनधारी उपभोक्ता तथा सक्रिय अशासकीय घरेलू एवं अशासकीय कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। इन श्रेणियों के उपभोक्ताओं को विद्युत देयक जमा करने के लिए प्रोत्साहन के रूप में अधिभार की राशि में 100 प्रतिशत छूट तथा मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया गया है।
योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को पंजीयन कराना होगा और पंजीयन के समय बकाया राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत भुगतान करना अनिवार्य होगा। शेष राशि का भुगतान किस्तों में किया जा सकेगा और आगामी माह में कोई अधिभार नहीं लगेगा। यह योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी।
इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, रायपुर नगर निगम महापौर मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी और विद्युत उपभोक्ता उपस्थित थे।

 


मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SCR) की पहली बैठक आयोजित

12-Mar-2026
रायपुर। ( शोर संदेश )  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में विधानसभा परिसर स्थित उनके कार्यालय में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (स्टेट कैपिटल रीजन – SCR) की पहली बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्राधिकरण के उद्देश्य, कार्यप्रणाली, गतिविधियों तथा राजधानी क्षेत्र के समग्र और योजनाबद्ध विकास की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री साय ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण की परिकल्पना शहर की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार-वाणिज्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की पहली बैठक अत्यंत सार्थक रही है और विभिन्न विषयों पर हुई विस्तृत चर्चा के सकारात्मक परिणाम आने वाले समय में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजधानी रायपुर और आसपास के शहर तेजी से विकसित होते हुए एक बड़े शहरी क्षेत्र का रूप ले रहे हैं, इसलिए महानगरों की तर्ज पर इनके संतुलित और योजनाबद्ध विकास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्टेट कैपिटल रीजन की घोषणा से जनता की अपेक्षाएँ भी बढ़ी हैं और इन अपेक्षाओं को पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित योजना और समयसीमा के अनुरूप पूरे किए जाएं तथा प्रगति की नियमित रूप से उच्चस्तरीय समीक्षा सुनिश्चित की जाए।
बैठक में बताया गया कि राजधानी रायपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों को स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें रायपुर, दुर्ग-भिलाई, नवा रायपुर अटल नगर और आसपास के क्षेत्र शामिल होंगे। यह क्षेत्र बड़े महानगरों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा और भविष्य में छत्तीसगढ़ के विकास का एक प्रमुख ग्रोथ इंजन बनेगा।
बैठक में राजधानी क्षेत्र में क्षेत्रीय मोबिलिटी और लॉजिस्टिक्स के विकास, मेट्रो संचालन के लिए टेक्नो-इकोनॉमिक फिजिबिलिटी स्टडी, सर्वेक्षण कार्यों के संचालन तथा इसके लिए विशेषज्ञ सलाहकारों की नियुक्ति पर विचार किया गया। साथ ही प्राधिकरण के प्रशासकीय और वित्तीय अधिकारों के प्रत्यायोजन, ऑडिट सेवाओं के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट की नियुक्ति और प्लानिंग प्रभाग के लिए विशेषज्ञ सलाहकारों की सेवाएं लेने के प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।
बैठक में राजधानी क्षेत्र विकास एवं निवेश योजना तैयार करने की कार्ययोजना पर भी विचार किया गया। इसके अंतर्गत निवेश क्षेत्रों का विधिवत चिन्हांकन, आवश्यक सर्वेक्षण, अनुसंधान एवं अध्ययन तथा चरणबद्ध रूप से परियोजनाओं के क्रियान्वयन की रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही राजधानी क्षेत्र में भूमि विकास और आबंटन की प्रक्रिया को सरल बनाने के संबंध में भी आवश्यक निर्देश जारी करने पर सहमति बनी। बैठक में प्राधिकरण की प्रारंभिक गतिविधियों के लिए 27 करोड़ रुपये के प्रावधान की जानकारी भी दी गई।
बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंकित आनंद, नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., एनआरडीए के सीईओ चंदन कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि भौगोलिक दृष्टि से देश के मध्य में स्थित छत्तीसगढ़ व्यापार, वाणिज्य और उद्योग के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। स्टेट कैपिटल रीजन के विकास से राजधानी और आसपास के शहरों में योजनाबद्ध शहरी विस्तार, बेहतर परिवहन कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल

12-Mar-2026
 रायपुर,। ( शोर संदेश )  महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और सशक्तिकरण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना (PMMVY) के क्रियान्वयन की फरवरी 2026 की स्टेट-वाइज राष्ट्रीय रैंकिंग में छत्तीसगढ़ ने बड़े राज्यों की श्रेणी में देश में पहला स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया है। राज्य ने अन्य बड़े राज्यों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की है।
जारी रैंकिंग के अनुसार छत्तीसगढ़ ने 93.37 प्रतिशत नामांकन, 83.87 प्रतिशत स्वीकृति दर और 93.95 प्रतिशत शिकायतों के त्वरित समाधान के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वहीं 30 दिनों से अधिक लंबित प्रकरणों की दर मात्र 7.07 प्रतिशत और लंबित शिकायत दर 4.96 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो योजना के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन को दर्शाती है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ ने पिछले माह की तुलना में 6 स्थानों की छलांग लगाकर पहला स्थान प्राप्त किया है।
इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और मैदानी अमले को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है और छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान इस दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का प्रमाण है।
महिला एवं बाल विकास  मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि को राज्य के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए विभागीय टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के कुशल मार्गदर्शन और दूरदर्शी नेतृत्व के कारण ही छत्तीसगढ़ आज देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों-कर्मचारियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आपसी समन्वय, प्रतिबद्धता और समयबद्ध कार्यशैली के परिणामस्वरूप ही राज्य यह मुकाम हासिल कर पाया है।
मंत्री राजवाड़े ने विश्वास व्यक्त किया कि विभाग भविष्य में भी इसी ऊर्जा और समर्पण के साथ कार्य करते हुए इस प्रथम स्थान को बनाए रखेगा तथा प्रदेश की प्रत्येक पात्र गर्भवती महिला तक योजना का लाभ समय पर पहुंचाएगा। उन्होंने योजना के क्रियान्वयन की जानकारी देते हुए बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक प्रदेश में 1,86,586 गर्भवती महिलाओं का प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत पंजीकरण किया जा चुका है। राज्य सरकार द्वारा अब तक 72 करोड़ 24 लाख 89 हजार रुपये की राशि सीधे पात्र हितग्राही महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिली है और छत्तीसगढ़ देश के सामने एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है।


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