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मोदी के सेक्युलर सिविल कोड के दांव से क्या विपक्ष होगा चित या गठबंधन की है मजबूरी

16-Aug-2024
नई दिल्ली।  ( शोर  संदेश )   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 11वें स्वतंत्रता दिवस के सबसे लंबे भाषण में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर बात की। हालांकि, उन्होंने इसे मौजूदा 'सांप्रदायिक नागरिक संहिता' से अलग 'धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता' यानी सीसीसी की बात की। आज यह समझते हैं कि मोदी का सेक्युलर सिविल कोड क्या है? यह यूनिफॉर्म सिविल कोड से कितना अलग है? क्या यह उनका विपक्ष के खिलाफ बड़ा दांव है या गठबंधन सरकार की मजबूरी है। इसे पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स से समझते हैं। पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद अहमद किदवई कहते हैं कि पीएम मोदी का सेक्युलर सिविल कोड दरअसल धर्मनिरपेक्षता की बात करने वाली विपक्षी पार्टियों के खिलाफ दांव हैं, जिन्होंने हमेशा भाजपा के यूसीसी एजेंडे को निशाना बनाया है।
शाहबानो केस से क्या पैदा हुआ था कम्युनल सिविल कोड
दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राजीव रंजन गिरि के अुनसार, 1985 में सुप्रीम कोर्ट के शाहबानो फैसले के बाद भाजपा ने यूसीसी की मांग बड़े पैमाने पर उठाई। रूढ़िवादी मुस्लिम समुदाय के बीच विरोध तब शुरू हुआ जब 1985 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पांच बच्चों वाली तलाकशुदा मुस्लिम महिला शाहबानो के पूर्व पति को गुजारा भत्ता के रूप में प्रति माह 179 रुपये का भुगतान करना होगा। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मुस्लिम महिला (तलाक पर संरक्षण का अधिकार) अधिनियम, 1986 को लागू करके सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलट दिया। इस कानून में कहा गया था कि महिलाओं के भरण-पोषण से संबंधित सीआरपीसी की धारा 125 मुस्लिम महिलाओं पर लागू नहीं है। यहीं से कम्युनल सिविल कोड पैदा हुआ, जो अब तक चला आ रहा है।
राममंदिर निर्माण और 370 के खात्मे के साथ यूसीसी बना भाजपा का एजेंडा
राजीव रंजन गिरि के अनुसार, वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी आत्मकथा-माई कंट्री माई लाइफ में पहली बार यूसीसी शब्द का इस्तेमाल किया था। राजीव गांधी ने कानून बनाकर भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर कर दिया। इसने कांग्रेस सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति को मजबूत बनाया और जेंडर जस्टिस, धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रीय एकता को बहुत कमजोर कर दिया है।
आडवाणी ने इसे छद्म-धर्मनिरपेक्षता बताया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी राजीव सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए परोक्ष रूप से यह कहा कि कांग्रेस ने एक वर्ग को खुश करने के लिए मुस्लिम महिलाओं के बीच धार्मिक भेदभाव किया। इसके बाद से ही राममंदिर निर्माण और जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 की समाप्ति के साथ-साथ यूसीसी भी भाजपा के मुख्य एजेंडे में शामिल हो गया।
 


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