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शिमला में 1947 के पहले की मस्जिद पर क्यों मचा है बवाल, विधानसभा तक गरमाया मुद्दा

05-Sep-2024
शिमला    ( शोर संदेश )   के संजौली में मस्जिद को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. दो समुदाय के युवकों में लड़ाई के बाद इस मस्जिद को गिराने की मांग की जा रही है. यह मांग हिंदू संगठनों ने की है. आरोप लगाया जा रहा है कि यह मस्जिद अवैध रूप से बनाई गई है. हालांकि यह मस्जिद 1947 से पहले की है और इसमें दो मंजिल बिना अनुमति के बनाई गई है. इस पूरे मामले को लेकर संजौली में माहौल काफी तनावपूर्ण है.

शिमला के संजौली में मस्जिद तोड़ने को लेकर हिन्दू संगठन अड़े हुए हैं. कांग्रेस के मंत्री ने भी मस्जिद को तोड़ने की मांग उठाई है. चार दिन पहले हिंदू संगठनों ने रैली निकाली, जिसमें शिमला नगर निगम के कांग्रेस के तीन पार्षद भी शामिल हुए और मस्जिद के बाहर धरना प्रदर्शन किया और मस्जिद में हुए निर्माण को गिराने की मांग उठाई. शहर में यूपी सहारनपुर के लोगो की दुकानें भी बंद करवा दी गई.
कांग्रेस के मंत्री ने मस्जिद को तोड़ने की मांग उठाई

वहीं यह मामला विधानसभा में भी उठा. कांग्रेस के ही मंत्री ने इस मस्जिद को तोड़ने की मांग उठाई. कांग्रेस सरकार में मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने मस्जिद को तोड़ने की मांग उठाई और बाहर से आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों पर नजर रखने की भी मांग उठाई और उन्होंने यहां तक कह दिया कि कोई बांग्लादेशी रोहंगिया, पाकिस्तान या कोई आतंकवादी भी बे रोक टोक आ जाएगा.

पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि यह किसी धार्मिक स्थल का मामला नहीं है. यह वैध और अवैध निर्माण का मामला है. 2010 में इसका निर्माण शुरू हुआ. यहां पर पहले दुकान हुआ करती थी. इस मामले में कई बार नोटिस दिए गए लेकिन यहां पर जो निर्माण हुआ वह 6750 स्क्वायर फुट तक पहुंच गया. यह जमीन हिमाचल प्रदेश सरकार की है. सरकार की जमीन पर कोई इस तरह निर्माण नहीं कर सकता.

सवाल यहां यह है कि इसका नक्शा किस तरह पास हो गया. इस मामले में नगर निगम शिमला की गलती है. आज सदन में भी यह मामला उठा है. मुख्यमंत्री से भी विभिन्न संगठनों के सदस्यों से मीले हैं. मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है इसपर कार्रवाई होगी. मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि तहबाजारी नियमों को भी सख्ती से लागू किया जाए.


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