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क्रिटिकल मिनिरल्स मिशन की घोषणा से ऊर्जा और रणनीतिक क्षेत्रों को मिलेगी मजबूती

23-Jul-2024
नई दिल्ली। ( शोर संदेश )  भारत सरकार ने क्रिटिकल मिनिरल्स (दुर्लभ खनिज) मिशन की घोषणा की है, जो ऊर्जागत परिवर्तनों और इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, और दूरसंचार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों की आधारशिला मानी जाती है। इस मिशन का उद्देश्य निजी और सरकारी कंपनियों को क्रिटिकल मिनिरल्स की सप्लाई चेन में अपनी क्षमताओं को विकसित करने और प्रतिस्पर्धात्मकता तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
सीईईडब्ल्यू की 2023 की रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर क्रिटिकल मिनिरल्स की सप्लाई चेन के अवसरों को रेखांकित किया था। इस रिपोर्ट ने दिखाया कि खनन (माइनिंग) का स्वदेशीकरण, विदेशों में अधिग्रहण के साथ प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) के लिए घरेलू क्षमताओं का निर्माण कैसे घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित बनाएगा। खासकर सौर, पवन, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी जैसे स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों के लिए।
इस घोषणा के माध्यम से भारत ने पिछले साल जी20 के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं पर कदम उठाने की शुरुआत कर दी है। सरकार का उद्देश्य है कि क्रिटिकल मिनिरल्स की एक भरोसेमंद, विविधतापूर्ण, सस्टेनेबल (सतत) और जिम्मेदारीपूर्ण सप्लाई चेन का निर्माण किया जा सके।
जैसा कि दुनिया भर में कई देश अपने आयात में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं, भारत एक आकर्षक गंतव्य के तौर पर उभर रहा है। इस बजट घोषणा के माध्यम से सरकार ने एक समर्पित प्रयास किया है। साथ ही, आयात के लिए सीमा शुल्क में कटौती, उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन योजनाओं जैसे मौजूदा सरकारी प्रयासों की मदद करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यह मिशन भारत के जलवायु लक्ष्यों के लिए अत्यंत जरूरी है। सरकार का मानना है कि इस तरह के मिशन से न केवल ऊर्जा और रणनीतिक क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी।
क्रिटिकल मिनिरल्स मिशन की यह घोषणा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बनाएगा। इससे भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी और देश को एक नई दिशा में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।


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