कम होगी मनाली-लेह की दूरी
नई दिल्ली(शोर सन्देश)। हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे के करीब बनाई गई 9 किलोमीटर लंबी अटल सुरंग अब उद्घाटन के लिए तैयार है। ऊंचाई के हिसाब दुनिया की पहली सुरंग होगी इसे लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है। इसके शुरू होने पर मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी। यह सुरंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पाकिस्तान-चीन बॉर्डर पर भारत की ताकत बढ़ जाएगी।
अटल सुरंग की विशेषताएं :
इसमें एक आपातकालीन एस्केप सुरंग भी शामिल है जिसे मुख्य सुरंग के नीचे बनाया गया है। यह किसी भी अप्रिय घटना के मामले में एक आपातकालीन निकास प्रदान करेगा, जो मुख्य सुरंग को अनुपयोगी बना सकता है। सुरंग में हर 150 मीटर पर एक टेलीफोन, हर 60 मीटर पर अग्नि हाइड्रेंट, हर 500 मीटर पर आपातकालीन निकास, हर 2.2 किमी में गुफा, हर एक किमी. पर हवा की गुणवत्ता की निगरानी प्रणाली, हर 250 मीटर पर सीसीटीवी कैमरों के साथ प्रसारण प्रणाली और घटना का पता लगाने वाली स्वचालित प्रणाली लगाई गई है। सुरंग में 80 किमी. प्रति घंटे की अधिकतम गति से वाहन चल सकेंगे और प्रतिदिन 5000 वाहन इससे गुजर सकेंगे। यह सुरंग लेह और लद्दाख के आगे के क्षेत्रों के लिए सभी मौसम के अनुकूल होगी।
दरअसल बर्फ़बारी के दिनों में यह इलाका अप्रैल से नवम्बर तक देश के बाकी हिस्सों से लगभग छह महीने के लिए कट जाता है। बर्फ़बारी के दिनों में भी इस सुरंग से पाकिस्तान और चीन सीमा तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा क्योंकि लेह-मनाली राजमार्ग दोनों देशों की सीमा से लगा हुआ है। इसलिए इस सुरंग के शुरू होने पर इसी के जरिये लद्दाख सीमा तक सैन्य वाहनों की सुरक्षित आवाजाही हो सकेगी और सैनिकों को रसद पहुंचाने में दिक्कत नहीं आएगी। इस सुरंग से भारतीय सीमा पर स्थित अग्रिम चौकियों की चौकसी, मुस्तैदी और ताकत काफी बढ़ जाएगी।
रक्षा मंत्रालय के अधीन सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने अपनी पहचान के मुताबिक इस मुश्किल कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने 21 अगस्त को सुरंग का दौरा करने के बाद बताया कि सभी तरह के निर्माण कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। सुरंग बनाये जाने के दौरान अवशेष के रूप में अंदर बहुत अधिक धूल है।
हिमालय की पीर पांज पर्वत श्रेणी में बनी यह सुरंग जमीन से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर है। इस सुरंग के बालू होने पर मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी। यह रोहतांग दर्रा तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग भी होगा जो 13 हजार 50 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। अभी मनाली घाटी से लाहौल और स्पीति घाटी तक की यात्रा में आमतौर पर पांच घंटे से अधिक समय लगता है जो अब 10 मिनट से कम समय में पूरा हो जाएगा। 2010 में इस सुरंग का निर्माण शुरू हुआ था जिसे 2019 तक पूरा करना था लेकिन कोविड-19 महामारी की वजह से श्रमिक और सामग्री उपलब्ध न हो पाने के कारण परियोजना को पूरी करने में थोड़ी देरी हुई है लेकिन अब यह उद्घाटन के लिए तैयार है।