ददा _दाई कहिथे घर ला में चलावत हो।
बेटा _बहू कहिथे घर ला में चलावत हो।।
आप सबो मनखे मन जानत हो संगी हो।
आज हमर घर ला सरकार हा चलवात हे।।
जनम ले मरन तक योजना उही बनावत हे।
पूरा करे बर गाँव मन मा तिहार मनावत हे।।
कोनो कहीं छुटगे त ओखर बर तंत्र लगा के।
शमशान घाट मा घलो खोजे बर जावत हे।
क्रिकेट,सिनेमा,सरकार सब ला भरमावत हे।
काम कम विज्ञापन ला जादा बतावत हे।।
आज कोनो ला समझ नइ आवत हे भाई।
जनता या सरकार कोन देश चलावत हे।।
राजनीति सबके धंधा बनत जावत हे।
दल बदलू मन सत्ता के सुख पावत हे।।
स्कूल कालेज नशा पानी के अड्डा बनगे।
धरती महतारी रो _रो के गोहरावत हे।।
तुलेश्वर कुमार सेन
सलोनी राजनांदगांव