आज का शीर्षक है मैं कहां हूं
दोस्तों मेरा परिचय बस यही है कि मैं एक आम आदमी हूं और *मुझे पता ही नहीं कि मैं कहां हूं*
हर तरफ है हमारी चर्चा पर पता नहीं मैं कहां हूं
हर भाषण में होता है मेरा जिक्र पर चुनाव के बाद कोई नहीं करता हमारी फिक्र तब मैं सोचता हूं मैं कहां हूं
हम पर ही पड़ती है सबसे ज्यादा मार क्योंकि हमारे ही सर पर होता है पूरे देश का भार तब मैं सोचता हूं मैं कहां हूं
हमने हर चुनाव के बाद अपने सपनों को ध्वस्त होते देखा है और तब मैं सोचता हूं मैं कहां हूं
हमने हमारे हक की लड़ाई लड़ने वाले हर को देखा है पर हक मिलते कभी नहीं देखा हैतब मैं सोचता हूं मैं कहां हूं
पेपरों पर भी टीवी पर भी मैं ही मैं दिखता हूं पर जिंदगी भर सुर्खियां में ही बना रहता हूं और समाचार रहता हूं तब मैं सोचता हूं मैं कहां हूं
मैं कहां हूं मैं कहां हूं मैं कहां हूं और मुझे कभी समझ नहीं आता कि मैं कहां हूं
दीपक ठाकुर रायपुर (शोर सन्देश) की कलम से