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विनोद दुआ को मिली सुप्रीम कोर्ट से राहत, गिरफ्तारी पर आगामी आदेश तक रोक*

17-Sep-2020

नई दिल्ली (नई दिल्ली (वीएनएस) सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार विनोद दुआ की गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा बढ़ा दी है और कहा है कि 18 सितंबर को हिमाचल प्रदेश में उनके खिलाफ दर्ज राजद्रोह मामले में अगली सुनवाई तक कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने बुधवार को एक अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि उन्हें मामले में अगली सुनवाई तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा, `विनोद दुआ पर अपने यूट्यूब कार्यक्रम` विनोद दुआ शो `में कुछ बयान देने का आरोप है, जो कथित तौर पर सांप्रदायिक घृणा को उकसाने और शांति और सांप्रदायिक घृणा के उल्लंघन के कारण हो सकता है। `
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने पहले पत्रकार पर राजद्रोह के आरोप की जांच के संबंध में शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट सील कर दी थी। वरिष्ठ वकील और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विकास सिंह ने दुआ की अपील करते हुए शीर्ष अदालत से कहा था कि एक पत्रकार होने के नाते अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सभी अधिकार हैं और सरकार की आलोचना करने का वैध अधिकार भी है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह के आरोपों के खिलाफ विनोद दुआ की याचिका और शिमला में उनके यूट्यूब वीडियो के लिए उनके खिलाफ दायर एफआईआर और केंद्र के खिलाफ सुनवाई कर रही थी।) सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार विनोद दुआ की गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा बढ़ा दी है और कहा है कि 18 सितंबर को हिमाचल प्रदेश में उनके खिलाफ दर्ज राजद्रोह मामले में अगली सुनवाई तक कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने बुधवार को एक अंतरिम आदेश देते हुए कहा कि उन्हें मामले में अगली सुनवाई तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा, `विनोद दुआ पर अपने यूट्यूब कार्यक्रम` विनोद दुआ शो `में कुछ बयान देने का आरोप है, जो कथित तौर पर सांप्रदायिक घृणा को उकसाने और शांति और सांप्रदायिक घृणा के उल्लंघन के कारण हो सकता है। `
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने पहले पत्रकार पर राजद्रोह के आरोप की जांच के संबंध में शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट सील कर दी थी। वरिष्ठ वकील और पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विकास सिंह ने दुआ की अपील करते हुए शीर्ष अदालत से कहा था कि एक पत्रकार होने के नाते अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सभी अधिकार हैं और सरकार की आलोचना करने का वैध अधिकार भी है।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह के आरोपों के खिलाफ विनोद दुआ की याचिका और शिमला में उनके यूट्यूब वीडियो के लिए उनके खिलाफ दायर एफआईआर और केंद्र के खिलाफ सुनवाई कर रही थी। 



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