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तनाव के बीच देश सेवा कर रहे लद्दाख के लोग, ऐसे कर रहे जवानों की सहायता*

19-Sep-2020

(शोर सन्देश) लेह। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीनी सेना के नापाक इरादों का सामना कर रही भारतीय सेना की मदद के लिए देशवासी भी पीछे नहीं हैं। एक ओर सरकार और सेना मिलकर पूर्वी लद्दाख में लंबे गतिरोध की तैयारी कर रही है तो वहीं लेह के एक गांव से लोगों ने सेना को रसद की मदद भेजी है। ये ऐसी रसद है जिसे बनाने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी और इससे सेना ठंड मौसम में रहने के लिए ताकत भी मिलेगी।
गांव वालों ने बताया कि यह खाना बहुत जरूरी है क्योंकि इसे बनाने में दाल रोटी की तरह देर नहीं लगती। इसे पकाना नहीं पड़ता और इसे तुरंत खाया जा सकता है। एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि यहां हमारा मठ है। हम फौज़ की वजह से चैन से सो पा रहे हैं।
लोकल लद्दाखी गांव वाले लोग सुखाया हुआ पनीर बोरियों में भरकर सैनिकों के लिए भेज रहे हैं। लोकल भाषा में इसे छुर्पे कहते हैं। ये प्रोटीन का खजाना है और कई महीनों तक खराब नहीं होता। इसके अलावा गांव वालों ने जवानों के लिए सुखाया हुआ साग भी भेजा है। जिसे जब चाहें गरम पानी में उबालकर खाया जा सकता है। जौ का बेहद पौष्टिक और गरम तासीर का सत्तू लद्दाख के लोगों को कड़ी सर्दी में बहुत काम आता है। इसे ऊंचे पहाड़ पर तैनात सैनिकों को भेजा जा रहा है ताकि वो जब चाहें गरम पानी में डालकर इस रेडी टू ईट भोजन का इस्तेमाल कर सकें।
सूखी स्थानीय मटर एक और खास लद्दाखी चीज है जो लंबे अरसे तक रखी जा सकती है। इसे राजमा की तरह पकाया जाता है और इसमें बहुत प्रोटीन होता है. लद्दाख के गांव वालों ने अपने घरों में सूखी लद्दाखी रोटियां बनाई हैं जो पंद्रह दिन तक खराब नहीं होतीं। गांव-गांव से एकत्र किया गया सामान सेना के सुपुर्द किया जा रहा है जो इसे आगे भेज रही है।
वहीं सर्दियों में चीन से मोर्च की तैयारी के तहत रक्षा अनुसंधान एवं विकास (DRDO) ने सेना के जवानों के लिए खास मीट का इंतजाम किया है। इसके लिए शोध कई शोध किए गए हैं। भारतीय सेना के लिए बेहतरीन मीट पर हुए शोध के बारे में DRDO के कर्नल मनोज बत्रा ने बताया कि यहां चांथांगी ब्रीड की मीट क्वालिटी अच्छी नहीं है। इसी ब्रीड से पश्मिना शॉल बनती है। कहा कि मैदानी इलाकों में पाए जाने वाले सीरोही ब्रीड से इसका क्रॉस कराया और फिर इनकी क्रॉस ब्रीड मिली जो यहां के इलाके लिए अच्छे से एक्लाइमेटाइज है और इसकी मीट क्वालिटी अच्छी है।
बताया गया की मीट क्वालिटी बहुत अच्छी है और इससे उन्हें भूख कम लगेगी साथ ही स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। कर्नल बत्रा ने बताया कि शोध के बाद जो नई क्रॉस ब्रीड बनी है उसे किसानों को दे दिया जाएगा, जिसके बाद हजारों की संख्या में उत्पादन बढ़ जाएगा। पहले चंडीगढ़ समेत देश के अन्य इलाकों से जवानों के लिए यहां तक मीट लाया जाता था लेकिन अब जवानों को लेह से ही मीट पहुंचाने में आसानी होगी।



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