अफगानिस्तान (शोर संदेश)। भूख और आर्थिक बदहाली से तपड़ते अफगानिस्तान में तालिबान ने महिलाओं के लिए नया फरमान जारी किया है और कहा है कि, अफगानिस्तान में रहने वाली औरतों की आंखे भी नहीं दिखनी चाहिए। महिलाओं के अधिकार को कुचलते हुए तालिबान ने शनिवार को एक नया फरमान जारी किया है, जिसमें अफगान महिलाओं को सार्वजनिक रूप से बुर्का पहनने का आदेश दिया गया है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान प्रमुख हैबतुल्लाह अखुंदजादा ने यह फरमान जारी किया है और बाद में तालिबान अधिकारियों ने काबुल में एक समारोह में इसे जारी किया है। तालिबान प्रमुख हैबतुल्लाह अखुंदजादा ने फरमान जारी करते हुए कहा कि, ‘उन्हें चदोरी (सिर से पैर तक बुर्का)’ पहनना होगा, क्योंकि यह पारंपरिक और सम्मानजनक है’। हालांकि यह फरमान नया है और अगस्त में अफगानिस्तान की सत्ता में लौटने के बाद से तालिबान महिलाओं की तमाम आजादियों को छीन चुका है और उन्हें सिर से लेकर पैर तक बुरके में ढंकने के लिए मजबूर कर चुका है। इससे पहले तालिबान की धार्मिक पुलिस ने राजधानी काबुल के चारों ओर पोस्टर लगाकर अफगान महिलाओं को अपने ही घर में छिपकर रहने का आदेश दिया था।
लड़कियों के लिए स्कूल बंद
इसके अलावा, तालिबान ने लड़कियों के लिए सभी माध्यमिक विद्यालयों को बंद करने का भी फैसला लिया है और अफगानिस्तान लड़कियों के लिए सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया है। तालिबान शासन के इस फैसले की दुनिया भर में निंदा बढ़ गई थी। कई कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों ने तालिबान से लड़कियों के लिए माध्यमिक विद्यालयों पर प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। मनोवैज्ञानिकों ने कहा है कि तालिबान द्वारा स्कूलों में जाने पर प्रतिबंध लगाने वाली छठी कक्षा से ऊपर की अफगान छात्राओं को इस कदम के कारण मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। एचआरडब्ल्यू के अनुसार, महिलाओं और लड़कियों को भी स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंचाने से रोक दिया गया है। रिपोर्टों से पता चलता है कि हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं और लड़कियों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं है।