सतीश देवांगन (शोर सन्देश)। सृष्टि में एक माँ ही है जो आपके जन्म से पहले ही आपसे प्रेम करने लगती है इसीलिए वह ईश्वर से पहले पूजनीय है, मां शब्द ही ऐसा है जिसमें प्रेरणा,साहस एवं कुछ कर दिखाने का जज्बा जैसे तमाम गुण अपने आप शामिल हो जाते हैं | हर मां की अपनी एक कहानी होती है और हर कहानी में छुपे होते हैं उनके अनंत अच्छाइयों वाले सबक | अक्सर एक सवाल हमेशा पूछा जाता है कि ईश्वर कैसे पैदा हुए किस माता ने ईश्वर को जन्म दिया यह एक बहुत ही रोचक सवाल है जिसका जवाब इतना आसान नहीं है हमारे मंदिरों में भगवान गर्भ गृह में रहते हैं तो यह गर्भ किसका है तो मंदिरों को भी एक माता के तौर पर देखा जाता है, अगर व्यापक संदर्भों में देखें तो प्रकृति ही सभी की मां है, यानी वह ईश्वर की भी मां है | इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि पूरी दुनिया का सबसे गहन, आत्मीय और भावनाओं से भरा खूबसूरत शब्द है मां, दुनिया की सबसे अनोखी नियामत है एक मां की स्नेह भरी थपकी | इस थपकी में जो सुख, सुरक्षा, सुकून और ममता का स्पर्श होता है वह दुनिया की किसी अन्य सुख, वैभव में नहीं, माँ सा निश्चल प्यार, माँ सी फिक्र और माँ सी ममता की छांव किसी दूसरे रिश्ते में अप्राप्य है | मां केवल जन्म दात्री ही नहीं होती वह तो एक कोमल एहसास है, हमारे भीतर संवेदनाओं की जितनी परते हैं उन सबकी संयोजिका है माँ | मां अपनी संतान पर केवल स्नेह और ममता की वर्षा ही नहीं करती बल्कि बचपन से ही हमारे भीतर हौसले, हिम्मत और साहस की बीज भी होती है, जो समय के साथ बड़ा होकर हमें कठिन परिस्थितियों से लड़ने की क्षमता प्रदान करती है आज कोरोना महामारी के इस दौर में जब भय,अनिश्चितता, संकट का माहौल है तो हर कोई मां के साए जैसा सुरक्षा चाहता है आज जो डॉक्टर,नर्स सफाई कर्मी और फ्रंटलाइन वारियर्स अघोषित युद्ध में योद्धा बन लड़ रहे हैं उनकी ऊर्जा का स्रोत भी कहीं न कहीं उनकी माताओं द्वारा दिया गया हौसला और दूसरों की सेवा करने का संस्कार ही है | ना जाने कितनी लेडी डॉक्टर्स और नर्सें मरीजों की देखभाल अपने बच्चे की तरह ही कर रही है वह मां के भीतर का असीम हौसला ही है जो विभिन्न रूपों में इन हेल्थ वर्कर्स के जरिए प्रगट हो रहा है | इन विकट स्थितियों में भी कितनी ही माताएं हौसले की नई कहानियां लिख रही हैं अपने बूढ़े कंधों पर अपने जवान बच्चों की जीवन रक्षा का भार उठाए इस अस्पताल से उस अस्पताल दौड़ रही है इसी तरह होम आइसोलेशन में बीमार बेटे, बेटियों की सेवा करने में असंख्य मांएं दिन-रात जुटी हुई हैं | आज मदर्स डे पर मैं यह संदेश देना चाहता हूं कि यह एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि अपनी संतान के लिए सारा जीवन आहूत करने वाली कुछ माओं को अपनी संतान से दूर वृद्धावस्था में उपेक्षित जीवन जीना पड़ता है, ऐसी सभी संतानों के लिए मदर्स - डे एक अवसर है कि वे अपने दिल को टटोलकर पूछे आखिर अपनी ममता, प्यार, दुलार, समर्पण और त्याग के बदले एक मां अपनी संतान से क्या चाहती है? सिर्फ थोड़ा सा आपका समय और साथ | क्या उम्र के इस पड़ाव पर हम उन्हें जरा सम्मान, ध्यान और दो मीठे बोल नहीं दे सकते? मांएं तो हर उम्र पर अपनी ममता हम पर लुटाती रहती है लेकिन एक उम्र के बाद हम उनसे प्रेम करना क्यों भूल जाते हैं? हमारी इसी भूल को सुधारने के लिए मदर्स - डे जैसे दिन बनाए गए हैं | तो आइए इस मदर्स - डे पर उन्हें सबसे कीमती तोहफा दें | अपने जीवन के व्यस्त पलों में से कुछ पल निकालकर उनके साथ बिताए | यकीन मानिए ऐसा करने से उन्हें तो असीम खुशी मिलेगी ही, हम भी कुछ देर के लिए अपने बचपन के प्यारे दिनों में लौट जाएंगे, जो अपनी मां के आंचल तले बिताए थे |आज मदर्स -डे के इस पावन अवसर पर शोर संदेश परिवार की ओर से देश की सभी मातृ शक्तियों को नमन,वंदन एवं शत-शत प्रणाम |