दिल्ली (शोर सन्देश)। दुनिया में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहा है और किसी भी देश में पास कोई ऐसा कारगर इलाज नहीं है जोकि इस महामारी से निपटने में मदद दे सके। ऐसे में एक बार फिर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के क्लिनिकल परीक्षण फिर से शुरू करने की घोषणा की है, क्योंकि यह संभावित ड्रग कोरोना वायरस उपचारों में मदद कर सकती है।
दुनिया में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहा है और किसी भी देश में पास कोई ऐसा कारगर इलाज नहीं है जोकि इस महामारी से निपटने में मदद दे सके। ऐसे में एक बार फिर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के क्लिनिकल परीक्षण फिर से शुरू करने की घोषणा की है, क्योंकि यह संभावित ड्रग कोरोना वायरस उपचारों में मदद कर सकती है।
इससे पहले 25 मई को डब्ल्यूएचओ ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी थी। हालांकि उनकी इस रोक के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को कोरोना से लड़ने के लिए मददगार बताया था। डब्ल्यूएचओ ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के परीक्षणों पर रोक लगा दी थी, ताकि इसको लेकर सुरक्षा समीक्षा की जा सके।
संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर रोक का यह फैसला द लांसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के बाद आया किया था, जिसमें कहा गया है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा कोरोना रोगियों के बीच मौत का खतरा बढ़ा सकती है।
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का आमतौर पर गठिया के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सहित सार्वजनिक हस्तियों ने कोरोना वायरस की रोकथाम और उपचार के लिए दवा का समर्थन किया है।
डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस एडहोम फेहेबियस ने बताया, “पिछले हफ्ते, सॉलिडैरिटी ट्रायल के कार्यकारी समूह ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर रोक लगाने का निर्णय किया था, क्योंकि दवा पर कुछ सवाल खड़े हो गए थे। यह निर्णय एहतियात के तौर पर लिया गया था, जबकि सुरक्षा डेटा की समीक्षा की गई थी। हालांकि अब सॉलिडैरिटी ट्रायल में कोरोना से लड़ने के लिए इसका समर्थन किया गया, जिसमें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन भी शामिल है।”