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नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ `मेड इन इंडिया` INS कवरात्ती, जानें इस जंगी जहाज की खासियतें*

22-Oct-2020

विशाखापट्टनम (शोर सन्देश) सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने पनडुब्बी रोधी प्रणाली से लैस आईएनएस कवरात्ती को आज नौसेना के हवाले कर दिया। पोत को भारतीय नौसेना के संगठन डायरेक्टोरेट ऑफ नेवल डिजाइन (डीएनडी) ने डिजाइन किया है और इसे कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने बनाया है। नौसेना अधिकारियों ने बताया कि आईएनएस कवरात्ती में अत्याधुनिक हथियार प्रणाली है। साथ ही इसमें ऐसे सेंसर लगे हैं जो पनडुब्बियों का पता लगाने और उनका पीछा करने में सक्षम हैं।

आईएएनएस कवरात्ती को विशाखापट्टनम में कमीशन्ड किया गया। इस जंगी जहात की खास बात है कि इसमें 90 फीसदी देसी उपकरण हैं और इसके सुपरस्ट्रक्चर के लिए कार्बन कंपोजिट का उपयोग किया गया है। इसे भारतीय पोत निर्माण के इतिहास में बड़ी सफलता कहा जा रहा है।
00 आईएनएस कवरात्ती की मुख्य खासियतें-
-पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता के अलावा, पोत एक विश्वसनीय सेल्फ डिफेंस क्षमता से लैस है।
-कवारात्ती लंबी दूरी के अभियानों के लिए बेहद कारगर और मजबूत है।
-पोत में 90 प्रतिशत उपकरण भारतीय हैं।
-कवारात्ती के सुपरस्ट्रक्चर के लिए कार्बन कंपोजिट का इस्तेमाल हुआ है. यह भारतीय पोत निर्माण के इतिहास में बड़ी सफलता है।
-ये पोत परमाणु, रासायनिक और जैविक युद्ध की स्थिति में भी काम करने में सक्षम हैं।
-आईएनएस कवरत्ती की लंबाई 109 मीटर और चौड़ाई 12.8 मीटर है जो अपने आपमें पर्याप्त है।
-कवारात्ती अत्याधुनिक हथियारों, रॉकेट लॉचर्स, एकीकृत हेलीकॉप्टर्स और सेंसर से लैस है।
00 INS कवरात्ती कैसे पड़ा नाम
आईएनएस कवरात्ती का नाम 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तानी गुलामी से मुक्ति दिलाने वाले युद्ध से जुड़ा हुआ है। यह नाम अपने अभियानों के जरिये अहम भूमिका निभाने वाले युद्धपोत आईएनएस कवरात्ती के नाम पर मिला है। भूतपूर्व आईएनएस कवरात्ती जनरल क्लास मिसाइल युद्धपोत था।
00 भारत की समुद्री ताकत में और अधिक इजाफा

मालूम हो कि साल 2017 में तत्कालीन केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में चार स्वदेशी निर्मित एंटी-सबमरीन वारफेयर में से तीसरे आईएनएस किल्तान को कमीशन किया था। अब आईएनएस कवरात्ती के शामिल होने से भारत की समुद्री ताकत को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। 



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