इंजी .रमाकान्त श्रीवास (शोर सन्देश)
काश कि मेरी भी तीन बेटियाँ होती
मेरे घर के आंगन में नित रोज चहकती
मैं भी उसे उँगली पकड़कर चलना सिखाता
रोज चोटी बनाकर स्कूल छोड़ने भी जाता
उनको मैं अपना दुनिया मानता
उनकी खुशी के खातिर मैं सबसे लड़ जाता
वो मेरी जान, मेरा स्वाभिमान होती
काश की मेरी भी तीन बेटियाँ होती
इस लाचार दुनिया के लिए ताकत वो बनती
बुरो के लिये बुरा और अच्छो को दुलार करती
सच , साहस और सम्मान से जब वो आगे बढ़ती
अपने सपनों को हौसलों की उड़ान से ,इस दुनिया को भी बदलती
काश की मेरी भी तीन बेटियाँ होती
मेरे घर के आँगन के में नित रोज चहकती