ब्रेकिंग न्यूज

सुनो भाई उधो,मोदी के राजनीतिक मुजरा

24-Jun-2024
परमानंद वर्मा ( शोर संदेश )। जिसके पास जाने से अशांत, परेशान मन शांत हो जाता है, मुरझाया, कुम्हलाया चेहरा सदाबहार फूलों की तरह प्रफुल्लित और महकने जैसा लगने लगता है, वह कौन लोग हैं, यह मुजरा कर जीवन निर्वाह करने वाली तवायफें ही हैं। इनके प्रति अशिष्ट भाषा, गलत धारणा, विचार व सोच रखना उचित नहीं जान पड़ता। राजनीति अपनी जगह है और कला, संस्कृति, गीत, नृत्य, साहित्य अपनी जगह पर। राजनीतिक दुर्भावनावश किसी व्यक्ति, समाज, प्रदेश की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं चाहिए। इसी संदर्भ में छत्तीसगढ़ी में पढि़ए यह आलेख...।

फिलिम मन म मुजरा तो दू तीन ठन देखे रेहेंव फेर असली मुजरा साकछात ओ  दिन दैखे ले मिलिस जब एक झन संगवारी के भाई के बिहाव म मुजरा रखे रिहिसे। बलाय ले आगे। बिहान भर परीक्षा अउ रात के मुजरा। दुनों झन एम ए फाइनल म रेहेन। बात ल ओकर टार नइ सकेंव अउ पहुंचगेन कुरुक्षेत्र के मैदान म। उहां दू झन बुलेंदरी, चुलबुली, रंगरुप ल झन पूछव बतावत म लाज लागत हे। देखते साठ मुंह कोती ले लार चुचुवाय ले धर लिस। कइसनो कर के  मन ल संभालेंव अउ फटकारेंव,,भोसाना हे का बेटा तोला। दु ठन डांस देखेन तहां ले घर आगेन। पुस्तक कापी ल खोलथौं पढे बर तब  कहां के पढाई होना हे, उही बुलेंदरी मन आंखी आंखी म झूले लगिस। केहेंव, पढ डरे बेटा, साल भर के कमई म तोर आगी लग गे तइसे लागत हे। सांखियकी के परचा रिहिसे। तीन ठन सवाल बनायेंव अउ दू ठन गद्य। जान बची लाखों पाये कस सौ म पचासी अंक पायेंव। मंय ओ मुजरावाली मन ल बधाई देंव अउ केहेंव,,जय होवय दाई हो तुंहर बने किरपा करेव। अइसने मोरे कस फांदा म फंसगे परधान मंतरी नरेन्द्र मोदी। मुजरा अउ गुलामी देखे के लालच म बिहार जा परिस। उहां ओला लेना के देना परगे।
वइसे तो गुजरात मं रास गरबा, डांडिया उहां के संस्कृति मं रचे-बसे हे, अउ मउका-बेमउका कोनो परब या फेर तिहार पर जथे तब ये नृत्य ओकर मन के देखे ले मिल जथे। परधान मंतरी नरेन्द्र मोदी तो नाचे-गाए के घला शौकीन हे। अइसन मउका ल ओहर कभू नइ छोडय़। फेर जब ले देश के बड़े पद ल संभाले हे तब थोकन एमा कमी आ गे हे। 
वइसने कस हाल बिहार के हे। उहां रास गरबा नहीं मुजरा के चलन जादा हे। कोन गांव, कोन कस्बा, अउ कोन शहर नइहे, जिहां मुजरा के नांव सुनथे तहां ले उहां एकमई हो जथे, जुरिया जथे, मुजरा देखे बर। मोदी सही लालू घला शौकीन हे मुजरा देखे के। एक ले बढ़के एक अप्सरा, सुंदरी, मेनका असन परी ल चुन-चुन के बलाथें। देखथे रातभर मुजरा।
परधान मंतरी मोदी ल मुजरा के बारे म ओतेक रस-कस मालूम नइहे, फेर ओकर अनुभवी अप्सरा मन सही चकाचक ले पुतरी बरोबर तवायफ के रोल करे हेमामालिनी, जयप्रदा, जया बच्चन, सत्यभामा,  मायावती, माधुरी दीक्षित, ममता कुलकर्णी, ममता बनर्जी जइसन कतको हे। जब मोदी जी ल बिहार आना रिहिस तब मुजरा के बारे म ओकर मन ले सलाह मशविरा कर लेना रिहिसे, या फेर ओमे से दू-चार झन ल संग मं ले आना रिहिसे। 
कोनो-कोनो बतइन के स्मृति ईरानी, हेमा मालिनी, जया बच्चन, स्वाति मालीवाल अउ राधिका खेड़ा आय रिहिस हे मोदी के संग राजनीतिक मुजरा करे खातिर। मोदी जी ल जब गुलामी अउ मुजरा के ऊपर गीत-गजल ''चलते-चलते मुझे कोई मिल गया था... सरे राह चलते-चलते... गाना अउ हाथ मटका के नाचे बर शुरू करिस तब हेमा मालिनी टोकत कहिथे अउ खुद कइसे हाथ-पांव, आंखी के भव  भंगिमा, होंठ मं मुसकाय के तरीका बताथे, तब मोदी जी वइसने नाचे अउ मटकाये ले धर लेथे। 
जया बच्चन ल लगथे मुजरा बने ढंग के नइ कर पावत हे मोदी जी हा, तब ओला उठेवा मारत कहिथे- एहर राजनीति नोहय भइया, ये मुजरा हे, नाचे गाये के रियाज करे ले परथे तब तवायफ मन के रोटी-पानी के जुगाड़ हो पाथे।  
मोदी जी कहिथे- तब समझा न कइसे नाचव, गावौं, मटकवौ ? तब जया बच्चन हा स्मृति ईरानी ल बलाथे अउ कहिथे- चलव तुमन दुनो झन जइसे मैं नाचिहौं, गाहौं तइसने तहूं मन वइसने करिहौ। 
मोदी जी कहिथे- जया, 'इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा ओ रिकार्डिंग बजवा अउ चलव आवौ सबो हिरोइन मन नाचबों, गाबो। फिल्म पाकीजा मं ये गीत ऊपर स्व. मीना कुमारी डांस करे रिहिसे। गीत बजथे- 
इन्हीं लोगों ने, इन्हीं लोगों ने 
इन्हीं लोगों ने, इन्हीं लोगों ने 
इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा
हां जी हां... हां जी... दुपट्टा मेरा
हमरी न मानो तो रंगरेजवा से पूछो
हां जी हां... रंगरेजवा से पूछो
बीच गलिन में छीन लिनी दुपट्टा मेरा
हां जी हां... हां जी हां... दुपट्टा मेरा। 
बिहार के चुनावी सभा म हजारों के भीड़ मं मोदी राजनीतिक मुजरा ल उहां के जनता मन देखिन फेर ओकर मन के मनमाफिक नइ होइस। अपन चुनावी भासन मं मोदी जी कहि दीस- बिहार के चिन्हारी हे गुलामी अउ मुजरा। चुनाव जीते खातिर ककरो गुलामी करौ, मुजरा करना हे ते करत राहौ फेर मैं एससी, एसटी अउ ओबीसी के संग खड़े रइहौं। राजद लालटेन ले के मुजरा करइया के जमात हे। मोदी के ये शब्द बिहारी मन ल चुभगे, अपमान असन लगिस। 
मोदी के बिहार मं ये चुनावी मुजरा उहां आगी लगा दीस। भड़कगे जनता। मुजरा के अपमान, तवायफ मन मोदी के निंदा करत हे। सही बात हे कोनो देस, परदेस, कला, संगीत, गीत, नृत्य अउ संस्कृति के हिनमान नइ करना चाही। कोनो गुजरात के कला संस्कृति, साहित्य के अइसने अपमान करिहीं तब ओमन ल कइसे लागही। परधान मंतरी के पद मं आसीन अइसन नेता के मुंह ले ये बात शोभा नइ देय। 
जाती-बिराती
नजर लागे राजा तोरे बंगले में
हां.. हां... तोरे बंगले में।
मैं तो होती राजा बन की कोयलिया
हां... हां.. बन की कोयलिया
कुहुका उठती राजा तोरे बंगले में
मैं तो होती राजा बेला -चमेलिया
हां..हां.. बेला चमेलिया
लिपट रहती  राजा तोरे तन बदन में
हां... हां... तोरे अंगने में
नजर लागी राजा...।

 



leave a comment

Advertisement 04

kalyan chart

Feedback/Enquiry



Log In Your Account