00 फिक्की और सीआईआई की चुप्पी पर भी कैट ने उठाये सवाल
रायपुर (शोर सन्देश)। भारतीय कम्पनी फ्यूचर ग्रुप पर अमेजन के अनैतिक कब्जे की कोशिश पर कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कहा की बेशक भारतीय कम्पनी फ्यूचर ग्रुप से व्यापारियों के मतभेद हैं लेकिन राष्ट्र हित में विदेशी कम्पनी और भारतीय कम्पनी की इस लड़ाई में कैट खुल कर भारतीय कम्पनी का साथ देगा। कैट ने इस मामले पर फिक्की और सीआईआई जैसे उद्योग संगठनों की चुप्पी पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा की ये संगठन अभी तक इस मामले पर क्यों नहीं बोले। ऐसा प्रतीत होता है की इसके पीछे कहीं इन संगठनों का निहित स्वार्थ तो नहीं छुपा हुआ है। कैट ने कहा की भारतीय कम्पनी के साथ हमारे मतभेद देश का अंदुरनी मामला है। इसे हम सुलझा लेंगे, किन्तु कोई विदेशी कम्पनी यदि भारतीय कम्पनी का अनैतिक तरीके से अधिग्रहण करेगी तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कैट ने 4 नवम्बर को केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीथारमन एवं केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल को सबूती दस्तावेज के साथ एक ज्ञापन भेजकर अमेजन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है। कैट ने अपने ज्ञापन में अमेजन पर भारत सरकार की एफडीआई पालिसी एवं विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघनों में शामिल होने के लिए अमेजन पर सीधे आरोप लगाए थे और भारत में मल्टी ब्रांड रिटेल गतिविधियों चलाने के लिए सरकार की अनिवार्य अनुमति नहीं लेने का आरोप भी लगाया था।
कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा की भारत के व्यापारी अमेजन द्वारा उनके व्यापार को नष्ट किये जाने को लेकर बेहद चिंतित हैं क्योंकि अमेजन उनका व्यापार नष्ट करने पर तुला है। इसीलिए अमेजन हर रास्ता अपना कर भारत के रिटेल कारोबार पर अपना कब्जा जमाने के लिए कुछ भी अधिकृत अथवा अनधिकृत रास्ता अपना कर मनमानी व्यापारिक गतिविधियां कर रहा है। यह तो फ्यूचर समूह और अमेजॅन के बीच लड़ाई है जिसके चलते अमेजॅन द्वारा सिंगापुर में स्तिथि आर्बिट्रेशन पैनल में जिरह के दौरान अमेजन ने इस बात को स्वीकार किया की वो फ्यूचर रिटेल जो की एक मल्टी ब्रांड रिटेल कम्पनी है को भी नियंत्रित कर रहा है जो सरकार की एफडीआई नीति के खिलाफ है दी गई।
श्री पारवानी ने कहा की अमेजॅन फ्यूचर ग्रुप में निवेश (एफसीएल के माध्यम से) फेमा 1999 अधिनियम की धारा 13 का उल्लंघन है। यह फेमा के नियम 23 के स्पष्टीकरण (डी) का भी उल्लंघन करता है, फेमा के अनुसूची -1 के तहत निर्धारित प्रवेश मार्ग का उल्लंघन करता है, अनुसूची -1 के खंड 15.4 का भी यह स्पष्ट उल्लंघन है। यह एफडीआई नीति के प्रेस नोट नंबर 2 के तहत निर्धारित शर्तों का भी घोर उल्लंघन करता है। अमेजन द्वारा फेमा का ऐसा उल्लंघन फेमा अधिनियम की धारा 13 में निर्दिष्ट जुर्माना लगाने के लिए एक प्रमाणित मामला है जिसके अनुसार मौद्रिक जुर्माना उल्लंघन में शामिल राशि का तीन गुना तक है जिसका अर्थ है कि अमेजन 1 लाख 20,000 करोड़ रुपये के मौद्रिक दंड के लिए उत्तरदायी है। इसके अतिरिक्त, प्रवर्तन निदेशालय यह निर्देश दे सकता है कि ष्किसी भी मुद्रा, सुरक्षा या अन्य धन या संपत्ति जिसके संबंध में उल्लंघन हुआ हैष् केंद्र सरकार जब्त कर सकती है। अंत में, सिंगापुर आर्बिट्रेटर द्वारा पारित अंतरिम पुरस्कार ने कथित तौर पर यह स्थापित किया है कि अमेजॅन के स्वयं के प्रवेश पर भी, इसका पूरा निवेश एफआरएल में अपने विशिष्ट नियंत्रण अधिकारों की ओर है। श्री पारवानी ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से तत्काल कार्रवाई की मांग की। इस मुद्दे पर सरकार के कानूनों और नियमों में व्यापारियों का विश्वास बहाल करने के लिए कैट ने संबंधित अधिनियम और नियमों के तहत आरबीआई, सेबी और प्रवर्तन निदेशालय से अमेजॅन के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने की भी मांग की है।