ब्रेकिंग न्यूज

काशी तमिल संगमम: भारत की शाश्वत आध्यात्मिक, सांस्कृतिक चेतना का जीवंत सेतु

31-Dec-2025
नई दिल्ली।  ( शोर संदेश ) उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को रामेश्वरम की पवित्र भूमि पर आयोजित काशी तमिल संगमम 4.0 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए इस पहल को भारत की शाश्वत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रतीक बताया। 
उपराष्ट्रपति ने काशी–तमिलनाडु संबंध को गहन सभ्यतागत और आध्यात्मिक निरंतरता बताया, जो साझा विरासत के माध्यम से भारत की राष्ट्रीय एकता को सशक्त बनाता है
काशी और तमिलनाडु के बीच अटूट बंधन पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह संबंध केवल ऐतिहासिक नहीं है, बल्कि एक गहन सभ्यतागत और आध्यात्मिक निरंतरता है, जिसने हजारों वर्षों से भारत को एकजुट रखा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आदान-प्रदान भारत की साझा विरासत की पुष्टि करते हैं और राष्ट्रीय एकता की भावना को गहरा करते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि काशी तमिल संगमम महाकवि सुब्रमण्यम भारती के एकजुट भारत के स्वप्न को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल से साकार करता है
उपराष्ट्रपति ने महाकवि सुब्रमण्यम भारती के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा कि काशी तमिल संगमम एकजुट, एकीकृत और आत्मविश्वासी भारत के बारे में कवि के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि भारतीजी का यह सपना आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और लक्षित पहलों के माध्यम से साकार हो रहा है।
उपराष्ट्रपति ने कहा, काशी-तमिल संगम जैसी पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता मजबूत कर विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त करती हैं
प्रधानमंत्री के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि काशी-तमिल संगम जैसी पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान, साझा विरासत और आपसी सम्मान के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूत करती है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे प्रयास देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर कर रहे हैं।
समापन समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि सहित केंद्रीय मंत्री, विधायक और आईआईटी मद्रास के निदेशक उपस्थित रहे
समापन समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने भाग लिया। साथ ही इस समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन, नैनार नागेंद्रन, विधायक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि समेत कई लोग मौजूद थे।
काशी तमिल संगमम सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों, विचारों के प्रवाह और जीवित परंपराओं से भारत की सांस्कृतिक एकता का उत्सव है
काशी तमिल संगमम एक ऐसे रिश्ते का जश्न है जो सदियों से भारतीय कल्पना में बसा हुआ है। अनगिनत तीर्थयात्रियों, विद्वानों और साधकों के लिए तमिलनाडु और काशी के बीच का सफर कभी भी सिर्फ शारीरिक तौर पर आने-जाने का रास्ता नहीं था। यह विचारों, सोच, भाषाओं और जीवित परंपराओं का एक आंदोलन था। संगमम इसी भावना से प्रेरित है, एक ऐसे बंधन को जिंदा करता है, जिसने पीढ़ियों से भारत के सांस्कृतिक माहौल को शांतिपूर्वक आकार दिया है।
आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान काशी तमिल संगमम भारत की सभ्यतागत विरासत और सांस्कृतिक निरंतरता सुदृढ़ करने का प्रयास बना
जब भारत आजादी के 75 साल पूरे होने पर पूरे देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाए जाने के महत्व के बारे में गहराई और गंभीरता से सोच रहा था और अपनी सभ्यतागत विरासत की गहराई को फिर खोज रहा था, संगमम देश को जोड़ने वाली सांस्कृतिक निरंतरता को फिर से पक्का करने के लिए एक उद्देश्यपूर्ण कोशिश के तौर पर सामने आया।
 


leave a comment

Advertisement 04

kalyan chart

Feedback/Enquiry



Log In Your Account