नई दिल्ली (शोर संदेश)। न्यूयॉर्क में आयोजित 80वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पाकिस्तान पर बेहद कड़ा हमला बोला. उन्होंने पड़ोसी देश पाकिस्तान को साफ शब्दों में ‘आतंकवाद का गढ़’ बताया और कहा कि सरकार प्रायोजित आतंकवाद आज भी पूरे क्षेत्र की सबसे बड़ी अस्थिरता की जड़ है. जब भारत के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को आतंकवाद का वैश्विक केंद्र बताया तो संपूर्ण संयुक्त राष्ट्र महासभा ने जोरदार तालियां बजीं. जयशंकर ने अपने संबोधन में अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र किया, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटक, जिनमें अधिकांश हिंदू श्रद्धालु थे, की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी.
उन्होंने कहा कि यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि पाकिस्तान की जमीन पर सक्रिय आतंकी कैंप ‘औद्योगिक स्तर’ पर काम कर रहे हैं और इन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है. भारत के विदेश मंत्री ने दुनिया के सामने पाकिस्तान की उस मानसिकता को भी उजागर किया, जहां आतंकियों को न सिर्फ बचाया जाता है बल्कि सार्वजनिक मंचों पर उन्हें नायक की तरह पेश किया जाता है. उन्होंने कहा, ‘जब आतंकवादियों का महिमामंडन किया जाता है, तो यह केवल हिंसा को सामान्य बनाने की कोशिश है, जिसे किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता.’
आतंकवाद का साथ देने वाले भुगतेंगे खामियाजा
डॉ. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि अब समय आ गया है जब आतंकवाद को पनाह देने वाले पूरे इकोसिस्टम पर ‘लगातार दबाव’ बनाया जाए. उन्होंने जोर दिया कि सबसे पहले आतंकवाद की फंडिंग को रोकना होगा. अगर आतंकी संगठनों के आर्थिक स्रोत बंद हो जाएं तो उनकी जड़ें भी सूख जाएंगी. विदेश मंत्री ने उन देशों को भी चेतावनी दी जो पाकिस्तान की मदद करते हैं. उन्होंने कहा, ‘जो लोग आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले राष्ट्रों का समर्थन करते हैं, उन्हें पता चलेगा कि इसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना पड़ेगा.’
भारत ने पहलगाम त्रासदी के तुरंत बाद पाकिस्तान की आतंकी ढांचों पर जवाबी कार्रवाई की थी, जिसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया. इसने दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत आतंकवाद पर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं करेगा. विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र मंच पर साफ कर दिया कि भारत की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है और इसमें आतंकी व उन्हें संरक्षण देने वाले, दोनों ही बराबर अपराधी माने जाएंगे.