तुलेश्वर कुमार सेन सलोनी राजनंदगांव (शोर संदेश)
भाई बहनों का अमर प्यार है।
इसके बिना सूना घर संसार है।।
सावन महिना,पूर्णिमा तिथि जी।
साल में रहता सबको इंतजार है।।
भारतीय,संस्कृति,परंपरा का जी।
यह तो बहुत ही अनुपम उपहार।।
भाई की कलाई में राखी बांधकर।
आरती,तिलक लगा,मिठाई हैं खिलाते।।
दोनों एक दूजे को आशीर्वाद देकर।
चली वर्षों की ही परंपरा हैं निभाते।।
माता लक्ष्मी,राजा बलि को बांधती थी।
द्रौपदी भी तो कृष्ण को पहनाती थी।।
ब्राह्मण अपने यजमानों के घर आता है।
रक्षा बंधन करके आशीष दे जाता हैं।।
सब मिल एक एक पेड़ लगाओ जी।
सभी राखी बांधकर उनको बचाओ जी।।
सब पर्यावरण,जल संरक्षण का संकल्प।
सभी भाई बहन स्वयं से उठाओ जी।।
राखी तिहार पंथी धुन
सुन तो गा मोर संगी जोड़ीदार।
आगे हावे भाई बहनि के तिहार।।
भइया मोर रद्दा देखत हो ही गा।
मोर दाई ददा संग पूरा परिवार।।
सुन तो गा मोर संगी जोड़ीदार...
सावन महिना,हरे उजियारी पाख।
आवत हे पुन्नी तिथि,राखी तिहार।।
एक रात बर मइके चल देतेव मेहा।
अपन हाथ जोड़ पारत हंव गुहार।।
सुन तो गा मोर संगी जोड़ीदार...
बिहनिया काम बुता करके काली।
मंझनिया गाड़ी बइठ जातेव गा।।
राखी बांध,सुख दुख गोठिया के।
होवत बिहनिया, घर आतेव गा।।
सुन तो गा मोर संगी जोड़ीदार...
खेत खार के बियासी,निंदई होगे हे।
अब तो लाक डाउन खुलगे हावे गा।।
कतेक समझाओ ते मोला बताना।
पढ़े बर लइका स्कूल जावत हे गा।।
सुन तो गा मोर संगी जोड़ीदार