रायपुर (शोर सन्देश)। भारत का संविधान की अनुच्छेद 21(ए) के अनुसार राज्य सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया जाएगा। नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुच्छेद 8 (व्याख्या), (1) व (2) के अनुसार राज्य सभी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने और अनिवार्य दाखिले, उपस्थिति और प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करने को सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है। संविधान या आरटीई कानून सिर्फ कमजोर तबका को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराया करने की बात नहीं करते है। बल्कि यह सार्वभौमिक है। कोई बच्चा जो भारत का नागरिक है, अमीर या गरीब, लड़का या लड़की, किसी भी जाति का हो, उसे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा पाने का अधिकार प्राप्त है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने कहा कि यह सुनिश्चित करना राज्य सरकार का दायित्व है। सभी बच्चे स्कूल में उपस्थित हो रहे है और नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त कर रहे है। लेकिन प्रदेश में स्कूली बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है।
कोरोना महामारी में सभी वर्ग के लोग आर्थिक रूप से कमजोर हो गए हैै और स्कूल की डिमांडेड फीस और अब बोर्ड की परीक्षा फीस जमा करने में ज्यादातर पालक सक्षम नहीं है। ऐसे परिस्थिति में भी प्राईवेट स्कूलों से बच्चों को शिक्षा व परीक्षा वंचित किया जा रहा है। आरटीई के हजारों की संख्या में बच्चे प्राईवेट स्कूल छोड़ कर जा रहे है। श्री पॉल ने कि प्रदेश के 8 हजार प्राईवेट स्कूलों में अध्ययनरत् 15 लाख बच्चों की नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा की चिंता करना भी सरकार का दायित्व है। शिक्षा पाना बच्चों का मौलिक अधिकार है और यह सरकार का दायित्व है कि सभी बच्चे नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएं। पैरेंट्स एसोसियेशन ने राज्यपाल महोदिया से पत्र लिखकर आग्रह किया है।