रायपुर (शोर सन्देश)। अच्छाई हमेशा लौटकर आती है ,इसलिए इंसान को हमेशा नेक कार्य करना चाहिए ,ये सोच थी स्वर्गीय श्रीमती राजेश जैन की, जिन्होंने अपने अंतिम समय यानी मृत्यु उपरांत देहदान कर चिकित्सा रिसर्च में योगदान दिया। श्रीमती जैन ने अपनी अंतिम सांस जन्माष्टमी 11 अगस्त को ली। 19 सितम्बर 1941 में जन्म ली श्रीमती जैन जीवन पर्यन्त महिलाओं को आत्म निर्भर बनाने सिलाई - बुनाई और क्राफ़्ट की शिक्षा दी। सैकड़ो महिलाओ को उन्होंने आखिरी समय तक फ्री ट्रेनिंग के साथ जरुरतमंदो की मदद कर अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। पत्रकार तपेश जैन व धर्मेश जैन की माता श्रीमती जैन की दो पुत्रियां रचना जैन व सपना गुप्ता है। हर्ष जैन व हार्दिक जैन दो पोते सहित पूरा भरा पूरा परिवार अपने पीछे छोड़ गई , पेशे से शिक्षक रही श्रीमती जैन ने बीए बीएड की शिक्षा पुराने समय में की जब महिला शिक्षा बड़ी बात होती थी। अल्प आयु में पति स्वर्गीय महेंद्र जैन के निधन के बाद अपने परिवार के भरण पोषण के साथ असहाय महिलाओं को शिक्षित करने का कार्य निसंदेह अनुकरणीय है , फिल्म स्टार व सांसद सुनील दत्त के हाथों से सम्मानित श्रीमती जैन को भारतीय जैन संघटना सहित कई संस्थाओं ने सम्मानित किया है। जेल में बंदी महिलाओं को स्वय के व्यय से सिलाई -बुनाई की ट्रेनिंग भी उल्लेखनीय है। रायपुर प्रेस क्लब ,छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ , छत्तीसगढ़ आल आर्टिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन और रायपुर स्टूडियो एंड फोटोग्राफर एसोसिएशन ने श्रीमती जैन को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवार को दुःख सहन करने की शक्ति देने भगवान से प्रार्थना की है .