नई दिल्ली (शोर सन्देश)। वित्तमंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा है कि केन्द्र उन राज्यों को ऋण लेने में मदद करेगा जो जीएसटी राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए प्रस्तावित उधारी विकल्प अपनाना चाहते हैं। कोविड महामारी के कारण राज्यों की जीएसटी क्षतिपूर्ति के उपायों पर अधिकांश राज्य और केन्द्रशासित प्रदेश के वित्तमंत्री सहमत हैं। नई दिल्ली में जीएसटी परिषद की 43वीं बैठक के बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारामण ने बताया कि 21 राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशों ने उधार लेने के विकल्प पर सहमति व्यक्त की है लेकिन इस मुद्दे पर अभी आम सहमति बनाई जानी है। उन्होंने कहा कि परिषद उन राज्यों से बातचीत कर मतभेद हल करने का प्रयास करेगी, जो चाहते है कि केन्द्र उधार लेकर उनके नुकसान की भरपाई करे। बता दें छत्तीसगढ़ समेत कुछ राज्यों ने यह मांग उठाई थी कि केन्द्र उधार लेकर उनके नुकसान की भरपाई करे। वित्तमंत्री ने आश्वासन दिया कि यदि केन्द्र उधार लेकर राज्यों की क्षतिपूर्ति का भुगतान करता है तो इससे सरकार और निजी क्षेत्र दोनों की उधारी लागत बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रतिभूतियों में किसी बढ़ोत्तरी से अन्य कंपनियों की उधारी लागत बढ़ेगी। श्रीमती सीतारामन ने राज्यों को भरोसा दिलाया कि उनके ऋण की मूलराशि और पूरे ब्याज का भुगतान क्षतिपूर्ति उपकर से किया जाएगा। जी.एस.टी. परिषद उपकर की अवधि पांच वर्ष की तय सीमा से पहले ही बढ़ा चुकी है। पहले यह जून 2022 में समाप्त हो रही थी।