धमतरी (शोर सन्देश)। जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद नायब तहसीलदार ने अपने ही नामांतरण आदेश पर स्थगन आदेश लाने के कारण आदिवासी किसान के सामने मुसीबत पैदा हो गई है। पीडि़त किसान ने न्याय की गुहार लगाकर कार्यवाही करने की मांग की है। शिकायत लेकर जिला कार्यालय पहुंचे ग्राम बलियारा निवासी किसान रामकुमार धु्रव ने बताया कि ग्राम करेठा में कृषि भूमि है। जिसका खसरा नंबर 107 के भाग में से 0.20 हेक्टेयर की जमीन खरीदने के लिए सौदा किया था। पटवारी से नकल नक्शा लेकर 27 अगस्त 2020 को पंजीकृत बैनामा के माध्यम से जमीन खरीदी थी। पंजीकृत बैनामा के आधार पर न्यायालय नायब तहसीलदार धमतरी ने नामांतरण आदेश जारी किया। लेकिन पटवानी ने अभिलेख दुरूस्त नहीं किया। बाद में उन्होंने नायब तहसीलदार को यह रिपोर्ट प्रस्तुत कर दिया गया कि उक्त भूमि विवादित है। जिसका प्रकरण न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी धमतरी में लंबित है। इस रिपोर्ट के बाद नायब तहसीलदार ने 3 नवंबर को अपने ही नामांतरण आदेश पर स्थगन आदेश जारी कर दिया। प्रकरण को लेकर उसने 6 नवंबर को संभाग आयुक्त के पास शिकायत की थी। आयुक्त ने कलेक्टर धमतरी को जांच और कार्यवाही के लिए निर्देशित किया। कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण लंबित है। कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण लंबित होने के बाद भी पटवारी ने राजस्व अभिलेख में शिव प्रसाद समेत उसके परिवार के अन्य लोगों का नाम दर्ज कर दिया गया। इस तरह जमीन खरीदने के बाद भी उसे जमीन का हक नहीं मिल पा रहा है। पीडि़त किसान ने कहा कि यदि जमीन विवादित थी तो पटवारी को नकल नक्शा जारी नहीं करना था। न ही नायब तहसीलदार को नामांतरण आदेश जारी करना था।