नई दिल्ली (शोर सन्देश)। थल सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने शनिवार को कहा कि ड्रोन या मानव रहित विमान यानी यूएवी अपनी घातक और विध्वंसक क्षमताओं की वजह से दूसरी चुनौतियों की तुलाना में कहीं ज्यादा गंभीर हैं। संयुक्त युद्धक अध्य्यन केंद्र द्वारा आयोजित एक वेबिनार में उन्होंने कहा कि ड्रोन की लागत बेहद कम होने के साथ ही ये बहुउपयोगी भी हैं।
उप सेना प्रमुख ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि निकट भविष्य में ड्रोन जैसे खतरों का तीसरा आयाम गंभीर हो सकता है। आने वाले वर्षों में इनके खतरे में कई गुना बढ़ोतरी होगी। ऐसे में सेना को भी अभी से इन खतरों से निपटने की योजना बनाने की जरूरत है। ड्रोन रोधी समाधान के तहत स्वार्म तकनीक के साथ साथ हार्ड किल और सॉफ्ट किल दोनों तरह के उपाय वक्त की जरूरत हैं।
बता दें कि दुश्मन ड्रोन को मार गिराने के लिए जब किसी मिसाइल या अन्य हथियार का इस्तेमाल किया जाता है तो इसे सेना की भाषा में हार्ड किल कहा जाता है। वहीं जब जैमर या स्पूफर के जरिए इनको नाकाम किया जाता है तो इसे सॉफ्ट किल कहते हैं। `फोर्स प्रोटेक्शन इंडिया 2020` नामक वेबिनार को संबोधित करते हुए उप सेना प्रमुख ने कहा कि अन्य खतरों के मुकाबले ड्रोन या मानव रहित विमान ज्यादा घातक हैं।
उप सेना प्रमुख ने चीन से जारी तनाव पर कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय जवान बेहद ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात हैं जहां तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है। भारत आज भी व्यवहारिक स्वदेशी समाधानों की कमी के चलते सर्दियों के लिए जरूरी कपड़े और उपकरण आयात कर रहा है। इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को हकीकत में बदलने के लिए सकारात्मक कोशिशों की दरकार है।