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जशक्राफ्ट के तहत छत्तीसगढ़ में कालीन शिल्प को नई पहचान, डिजाइनिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

01-Jan-2026
 जशपुर ।( शोर संदेश )  छत्तीसगढ़ में पारंपरिक हस्तशिल्प को नई पहचान और व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जशपुर जिले में “जशक्राफ्ट” ब्रांड के अंतर्गत कालीन शिल्प को सशक्त बनाने हेतु डिजाइन एवं गुणवत्ता उन्नयन पर केंद्रित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
विकास आयुक्त हस्तशिल्प, भारत सरकार, वस्त्र मंत्रालय, नई दिल्ली की CHCDS परियोजना के तहत “डिजाइन एंड डेवलपमेंट वर्कशॉप ऑन कारपेट क्राफ्ट” का आयोजन जशपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बालाछापर स्थित रीपा परिसर में किया जा रहा है। यह तीन माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम 19 दिसंबर 2025 से 18 मार्च 2026 तक संचालित होगा।
कार्यशाला का आयोजन छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा जिला प्रशासन जशपुर एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के समन्वय से किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य कालीन शिल्प से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं एवं कारीगरों को आधुनिक डिजाइनिंग, तकनीकी दक्षता और उत्पाद विकास की उन्नत जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे स्थायी आजीविका से जुड़ सकें।
जशक्राफ्ट ब्रांड के माध्यम से जिले में कालीन, छिंद-कांसा, बांस एवं काष्ठ शिल्प जैसे पारंपरिक उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पहल से स्थानीय कारीगरों को न केवल तकनीकी मजबूती मिल रही है, बल्कि उनके उत्पादों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बाजार से जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री राजेंद्र राजवाड़े ने बताया कि प्रशिक्षण में शामिल 30 महिलाओं को प्रति दिवस 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, वहीं तैयार उत्पादों के विपणन की जिम्मेदारी बोर्ड द्वारा वहन की जाएगी। उन्होंने बताया कि जशपुर जिले में कालीन उद्योग के साथ-साथ भारत सरकार के सहयोग से काष्ठ हस्तशिल्प का दो माह का प्रशिक्षण मनोरा विकासखंड के अलोरी ग्राम पंचायत में तथा गोदना शिल्प का एक माह का प्रशिक्षण दुलदुला विकासखंड में भी आयोजित किया जा रहा है।
बालाछापर में संचालित कालीन प्रशिक्षण में दिल्ली से आई डिजाइनिंग विशेषज्ञ सुश्री कौशिकी सौम्या एवं स्थानीय प्रशिक्षक चिंतामणि भगत (अंबिकापुर) द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।













 


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