नई दिल्ली (शोर सन्देश)। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर गोद लेने व संरक्षण के नियमों की `विसंगतियों` को दूर करने की अपील की गई है। भाजपा नेता व वकील अश्विनी उपाध्याय की तरफ से दाखिल याचिका में गोद लेने व संरक्षण के `भेदभावपूर्ण आधार` को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 व 21 का उल्लंघन बताया गया है। साथ ही इस संबंध में `समान दिशा निर्देश` तैयार करने के लिए आदेश जारी करने की मांग की गई है। अनुच्छेद 14 के अंतर्गत कानून के समक्ष समानता, अनुच्छेद 15 के तहत भारतीयों में धर्म, नस्ल, जाति व लिंग आदि के आधार पर भेदभाव पर रोक तथा अनुच्छेद 21 के तहत जीने व निजी स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख है।
वकील अश्वनी कुमार दुबे के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया है कि गोद लेने की मौजूदा प्रक्रिया भेदभावपूर्ण है। हिंदू कानून के तहत गोद लिए हुए बच्चे को खानदानी संपत्ति में अधिकार प्रदान किया गया है, जबकि मुस्लिम, ईसाई व पारसी कानून के तहत ऐसा नहीं है। ¨हदू द्वारा गोद लिया हुआ बच्चा कानूनी वारिस बन जाता है, जबकि मुस्लिम, ईसाई व पारसी धर्मो में ऐसा प्रावधान नहीं है। याचिका में कहा गया है कि गोद लेना व संरक्षण मानव जीवन का अहम हिस्सा हैं, लेकिन आजादी के 73 साल बाद भी भारत में गोद लेने व संरक्षण के मामले में लैंगिक व धार्मिक समानता वाला कानूनी नहीं है।