बॉलीवुड के महानायक कहे जाने वाले दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन अपने पिता के कितने करीब रहे हैं ये तो किसी से छिपा नहीं है. अमिताभ ने कई बार अपने बचपन की तस्वीरें शेयर की हैं जिनमें वह अपने पिता के साथ नजर आते हैं. कई बार ऐसा होता है कि जब बिग बी अपने पिता की यादों में खो जाते हैं. हाल ही में उन्होंने एक बार फिर अपने पिता को याद किया और उनकी एक पुरानी कविता को शेयर किया जो आज के हालात पर काफी फिट बैठती है.
हरिवंश राय बच्चन की इस कविता का नाम है `अंधेरे का दीपक`. अमिताभ ने इस कविता को पढ़ने के बाद इसका अंग्रेजी अनुवाद भी किया है जिसे उन्होंने अपनी इंस्टा पोस्ट के कैप्शन में लिखा है. कविता उम्मीद की उस किरण के बारे में बात करती है जो मुश्किल हालातों में भी हमारे पास होती है लेकिन हम उस पर ध्यान नहीं देते. बस कई बार हम नकारात्मकता के अंधेरे में उसे देखने की कोशिश नहीं करते.
“बहुतेरे इलाज बतावें ,जन जनमानस सब ,
केकर सुनैं, केकर नाहीं, कौन बताए इ सब ;
केयु कहिस कलौंजी पीसौ, केयु आँवला रस
केयु कहस घर म बैठो, हिलो न ठस से मस
ईर कहेन औ बीर कहेन, की ऐसा कुछ भी Carona ,
बिन साबुन से हाथ धोई के ,केहू के भैया छुओ न ;
हम कहा चलो हमौ कर देत हैं , जैसन बोलैं सब
आवय देयो , Carona-फिरोना , ठेंगुआ दिखाऊब तब !` ~ अब