नई दिल्ली(शोर सन्देश)।मोदी सरकार आज कृषि बिल को राज्यसभा में पेश करेगी। माना जा रहा है कि सदन में विपक्षी दल इस बिल का भरपूर विरोध करेंगे। वहीं सरकार को उम्मीद है कि वो इस बिल को राज्यसभा में भी पास करवा लेगी। इस बिल को लोकसभा से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। बिल के विरोध में पंजाब-हरियाणा के किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। वही सरकार का दावा है कि नया कानून खेतीबारी में `लाइसेंस राज` को समाप्त कर देगा और किसान अपनी पसंद के अनुसार अपनी कृषि उपज बेचने के लिए स्वतंत्र होंगे।
कृषि विधेयकों पर जमकर विरोध जता रहे विपक्षी दल खासकर कांग्रेस की कोशिश इसे राज्यसभा में रुकवाने की है। विपक्षी दल विधेयक को किसान विरोधी ठहरा रही है। जबकि प्रधानमंत्री के साथ पूरी सरकार की कोशिश विधेयक को पास कराने और इसे किसानों का हितैषी बताने की है।
राज्यसभा में बहुमत का गणित सरकार के पक्ष में है लेकिन अकाली दल का मुखर विरोध दूसरे सहयोगियों पर असर डाल सकता है। वहीं, एनडीए से बाहर लेकिन आमतौर पर सरकार का साथ देने वाले दलों का रुख भी विधेयक को रोकने या पास कराने में भूमिका निभाएगा। बीजेपी ने अपने सांसदों के लिए व्हिप भी जारी कर दिया है। इसके साथ विपक्षी पार्टीयों को भी इस विधेयक के समर्थन में लाने के लिए केंद्र के बड़े मंत्री बातचीत में लग गए हैं। सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिवसेना और एनसीपी के नेताओ से फोन पर बात की और इन विधेयक के पक्ष में आने की अपील की है।
245 सदस्यों वाली राज्यसभा में बीजेपी अभी 86 सांसदों के साथ सबसे बड़ी जबकि 40 सदस्यों के साथ कांग्रेस दूसरी बड़ी पार्टी है। इस समय 9 स्थान रिक्त हैं। तीनों विधेयकों को पास करवाने के लिए सरकार को कम से कम 122 वोट की जरूरत पड़ेगी। सरकार को उम्मीद है कि एनडीए से बाहर के बीजू जनता दल के 9, एआईएडीएमके के 9, टीआरएस के 7 और वाईएसआर कांग्रेस के 6, टीडीपी का एक और कुछ निर्दलीय सांसदों की मदद से तीनों विधेयकों को पास करा लेगी। विपक्षी दलों के साथ अकाली दल के तीन सदस्य भी जोड दिए जाएं तो संख्या सौ के पास पंहुचती है। हालांकि, कुछ छोटे दलों ने अपना स्टैंड साफ नहीं किया है इन पार्टियों के राज्यसभा में करीब दर्जनभर सांसद हैं।