क्या 1967 दोहराना चाहता है चीन
नई दिल्ली (शोर सन्देश)। भाती-चीन का विवाद इन दिनों गलवान घाटी पर गरमाया हुआ है, लेकिन ऐसा क्या है जो चीन भारत के गलवान पर ही कब्जा करना चहता है। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीनी सेना के बीच तनाव की शुरुआती हो गई थी। जून में यह तनाव चरम पर पहुंच गया और हिंसक झड़प में बदल गया। इस झड़प में जहां भारत ने अपने 20 जवानों को खोया वहीं चीन को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। इससे पहले चीन के साथ भारत की 1967 में भारी तना-तनी हुई थी, जिसका खामियाजा दोनों देशों को बड़े नुकसान से चुकाना पड़ा था। जिस तरह के हालात वर्तमान में दोनों देशों के बीच बन रहे हैं, इसका अर्थ कही चीन 1967 दोहराना तो नहीं चाहता।
आखिर भारत के गलवान पर ही क्यों कब्जा करना चाहता है चीन। इसका जवाब जानने जब गहरी चिंतन हुई तब एक बात सामने आई जो है अक्साई चिन। अक्साई चिन पर हमेशा से भारत का दावा रहा है, लेकिन गलवान के इलाके को चीन ने कब्जा कर रखा है। यहां की भौगोलिक स्थिति पठारी है। इस इलाके में चीन सामरिक तौर पर अपनी मौजूदगी और मजबूत करना चाहता है, इसलिए वो इसके आगे के हिस्सों पर भी अपना कब्जा चाहता है।
भारत के जिस इलाके में गलवान है, वह भारत के उत्तरी इलाके में सुदूर, बेहद संकरे और कटीले पहाड़ों और तेजी से बहती नदियों के बीच स्थित है, यह क्षेत्र लगभग 14,000 फीट (4,250 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है और तापमान अक्सर शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे ही रहता है।
सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा फेस-ऑफ का सबसे प्रमुख कारण भारत का ट्रांसपोर्ट लिंक को बेहतर बनाने के लिए सड़कों और हवाई अड्डों का निर्माण करना है। चीन इस इलाके में भारत की मजबूत स्थिति से पूरी तरह बौखलाया हुआ है।
बता दें कि एलएसी के किनारे चीन ने पहले ही मजबूत बुनियादी ढांचा बना लिया है। ऐसे में भारत के सीमाई क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर चीन बुरी तरह भड़का हुआ है। चीन को लग रहा है कि इससे इन दुर्गम इलाकों में भी भारत भारी पड़ सकता है। भारत की इस तैयारी से दोनों देशों के बीच जो सैन्य ताकतों का फासला है वो भी कम हो सकता है।
बता दें कि दोनों देशों के बीच 1993 में हुए एक समझौते के मुताबिक वास्तविक सीमा रेखा पर कोई भी पक्ष बल का प्रयोग नहीं करेगा, लेकिन चीन ने अपनी चालबाजी के जरिए बिना एक भी गोली चलाए तनाव को शीर्ष स्तर पर पहुंचा दिया।
इस क्षेत्र में दोनों देश के बीच 4,056 किमी (2,520 मील) लंबी सीमा रेखा है। हिमालय के इस क्षेत्र में चीन भारत के विशाल भूखंड पर अपना दावा करता रहा है। जब इसी घुसपैठ को सेना रोकती है और उन्हें पीछे जाने पर मजबूर करती है तो एलएसी पर तनाव बढ़ जाता है। इस इलाके में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद भारत के पूर्व ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासकों द्वारा किए गए सीमांकन के बाद से ही शुरू हो गया था।
गलवान में चीन की आपत्ति के बाद भी भारत ने अपनी तरफ एक सड़क का निर्माण बीते साल अक्टूबर में ही पूरा कर लिया था। इससे पहले साल 1967 में भारत और चीनी सेना के बीच ऐसी ही झड़प हो चुकी है, जिसमें सैकड़ों चीनी सैनिक मारे गए थे। भारत के भी कई जवान शहीद हो गए थे।